Six Action Shoes (Hindi)


आप क्यों हमेशा एक ही तरीके से 'फै़सले' लेकर फेल हो जाते हैं? जब बाकि लोग 'सिक्स एक्शन शूज़' से हर सिचुएशन को कंट्रोल कर रहे हैं, आप अभी भी 'कंफ्यूज़न' में घूम रहे हैं। यह 'एक-तरफ़ा सोच' आपको डुबो देगी! Six Action Shoes में 3 ऐसे सीक्रेट्स हैं, जिन्हें अपनाकर आप बिज़नेस और लाइफ़ के लिए सही फ़ैसला लेना Master कर लेंगे। ये 3 लेसन्स आपके एक्शन लेने के तरीक़े को हमेशा के लिए ट्रांसफॉर्म कर देंगे।


Lesson : एक ही 'जूता' मत पहनो – एक्शन का नज़रिया बदलो

ज़्यादातर लोग हर सिचुएशन में एक ही तरीक़े से रिएक्ट (React) करते हैं। अगर कोई प्रॉब्लम आती है, तो 'एग्रेसिव' आदमी तुरंत चिल्लाता है। अगर कोई नया आइडिया आता है, तो 'पॉजिटिव' आदमी तुरंत 'हाँ' कह देता है। यह एक 'सिंगल मोड' की ज़िंदगी है। आप एक 'पाइप' की तरह हैं—आपसे सिर्फ़ एक ही तरह की चीज़ बाहर निकल सकती है।

एडवर्ड डी बोनो (Six Thinking Hats वाले) कहते हैं: "यह समझना कि हर सिचुएशन के लिए 'एक्शन' लेने का एक अलग नज़रिया होता है, और 6 अलग 'जूतों' (Shoes) को पहनकर ही सही फ़ैसला लिया जा सकता है।"

'सिक्स एक्शन शूज़' (Six Action Shoes) एक मेंटल टूलकिट (Mental Toolkit) है जो आपको 6 अलग-अलग 'एक्शन मोड' देती है। जब आप एक तरह का 'जूता' पहनते हैं, तो आपका दिमाग़ सिर्फ़ उसी तरह के एक्शन पर फ़ोकस करता है। इससे आप किसी भी सिचुएशन को एकतरफ़ा (One-Sided) नहीं, बल्कि पूरे नज़रीये से देखते हैं।

ये 6 जूते 6 अलग-अलग तरह के फ़ैसला लेने के तरीक़े बताते हैं, जैसे:
  • नेवी ब्लू शूज़: सिर्फ़ रूटीन और फ़ॉर्मल एक्शन (जैसे: अटेंडेंस लेना, बिल भरना)।
  • ग्रे शूज़: रिसर्च और इन्फॉर्मेशन ढूँढना (जैसे: क्लाइंट के बारे में डेटा कलेक्ट करना)।
  • ब्राउन शूज़: प्रैक्टिकल और एहतियाती एक्शन (जैसे: किसी भी रिस्क को पहले चेक करना)।

जब आप 'ग्रे शूज़' पहनते हैं, तो आप 'चिल्लाते' नहीं हैं, आप सिर्फ़ 'सुनते' और 'डेटा' इकट्ठा करते हैं। यह 'बदलने' की ताक़त ही आपको सही फ़ैसला लेने वाला बनाती है।

आइए, इसे एक फनी एग्ज़ाम्पल से समझते हैं। मिलिए मिस्टर चोपड़ा से। मिस्टर चोपड़ा हर सिचुएशन को 'रेड शूज़' (इमरजेंसी, आग बुझाने वाला मोड) से देखते हैं। अगर किसी एम्प्लॉयी ने एक छोटी-सी ग़लती कर दी, तो मिस्टर चोपड़ा तुरंत चिल्लाते हैं: "इसको अभी फ़ायर करो, यह कंपनी को डुबो देगा!"

एक बार एक जूनियर टीम मेंबर से एक क्लाइंट का ईमेल डिलीट हो गया। मिस्टर चोपड़ा ने तुरंत 'फ़ायरिंग मोड' ऑन कर दिया। अगर वह 'ग्रे शूज़' पहनते, तो वह पहले पूछते: "यह कैसे हुआ? क्या क्लाइंट को पता चला? क्या हम इसे रिकवर कर सकते हैं?"

