Doing It Now (Hindi)


क्या आप भी अपनी अधूरी टू-डू लिस्ट को किसी मेडल की तरह सजाकर बैठे हैं? बधाई हो, आप आलस के गोल्ड मेडलिस्ट बनने वाले हैं। जबकि दुनिया आगे निकल रही है, आप बस कल शुरू करेंगे के झूठे वादों पर जी रहे हैं। इस हार से बचने के लिए एडविन सी ब्लिस के ये 3 लाइफ चेंजिंग लेसन्स आपकी आंखें खोल देंगे।


Lesson : फाइव मिनट रूल - आलस का डेथ वारंट

हम सब के पास एक ऐसी फाइल या ऐसा काम जरूर होता है जिसे देखकर ही हमें नींद आने लगती है। चाहे वो जिम जाना हो या वो पेंडिंग ऑफिस रिपोर्ट तैयार करना। हम सोचते हैं कि जब सही मूड होगा तब शुरू करेंगे। सच तो यह है कि वह शुभ मुहूर्त कभी आता ही नहीं। एडविन सी ब्लिस कहते हैं कि प्रोक्रैस्टिनेशन यानी काम टालने की बीमारी का सबसे बड़ा इलाज है फाइव मिनट रूल।

अब जरा सोचिए। आप सोफे पर पड़े हैं और फोन स्क्रोल कर रहे हैं। आपको पता है कि आपको पढ़ाई करनी है या अपना साइड बिजनेस शुरू करना है। लेकिन आपका दिमाग कहता है कि भाई अभी तो बहुत काम है और पूरा दिन पड़ा है। यहीं पर आप खुद को धोखा देते हैं। एडविन कहते हैं कि खुद से झूठ बोलिए। जी हां। खुद से कहिए कि मैं बस पांच मिनट के लिए यह काम करूँगा। सिर्फ पांच मिनट। इसके बाद मैं वापस सोफे पर लेट जाऊंगा।

यह सुनने में बड़ा मजाक लगता है। लेकिन इसके पीछे एक तगड़ी साइंस है। असल में हमारा दिमाग किसी भी बड़े काम को एक पहाड़ की तरह देखता है। जब आप कहते हैं कि मुझे 5 घंटे पढ़ना है तो दिमाग डर के मारे शटडाउन हो जाता है। लेकिन जब आप कहते हैं कि बस पांच मिनट किताब खोलनी है तो दिमाग को लगता है कि चलो इतना तो कर ही सकते हैं।

जैसे मान लीजिए आपको अपना कमरा साफ करना है जो पिछले तीन महीने से कबाड़खाना बना हुआ है। अब पूरे कमरे की सफाई के बारे में सोचेंगे तो आप पक्का नेटफ्लिक्स खोलकर बैठ जाएंगे। लेकिन अगर आप खुद से कहें कि मैं बस 5 मिनट के लिए अपनी मेज साफ करूँगा। तो क्या होगा? आप उठेंगे। मेज साफ करेंगे। और जैसे ही आप एक्शन मोड में आएंगे आपका मोमेंटम बन जाएगा।

न्यूटन का पहला लॉ याद है? जो चीज मोशन में है वह मोशन में ही रहना चाहती है। पांच मिनट का यह छोटा सा स्टार्टअप आपके आलस के जड़त्व यानी इनर्शिया को तोड़ देता है। ज्यादातर समय हम काम से नहीं डरते। हम काम को शुरू करने वाले उस पहले स्टेप से डरते हैं।

भारतीय घरों में अक्सर मम्मी कहती हैं कि बस एक बार नहा लो फिर सारा दिन जो करना है करना। यह भी एक तरह का फाइव मिनट रूल ही है। एक बार आप बाथरूम में घुस गए और पानी डाल लिया तो फिर आप नहा ही लेते हैं। कोई भी आधा नहाकर बाहर नहीं आता। इसी तरह जब आप पांच मिनट के लिए अपना लैपटॉप खोल लेते हैं तो चांस बढ़ जाते हैं कि आप अगले एक घंटे तक काम करते रहेंगे।

तो अगली बार जब आपका मन कहे कि यार कल करेंगे तो उसे डांटकर बोलिए कि चुप रह। बस पांच मिनट करूँगा। यह छोटा सा झूठ आपको उन लाखों लोगों से आगे ले जाएगा जो सिर्फ प्लानिंग के हसीन सपने देख रहे हैं। और याद रखिए कि अगर आप इन पांच मिनटों को भी नहीं संभाल सकते तो फिर बड़ी सक्सेस के सपने देखना बंद कर दीजिए। क्योंकि कल कभी नहीं आता और आज सिर्फ पांच मिनट के लिए आता है।


