क्या आप भी उन सेल्समैन में से हैं जो कस्टमर को देखते ही सेल्स पिच उगलने लगते हैं। बधाई हो। आपके कॉम्पिटिटर्स आपकी इसी बेवकूफी पर हंस रहे हैं और आपकी डील्स चुरा रहे हैं। केविन डेविस की यह बुक बताएगी कि आप कस्टमर के दिमाग के बाहर ही क्यों खड़े हैं।
कस्टमर के दिमाग में घुसने और सेल्स की गेम पलटने के लिए यह रहे वो ३ बड़े लेसन्स जो आपकी किस्मत बदल सकते हैं।
Lesson : कस्टमर का दिमाग पढ़ना सीखो वरना झोला उठाओ और घर जाओ
क्या आपको लगता है कि कस्टमर सिर्फ सामान खरीदने के लिए दुकान पर आता है। अगर हां, तो आप अभी भी सेल्स की दुनिया के नर्सरी क्लास में हैं। केविन डेविस कहते हैं कि बेचने वाला सिर्फ एक वेंडर नहीं होता, उसे कस्टमर के दिमाग के अंदर चल रहे ८ अलग रोल्स को समझना पड़ता है। असल में सेल्स एक प्रोसेस है, कोई जादू नहीं। इमेजिन करिए कि आप एक लड़के को जिम की मेंबरशिप बेच रहे हैं। वह वहां सिर्फ लोहे के डंबल उठाने नहीं आया है। उसके दिमाग में एक रोल चल रहा है 'खुद को बेहतर दिखाने वाला'। अगर आप उसे सिर्फ मशीन की क्वालिटी गिनाएंगे, तो वह बोर हो जाएगा। लेकिन अगर आप उसे बताएंगे कि ६ महीने बाद उसकी टी-शर्ट की फिटिंग कैसी होगी, तो आप उसके असली रोल को हिट कर रहे हैं।
ज्यादातर सेल्समैन की सबसे बड़ी गलती यही है कि वे सिर्फ 'प्रोडक्ट पुशर' बनकर रह जाते हैं। वे कस्टमर के पास जाते हैं और अपना रटा-रटाया ज्ञान ऐसे उगलते हैं जैसे कोई टूटा हुआ टेप रिकॉर्डर हो। कस्टमर सोच रहा है कि उसे अपनी कंपनी का खर्चा कम करना है और आप उसे बता रहे हैं कि आपके सॉफ्टवेयर का रंग कितना सुंदर है। क्या मजाक है। केविन डेविस हमें सिखाते हैं कि सेल्स में सबसे पहले 'डिटेक्टिव' बनना पड़ता है। आपको यह पता लगाना होता है कि कस्टमर इस वक्त किस रोल में है। क्या वह एक 'एनालिस्ट' है जो नंबर्स देख रहा है। या वह एक 'यूजर' है जिसे सिर्फ काम आसान करना है।
जब तक आप कस्टमर के सिर के अंदर नहीं घुसेंगे, आप उसे वो चीज नहीं बेच पाएंगे जो उसे चाहिए। आप बस वो बेचते रहेंगे जो आपके पास है। और यकीन मानिए, दुनिया को आपकी बेकार की बातों में कोई इंटरेस्ट नहीं है। हमारे प्यारे कॉम्पिटिटर्स इसीलिए खुश हैं क्योंकि वे जानते हैं कि आप अभी भी पुराने तरीके से चिल्ला-चिल्लाकर सामान बेच रहे हैं। वे शांति से कस्टमर के पेन पॉइंट्स यानी उसकी तकलीफों को समझते हैं और फिर अपना सोल्यूशन ऐसे पेश करते हैं जैसे वो कोई मसीहा हों।
सेल्स में जीत उसकी नहीं होती जो सबसे ज्यादा बोलता है, बल्कि उसकी होती है जो सबसे सही सवाल पूछता है। अगर आप सवाल नहीं पूछ रहे हैं, तो आप सिर्फ अंधेरे में तीर चला रहे हैं। और सेल्स में अंधेरे में चलाया गया तीर अक्सर आपके अपने पैर पर ही लगता है। इसलिए, कस्टमर के उन ८ सीक्रेट रोल्स को पहचानिए। देखिए कि वह कब डर रहा है, कब वह एक्साइटेड है और कब वह कन्फ्यूज्ड है। जब आप उसके दिमाग के साथ सिंक हो जाते हैं, तब सेल्स अपने आप होने लगती है। आपको धक्का लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