मिस्टर चोपड़ा ने 'ज़रूरत से ज़्यादा' रिएक्ट किया। उन्होंने एक छोटी-सी 'टायर पंचर' की सिचुएशन को 'कार का एक्सीडेंट' बना दिया, क्योंकि वह हमेशा 'रेड शूज़' (इमरजेंसी मोड) में रहते थे।

यह तो वही बात हो गई कि आप हर सुबह 'पार्टी वाले' कपड़े पहनकर ऑफ़िस जाएँ। आपका 'एक्शन' सिचुएशन के 'ज़रूरत' से मैच नहीं करेगा।

'एक्शन का नज़रिया' बदलने का मतलब है:
  • सिचुएशन को 'लेबल' करो। (यह 'इमरजेंसी' है, 'रिसर्च' है, या 'रचनात्मकता'?)।
  • 'रिएक्ट' मत करो, 'चुनो'। (गुस्सा करने से पहले सोचो: इस सिचुएशन में 'ग्रे शूज़' की ज़रूरत है, 'रेड शूज़' की नहीं)।
  • दूसरों को 'जूते' पहचानना सिखाओ। (जब टीम में कोई इमोशनल हो, तो उसे कहो: "थोड़ी देर के लिए 'ग्रे शूज़' पहनकर सोचो")।

जब आप हर सिचुएशन के लिए 'सही जूता' चुनते हैं, तो आपका फ़ैसला लेने का तरीक़ा 'अंधा' नहीं होता, बल्कि फ़ोकस्ड होता है। यह माइंडसेट आपको कन्फ्यूज़न से बाहर निकालता है।

लेकिन, सिर्फ़ 'जूते' होना काफ़ी नहीं है। आपको यह जानना होगा कि इन अलग-अलग 'एक्शन स्टाइल' के बीच 'स्विच' कैसे करें।

यही बात हमें दूसरे सबसे ज़रूरी लेसन की ओर ले जाती है, जहाँ हम सीखेंगे कि 6 अलग 'एक्शन स्टाइल' के बीच स्विच करने की ताक़त क्या है।


Lesson : स्टिफ़ नहीं, फ़्लेक्सिबल बनो – 6 एक्शन स्टाइल के बीच स्विच करने की कला

सोचिए, आप एक क्रिकेटर हैं। अगर आप हर बॉल को 'डिफ़ेंसिव' होकर खेलेंगे, तो आप आउट नहीं होंगे, पर रन भी नहीं बनेंगे। अगर आप हर बॉल को 'हिटर' बनकर खेलेंगे, तो आप जल्दी आउट हो जाएँगे। एक महान प्लेयर वह है जो 'बॉल' के हिसाब से अपना 'शॉट' (Action Style) बदलता है।

ज़्यादातर मैनेजर्स या लोग अपनी ज़िंदगी में एक ही 'एक्शन स्टाइल' में फँस जाते हैं—या तो वह हमेशा 'लॉजिकल' (Logical, जैसे ग्रे शूज़) होते हैं, या हमेशा 'इमोशनल' (Emotional, जैसे ऑरेंज शूज़)। यह फ़्लेक्सिबिलिटी की कमी है।

एडवर्ड डी बोनो कहते हैं: "सिर्फ़ एक ही तरीके पर टिके रहने के बजाय, जानबूझकर 6 अलग 'एक्शन स्टाइल' (जैसे इन्फॉर्मेशन मोड या इमरजेंसी मोड) के बीच स्विच करना।"

'सिक्स एक्शन शूज़' का असली मज़ा तब है जब आप उन 6 जूतों को 'एक बॉक्स' में रखते हैं और जब ज़रूरत हो, तब सही 'जूता' निकालते हैं।