Lesson : वर्स्ट फर्स्ट - उस मेंढक को सबसे पहले निगल लें

क्या आपने कभी गौर किया है कि आपके टू-डू लिस्ट में एक ऐसा काम जरूर होता है जिसे देखकर आपको पेट में दर्द होने लगता है? जैसे बॉस को वो मुश्किल ईमेल भेजना या अपनी कार की सर्विसिंग कराना। हम क्या करते हैं? हम उस डरावने काम को शाम के लिए टाल देते हैं और छोटे-मोटे फालतू कामों में खुद को बिजी दिखाते हैं। एडविन सी ब्लिस कहते हैं कि यह सबसे बड़ी बेवकूफी है। उनका सिंपल सा मंत्र है वर्स्ट फर्स्ट। यानी जो सबसे कड़वा है, उसे सबसे पहले चख लो।

अब जरा इमेजिन कीजिए। आपको पता है कि आज आपको जिम में लेग डे करना है या उस रिश्तेदार को फोन करना है जो सिर्फ ताने मारता है। आप पूरा दिन बस यही सोचते रहते हैं कि यार शाम को वो करना पड़ेगा। इस चक्कर में आप जो काम कर रहे होते हैं, उस पर भी ध्यान नहीं दे पाते। आपका आधा दिमाग तो उसी डर में अटका रहता है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप एक कड़वी दवाई को हाथ में पकड़कर एक घंटे तक उसे घूर रहे हों। भाई, जितनी देर देखोगे, उतनी ही घबराहट बढ़ेगी। इसे बस मुंह में डालो और किस्सा खत्म करो।

एडविन समझाते हैं कि हमारी इच्छाशक्ति यानी विलपावर सुबह के समय सबसे ज्यादा होती है। जैसे-जैसे दिन ढलता है, हमारी बैटरी लो होने लगती है। शाम तक आते-आते हम इतने थक जाते हैं कि फिर हम सिर्फ वही काम करते हैं जिसमें मजा आए, जैसे इंस्टाग्राम रील्स देखना। इसलिए अगर आपने वो सबसे मुश्किल काम सुबह 9 बजे नहीं निपटाया, तो यकीन मानिए वो आज भी नहीं होगा और कल भी नहीं।

जैसे मान लीजिए आप एक सेल्समेन हैं और आपको एक ऐसे क्लाइंट को कॉल करना है जो बहुत बदतमीज है। आप सोचते हैं कि पहले चाय पी लेता हूँ, फिर थोड़े आसान कॉल कर लूँगा, फिर लंच के बाद उसे देखूँगा। लंच के बाद आपको नींद आएगी, फिर आप कहेंगे कल सुबह पक्का। मुबारक हो, आपने अपना पूरा दिन एक कॉल के डर में बर्बाद कर दिया। अगर आप वही कॉल सबसे पहले कर लेते, तो क्या होता? या तो वो मना कर देता या मान जाता। जो भी होता, आपके सिर से वो बोझ तो उतर जाता। इसके बाद के सारे काम आपको केक वॉक जैसे लगते।

हमारे देसी समाज में एक कहावत है कि सुबह का काम करने वाला पूरे दिन राजा की तरह घूमता है। यह बिल्कुल सच है। जब आप अपने दिन का सबसे कठिन काम सुबह ही खत्म कर लेते हैं, तो आपको एक अजीब सा रिलैक्सेशन महसूस होता है। इसे विनर्स हाई कहते हैं। आपके अंदर एक ऐसा कॉन्फिडेंस आता है कि जब मैंने वो पहाड़ जैसा काम कर लिया, तो अब ये छोटे-मोटे कंकड़ क्या चीज हैं।

सच्चाई तो यह है कि काम आपको नहीं थकाता, काम को टालने का स्ट्रेस आपको थका देता है। तो कल सुबह जब आप सोकर उठें, तो अपनी लिस्ट में सबसे गंदा और डरावना काम ढूंढें और उस पर टूट पड़ें। बहाने बनाना बंद कीजिए कि मूड नहीं है। मूड काम शुरू करने के बाद आता है, पहले नहीं। अगर आप हर दिन का सबसे बुरा हिस्सा सुबह ही खत्म कर लेंगे, तो बाकी का दिन आपके लिए किसी वैकेशन से कम नहीं होगा। वरना सारा दिन उस डर की पोटली को पीठ पर लादकर घूमते रहिए और खुद को बिजी होने का झांसा देते रहिए। चॉइस आपकी है।


Lesson : छोटी जीत का जश्न - खुद को शाबाशी देना सीखें

क्या आपने कभी सोचा है कि वीडियो गेम्स इतने एडिक्टिव क्यों होते हैं? क्योंकि वहां हर छोटे लेवल के बाद आपको एक स्टार मिलता है या एक रिवॉर्ड मिलता है। आपकी लाइफ का गेम भी कुछ ऐसा ही होना चाहिए। एडविन सी ब्लिस कहते हैं कि अगर आप सिर्फ उस बड़ी सफलता के इंतजार में बैठे हैं जो पांच साल बाद आएगी, तो आप आज ही हार चुके हैं। असल जादू तो सेलिब्रेटिंग स्मॉल विन्स में है।

