क्या आप अभी भी अपने दादाजी के जमाने के बिजनेस आइडियाज लेकर बैठे हैं? मुबारक हो, आप बहुत जल्द मार्केट से गायब होने वाले हैं। अगर आपको लगता है कि सिर्फ सामान बेचना ही बिजनेस है, तो २०२० विजन की ये बातें आपको आइना दिखाएंगी। बिना डिजिटल बदलाव के आप बस फेलियर की कतार में खड़े हैं। चलिए देखते हैं वे ३ लेसन्स जो आपकी डूबती नैया पार लगा सकते हैं।
Lesson : सामान बेचना छोड़ो, इन्फॉर्मेशन बेचना सीखो
अगर आपको लगता है कि आप एक दुकान चलाते हैं और आपका काम बस गल्ले पर बैठकर सामान तौलना है, तो दोस्त, आप अभी भी पिछली सदी के हैंगओवर में जी रहे हैं। २०२० विजन किताब हमें सबसे पहले यही जोर का थप्पड़ मारती है कि आज की दुनिया में प्रोडक्ट की उतनी कीमत नहीं है, जितनी उस प्रोडक्ट से जुड़ी जानकारी की है। पुराने जमाने में इकॉनमी चलती थी लोहे, कोयले और पसीने से, लेकिन आज की इकॉनमी चलती है डेटा और दिमाग से। इसे हम इन्फॉर्मेशन इकॉनमी कहते हैं।
इसे एक आसान से उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपकी गली के कोने पर एक हलवाई की दुकान है। वह बढ़िया समोसे बनाता है, लोग आते हैं, खाते हैं और चले जाते हैं। यह हुआ एक साधारण बिजनेस। लेकिन अब सोचिए एक ऐसी स्मार्ट मिठाई की दुकान के बारे में जिसके पास अपने हर कस्टमर का डेटा है। उसे पता है कि शर्मा जी को शुगर है, इसलिए उनके लिए बिना चीनी वाली बर्फी तैयार रखनी है। उसे पता है कि वर्मा जी के घर में कल शादी की एनिवर्सरी है, तो वह आज ही उन्हें डिस्काउंट कूपन भेज देता है। अब बताइए, ग्राहक कहाँ जाएगा?
सच्चाई तो यही है कि ग्राहक को आपके समोसे से ज्यादा इस बात में दिलचस्पी है कि आप उसे कितनी अच्छी तरह समझते हैं। स्टैन डेविस और बिल डेविडसन कहते हैं कि हर बिजनेस को एक इन्फॉर्मेशन बिजनेस बनना ही पड़ेगा। अगर आप टायर बेचते हैं, तो आप सिर्फ रबर नहीं बेच रहे। आप सुरक्षा और माइलेज का डेटा बेच रहे हैं। अगर आप जिम चलाते हैं, तो आप सिर्फ मशीनें नहीं दे रहे, आप हेल्थ प्रोग्रेस का चार्ट बेच रहे हैं।
लोग अक्सर गलती यह करते हैं कि वे अपनी इन्फॉर्मेशन को संभालकर नहीं रखते। उन्हें लगता है कि डेटा तो बस कंप्यूटर वालों का काम है। भाई साहब, अगर आज आपके पास अपने कस्टमर की पसंद और नापसंद का रिकॉर्ड नहीं है, तो आप अंधेरे में तीर चला रहे हैं। और यकीन मानिए, मार्केट के इस कंपटीशन में वो तीर आपके खुद के पैर पर ही लगने वाला है।
आजकल तो हाल यह है कि कंपनियाँ आपको फ्री में सर्विस देती हैं ताकि वे आपका डेटा ले सकें। और हम बड़े प्यार से 'अक्सेप्ट ऑल कुकीज' पर क्लिक कर देते हैं। क्यों? क्योंकि उन्हें पता है कि एक बार उन्हें पता चल गया कि आपको रात को २ बजे भूख लगती है, तो वे आपको उसी वक्त खाने के विज्ञापन दिखाकर अपना बिजनेस सेट कर लेंगे।
अगर आप अभी भी अपने बिजनेस को सिर्फ फिजिकल एसेट यानी जमीन, दुकान और स्टॉक के नजरिए से देख रहे हैं, तो आप बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं। आपको अपने बिजनेस में इन्फॉर्मेशन की वैल्यू जोड़नी होगी। बिना डेटा के बिजनेस चलाना वैसा ही है जैसे बिना हेलमेट के सुपरबाइक चलाना, थ्रिल तो बहुत है पर रिस्क उससे भी कहीं ज्यादा है।
क्या आप तैयार हैं अपने पुराने ढर्रे को छोड़कर डेटा की दुनिया में कदम रखने के लिए? क्योंकि अगला लेसन इससे भी ज्यादा मजेदार होने वाला है जहाँ हम बात करेंगे कि कैसे आप हर एक इंसान को खास महसूस कराके अपना टर्नओवर बढ़ा सकते हैं।
