Co-Opetition (Hindi)


अगर आप आज भी अपने कॉम्पिटिटर की दुकान जलते हुए देखने के सपने देख रहे हैं तो यकीन मानिए आपका बिज़नेस खुद राख होने वाला है। पुराने जमाने की दुश्मनी पालकर आप सिर्फ अपना खून और पैसा जला रहे हैं जबकि स्मार्ट लोग दुश्मन के साथ पार्टी करके करोड़ों छाप रहे हैं।

आज हम एडम ब्रैंडनबर्गर और बैरी नेलबफ की मशहूर किताब को ऑपिटिशन से वो ३ सीक्रेट लेसन्स सीखेंगे जो आपको मार्केट का असली खिलाड़ी बनाएंगे।


Lesson : दुश्मन नहीं पार्टनर की तरह सोचो

बिज़नेस की दुनिया में हम बचपन से एक ही बात सुनते आए हैं कि बेटा अगर आगे बढ़ना है तो सामने वाले को कुचलना पड़ेगा। हमें सिखाया गया है कि मार्केट एक पिज्जा की तरह है और अगर तुम्हारे कॉम्पिटिटर ने बड़ा स्लाइस ले लिया तो तुम्हारे लिए सिर्फ क्रम्ब्स यानी चूरा बचेगा। लेकिन एडम ब्रैंडनबर्गर और बैरी नेलबफ कहते हैं कि भाई तुम पिज्जा के टुकड़े के लिए लड़ क्यों रहे हो। क्यों न मिलकर पिज्जा ही बड़ा बना लिया जाए। इसी कमाल के आइडिया को कहते हैं को ऑपिटिशन। यह कॉम्पिटिशन और को ऑपेरशन का वो डेडली कॉम्बो है जो आपकी ग्रोथ की रफ़्तार को दस गुना बढ़ा सकता है।

सोचिए आप एक मोहल्ले में अकेले चाट की दुकान खोलते हैं। आप खुश हैं कि कोई और नहीं है। लेकिन फिर एक और बंदा बगल में गोलगप्पे की रेहड़ी लगा लेता है। अब आपकी पुरानी सोच कहेगी कि अरे यार मेरा धंधा खा जाएगा यह। आप उससे लड़ने लगते हैं और रेट कम कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि दोनों का नुकसान होता है। अब जरा को ऑपिटिशन वाला चश्मा पहनकर देखिए। जब वहां दो दुकानें होंगी तो उस मार्केट की रौनक बढ़ेगी। लोग दूर दूर से वहां खाने आएंगे क्योंकि उन्हें वैरायटी मिल रही है। अब वह मार्केट एक फूड हब बन गया है। आपने एक दूसरे का धंधा नहीं काटा बल्कि मिलकर उस पूरे एरिया की वैल्यू बढ़ा दी। यह तो वही बात हुई कि दो पड़ोसी मिलकर एक ही सीढ़ी लगा रहे हैं ताकि दोनों छत पर जल्दी पहुँच सकें।

इस किताब का सबसे बड़ा सीक्रेट है वैल्यू नेट। इसमें सिर्फ आप और आपका दुश्मन नहीं होते। इसमें आपके सप्लायर और कॉम्प्लिमेंटर्स भी होते हैं। कॉम्प्लिमेंटर्स वो लोग हैं जिनके होने से आपके प्रोडक्ट की इज्जत बढ़ जाती है। जैसे कार के लिए पेट्रोल पंप या फोन के लिए एप्स। अगर आप अपने कॉम्पिटिटर के साथ मिलकर ऐसी कोई सर्विस शुरू करते हैं जिससे कस्टमर का फायदा हो तो यकीन मानिए आप दोनों की जेबें भरेंगी। आज के जमाने में अकेले उड़ना ईगो के लिए अच्छा हो सकता है लेकिन बैंक बैलेंस के लिए घातक है।

क्या आपने कभी नोटिस किया है कि बड़े बड़े टेक ब्रांड्स जैसे एप्पल और सैमसंग एक दूसरे के खिलाफ कोर्ट में केस लड़ते रहते हैं लेकिन अंदर ही अंदर सैमसंग ही एप्पल को स्क्रीन सप्लाई करता है। यह कोई मजबूरी नहीं बल्कि मास्टर स्ट्रोक है। इसे कहते हैं दिमाग से काम लेना। वो जानते हैं कि अगर एक दूसरे का साथ छोड़ दिया तो प्रोडक्शन की कॉस्ट आसमान छूने लगेगी। तो आप भी अपने कॉम्पिटिटर को देखकर अपना मुंह मत बनाइए बल्कि यह सोचिए कि कौन सा ऐसा काम है जो आप दोनों साथ मिलकर ज्यादा सस्ता और अच्छा कर सकते हैं। जब आप अपनी जीत की परिभाषा बदलते हैं तब असली पैसा और इज्जत दोनों आपके पास खिंचे चले आते हैं।