अब जरा अपनी जिंदगी को देखिए। आप सोचते हैं कि जब मेरा करोड़ों का टर्नओवर होगा या जब मैं 15 किलो वजन कम कर लूँगा, तभी मैं खुश होऊँगा। भाई, तब तक तो आप डिप्रेशन के शिकार हो जाएंगे। एडविन समझाते हैं कि हमारा दिमाग डोपामाइन पर चलता है। जब आप एक छोटा सा काम पूरा करते हैं और खुद को रिवॉर्ड देते हैं, तो दिमाग को सिग्नल मिलता है कि भाई मजा आया, चलो एक और काम करते हैं।

जैसे मान लीजिए आपने तय किया कि आज आप 10 पेज पढ़ेंगे। अब जैसे ही 10 पेज खत्म हों, खुद को एक अच्छी कॉफी पिलाएं या 5 मिनट अपना पसंदीदा गाना सुनें। इसे रिश्वत मत समझिए, इसे फ्यूल समझिए। हम भारतीयों की आदत है कि हम खुद को कोसने में तो उस्ताद हैं, लेकिन अपनी तारीफ करने में बड़े कंजूस। अगर काम नहीं हुआ तो हम खुद को गालियां देंगे, लेकिन अगर छोटा सा काम हो गया तो कहेंगे कि इसमें क्या बड़ी बात है, ये तो करना ही था। यहीं पर आप मात खा जाते हैं।

एडविन का कहना है कि बड़े लक्ष्य को इतने छोटे टुकड़ों में बांट दें कि उन्हें पूरा करना बच्चों का खेल लगे। और हर खेल के बाद एक इनाम रखें। अगर आप एक बड़ा प्रोजेक्ट कर रहे हैं, तो उसे 10 हिस्सों में बांटें। हर हिस्सा पूरा होने पर खुद को एक छोटा सा ब्रेक दें। यह ब्रेक आपको अगले हिस्से के लिए चार्ज कर देगा। अगर आप सिर्फ काम-काम और काम करेंगे, तो आप एक थके हुए गधे बन जाएंगे, रेस के घोड़े नहीं।

सोचिए, अगर आप जिम जा रहे हैं और पहले ही दिन आपने 50 किलो उठा लिया और अगले दिन बिस्तर से नहीं उठ पाए, तो क्या फायदा? इससे अच्छा है कि आप सिर्फ 10 मिनट एक्सरसाइज करें और कहें कि शाबाश, आज मैं जिम गया। यह छोटी सी जीत आपको अगले दिन फिर से जिम ले जाएगी। कंसिस्टेंसी का असली राज यही है कि आप खुद को प्रोसेस से प्यार करना सिखाएं, न कि सिर्फ रिजल्ट से।

कुछ लोग तो ऐसे हैं जो अपनी टू-डू लिस्ट में नहाना और ब्रश करना भी लिखते हैं ताकि उसे टिक करके उन्हें जीत वाली फीलिंग आए। खैर, इतना भी नीचे नहीं गिरना है। लेकिन हां, अगर आपने अपने दिन का वो सबसे मुश्किल काम (जो हमने लेसन 02 में सीखा) कर लिया है, तो आप एक बड़ी ट्रीट के हकदार हैं।

अंत में, यह याद रखिए कि बड़ी सफलताएं रातों-रात नहीं मिलतीं। वो उन हजारों छोटी जीतों का जोड़ होती हैं जो आपने हर दिन हासिल की हैं। अगर आप खुद को हर छोटे कदम पर मोटिवेट नहीं करेंगे, तो आप रास्ते में ही दम तोड़ देंगे। इसलिए बहाने बनाना छोड़िए, एक्शन लीजिए और जैसे ही एक छोटा सा लक्ष्य पूरा हो, खुद की पीठ थपथपाइए। क्योंकि अगर आप खुद की कद्र नहीं करेंगे, तो यह दुनिया तो आपको कुचलने के लिए तैयार बैठी है।


तो अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप वही पुराने बहानेबाज बने रहना चाहते हैं या आज से एक एक्शन टेकर बनना चाहते हैं? एडविन सी ब्लिस के ये तीन नियम आपकी लाइफ बदल सकते हैं, लेकिन सिर्फ तब जब आप इन्हें पढ़कर भूल न जाएं। अभी नीचे कमेंट में बताएं कि आपका वो कौन सा एक काम है जिसे आप पिछले कई दिनों से टाल रहे हैं और उसे आप आज ही फाइव मिनट रूल से शुरू करेंगे। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा कल से शुरू करूँगा कहता है। उठिए और अभी करिए, क्योंकि कल कभी नहीं आता।

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