Management Challenges for the 21st Century (Hindi)


अगर आप आज भी वही पुराने घिसे पिटे मैनेजमेंट के तरीकों से अपनी लाइफ और करियर चलाने की कोशिश कर रहे हैं तो यकीन मानिए आप अपनी बर्बादी का सामान खुद तैयार कर रहे हैं। बिना पीटर ड्रकर के इन मॉडर्न रूल्स को समझे आप बस एक कोल्हू के बैल की तरह मेहनत करते रह जाएंगे और सक्सेस आपसे कोसों दूर रहेगी।

चलिए इस आर्टिकल में हम पीटर ड्रकर की किताब से उन ३ जादुई लेसन्स को समझते हैं जो आपकी पूरी वर्क लाइफ को बदल देंगे।


Lesson : खुद का मैनेजमेंट यानी मैनेजिंग वनसेल्फ

आज के जमाने में सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि हमें लगता है हम ऑफिस के बॉस या कंपनी के मालिक को मैनेज कर रहे हैं। असलियत तो यह है कि अगर आप खुद को मैनेज नहीं कर पा रहे हैं तो आप किसी और को क्या खाक मैनेज करेंगे। पीटर ड्रकर अपनी किताब में साफ कहते हैं कि २१वीं सदी में करियर की लंबी रेस जीतने के लिए आपको खुद का सीईओ बनना पड़ेगा। पुराने जमाने में लोग एक ही कंपनी में पैदा होते थे और वहीं से रिटायर होकर निकलते थे। लेकिन आज का दौर वैसा नहीं है। आज आपको हर मोड़ पर खुद को अपडेट करना होगा।

सोचिये एक ऐसे इंसान के बारे में जो मछली पकड़ने में माहिर है लेकिन उसे जबरदस्ती पेड़ पर चढ़ने के काम में लगा दिया गया है। वह पूरी जिंदगी खुद को नाकामयाब समझता रहेगा। हमारे साथ भी यही होता है। हम अक्सर उन चीजों में सिर मारते रहते हैं जिनमें हम कभी अच्छे थे ही नहीं। ड्रकर कहते हैं कि अपनी कमजोरियों को सुधारने में समय बर्बाद करने से बेहतर है कि आप अपनी ताकत यानी स्ट्रेंथ पर काम करें। अपनी स्ट्रेंथ को जानना ही असली सुपरपावर है।

अब आप कहेंगे कि भाई हमें कैसे पता चलेगा कि हमारी ताकत क्या है। ड्रकर ने इसके लिए एक बहुत ही कूल तरीका बताया है जिसे फीडबैक एनालिसिस कहते हैं। जब भी आप कोई बड़ा फैसला लें या कोई काम शुरू करें तो लिख लीजिये कि आपको उससे क्या उम्मीद है। फिर नौ या बारह महीने बाद देखिये कि असली रिजल्ट क्या निकला। अगर आप सोचते थे कि आप सेल्स में आग लगा देंगे लेकिन असल में आप एक फाइल भी नहीं बेच पाए तो समझ जाइये कि आपकी स्ट्रेंथ कहीं और है।

कुछ लोग खुद को मल्टी टास्किंग का राजा समझते हैं। वे मीटिंग में भी बैठेंगे, फोन पर चैट भी करेंगे और साथ में लंच भी निपटाएंगे। ड्रकर ऐसे लोगों को देखकर शायद अपना सिर पकड़ लेते। वे कहते हैं कि प्रोडक्टिविटी का मतलब यह नहीं है कि आप कितने बिजी दिख रहे हैं बल्कि यह है कि आप कितना रिजल्ट दे रहे हैं। जो लोग बिना किसी प्लान के बस पागलों की तरह भाग रहे हैं वे असल में अपनी बर्बादी का रास्ता खुद साफ कर रहे हैं।

आज का नॉलेज वर्कर वह नहीं है जो ज्यादा मेहनत करता है बल्कि वह है जो सही दिशा में मेहनत करता है। अपनी स्ट्रेंथ को पहचानिये, अपने काम करने के तरीके को समझिये और फिर देखिये कि कैसे आप अपनी फील्ड के टॉप १ परसेंट लोगों में शामिल होते हैं। खुद को मैनेज करना कोई ऑप्शन नहीं बल्कि आज के दौर में जिंदा रहने की पहली शर्त है।