उदाहरण के लिए, 6 शूज़ में से दो और मोड देखिए:
  • पिंक शूज़: सिर्फ़ 'ह्यूमन केयर' और 'सेंसिटिविटी' पर फ़ोकस करना (जैसे: जब किसी एम्प्लॉयी की तबियत ख़राब हो, तो सिर्फ़ उसकी मदद करना, काम की बात नहीं)।
  • ऑरेंज शूज़: 'इमरजेंसी मोड' में तुरंत और आक्रामक (Aggressive) एक्शन लेना (जैसे: आग लगने पर बिना सोचे-समझे दरवाज़ा तोड़ना)।

अगर कोई आग लगी है, और आप 'नेवी ब्लू शूज़' (रूटीन एक्शन) पहनकर कह रहे हैं: "मुझे पहले परमिशन स्लिप लेनी पड़ेगी," तो सब कुछ ख़त्म हो जाएगा। आपको तुरंत 'ऑरेंज शूज़' (इमरजेंसी) में स्विच करना होगा।

आइए, इसे एक फनी एग्ज़ाम्पल से समझते हैं। मिलिए मिसेज़ गुप्ता से। मिसेज़ गुप्ता हमेशा 'ग्रे शूज़' (लॉजिक और डेटा) में रहती थीं।

एक बार उनके दफ़्तर में एक एम्प्लॉयी को 'पैनिक अटैक' (Panic Attack) आया। मिसेज़ गुप्ता ने तुरंत 'ग्रे शूज़' में आकर कहा: "मुझे पहले इसका मेडिकल डेटा चाहिए, फिर मैं 108 को कॉल करूँगी।"

अगर वह 'पिंक शूज़' (इंसानियत और केयर) में होतीं, तो वह पहले उस एम्प्लॉयी को पानी देतीं और शांत करतीं। मिसेज़ गुप्ता का लॉजिक सही था, पर उस वक़्त 'इंसानियत' (पिंक शूज़) ज़्यादा ज़रूरी थी।

मिसेज़ गुप्ता ने 'फ़ैसला' तो लिया, पर वह सिचुएशन की ज़रूरत के हिसाब से नहीं था। उन्होंने 'इंसानियत' को 'डेटा' के लिए मिस कर दिया।

यह तो वही बात हो गई कि आप शादी में 'वकील' की ड्रेस पहनकर जाएँ और सबसे 'कानूनी' बातें करें। ड्रेस सही है, पर जगह ग़लत है।

फ़्लेक्सिबिलिटी की ताक़त का मतलब है 'एक्शन स्टाइल' को जानबूझकर चुनना:
  • हर सिचुएशन को मापो: पूछो: "इस वक़्त कौन सा जूता सबसे ज़्यादा ज़रूरी है? क्या यह 'रचनात्मकता' (पीले शूज़) का समय है, या 'सावधानी' (ब्राउन शूज़) का?"
  • स्विच करने का अभ्यास करो: जब कोई इमरजेंसी हो, तो 5 सेकंड लो और खुद से कहो: "ऑरेंज शूज़ ऑन।" जब कोई ग़लती हो, तो कहो: "ग्रे शूज़ ऑन।"
  • इमोशन को अलग रखो: 'एक्शन शूज़' आपको अपने 'इमोशन' को 'एक्शन स्टाइल' से अलग करने में मदद करते हैं। आप ग़ुस्से में 'ऑरेंज' नहीं, बल्कि 'ज़रूरत' में 'ऑरेंज' पहनते हैं।

जब आप 6 एक्शन स्टाइल के बीच आसानी से स्विच करते हैं, तो आप 'कन्फ्यूज़न' से बाहर निकलकर हमेशा एक फ़ोकस्ड (लेसन 1 से कनेक्शन) फ़ैसला लेते हैं। आप किसी भी सिचुएशन में 'सही चाल' चलने के लिए तैयार रहते हैं।

लेकिन, इन जूतों को पहनना काफ़ी नहीं है। आपको यह जानना होगा कि इन जूतों को 'किस ऑर्डर' में पहनना है। आप पहले 'रिसर्च' (ग्रे) करेंगे या पहले 'इमरजेंसी' (ऑरेंज) से निपटेंगे?