Lesson : गेम के खिलाड़ी नहीं गेम के मालिक बनो

ज़्यादातर लोग बिज़नेस को लूडो की तरह खेलते हैं। बस अपनी गोटी बचाने में लगे रहते हैं और सोचते हैं कि काश सामने वाले का छह न आए। लेकिन एडम ब्रैंडनबर्गर और बैरी नेलबफ कहते हैं कि भाई अगर तुम्हें गेम पसंद नहीं आ रहा तो तुम गेम के रूल्स ही बदल दो न। को ऑपिटिशन का दूसरा सबसे बड़ा मंत्र है पार्ट्स (PARTS) मॉडल। इसका मतलब है कि हर बिज़नेस डील में पांच ऐसी चीज़ें होती हैं जिन्हें आप अपनी उंगलियों पर नचा सकते हैं। ये हैं प्लेयर्स, एडेड वैल्यू, रूल्स, टैक्टिक्स और स्कोप। अगर आप इन पांचों को समझ गए तो आप सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं बल्कि उस गेम के अंपायर बन जाएंगे जो अपनी मर्ज़ी से फैसला सुनाता है।

अब ज़रा इसे एक देसी मिसाल से समझते हैं। मान लीजिए आप एक कॉलोनी में दूध की डेयरी चलाते हैं। अब वहां एक बड़ी कंपनी अपना आउटलेट खोल देती है। अब आप क्या करेंगे। क्या आप बैठ कर रोएंगे कि बड़ी मछली छोटी मछली को खा गई। बिलकुल नहीं। आप यहां एडेड वैल्यू वाला पत्ता खेलेंगे। बड़ी कंपनी आपको सस्ता दूध दे सकती है लेकिन क्या वो सुबह 6 बजे गरमा गरम दूध आपके घर के दरवाजे पर पहुँचाकर आपके साथ दो मिनट सुख दुख की बातें करेगी। नहीं करेगी। आपकी एडेड वैल्यू है वह भरोसा और पर्सनल टच जो बड़ी मशीनों के पास नहीं है। आप गेम के रूल बदल रहे हैं। आप सिर्फ दूध नहीं बेच रहे आप सुविधा और रिश्ता बेच रहे हैं। जब आप अपनी वैल्यू बढ़ाते हैं तो कस्टमर को फर्क नहीं पड़ता कि सामने वाला कितना बड़ा डिस्काउंट दे रहा है।

अगली चीज़ है टैक्टिक्स यानी आपकी चालें। कभी कभी हम अपनी ईगो में आकर अपनी चालें ऐसी चलते हैं कि खुद ही फंस जाते हैं। जैसे कि प्राइस वॉर। आपने दाम घटाया तो आपके कॉम्पिटिटर ने और घटा दिया। आखिर में आप दोनों रोड पर आ गए और फायदा सिर्फ कस्टमर का हुआ। को ऑपिटिशन कहता है कि ऐसी चाल चलो जिससे मार्केट की धारणा बदले। मान लीजिए आप एक सॉफ्टवेर बना रहे हैं। आप अपने कॉम्पिटिटर को कह सकते हैं कि भाई हम दोनों अलग अलग रिसर्च क्यों कर रहे हैं। चलो मिलकर एक बेसिक ढांचा तैयार करते हैं और फिर अपनी अपनी ब्रांडिंग लगाकर बेचते हैं। इससे आपकी लागत आधी हो जाएगी और मुनाफा डबल। इसे कहते हैं दिमाग की बत्ती जलाना।

अंत में आता है स्कोप यानी आपकी सोच का दायरा। कई बार हम एक ही छोटे से कुएं में लड़ते रहते हैं जबकि समंदर बाहर खुला पड़ा है। अगर आप अपने कॉम्पिटिटर के साथ हाथ मिलाकर किसी नए शहर या नए सेगमेंट में कदम रखते हैं तो आप उस पूरे नए मार्केट को कैप्चर कर सकते हैं। यह वैसा ही है जैसे दो पहलवान आपस में लड़ने के बजाय मिलकर मेला देखने आए लोगों को अपनी ताकत का शो दिखाएं और टिकट से पैसे कमाएं। जब आप गेम के इन पांच हिस्सों को कंट्रोल करना सीख जाते हैं तो मार्केट की मंदी या मंदी का डर आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। आप अपनी किस्मत खुद लिखते हैं क्योंकि अब आप गेम खेल नहीं रहे बल्कि गेम को चला रहे हैं।


Lesson : विन विन का असली जादू

ज़्यादातर लोगों को लगता है कि अगर कोई दूसरा जीत रहा है तो इसका मतलब है कि वो हार रहे हैं। यह वही पुरानी स्कूल वाली सोच है कि अगर क्लास में शर्मा जी का लड़का फर्स्ट आ गया तो मेरी रैंक गिर जाएगी। लेकिन एडम ब्रैंडनबर्गर और बैरी नेलबफ कहते हैं कि भाई बिज़नेस कोई स्कूल का एग्जाम नहीं है जहाँ सिर्फ एक ही बंदा टॉपर बनेगा। असली दुनिया में विन विन सिचुएशन बनाना ही सबसे बड़ी समझदारी है। को ऑपिटिशन का तीसरा सबसे बड़ा सबक यही है कि जब आप दूसरों को जिताने की कोशिश करते हैं तो कुदरत आपको अपने आप जिता देती है। इसे ईगो का खेल नहीं बल्कि नंबर्स का खेल समझो।