Lesson : मास कस्टमाइजेशन - हर ग्राहक को राजा बनाओ
क्या आपको याद है वो दौर जब टेलर के पास जाकर शर्ट सिलवाना एक लग्जरी होता था? फिटिंग एकदम परफेक्ट, कॉलर अपनी पसंद का, और जेब वैसी जहाँ आपका फोन फिट आ जाए। लेकिन फिर आया रेडीमेड कपड़ों का जमाना। सस्ते तो थे, पर फिटिंग का भगवान ही मालिक था। या तो आस्तीन लंबी होती थी या पेट के पास से बटन जवाब दे जाते थे। २०२० विजन किताब हमें एक ऐसे भविष्य की सैर कराती है जहाँ आपको टेलर वाली फिटिंग मिलेगी और दाम रेडीमेड वाले होंगे। इसे कहते हैं मास कस्टमाइजेशन।
अगर आप आज भी यह सोच रहे हैं कि 'एक ही लाठी से सबको हांक देंगे', तो भाई साहब, आपकी लाठी टूटने वाली है। आज का ग्राहक बड़ा जिद्दी है। उसे वही चाहिए जो सिर्फ उसके लिए बना हो। स्टैन डेविस और बिल डेविडसन कहते हैं कि टेक्नोलॉजी का असली जादू यही है कि आप हजारों-लाखों लोगों को सामान बेचें, लेकिन हर एक को ऐसा महसूस हो कि यह चीज खास तौर पर उसी के लिए डिजाइन की गई है।
मान लीजिए आप एक ऑनलाइन जूतों की दुकान चलाते हैं। पुराना तरीका क्या था? आपने १० डिजाइन बनाए और सबको वही चिपका दिए। नया तरीका क्या है? ग्राहक अपने पैर की फोटो खींचकर ऐप पर डालता है, ऐप उसके पैर का सही नाप लेता है और उसे वही सोल और वही कुशनिंग देता है जो उसके चलने के स्टाइल के लिए बेस्ट है। अब ग्राहक को लगेगा कि वह कोई आम आदमी नहीं, बल्कि टीम इंडिया का कप्तान है जिसके लिए जूते कस्टमाइज किए गए हैं।
हंसी तो तब आती है जब कुछ दुकानदार सोचते हैं कि 'नाम बदलकर लिख देने से' काम चल जाएगा। भाई, कॉफी कप पर नाम लिख देना कस्टमाइजेशन का सिर्फ ट्रेलर है, पूरी पिक्चर नहीं। असली खेल तब शुरू होता है जब आप कस्टमर की जरूरत को उसके बोलने से पहले समझ लेते हैं। अगर आप नेटफ्लिक्स देखते हैं, तो आपको पता होगा कि वह आपको वही फिल्में दिखाता है जो आपको पसंद आने वाली हैं। वह आपके लिए आपका अपना टीवी चैनल बन जाता है। इसे कहते हैं कस्टमाइजेशन एट स्केल।
जो लोग कहते हैं कि 'भाई, हम तो छोटे दुकानदार हैं, हम यह सब कैसे करेंगे?', उनके लिए एक कड़वा सच है। अगर आप अपने कस्टमर को खास महसूस नहीं कराएंगे, तो अमेज़न और फ्लिपकार्ट उन्हें गोद ले लेंगे। आपको अपनी सर्विस में वो पर्सनल टच लाना होगा जो मशीनें नहीं ला सकतीं, लेकिन उन मशीनों का सहारा लेकर जो आपका काम आसान कर दें।
सोचिए, अगर आपकी परचून की दुकान है और आप हर महीने अपने टॉप ग्राहकों को उनकी पसंद के सामान की लिस्ट खुद ही वॉट्सऐप कर दें, तो क्या वे कहीं और जाएंगे? बिल्कुल नहीं। सरकाज्म की बात तो यह है कि लोग रोबोट्स से नफरत करते हैं लेकिन चाहते हैं कि हर सर्विस रोबोटिक रफ्तार से मिले और उसमें इमोशन इंसानों वाले हों।
तो क्या आप अपने बिजनेस को 'वन साइज फिट्स ऑल' के पिंजरे से बाहर निकालने के लिए तैयार हैं? क्योंकि अगर आप सबको एक जैसा समझेंगे, तो मार्केट आपको 'जीरो' समझने में देर नहीं लगाएगा। अब हम बढ़ेंगे अपने आखिरी और सबसे क्रांतिकारी लेसन की तरफ, जहाँ समय और जगह की सारी दीवारें गिर जाएंगी।
Lesson : समय और स्थान की बर्बादी बंद करो - एनीटाइम, एनीव्हेयर इकॉनमी
