Positioning: the Battle for Your Mind (Hindi)


आप क्यों हमेशा एक ही 'पुराने आइडिया' को घसीट रहे हैं? जब बाकि लोग Lateral Thinking से हर रोज़ करोड़ों के नए आइडिया छाप रहे हैं, आप अभी भी 'बॉक्स' में फँसे हैं। यह 'सोचने की सुस्ती' आपको डुबो देगी! Serious Creativity में 3 ऐसे सीक्रेट्स हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने दिमाग़ को न्यू आइडियाज़ के लिए Unlock कर देंगे। ये 3 लेसन्स आपकी रचनात्मकता (Creativity) को हमेशा के लिए ट्रांसफॉर्म कर देंगे।


Lesson : बाज़ार नहीं, 'दिमाग़' जीतो – कस्टमर के दिमाग़ पर राज

अगर आप ये सोचते हैं कि आपकी मार्केटिंग सिर्फ़ 'ज़ीरो-बैलेंस' वाले मैसेज को कस्टमर तक पहुँचाना है, तो आप 1950 के दशक की दुनिया में जी रहे हैं। आजकल का बाज़ार 'शोर' से भरा है। हर कंपनी चिल्ला रही है: "मेरा प्रॉडक्ट बेस्ट है! मेरा प्रॉडक्ट सस्ता है!" आप इस शोर में 'इको' (Echo) नहीं, एक साफ़ आवाज़ बनना चाहते हैं।

अल रीस और जैक ट्राउट की यह क्लासिक बुक कहती है: "मार्केटिंग का युद्ध 'बाज़ार' में नहीं, बल्कि 'कस्टमर के दिमाग़' (Mind) में लड़ा जाता है, और जीतने के लिए आपको एक साफ़, सरल पोज़िशन चाहिए।"

कस्टमर का दिमाग़ एक 'अलमारी' (Cupboard) जैसा है। हर 'शेल्फ़' पर सिर्फ़ 1-2 ब्रांड के लिए जगह है। जैसे: 'सर्च इंजन' की शेल्फ़ पर Google है। 'कॉपी मशीन' की शेल्फ़ पर Xerox है। 'कैंडी' की शेल्फ़ पर Cadbury है। अगर आप 'नंबर 1' नहीं बन सकते, तो आप उस शेल्फ़ पर किसी काम के नहीं हैं।

आप कितना भी 'बेहतर' प्रॉडक्ट क्यों न बना लें। अगर कस्टमर के दिमाग़ की शेल्फ़ में आपके लिए कोई जगह नहीं है, तो आपकी सारी मेहनत ज़ाया है। आपको एक साफ़, सरल और अलग पहचान बनानी होगी। इसे ही पोज़िशनिंग (Positioning) कहते हैं।

आइए, इसे एक रियल लाइफ़ फनी एग्ज़ाम्पल से समझते हैं। मिलिए मिस्टर जुनेजा से। मिस्टर जुनेजा ने एक नया 'एनर्जी ड्रिंक' लॉन्च किया। वह विज्ञापन (Ad) में कहते थे: "हमारा ड्रिंक 'सबसे ज़्यादा हेल्दी' भी है, 'सबसे ज़्यादा एनर्जी' भी देता है, और 'सबसे सस्ता' भी है।"

उन्होंने कस्टमर के दिमाग़ में '3 चीज़ें' डालने की कोशिश की—हेल्दी, एनर्जेटिक, सस्ता।

नतीजा? कस्टमर को कुछ भी याद नहीं रहा। वह सोचते थे: "एनर्जी के लिए Red Bull अच्छा है। हेल्दी के लिए जूस अच्छा है। ये जुनेजा का ड्रिंक 'कन्फ़्यूजिंग' है।"

जुनेजा ने 'सब कुछ' बनने की कोशिश की, इसलिए वह 'कुछ भी' नहीं बन पाए। उनका प्रॉडक्ट 'बाज़ार' में अच्छा था, पर 'दिमाग़' की शेल्फ़ में कोई जगह नहीं बना पाया।

यह तो वही बात हो गई कि आप एक 'बाइकर गैंग' के लीडर को कहें कि वह 'योगा टीचर' भी है। उसकी 'पहचान' टूट जाएगी।