मान लीजिए आपकी एक मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान है। आपके बगल में एक बंदा मोबाइल एक्सेसरीज यानी कवर और टेम्पर्ड ग्लास बेचता है। अब आप चाहें तो उससे चिढ़ सकते हैं कि वो आपसे ज्यादा पैसे कमा रहा है। लेकिन को ऑपिटिशन वाला बंदा क्या करेगा। वो उसके पास जाएगा और कहेगा कि भाई जो भी मेरे पास फोन ठीक कराने आएगा मैं उसे तेरी दुकान पर भेजूंगा और जो तेरे पास कवर लेने आएगा उसे तू मेरे पास भेज देना। अब देखिये क्या हुआ। आपने बिना एक रुपया खर्च किए अपना मार्केटिंग बजट जीरो कर दिया और कस्टमर का फुटफाल डबल कर लिया। यह है असली जादू जहाँ एक और एक मिलकर ग्यारह हो जाते हैं न कि दो।

कई बार हमें लगता है कि मार्केट में कब्ज़ा करने के लिए हमें अपने सप्लायर का गला घोंटना पड़ेगा। हम उनसे इतनी ज्यादा सौदेबाजी करते हैं कि बेचारा सप्लायर ही दिवालिया होने की कगार पर पहुँच जाता है। लेकिन सोचिए अगर आपका सप्लायर ही डूब गया तो आपका माल कौन बनाएगा। को ऑपिटिशन सिखाता है कि अपने सप्लायर को भी बढ़ने का मौका दो। जब वो खुश रहेगा और तरक्की करेगा तो आपको बेस्ट क्वालिटी का माल सबसे पहले देगा। यह वैसा ही है जैसे आप अपने ड्राइवर को खुश रखते हैं ताकि वो आपकी कार को गड्ढों से बचाकर ले जाए। अगर आप सिर्फ अपना फायदा देखेंगे तो यकीन मानिए आप उस डाल पर बैठे हैं जिसे आप खुद ही काट रहे हैं।

आज के इस डिजिटल दौर में जहाँ हर कोई एक दूसरे की टांग खींचने में लगा है वहां को ऑपिटिशन का माइंडसेट आपको एक लीडर बनाता है। जब आप मार्केट में अपनी इमेज एक ऐसे बंदे की बनाते हैं जो सबके साथ मिलकर चलने को तैयार है तो लोग आप पर भरोसा करने लगते हैं। बड़े बड़े इन्वेस्टर्स भी उन्हीं कंपनियों में पैसा लगाते हैं जो कोलाबरेशन करना जानती हैं। याद रखिये कि अकेले आप सिर्फ एक छोटी सी चिंगारी बन सकते हैं लेकिन मिलकर आप एक ऐसी मशाल जला सकते हैं जो पूरे मार्केट को रौशन कर दे। तो अपनी मुट्ठी खोलिए और हाथ मिलाना सीखिए क्योंकि असली पैसा और सुकून वहीं है जहाँ सब साथ बढ़ते हैं।


दोस्त दुनिया बहुत बड़ी है और यहाँ सबके लिए जगह है। अगर आप आज भी पुरानी नफरत और जलन वाली स्ट्रेटेजी लेकर चल रहे हैं तो आप अपनी ग्रोथ का गला खुद ही घोंट रहे हैं। एडम ब्रैंडनबर्गर और बैरी नेलबफ की यह किताब हमें बस यही सिखाती है कि चालाकी दूसरों को गिराने में नहीं बल्कि सबको साथ लेकर ऊपर उठने में है। आज ही अपने आस पास देखिये कि आप किसके साथ हाथ मिलाकर अपनी वैल्यू बढ़ा सकते हैं। क्या आप एक ऐसे खिलाड़ी बनना चाहते हैं जो अकेले जीत कर भी अकेला रह जाए या वो जो सबके साथ मिलकर एक नया इतिहास रचे। फैसला आपका है।

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया और इसने आपकी सोच बदली है तो इसे अपने उस दोस्त या बिज़नेस पार्टनर के साथ ज़रूर शेयर करें जिसे लगता है कि कॉम्पिटिशन ही सब कुछ है। नीचे कमेंट में बताएं कि आपका सबसे बड़ा कॉम्पिटिटर कौन है और आप उसके साथ कैसे को ऑपिटिशन कर सकते हैं। चलिए मिलकर मार्केट का साइज़ बड़ा करते हैं।

-----

अगर आप इस बुक की पूरी गहराई में जाना चाहते हैं, तो इस बुक को यहाँ से खरीद सकते है - Buy Now

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#BusinessStrategy #CoOpetition #Entrepreneurship #SuccessMindset #GameTheory


_

Post a Comment

Previous Post Next Post