क्या आपको वो दिन याद हैं जब बैंक जाने के लिए आपको लंच ब्रेक खत्म होने का इंतज़ार करना पड़ता था? या फिर राशन की दुकान के बाहर धूप में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार? शुक्र मनाइए कि २०२० विजन की भविष्यवाणियाँ सच हो गईं, वरना आज भी हम लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी जवानी बर्बाद कर रहे होते। स्टैन डेविस और बिल डेविडसन का तीसरा सबसे बड़ा मंत्र है 'नो टाइम, नो स्पेस'। इसका मतलब है कि आज के बिजनेस के लिए घड़ी और नक्शा, दोनों बेकार हो चुके हैं।
अगर आपकी दुकान रात को १० बजे बंद हो जाती है और सुबह १० बजे खुलती है, तो मुबारक हो, आप दिन के १२ घंटे अपने कॉम्पिटिटर को दान कर रहे हैं। आज की दुनिया में ग्राहक को जब भूख लगती है, वो तभी ऑर्डर करता है। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि बाहर बारिश हो रही है या रात के ३ बज रहे हैं। अगर आप उसके 'अभी और यहीं' वाले ईगो को संतुष्ट नहीं कर सकते, तो आपका बिजनेस बस एक म्यूजियम का पीस बनकर रह जाएगा।
इसे एक मजेदार और थोड़े सरकास्टिक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप एक योगा क्लास चलाते हैं। पुराने जमाने में आप एक कमरा किराए पर लेते, बोर्ड लगाते और लोगों को सुबह ६ बजे आने को कहते। आधे लोग तो अलार्म बंद करके सो जाते और बाकी आधे ट्रैफिक में फंस जाते। यह था 'स्पेस और टाइम' का बंधन। लेकिन आज? आप अपनी क्लास रिकॉर्ड करते हैं या लाइव स्ट्रीम करते हैं। अब शर्मा जी अपनी बालकनी में बैठकर रात को भी योगा कर सकते हैं और अमेरिका में बैठा कोई बंदा भी आपकी क्लास ले सकता है। अब आपकी दुकान पूरा ग्लोब है और आपका वर्किंग टाइम २४ घंटे।
आज भी कुछ लोग कहते हैं कि 'भाई साहब, हमारी लोकेशन बहुत प्राइम है, मेन रोड पर दुकान है।' अरे भाई, आज की 'प्राइम लोकेशन' ग्राहक के हाथ में थमा हुआ स्मार्टफोन है। अगर आप उस स्क्रीन पर नहीं हैं, तो आप कहीं नहीं हैं। २०२० विजन हमें समझाता है कि इन्फॉर्मेशन इकॉनमी में चीजें फिजिकल से डिजिटल की तरफ शिफ्ट हो जाती हैं। जो सामान पहले ट्रक में भरकर आता था, अब वो फाइबर ऑप्टिक केबल के जरिए आपके फोन में डाउनलोड हो जाता है।
सोचिए, पहले फोटो खिंचवाने के बाद हफ्ते भर रील धुलने का इंतजार करना पड़ता था। आज फोटो खींचते ही आप उसे फिल्टर लगाकर पूरी दुनिया को दिखा देते हैं। यह 'रियल टाइम' की ताकत है। अगर आपके बिजनेस का रिस्पॉन्स टाइम ५ मिनट से ज्यादा है, तो समझ लीजिए ग्राहक का ध्यान भटक चुका है। वो रील स्क्रॉल करते हुए किसी और के पास चला गया है।
अंत में बात बस इतनी सी है कि दुनिया बदल नहीं रही है, दुनिया बदल चुकी है। २०२० विजन सिर्फ एक साल का नाम नहीं था, यह एक नए नजरिए का नाम था। अगर आप अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं, तो आप उस ड्राइवर की तरह हैं जो पिछली खिड़की से देखकर गाड़ी आगे चलाने की कोशिश कर रहा है। एक्सीडेंट तो पक्का है, बस देखना यह है कि कितना भयानक होगा।
खुद को बदलिए, डेटा को अपनाइए, हर ग्राहक को वीआईपी फील कराइए और समय की सीमाओं को तोड़ दीजिए। यही वो रास्ता है जो आपको कल की इकॉनमी का सुल्तान बनाएगा।
तो क्या आप अपने बिजनेस को इस नए डिजिटल युग के लिए तैयार करने का साहस जुटा पाएंगे? या फिर आप पुराने खयालातों के साथ डूबना पसंद करेंगे? कमेंट्स में बताइए कि इस किताब का कौन सा लेसन आपके बिजनेस को बदल सकता है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो आज भी 'कल देखेंगे' वाले एटीट्यूड में जी रहा है। उठिए, बदलिए और जीतिए!
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