Lesson : डॉक्टर बनो वरना पेशेंट यानी कस्टमर भाग जाएगा
क्या आपने कभी किसी ऐसे डॉक्टर को देखा है जो आपके क्लिनिक में घुसते ही बिना आपकी बीमारी पूछे सीधा इंजेक्शन लेकर दौड़ पड़े। आप वहां से अपनी जान बचाकर भागेंगे ही। ठीक यही हाल उस सेल्समैन का होता है जो कस्टमर की 'प्रॉब्लम' समझे बिना अपना 'प्रोडक्ट' उसके गले में उतारने की कोशिश करता है। केविन डेविस कहते हैं कि एक प्रोफेशनल सेल्समैन और एक नौसिखिए में यही फर्क है। प्रोफेशनल इंसान पहले मर्ज पकड़ता है और फिर दवा देता है।
इमेजिन करिए कि आप एक सॉफ्टवेयर बेचने गए हैं। आप वहां जाकर अपनी कंपनी के हेडक्वार्टर की फोटो दिखा रहे हैं और बता रहे हैं कि आपका सर्वर मंगल ग्रह से भी तेज चलता है। वहीं कस्टमर बेचारा परेशान है क्योंकि उसका पिछला सॉफ्टवेयर हर सोमवार को क्रैश हो जाता था। उसे आपकी स्पीड से ज्यादा 'भरोसे' की जरूरत है। अगर आप उसे यह नहीं बता पाए कि आपका सिस्टम कभी धोखा नहीं देगा, तो आप उसे दुनिया का सबसे तेज सॉफ्टवेयर भी मुफ्त में देंगे तो भी वह नहीं लेगा। सार्काज्म तो देखिए, हम सेल्स वाले अक्सर अपनी ही दुनिया में इतने खोए रहते हैं कि भूल जाते हैं कि सामने वाला इंसान है, कोई एटीएम मशीन नहीं।
केविन डेविस का यह लेसन हमें सिखाता है कि कस्टमर के 'अनकहे डर' को कैसे पहचानें। सेल्स की भाषा में इसे 'पेन पॉइंट्स' कहते हैं। मान लीजिए आप एक नई कार बेच रहे हैं। एक फैमिली आती है। पापा को माइलेज चाहिए, मम्मी को कंफर्ट चाहिए और बच्चों को सनरूफ। अगर आप सिर्फ इंजन की हॉर्सपावर झाड़ रहे हैं, तो आप अपनी ही कब्र खोद रहे हैं। आपको 'फैमिली मैन' वाले रोल में घुसना होगा। आपको बताना होगा कि कैसे यह कार उनके संडे ट्रिप को यादगार बना देगी।
जब आप सवाल पूछते हैं, तो आप कस्टमर को यह महसूस कराते हैं कि आप उसकी फिक्र कर रहे हैं। लेकिन याद रहे, सवाल पूछना एक कला है, पुलिस की पूछताछ नहीं। 'आपकी कंपनी का टर्नओवर क्या है' बोलने के बजाय 'आप आने वाले साल में अपनी टीम को कहां देखना चाहते हैं' पूछना ज्यादा असरदार होता है। जब आप सलूशन देने वाले मोड में आते हैं, तो कस्टमर आपको अपना दुश्मन या 'जेब काटने वाला' नहीं समझता। वह आपको एक 'सलाहकार' मानने लगता है।
कॉम्पिटिटर्स अक्सर यही गलती करते हैं कि वे अपनी 'फीचर लिस्ट' को ही सब कुछ मान लेते हैं। वे सोचते हैं कि अगर उनके पास १० एक्स्ट्रा बटन हैं, तो वे जीत जाएंगे। लेकिन सच तो यह है कि कस्टमर को बटन नहीं चाहिए, उसे अपना काम आसान करना है। अगर आप उसे यह यकीन दिला दें कि आपके साथ जुड़कर उसकी जिंदगी की एक बड़ी सिरदर्दी खत्म हो जाएगी, तो वह आपसे सामान जरूर खरीदेगा। सेल्स का असली मजा तब है जब कस्टमर खुद कहे कि 'भाई, तू ही मेरा मसीहा है'। इसलिए, सेल्समैन की टोपी उतारिए और एक अच्छे 'डॉक्टर' का एप्रन पहन लीजिए।