'पोज़िशनिंग' का मतलब है:
  • एक शब्द चुनो। (आपकी कंपनी कस्टमर के दिमाग़ में किस 'एक' शब्द से जानी जाएगी? जैसे Volvo = Safety)।
  • सिर्फ़ वही बेचो। (अगर आपने 'सबसे तेज़' चुना है, तो 'सबसे सस्ता' बेचना बंद करो)।
  • 'कम' बोलो, 'साफ़' बोलो। (जितना ज़्यादा आप बोलेंगे, उतना ज़्यादा कन्फ्यूज़न होगा। अपने मैसेज को 10 शब्दों से ज़्यादा मत रखो)।

जब आप एक साफ़ पोज़िशन लेते हैं, तो आपका मैसेज 'शोर' में नहीं डूबता। वह सीधे 'दिमाग़ की शेल्फ़' में जाकर बैठ जाता है। यही साफ़ पोज़िशन आपको भीड़ से अलग करती है।

लेकिन, अगर आपके 'नंबर 1' बनने से पहले ही कोई दूसरा उस शेल्फ़ पर बैठा हो, तो क्या करेंगे? क्या आप उससे 'लड़ेंगे'? नहीं। आपको एक 'खाली जगह' ढूँढनी होगी।

यही बात हमें दूसरे सबसे ज़रूरी लेसन की ओर ले जाती है, जहाँ हम सीखेंगे कि कॉम्पिटिटर से लड़ना क्यों एक 'बेवकूफ़ी' है, और कैसे उनके मुक़ाबले एक 'खाली जगह' ढूँढें।


Lesson : भीड़ में जगह मत बनाओ, 'खाली जगह' ढूँढो – अपनी जगह खाली करो

ज़्यादातर कंपनियाँ क्या करती हैं? वह 'नंबर 1' (Market Leader) को देखती हैं और कहती हैं: "हम भी इनके जैसा प्रॉडक्ट बनाएँगे, पर 10% बेहतर।" यह 'नक़ल' है। जब आप नक़ल करते हैं, तो आप कस्टमर के दिमाग़ में 'नंबर 1' की सिर्फ़ एक 'कमज़ोर कॉपी' बनते हैं।

अल रीस और जैक ट्राउट कहते हैं: "सिर्फ़ 'नया' बनने की कोशिश नहीं, बल्कि कॉम्पिटिटर (Competitor) के मुक़ाबले एक 'खाली जगह' ढूँढना और उस पर अपना कब्ज़ा करना।"

इसे 'री-पोज़िशनिंग' या 'वैकल्पिक पोज़िशनिंग' भी कहते हैं। आप 'नंबर 1' से लड़ते नहीं हैं। आप 'नंबर 1' को देखकर कस्टमर के दिमाग़ में एक नई शेल्फ़ बनाते हैं।

उदाहरण के लिए, जब 'कॉफी' का बाज़ार Starbucks से भरा था, तो किसी ने 'कॉफी' नहीं बेची। उन्होंने 'इंटीमेट, स्लो, रिलैक्स' कॉफ़ी बेची (जैसे एक छोटी, शांत जगह)। यह एक नई शेल्फ़ थी: 'कॉफ़ी का एक्सपीरियंस', न कि सिर्फ़ 'कॉफ़ी'।

आप 'नंबर 1' की कमज़ोरी को अपनी ताक़त बनाते हैं। अगर 'नंबर 1' बड़ा और धीमा है, तो आप 'छोटा और तेज़' बन जाते हैं। अगर 'नंबर 1' सबके लिए है, तो आप 'सिर्फ़ बच्चों के लिए' या 'सिर्फ़ बुज़ुर्गों के लिए' बन जाते हैं।

आइए, एक फनी एग्ज़ाम्पल देखते हैं। मिलिए मिस्टर चोपड़ा से। मिस्टर चोपड़ा ने एक नया 'साबुन' लॉन्च किया। उन्होंने विज्ञापन में कहा: "हमारा साबुन 'नंबर 1' साबुन से 10% ज़्यादा झाग देता है।"

नतीजा? कस्टमर ने सोचा: "ठीक है, पर मैं तो 'नंबर 1' पर ही भरोसा करता हूँ।" मिस्टर चोपड़ा की '10% ज़्यादा झाग' किसी काम की नहीं रही। वह सीधे 'नंबर 1' से लड़ रहे थे।

