Full Frontal PR (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो लाखों रुपये एड्स पर फूंक कर बस सन्नाटे का इंतजार करते हैं? सच तो यह है कि आपका प्रोडक्ट शायद इतना बोरिंग है कि लोग उसे इग्नोर करना अपना हक समझते हैं। जब तक आप फुल फ्रंटल पीआर के ये सीक्रेट्स नहीं जान लेते, आप बस एक गुमनाम बिजनेसमैन बनकर रह जाएंगे जिसे उसके घर वाले भी सीरियसली नहीं लेते।

चलिए देखते हैं इस किताब के वो ३ पावरफुल लेसन्स जो आपके ब्रांड को रातों रात चर्चा का विषय बना देंगे।


Lesson : विज्ञापन नहीं, तड़केदार कहानी बेचिए

क्या आपने कभी सोचा है कि आप टीवी पर आने वाले उन बोरिंग विज्ञापनों को स्किप क्यों कर देते हैं? क्योंकि वो आपको कुछ बेचने की कोशिश कर रहे हैं और इंसान का दिमाग बेचे जाने से नफरत करता है। रिचर्ड लार्मेर और माइकल प्रिचिनेलो अपनी किताब फुल फ्रंटल पीआर में बड़े साफ शब्दों में कहते हैं कि अगर आप चाहते हैं कि लोग आपके बारे में बात करें, तो आपको विज्ञापन देना बंद करना होगा और एक जबरदस्त कहानी सुनानी शुरू करनी होगी।

सोचिए, एक तरफ एक साबुन की कंपनी है जो चिल्ला रही है कि हमारा साबुन ९९ परसेंट कीटाणु मारता है। दूसरी तरफ एक ऐसी कहानी है जहाँ एक छोटा बच्चा कीचड़ में खेल रहा है क्योंकि उसकी माँ को भरोसा है कि उनका साबुन उसे बीमार नहीं होने देगा। आप किसे याद रखेंगे? जाहिर है उस एहसास और उस कहानी को। इंडिया में तो वैसे भी हमें मसालों की आदत है, तो फिर आपका बिजनेस फीका क्यों रहे?

मार्केट में आपके जैसे हजारों लोग वही सामान बेच रहे हैं जो आप बेच रहे हैं। अगर आप भी वही घिसी पिटी बातें करेंगे कि मेरा प्रोडक्ट बेस्ट है, तो लोग आपको किसी कोने में पड़े पुराने अखबार की तरह इग्नोर कर देंगे। आपको अपनी ब्रांडिंग में थोडा ड्रामा और थोडा इमोशन जोड़ना पड़ेगा। जैसे मान लीजिए आप एक नया चाय का स्टार्टअप शुरू करते हैं। अब अगर आप बस चाय की पत्ती की क्वालिटी की बात करेंगे, तो कोई मुड़कर भी नहीं देखेगा। लेकिन अगर आप यह बताएं कि कैसे आपने अपनी दादी की गुप्त रेसिपी को बचाने के लिए कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ दी, तो लोग आपकी चाय का स्वाद चखने के लिए लाइन लगा देंगे।

सर्कस में जो जोकर होता है, वो बस करतब नहीं दिखाता, वो एक परफॉरमेंस देता है। आपको भी अपने बिजनेस का वही शोमैन बनना पड़ेगा। जब तक आपकी कहानी में वो हुक नहीं होगा जो लोगों के इमोशन्स को टच करे, तब तक आप बस एक और दुकान खोलकर बैठे हैं। लोग आज के जमाने में प्रोडक्ट नहीं खरीदते, वो उस कहानी का हिस्सा बनना चाहते हैं जो आप सुना रहे हैं। अगर आपकी कहानी में दम है, तो लोग खुद चलकर आपके पास आएंगे और आपको चिल्ला चिल्ला कर मार्केटिंग करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

अगले लेसन में हम देखेंगे कि कैसे थोडा सा विवाद और चर्चा आपके ब्रांड को रातों रात वायरल कर सकती है, क्योंकि सिर्फ अच्छी कहानी काफी नहीं है, कभी कभी आग लगाना भी जरूरी होता है।