यही बात हमें तीसरे सबसे ज़रूरी लेसन की ओर ले जाती है, जहाँ हम सीखेंगे कि इन 6 एक्शन शूज़ को किस सही क्रम (Sequence) में इस्तेमाल करना है।


Lesson : किस ऑर्डर में 'जूते' पहनें? – एक्शन का सीक्वेंस (Action Sequence)

हमने सीखा कि हर सिचुएशन में 'जूते' बदलना (लेसन 2) ही फ़्लेक्सिबिलिटी है। लेकिन, अगर आपको 6 जूते दे दिए जाएँ और आपको पता ही न हो कि 'पहले कौन सा पहनना है', तो आप सिर्फ़ और कन्फ्यूज़न पैदा करेंगे। आप एक डॉक्टर की तरह हैं: आप पहले 'ऑपरेशन' नहीं करते, पहले 'जाँच' करते हैं।

एडवर्ड डी बोनो कहते हैं कि 'सिक्स एक्शन शूज़' की असली ताक़त उसके सीक्वेंस (Sequence) में है। यह जानना कि: "समस्या को समझने से लेकर, उसका समाधान ढूँढने और उस पर एक्शन लेने तक, इन 6 एक्शन शूज़ को किस सही क्रम में इस्तेमाल करना है।"

एक ग़लत क्रम आपके पूरे प्लान को डुबो सकता है। अगर आप 'ग्रे शूज़' (डेटा/रिसर्च) से पहले 'ऑरेंज शूज़' (इमरजेंसी एक्शन) पहन लेते हैं, तो आप बिना सोचे-समझे आग में कूद जाएँगे। आपका 'एक्शन' सही होगा, पर वह 'ग़लत दिशा' में हो सकता है।

यहाँ 'फै़सला लेने' और 'एक्शन लेने' का एक मास्टर सीक्वेंस है, जिसे आप हर सिचुएशन में लगा सकते हैं:
  1. सबसे पहले, ग्रे शूज़ (Gray Shoes) – डेटा इकट्ठा करो: कोई भी फ़ैसला लेने से पहले, 'शांत' रहो और 'डेटा' इकट्ठा करो। क्या सही है? क्या ग़लत है? नंबर्स क्या कहते हैं? कौन क्या सोचता है? जब तक आपके पास 80% डेटा न हो, अगले स्टेप पर मत जाओ।
  2. दूसरा, ब्राउन शूज़ (Brown Shoes) – रिस्क देखो: अब डेटा को देखो और पूछो: "इसमें सबसे बड़ा रिस्क क्या है? क्या यह प्रैक्टिकल (Practical) है? सबसे ख़राब क्या हो सकता है?" 'सेफ़्टी फ़र्स्ट' का नज़रिया अपनाओ।
  3. तीसरा, पीला शूज़ (Yellow Shoes) – आइडिया सोचो: जब रिस्क साफ़ हो जाए, तब क्रिएटिव बनो। पूछो: "इसे बेहतर तरीक़े से कैसे करें? क्या नया कर सकते हैं? सबसे बड़ा फ़ायदा क्या होगा?" यह 'ब्रेनस्टॉर्मिंग' का समय है।
  4. चौथा, ऑरेंज शूज़ (Orange Shoes) – अब फ़ैसला लो: अब, डेटा, रिस्क और आइडिया के आधार पर, यह तय करो कि 'एक्शन प्लान' क्या है। यही वह 'विल-पावर' है जो कहती है: "बस, बहुत सोच लिया, अब यह करना है।"
  5. आख़िरी, नेवी ब्लू शूज़ (Navy Blue Shoes) – रूटीन में डालो: अब उस फ़ैसले को 'रूटीन' और 'सिस्टम' में डाल दो। रोज़ाना की रिपोर्ट, हर हफ़्ते की मीटिंग—सब कुछ कंट्रोल के साथ करो।

आइए, इसे एक फनी एग्ज़ाम्पल से समझते हैं। मिलिए मिस्टर जुनेजा से। मिस्टर जुनेजा एक 'एक्साइटेड' लीडर थे। उनके पास एक नया क्लाइंट आया।