Lesson : नॉलेज वर्कर की प्रोडक्टिविटी और परफॉरमेंस

पुराने जमाने में अगर आपको अमीर या कामयाब होना था तो आपको बस शरीर से मजबूत होना पड़ता था। अगर आप एक फावड़ा लेकर दिन भर गड्डा खोद सकते थे तो आप एक बेहतरीन मजदूर माने जाते थे। लेकिन पीटर ड्रकर कहते हैं कि २१वीं सदी में असली ताकत आपके हाथों में नहीं बल्कि आपकी खोपड़ी के अंदर मौजूद उस तीन पाउंड के मांस के टुकड़े में है जिसे हम दिमाग कहते हैं। आज हम सब नॉलेज वर्कर हैं। यानी हमारा काम पसीना बहाना नहीं बल्कि सही फैसले लेना और जानकारी का इस्तेमाल करना है।

अब मजे की बात देखिये। नॉलेज वर्कर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उसे खुद नहीं पता होता कि उसका काम कब खत्म हुआ। एक गड्डा खोदने वाले को पता है कि जब ५ फुट का गड्डा हो गया तो काम खत्म। लेकिन एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर या मैनेजर को कैसे पता चलेगा कि उसने आज सबसे बेहतरीन काम किया है? यहीं पर आती है असली चुनौती। ड्रकर साहब बड़े प्यार से समझाते हैं कि नॉलेज वर्कर की प्रोडक्टिविटी बढ़ाना कोई मशीन ठीक करने जैसा काम नहीं है। इसके लिए आपको खुद से पूछना होगा कि आखिर मेरा टास्क क्या है?

आजकल के ऑफिसों में देखिये। लोग सुबह ९ बजे आते हैं और शाम ६ बजे तक बस ईमेल का जवाब देने और फालतू की मीटिंग्स में बिस्कुट तोड़ने में निकाल देते हैं। वे खुद को बहुत बिजी समझते हैं लेकिन सच तो यह है कि उन्होंने पूरे दिन में धेले भर का काम नहीं किया होता। यह वही बात हुई कि आप रेसिंग कार लेकर ट्रैफिक जाम में फंसे हैं और सोच रहे हैं कि आप बहुत तेज चल रहे हैं। ड्रकर कहते हैं कि नॉलेज वर्कर को अपनी क्वालिटी पर ध्यान देना चाहिए न कि क्वांटिटी पर।

एक छोटा सा उदाहरण लीजिये। एक डॉक्टर दिन में ५० मरीज देखता है लेकिन अगर उसने एक भी गलत ऑपरेशन कर दिया तो उसके बाकी ४९ मरीजों को देखने का कोई फायदा नहीं। वैसे ही आपका एक सही फैसला आपकी कंपनी या करियर को सातवें आसमान पर ले जा सकता है और एक गलत फैसला आपको सड़क पर ला सकता है। ड्रकर ने यहाँ कटाक्ष करते हुए समझाया है कि जो लोग हर समय अवेलेबल रहते हैं और हर छोटे काम में अपनी टांग अड़ाते हैं वे असल में अपनी वैल्यू कम कर रहे होते हैं।

नॉलेज वर्क में सबसे जरूरी है लगातार सीखना। अगर आप सोच रहे हैं कि कॉलेज की डिग्री लेकर आप पूरी जिंदगी ऐश करेंगे तो भाई साहब आप गलतफहमी के शिकार हैं। आज के दौर में जो इंसान कल की सीखी हुई बात को आज भूलकर नई चीज नहीं सीख सकता वह बहुत जल्द कबाड़ बन जाएगा। अपनी स्किल्स को धार देते रहिये वरना मार्केट आपको वैसे ही बाहर फेंक देगा जैसे पुराने जमाने के नोकिया फोन को एंड्राइड ने बाहर फेंका था।