Lesson : विवाद और चर्चा का सही तड़का

अगर आपके बारे में कोई बात नहीं कर रहा है, तो समझ लीजिए कि आप बिजनेस की दुनिया में मर चुके हैं। फुल फ्रंटल पीआर का यह दूसरा और सबसे क्रांतिकारी लेसन है कि शांति से बैठना अच्छी बात है, पर केवल श्मशान में। मार्केट में तो आपको शोर मचाना ही पड़ेगा। रिचर्ड लार्मेर कहते हैं कि कभी-कभी थोडा सा विवाद खड़ा करना आपके ब्रांड के लिए वो काम कर देता है जो करोड़ों के विज्ञापन नहीं कर पाते।

इंडिया में हम सब जानते हैं कि जब तक पड़ोस वाली आंटी किसी बात पर गॉसिप न करें, तब तक वो बात वायरल नहीं होती। आपके बिजनेस के साथ भी यही है। अगर आप बहुत शरीफ बनकर कोने में बैठे रहेंगे, तो लोग आपको भूल जाएंगे। आपको कुछ ऐसा करना होगा जो लोगों को मजबूर कर दे कि वो कहें, अरे भाई! तुमने देखा उसने क्या किया?

इसका मतलब यह नहीं कि आप सड़क पर जाकर झगड़ा शुरू कर दें। इसका मतलब है कि आप किसी ऐसी बात पर स्टैंड लें जो थोड़ी अलग हो। मान लीजिए कि सब कह रहे हैं कि दूध पीना सेहत के लिए अच्छा है, और आप एक रिसर्च लेकर आते हैं जो कहती है कि रात को दूध पीना आपकी नींद खराब करता है। अब क्या होगा? जो लोग दूध पीते हैं वो आपसे लड़ेंगे, जो नहीं पीते वो आपको सपोर्ट करेंगे। लेकिन सबसे जरूरी बात? सब आपके बारे में बात करेंगे!

विवाद एक ऐसी आग है जिसे अगर आप सही से जलाएं, तो वो आपके ब्रांड की वैल्यू बढ़ा देती है। हमारे यहाँ के कुछ बड़े स्टार्टअप्स यही तो करते हैं। कभी किसी बड़े ब्रांड को सोशल मीडिया पर रोस्ट कर देते हैं, तो कभी कोई ऐसी अजीब सी कैंपेन चलाते हैं जो न्यूज चैनल्स की हेडलाइन बन जाती है। लोग जब तक आपके खिलाफ या आपके पक्ष में नहीं बोलेंगे, तब तक आप एक गुमनाम परछाईं के सिवा कुछ नहीं हैं।

जरा सोचिए, क्या आपको वो दोस्त याद है जो क्लास में सबसे चुपचाप बैठता था? शायद नहीं। लेकिन वो लड़का जरूर याद होगा जो हमेशा टीचर से बहस करता था या कुछ न कुछ शरारत करता था। पब्लिसिटी का खेल भी ऐसा ही है। आपको अपनी इंडस्ट्री का वो शरारती बच्चा बनना पड़ेगा जो बोरियत को खत्म कर दे। जब आप थोडा रिस्क लेते हैं और कुछ ऐसा बोलते हैं जो लीक से हटकर हो, तब जाकर असली पीआर शुरू होता है।

लेकिन याद रहे, विवाद का मकसद सिर्फ शोर मचाना नहीं, बल्कि लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचकर उन्हें अपने असली काम के बारे में बताना है। जैसे ही लोग मुड़कर देखें, उन्हें अपनी बेहतरीन सर्विस या प्रोडक्ट दिखा दीजिए। अगर आप सिर्फ विवाद करेंगे और पीछे माल बेकार होगा, तो लोग आपको ट्रोल करके निकल जाएंगे। इसलिए तड़का उतना ही लगाएं जितना दाल में अच्छा लगे।

अगले और आखिरी लेसन में हम बात करेंगे कि कैसे बड़े मीडिया हाउस और इन्फ्लुएंसर्स को अपना दोस्त बनाकर आप इस गेम को हमेशा के लिए जीत सकते हैं।


