From Worst to First (Hindi)


आप अपनी कंपनी को डुबाने में कसर नहीं छोड़ रहे क्योंकि आप अब भी उन पुराने घिसे पिटे रूल्स को फॉलो कर रहे हैं। अगर आपको लगता है कि सिर्फ बॉस बनकर आप सक्सेस पा लेंगे तो मुबारक हो आप फेलियर के एक्सप्रेस वे पर हैं। चलिए जानते हैं कैसे गॉर्डन बेथ्यून ने मरी हुई एयरलाइन को फिर से जिंदा किया।

यहाँ इस किताब से ३ ऐसे कड़वे और असरदार सबक दिए गए हैं जो आपके काम करने के तरीके को हमेशा के लिए बदल देंगे।


Lesson : डर का माहौल बदलें और एम्प्लॉई को अपना दोस्त बनाएं

कल्पना कीजिए आप एक ऐसी बस में बैठे हैं जिसके टायर फटे हुए हैं और ड्राइवर को खुद नहीं पता कि जाना कहाँ है। १९९४ में कॉन्टिनेंटल एयरलाइंस की हालत कुछ ऐसी ही थी। वहां के कर्मचारी अपनी वर्दी छिपाते थे ताकि लोग उन्हें पहचान न सकें। गॉर्डन बेथ्यून जब वहां आए तो उन्होंने देखा कि मैनेजमेंट ने ऑफिस के दरवाजों पर ताले लगा रखे थे और सिक्योरिटी गार्ड्स हर किसी पर शक करते थे। गॉर्डन ने सबसे पहले उन फालतू तालों को तोड़ा। उन्होंने कहा कि अगर आप अपने ही लोगों पर भरोसा नहीं कर सकते तो वे आप पर भरोसा क्यों करेंगे।

इसे एक रियल लाइफ उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपकी एक छोटी सी दुकान है और आपने वहां सीसीटीवी कैमरे इसलिए लगाए हैं ताकि आप अपने स्टाफ की चोरी पकड़ सकें। आप सारा दिन बस मॉनिटर घूरते रहते हैं। नतीजा क्या होगा? आपका स्टाफ काम करने के बजाय बस कैमरे से बचने के जुगाड़ सोचेगा। गॉर्डन बेथ्यून ने सिखाया कि डर से आप काम करवा सकते हैं लेकिन वफादारी नहीं खरीद सकते। उन्होंने एयरलाइन के बंद दरवाजों को खोल दिया और खुद एम्प्लॉई के साथ बैठकर बातें कीं।

कुछ बॉस को लगता है कि जितना ज्यादा वो चिल्लाएंगे कंपनी उतनी ऊपर जाएगी। भाई साहब आप शेर नहीं हैं और आपके एम्प्लॉई सर्कस के जानवर नहीं। अगर आप उन्हें इज्जत नहीं देंगे तो वो आपके जहाज के इंजन में कचरा डाल देंगे और आपको पता भी नहीं चलेगा। गॉर्डन ने एक गो फॉरवर्ड प्लान बनाया जिसका सबसे बड़ा हिस्सा था लोगों का दिल जीतना। उन्होंने नियम बदले और उन रूल्स की किताबों को आग लगा दी जो सिर्फ एम्प्लॉई को सजा देने के लिए बनी थीं।

जब लोग खुश होते हैं तो वो दिल से काम करते हैं। अगर एयरलाइन का क्लीनर खुश है तो वो सीट की पॉकेट में पड़ा कचरा भी साफ करेगा। अगर वो दुखी है तो वो बस ऊपर से पोंछा मार कर निकल जाएगा। गॉर्डन ने यह साबित किया कि एक लीडर का काम सिर्फ हुक्म चलाना नहीं बल्कि बाधाओं को दूर करना है। उन्होंने मैनेजमेंट को केबिन से निकालकर ग्राउंड पर खड़ा कर दिया।

इस पहले सबक का सीधा मतलब यह है कि अगर आपकी टीम आपके साथ खड़ी है तो आप डूबते हुए जहाज को भी रॉकेट बना सकते हैं। लेकिन अगर टीम ही आपसे नफरत करती है तो आपकी डिग्री और आपका विजन सिर्फ कागज के टुकड़े हैं। कॉन्टिनेंटल एयरलाइंस का टर्नअराउंड किसी जादू से नहीं बल्कि एक टूटे हुए रिश्ते को जोड़ने से शुरू हुआ था।