उन्होंने क्या किया? उन्होंने 'ग्रे शूज़' (डेटा) पर ध्यान नहीं दिया। क्लाइंट की ज़रूरतें ठीक से नहीं समझीं। वह सीधे 'पीले शूज़' (क्रिएटिव आइडिया) में आ गए। उन्होंने 5 शानदार आइडिया दिए, जो सुनने में बहुत 'फ़ैन्सी' थे, पर क्लाइंट के बजट से 5 गुना ज़्यादा थे।

फिर, जब क्लाइंट ने प्राइस पूछा, तो मिस्टर जुनेजा तुरंत 'ऑरेंज शूज़' (जल्दबाज़ी में एक्शन) में आ गए और प्राइस 50% कम कर दिया। उन्होंने 'ब्राउन शूज़' (प्रैक्टिकल रिस्क) को मिस कर दिया—उन्हें नुक़सान होने लगा।

नतीजा? उनके पास एक 'शानदार' पर 'घाटे वाली' डील थी। उन्होंने 'आइडिया' तो अच्छा बेचा, पर 'बिज़नेस' डूबो दिया। क्योंकि उन्होंने 'जूते' तो पहने, पर ग़लत ऑर्डर में। उन्होंने 'जाँच' से पहले 'ऑपरेशन' कर दिया।

यह तो वही बात हो गई कि आप एक लंबी ड्राइव पर निकलें और 'मैप' (ग्रे शूज़) देखने से पहले ही अपनी 'टॉप स्पीड' (ऑरेंज शूज़) पर गाड़ी दौड़ाने लगें।

सीक्वेंस ही आपको हर सिचुएशन में 'कंट्रोल' देता है:
  • कन्फ्यूज़न हो, तो 'ग्रे' पहनो: जब भी मन में शोर हो, तो सिर्फ़ 'डेटा' और 'फ़ैक्ट्स' ढूँढो—और कुछ नहीं।
  • 'पिंक' और 'ब्लैक' की जगह: 'पिंक शूज़' (इंसानियत) और 'ब्लैक शूज़' (नेगेटिव चेक) को ज़रूरत के हिसाब से, 'ब्राउन' और 'येलो' के बीच में डालो—ज़रूरत हो, तभी पहनो।
  • आदत बनाओ: हर बड़े फ़ैसले से पहले एक बार 'ग्रे-ब्राउन-येलो-ऑरेंज-नेवी ब्लू' का मानसिक चेकलिस्ट (Checklist) चलाओ।

जब आप इस एक्शन सीक्वेंस को मास्टर कर लेते हैं, तो आप 'ज़िंदगी के रिएक्शन' को नहीं झेलते, बल्कि 'ज़िंदगी के एक्शन' को कंट्रोल करते हैं। यह फ़ैसला लेने का तरीक़ा आपको 'एकतरफ़ा सोच' (लेसन 1) से बाहर निकालता है और आपको किसी भी सिचुएशन में 'सही चाल' चलने की फ़्लेक्सिबिलिटी (लेसन 2) देता है।

अब आप एक ऐसे लीडर हैं जो 'बॉस' नहीं, बल्कि एक 'मास्टर चेस प्लेयर' है—हर चाल सोचकर और कंट्रोल के साथ चलता है।


आपका बेस्ट डिसीजन तब आता है जब आप 6 जूतों को सही ऑर्डर में पहनते हैं।
  1. आज ही अपनी 'टू-डू लिस्ट' के 3 सबसे मुश्किल कामों को देखो, और उन्हें 'ग्रे शूज़' से 'नेवी ब्लू शूज़' तक के सीक्वेंस में तोड़ो।
  2. जब अगली बार कोई नया आइडिया आए, तो उसे 24 घंटे के लिए रोको—और पहले 'ग्रे शूज़' (डेटा) पहनो।
  3. अगर यह आर्टिकल पढ़कर आपको लगा कि यह आपके डिसीजन मेकिंग को एक पावरफुल सिस्टम दे सकता है, तो इसे अपने उन सभी दोस्तों के साथ शेयर करो जो हमेशा 'जल्दबाज़ी' में ग़लत फ़ैसले लेकर पछताते हैं!

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