Lesson : मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स से पक्की दोस्ती

क्या आपको लगता है कि एक बड़ा सा प्रेस रिलीज लिखकर किसी पत्रकार को भेज देने से आपका नाम कल के अखबार की हेडलाइन बन जाएगा? अगर आप ऐसा सोचते हैं, तो आप शायद उसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ लोग अभी भी चिट्ठियां लिखते हैं। फुल फ्रंटल पीआर का यह आखिरी और सबसे कीमती लेसन है कि पीआर का असली मतलब पब्लिक रिलेशन नहीं, बल्कि पर्सनल रिलेशन है।

सोचिए, आपके पास दिन भर में सैकड़ों कॉल्स आते हैं जो आपको इंश्योरेंस या लोन बेचने की कोशिश करते हैं। आप क्या करते हैं? तुरंत काट देते हैं। लेकिन अगर वही कॉल आपके किसी पुराने दोस्त का हो, तो आप चाहे कितने भी बिजी हों, दो मिनट बात जरूर करते हैं। मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स के साथ भी यही खेल है। रिचर्ड लार्मेर कहते हैं कि उन्हें अपना हथियार मत समझिये, उन्हें अपना दोस्त बनाइये।

इंडिया में तो वैसे भी हम रिश्तों पर चलते हैं। अगर आप किसी पत्रकार को सिर्फ तब याद करते हैं जब आपको अपनी फोटो छपवानी हो, तो वो आपको घास भी नहीं डालेगा। आपको उनके काम में उनकी मदद करनी होगी। उन्हें ऐसी खबरें और जानकारी दीजिये जो उनके रीडर्स के काम की हों। जब आप उन्हें वैल्यू देंगे, तो वो खुद आपकी तलाश करेंगे। यह वैसा ही है जैसे आप मोहल्ले की उस चाची को सबसे पहले समोसे खिलाते हैं जो पूरे मोहल्ले में खबरें फैलाती हैं। अगर चाची खुश, तो आपकी वाह-वाही पक्की!

आजकल के जमाने में तो इन्फ्लुएंसर्स ही नए जमाने के राजा हैं। लेकिन उन्हें बस पैसा फेंक कर अपनी तारीफ करवाना पीआर नहीं, बल्कि एक सस्ता सौदा है। असली पीआर तब होता है जब कोई इन्फ्लुएंसर दिल से आपके प्रोडक्ट के बारे में बात करे क्योंकि आपने उसके साथ एक अच्छा रिश्ता बनाया है। आपको उनके कंटेंट को समझना होगा, उन्हें एप्रिशिएट करना होगा।

जब आप लोगों की मदद करना शुरू करते हैं बिना किसी स्वार्थ के, तो कुदरत का नियम है कि वो मदद आपके पास लौटकर जरूर आती है। बिजनेस में भी यही नियम लागू होता है। अपने नेटवर्क को इतना मजबूत कर लीजिये कि जब आप अपना नया प्रोडक्ट लॉन्च करें, तो आपको चिल्लाना न पड़े, बल्कि दूसरे लोग आपके लिए शोर मचाएं।

याद रखिये, पीआर एक मैराथन है, कोई १०० मीटर की दौड़ नहीं। इसमें धीरज चाहिए और इंसानों की समझ। अगर आप लोगों के दिलों में जगह बना लेते हैं, तो मार्केट में जगह अपने आप बन जाती है।


तो दोस्तों, फुल फ्रंटल पीआर हमें यही सिखाती है कि बिजनेस सिर्फ सामान बेचने का नाम नहीं है, बल्कि लोगों का ध्यान खींचने और उसे बनाए रखने की कला है। चाहे वो आपकी तड़केदार कहानी हो, थोडा सा विवाद हो या फिर मीडिया के साथ गहरे रिश्ते—ये सब मिलकर आपको एक गुमनाम भीड़ से बाहर निकालकर एक चमकता हुआ सितारा बना सकते हैं।

अब आपकी बारी है! क्या आप भी अपने बिजनेस के लिए कोई ऐसी कहानी बना रहे हैं जो लोगों की जुबान पर चढ़ जाए? या फिर अभी भी वही पुराने बोरिंग विज्ञापन के भरोसे बैठे हैं? नीचे कमेंट्स में हमें बताएं कि आप अपने ब्रांड को वायरल करने के लिए कौन सा तरीका अपनाने वाले हैं। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपना नया स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं ताकि वो भी पीआर के ये जादुई फंडे सीख सकें!

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