अगर मिस्टर चोपड़ा 'खाली जगह' ढूँढते, तो वह पूछते: "नंबर 1 साबुन किसके लिए है?" (शायद 'महिलाओं' के लिए)। मिस्टर चोपड़ा 'अपने साबुन' को 'सिर्फ़ पुरुषों के लिए' या 'सिर्फ़ बच्चों के लिए' पोज़िशन करते। यह एक नई, खाली शेल्फ़ थी।

उन्होंने 'लड़ने' को चुना, 'समझदारी' को नहीं। उन्होंने अपनी 100% ताक़त 'नंबर 1' की टक्कर में वेस्ट कर दी, जबकि 'नई जगह' पर वह आसानी से 'नंबर 1' बन सकते थे।

यह तो वही बात हो गई कि आप एक 'बड़ी बिल्डिंग' के सामने एक 'छोटी बिल्डिंग' बनाने की कोशिश करें, जबकि आप एक 'नए, खाली मैदान' पर एक शानदार बिल्डिंग बना सकते थे।

'खाली जगह' ढूँढने का मतलब है:
  • 'सब-कैटेगरी' बनाओ। (अगर आप 'कॉफ़ी' नहीं बेच सकते, तो 'हर्बल कॉफ़ी', 'रात की कॉफ़ी' या 'बच्चों की कॉफ़ी' बेचो)।
  • 'नंबर 1' की कमज़ोरी को ताक़त बनाओ। (अगर कॉम्पिटिटर बड़ा है, तो आप 'पर्सनल टच' बेचो)।
  • 'फ़र्स्ट' बनना ही सब कुछ है। (जिस कैटेगरी को आप बनाते हैं, आप उसमें 'हमेशा के लिए' नंबर 1 बन जाते हैं)।

जब आप 'खाली जगह' ढूँढते हैं, तो आप 'भीड़' से अलग हो जाते हैं। आपका मैसेज सीधे कस्टमर के दिमाग़ में जाता है और पहली बार में ही याद हो जाता है (लेसन 1 से कनेक्शन)।

लेकिन, अगर आप एक 'छोटी' कैटेगरी में भी 'नंबर 1' नहीं बन सकते, तो क्या करेंगे? क्या आपको 'हार' मान लेनी चाहिए? नहीं। आपको 'नियमों' को ही बदलना होगा।

यही बात हमें तीसरे सबसे ज़रूरी लेसन की ओर ले जाती है, जहाँ हम सीखेंगे कि 'अगर आप किसी कैटेगरी में 'नंबर 1' नहीं बन सकते, तो आपको अपनी खुद की 'नई कैटेगरी' बनाकर उसका 'नंबर 1' कैसे बनना चाहिए। 


Lesson : नंबर 1 नहीं बन सकते? – अपनी खुद की Category बनाओ

बाज़ार में दो तरह की कंपनियाँ हैं: जो 'नियमों' का पालन करती हैं, और जो 'नियमों' को बनाती हैं। अगर आप 'नंबर 1' (Market Leader) की कैटेगरी में 'नंबर 2' बनकर चल रहे हैं, तो आप हमेशा 'पीछे' ही रहेंगे। कस्टमर 'नंबर 1' को याद रखेगा, और आपको 'नंबर 2' के रूप में। यह 'सेकंड बेस्ट' का टैग आपकी ग्रोथ को हमेशा धीमा रखेगा।

अल रीस और जैक ट्राउट की सबसे पावरफुल सलाह है: "यह जानना कि अगर आप किसी कैटेगरी (Category) में 'नंबर 1' नहीं बन सकते, तो आपको अपनी खुद की 'नई कैटेगरी' बनाकर उसका 'नंबर 1' बनना चाहिए।"

आप 'नियम' तोड़ते हैं, पर 'बिज़नेस का नियम' नहीं तोड़ते। आप 'पोज़िशनिंग का नियम' तोड़ते हैं। आप कहते हैं: "ठीक है, हम इस 'बड़ी' कैटेगरी में 'नंबर 1' नहीं बन सकते। तो हम एक 'छोटी' कैटेगरी बनाएँगे और उसमें 'नंबर 1' बनेंगे।"

उदाहरण के लिए, अगर आप 'एयरलाइन' में 'नंबर 1' नहीं बन सकते, तो आप 'सबसे सस्ती एयरलाइन' (Southwest Airlines), या 'बिज़नेस क्लास की सबसे अच्छी एयरलाइन' बन जाते हैं। आप 'एयरलाइन' को एक 'नई, छोटी कैटेगरी' में तोड़ देते हैं।