Lesson : ऑन टाइम परफॉरमेंस और सबको बराबर का रिवॉर्ड

कल्पना कीजिए आप एक पिज्जा आर्डर करते हैं और वो ४ घंटे बाद आता है। पिज्जा वाला आपसे कहता है कि सर हमारा ओवन बहुत शानदार है और हमारे पास दुनिया के सबसे अच्छे शेफ हैं। क्या आप दोबारा वहां से आर्डर करेंगे? बिल्कुल नहीं! कॉन्टिनेंटल एयरलाइंस के साथ भी यही हो रहा था। वो दुनिया की सबसे खराब एयरलाइन थी क्योंकि उनके जहाज कभी टाइम पर नहीं उड़ते थे। गॉर्डन बेथ्यून ने समझ लिया कि अगर आप अपनी सर्विस का वादा पूरा नहीं कर सकते, तो आपकी मार्केटिंग सिर्फ झूठ का पुलिंदा है।

उन्होंने एक बहुत ही सिंपल और मजेदार रिवॉर्ड सिस्टम शुरू किया। उन्होंने घोषणा की कि जिस महीने कॉन्टिनेंटल एयरलाइंस टॉप ५ एयरलाइंस में ऑन टाइम परफॉरमेंस देगी, उस महीने हर एम्प्लॉई को ६५ डॉलर का चेक मिलेगा। अब आप कहेंगे कि सिर्फ ६५ डॉलर? भाई साहब, १९९० के दशक में यह एक बड़ी रकम थी, लेकिन उससे भी बड़ी बात यह थी कि यह चेक सबको मिलता था। चाहे वो पायलट हो या वो बंदा जो सामान उठाता है।

अक्सर कंपनियों में क्या होता है? अगर कंपनी ने मुनाफा कमाया तो सीईओ साहब को करोड़ों का बोनस मिलता है और जूनियर स्टाफ को दिवाली पर एक सोनपापड़ी का डिब्बा पकड़ा दिया जाता है। गॉर्डन ने इस रीत को तोड़ दिया। उन्होंने दिखाया कि जब जहाज टाइम पर उड़ता है, तो उसमें सिर्फ पायलट का हाथ नहीं होता, बल्कि उस मैकेनिक का भी हाथ होता है जिसने नट ढीला नहीं छोड़ा।

जब पहला चेक एम्प्लॉई के घर पहुंचा, तो माहौल बदल गया। अचानक सबको लगने लगा कि ये मेरी कंपनी है। लोग एक दूसरे की मदद करने लगे ताकि जहाज लेट न हो। सफाई वाले ने जल्दी सफाई की क्योंकि उसे वो ६५ डॉलर चाहिए थे। गेट एजेंट ने जल्दी पैसेंजर्स को चढ़ाया क्योंकि उसे अपनी टीम को जीतते हुए देखना था। गॉर्डन ने साबित किया कि टीम वर्क के बारे में लंबी चौड़ी स्पीच देने से अच्छा है कि उनके हाथ में जीत का हिस्सा थमा दो।

रियल लाइफ में भी यही होता है। अगर आप एक टीम लीडर हैं और आप सारा क्रेडिट खुद खा जाते हैं, तो अगली बार आपकी टीम आपके लिए जान नहीं देगी। गॉर्डन बेथ्यून ने परफॉरमेंस को पैसे से जोड़ दिया और उसे एक गेम बना दिया। जब लोग जीतने के लिए खेलते हैं, तो नतीजे चमत्कारिक होते हैं। कॉन्टिनेंटल जो सबसे पीछे थी, अचानक नंबर वन की रेस में आ गई। यह सबक हमें सिखाता है कि जो चीज मापी जा सकती है, वही सुधारी जा सकती है। और जो सुधारा जाता है, उसे रिवॉर्ड मिलना ही चाहिए।


Lesson : गो फॉरवर्ड प्लान और कस्टमर का भरोसा जीतना

अगर आप एक रेस्टोरेंट चलाते हैं और आपके वेटर बहुत अच्छे हैं लेकिन खाना सड़ा हुआ है, तो क्या कोई आएगा? बिल्कुल नहीं। गॉर्डन बेथ्यून ने समझ लिया था कि सिर्फ एम्प्लॉई को खुश करना काफी नहीं है, बल्कि उस प्रोडक्ट को भी ठीक करना होगा जिसे आप बेच रहे हैं। कॉन्टिनेंटल के पास पुराने जहाज थे, सीटें फटी हुई थीं और खाना इतना खराब था कि लोग उसे छूते तक नहीं थे। गॉर्डन ने अपना गो फॉरवर्ड प्लान लागू किया। उन्होंने कहा कि हम सिर्फ उड़ेंगे नहीं, हम सबसे अच्छे तरीके से उड़ेंगे।