Lesson : बदलाव को अपनाना और लीडरशिप की असली चुनौती

पीटर ड्रकर कहते हैं कि २१वीं सदी में वही इंसान या कंपनी टिक पाएगी जो बदलाव के पीछे नहीं भागती बल्कि बदलाव के आगे चलती है। पुराने जमाने में लोग स्टेबिलिटी यानी स्थिरता को कामयाबी की निशानी मानते थे। एक बार सरकारी नौकरी लग गई या एक बड़ा बिजनेस सेट हो गया तो समझो सात पुश्तें तर गईं। लेकिन आज की दुनिया वैसी नहीं है। आज अगर आप कल के भरोसे बैठे हैं तो समझ लीजिये कि कल आपके पास कुछ नहीं बचेगा।

यहाँ ड्रकर एक बहुत ही कड़वा सच बोलते हैं जिसे वह एबंडनिंग द यस्टरडे यानी बीते हुए कल को छोड़ना कहते हैं। हम में से ज्यादातर लोग अपनी पुरानी कामयाबियों की लाश ढोते रहते हैं। मान लीजिये आपने पांच साल पहले कोई बहुत बड़ा प्रोजेक्ट हिट किया था और आज भी आप उसी के गुण गा रहे हैं जबकि मार्केट की जरूरतें पूरी तरह बदल चुकी हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप आज के जमाने में किसी को प्रेम पत्र भेजने के लिए कबूतर का इंतजार कर रहे हों। भाई जमाना व्हाट्सएप का है और आप अभी भी पंखों में चिट्ठियां बांध रहे हैं।

असली लीडर वह नहीं है जो आग लगने के बाद कुआं खोदता है बल्कि वह है जो जानता है कि आग कहाँ लग सकती है। ड्रकर ने यहाँ कटाक्ष करते हुए समझाया है कि जो कंपनियां सिर्फ अपनी पुरानी इमेज को बचाने में लगी रहती हैं वे बहुत जल्द इतिहास के पन्नों में दब जाती हैं। बदलाव कोई आफत नहीं है बल्कि यह एक अवसर है। अगर आप कल की चुनौतियों को आज भांप लेते हैं तो आप मार्केट के बेताज बादशाह बन सकते हैं।

सोचिये अगर नेटफ्लिक्स ने अपनी डीवीडी रेंटल सर्विस को नहीं छोड़ा होता तो क्या वह आज स्ट्रीमिंग का किंग होता? कभी नहीं। उसने समय रहते खुद को बदला। ड्रकर कहते हैं कि बदलाव के लिए एक खास तरह की सोच चाहिए। आपको अपनी उन चीजों को खत्म करने की हिम्मत जुटानी होगी जो आज तो पैसा दे रही हैं लेकिन कल बोझ बन जाएंगी। यह सुनने में थोडा डरावना लग सकता है लेकिन यही कड़वा सच है।

अंत में ड्रकर एक बहुत गहरी बात कहते हैं कि मैनेजमेंट का मतलब सिर्फ प्रॉफिट कमाना नहीं है बल्कि समाज में एक पॉजिटिव बदलाव लाना है। २१वीं सदी के लीडर को केवल नंबर्स नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी और उनकी ग्रोथ पर ध्यान देना होगा। अगर आप अपनी टीम को बेहतर नहीं बना रहे हैं तो आप सिर्फ एक मैनेजर हैं लीडर नहीं।


पीटर ड्रकर की यह किताब हमें यह सिखाती है कि २१वीं सदी में सर्वाइवल का एक ही मंत्र है और वह है लगातार खुद को अपग्रेड करना। अब सवाल यह है कि क्या आप आज भी अपने पुराने ढर्रे पर चलना चाहते हैं या आप खुद को एक नई पहचान देने के लिए तैयार हैं? अपनी स्ट्रेंथ को पहचानिये, अपनी प्रोडक्टिविटी पर काम कीजिये और बदलाव के साथ कदम से कदम मिलाकर चलिये।

अगर आपको लगता है कि यह जानकारी आपके करियर में चार चाँद लगा सकती है तो इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर कीजिये जो अभी भी अपनी पुरानी सफलताओं के नशे में सो रहे हैं। नीचे कमेंट्स में बताइये कि आप अपनी कौन सी एक पुरानी आदत आज छोड़ने वाले हैं?

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