यह तो वही बात हो गई कि आप 'क्रिकेट' में सचिन तेंदुलकर को नहीं हरा सकते, तो आप 'कब्बडी' में 'नंबर 1' बन जाते हैं। आप 'गेम' ही बदल देते हैं।

आइए, हमारे तीसरे और आख़िरी कैरेक्टर मिस्टर पटेल से मिलिए। मिस्टर पटेल का बिज़नेस 'कस्टमर सर्विस' का था। उन्होंने देखा कि 'कस्टमर सर्विस' में पहले से ही 50 बड़ी कंपनियाँ थीं।

मिस्टर पटेल ने विज्ञापन में कहा: "हम 'नंबर 1' कंपनी से ज़्यादा 'ईमानदार' हैं।"

नतीजा? किसी को याद नहीं रहा। क्यों? क्योंकि 'ईमानदारी' एक 'पोज़िशन' नहीं है, यह एक 'उम्मीद' है।

अगर मिस्टर पटेल 'नियम तोड़ते', तो वह अपनी खुद की कैटेगरी बनाते: '24-घंटे चैटबॉट-मुक्त कस्टमर सर्विस'। (यानी, सिर्फ़ 'इंसान' ही आपसे बात करेंगे, बॉट नहीं)।

उन्होंने 'कस्टमर सर्विस' को 'ह्यूमन टच' की एक 'नई कैटेगरी' में तोड़ दिया। अब जब कस्टमर को 'मानवीय मदद' चाहिए होगी, तो वह मिस्टर पटेल को याद करेंगे—क्योंकि इस कैटेगरी में वह नंबर 1 हैं।

मिस्टर पटेल ने 'नियम' को तोड़ने की हिम्मत नहीं की। उन्होंने अपनी 'पहचान' को 'नंबर 1' के 'पीछे' रखा।

यह तो वही बात हो गई कि आप एक 'नदी' के किनारे एक 'छोटा गड्ढा' खोद रहे हैं, जबकि आप 'पहाड़' पर एक 'झरना' बनाकर एक 'नई नदी' बना सकते थे।

'अपनी खुद की कैटेगरी बनाना' ही डोमिनेशन का आख़िरी नियम है:
  • 'सबट्रैक्शन' (Subtraction) का नियम लगाओ। (अपने प्रॉडक्ट से कौन सी 'एक चीज़' हटा दें, जिससे वह एक 'नई कैटेगरी' बन जाए?)।
  • 'नंबर 1' को चैलेंज मत करो, उसे 'छोटा' करो। (जब आप अपनी 'नई कैटेगरी' बनाते हैं, तो 'नंबर 1' अपने आप 'पुराना' हो जाता है)।
  • 'बाज़ार' को नहीं, 'दिमाग़' को एजुकेट करो। (कस्टमर को बताओ कि 'नंबर 1' आपके सामने 'क्यों' पुराना है)।

जब आप 'नियमों को तोड़ते हैं', तो आप एक 'नया बाज़ार' बनाते हैं। आप उस बाज़ार के हमेशा के लिए 'नंबर 1' बन जाते हैं। यह साफ़ पोज़िशन ही आपकी कंपनी को 'मेहनत' से निकालकर 'डोमिनेशन' की राह पर लाती है।


मार्केटिंग का युद्ध जीतने के लिए आपको 'नियम' तोड़ने होंगे।
  1. आज ही अपनी कंपनी की 'सबसे बड़ी कैटेगरी' को देखो और पूछो: "हम इस कैटेगरी को 3 'छोटी कैटेगरी' में कैसे तोड़ सकते हैं?"
  2. अपने कॉम्पिटिटर (लेसन 2) को देखो और पूछो: "कस्टमर के दिमाग़ की कौन सी 'शेल्फ़' अभी भी पूरी तरह से खाली है?"
  3. अगर यह आर्टिकल पढ़कर आपको लगा कि यह आपके बिज़नेस को 'भीड़' से बाहर निकाल सकता है, तो इसे अपने उन सभी सेल्स और मार्केटिंग दोस्तों के साथ शेयर करो जो अभी भी 'नंबर 1' की नक़ल कर रहे हैं!

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