उन्होंने नए जहाज खरीदे, इंटीरियर बदला और सबसे जरूरी बात, कस्टमर को इज्जत देना शुरू किया। अक्सर बिजनेस में लोग सोचते हैं कि एडवरटाइजिंग पर करोड़ों खर्च कर दो तो कस्टमर खुद खिंचा चला आएगा। भाई साहब, अगर आपकी सर्विस घटिया है तो आपकी एडवरटाइजिंग सिर्फ और सिर्फ आपकी बेइज्जती का ढिंढोरा पीटेगी। गॉर्डन ने मार्केटिंग से ज्यादा पैसा सर्विस सुधारने में लगाया। उन्होंने एक बहुत ही सार्केस्टिक बात कही थी कि अगर आप एक पिज्जा शॉप चलाते हैं और आपका पिज्जा ठंडा है, तो उसे गर्म करने के लिए नई ओवन खरीदें, न कि नए पोस्टर छपवाएं।

मान लीजिए आप एक ऑनलाइन स्टोर से जूते मंगाते हैं। जूते बॉक्स में टूटे हुए निकलते हैं और कस्टमर केयर वाला आपसे तमीज से बात नहीं करता। क्या आप वहां दोबारा जाएंगे? कभी नहीं। गॉर्डन ने कॉन्टिनेंटल के हर एम्प्लॉई को सिखाया कि पैसेंजर सिर्फ एक टिकट नंबर नहीं है, वो एक इंसान है जो अपना कीमती वक्त और पैसा हमें दे रहा है। उन्होंने बिजनेस क्लास को इतना शानदार बनाया कि लोग दूसरी एयरलाइंस छोड़कर यहां आने लगे।

इस लेसन का सबसे बड़ा टेकअवे यह है कि जब आप अपने काम की क्वालिटी पर ध्यान देते हैं, तो मुनाफा खुद-ब-खुद पीछे आता है। गॉर्डन ने हारती हुई बाजी को जीत में बदल दिया क्योंकि उन्होंने बेसिक चीजों को सही किया। उन्होंने फालतू के खर्चों में कटौती की और उस पैसे को वहां लगाया जहां से वैल्यू बढ़ती थी। उन्होंने पूरी कंपनी का नजरिया बदल दिया। जो एयरलाइन कल तक दिवालिया होने की कगार पर थी, वो अचानक फॉर्च्यून ५०० की सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली कंपनी बन गई।

सबक साफ है, अगर आप वर्स्ट से फर्स्ट बनना चाहते हैं, तो आपको बहाने बनाना छोड़कर अपनी कमियों को स्वीकार करना होगा। गॉर्डन बेथ्यून की यह कहानी हमें सिखाती है कि कोई भी बिजनेस या करियर इतना बुरा नहीं होता कि उसे सुधारा न जा सके। बस जरूरत होती है एक सही विजन, थोड़े साहस और अपनी टीम पर अटूट भरोसे की। अगर आप आज अपनी कंपनी के गॉर्डन बेथ्यून बन जाएं, तो यकीन मानिए आपका कमबैक भी इतना ही शानदार होगा।


तो दोस्तों, क्या आप भी अपनी लाइफ या बिजनेस में उन पुराने और बेकार नियमों को ढो रहे हैं जो आपको आगे बढ़ने से रोक रहे हैं? आज ही फैसला कीजिए कि आप डर की राजनीति करेंगे या भरोसे की दीवार खड़ी करेंगे। याद रखिए, गॉर्डन बेथ्यून ने सिर्फ एक एयरलाइन नहीं बचाई थी, उन्होंने हजारों लोगों की उम्मीदों को उड़ान दी थी। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो अपनी टीम को लीड करने में स्ट्रगल कर रहा है। नीचे कमेंट में बताएं कि आपको इस बुक का सबसे बेस्ट पार्ट क्या लगा। चलिए साथ मिलकर वर्स्ट से फर्स्ट का सफर शुरू करते हैं।

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