Lesson : डिस्काउंट का कटोरा छोड़ो और वैल्यू का राजा बनो
क्या आप भी उन सेल्समैन में से हैं जो कस्टमर के एक बार 'महंगा है' बोलते ही डिस्काउंट का झोला खोलकर बैठ जाते हैं। अगर हां, तो मुबारक हो, आप सेल्स नहीं कर रहे, आप अपनी इज्जत की नीलामी कर रहे हैं। केविन डेविस अपनी बुक में एक बहुत कड़वी बात कहते हैं कि जब आपके पास वैल्यू दिखाने का दम नहीं होता, तभी आप कीमत कम करने का सहारा लेते हैं। असल में कस्टमर को सस्ता सामान नहीं चाहिए, उसे उस सामान की सही 'वैल्यू' चाहिए। इमेजिन करिए कि आप एक बहुत महंगा फोन खरीदने गए हैं। दुकानदार कहता है कि यह फोन २० परसेंट डिस्काउंट पर है पर इसकी वारंटी नहीं है। क्या आप लेंगे। बिल्कुल नहीं। वहीं अगर वो कहे कि यह महंगा है पर अगर यह टूट गया तो हम घर आकर नया दे जाएंगे, तो आप शायद एक्स्ट्रा पैसे भी दे दें।
यही वो सीक्रेट रोल है जिसे केविन डेविस 'वैल्यू क्रिएटर' कहते हैं। सेल्स की दुनिया का सबसे बड़ा मजाक यह है कि लोग सोचते हैं कि कम दाम में माल बेचना ही टैलेंट है। भाई, कम दाम में तो कोई भी बेच देगा, उसमें आपका क्या कमाल है। असली कलाकार वो है जो कस्टमर को यह यकीन दिला दे कि आपका प्रोडक्ट उसकी लाइफ की मुश्किलों को चुटकी में हल कर देगा और उसके लिए वो खुशी-खुशी प्रीमियम पैसे देगा। सोचिए, आपके कॉम्पिटिटर्स मार्केट में गला काट कॉम्पिटिशन कर रहे हैं, एक-दूसरे से १० रुपये कम में माल बेच रहे हैं। आप वहां बैठिए और कस्टमर को वो 'आफ्टर सेल्स सर्विस' या वो 'भरोसा' बेचिए जो कोई और नहीं दे पा रहा।
कस्टमर के दिमाग में एक और रोल चलता है जिसे हम 'रिस्क एवर्टर' कहते हैं, यानी वो जो रिस्क से डरता है। उसे डर है कि कहीं उसके पैसे डूब न जाएं। अगर आप सेल्स के दौरान उसके इस डर को खत्म कर देते हैं, तो कीमत का मुद्दा अपने आप खत्म हो जाता है। उदाहरण के तौर पर, मान लीजिए आप एक ऑफिस की कुर्सी बेच रहे हैं। एक सस्ता वेंडर कहता है कि यह ५००० की है। आप कहते हैं कि मेरी कुर्सी १०००० की है, लेकिन इसे बैठने से आपके एम्प्लॉई की कमर का दर्द खत्म हो जाएगा और उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी। अब मालिक के लिए वो ५००० की बचत बड़ी है या एम्प्लॉई का काम। जाहिर है काम।
सेल्समैन अपनी कंपनी के ब्रोशर को ही गीता-कुरान मान लेते हैं। ब्रोशर में लिखा है 'बेस्ट क्वालिटी', तो वे भी वही चिल्लाते हैं। अरे भाई, बेस्ट क्वालिटी तो सबकी है, खराब कौन बेच रहा है। आपको कस्टमर को यह दिखाना होगा कि आपका साथ उसके बिजनेस या लाइफ को कैसे नेक्स्ट लेवल पर ले जाएगा। जब आप ट्रांजैक्शन से ऊपर उठकर 'रिलेशनशिप' पर फोकस करते हैं, तब सेल्स एक बोझ नहीं बल्कि एक सेलिब्रेशन बन जाती है। याद रखिए, सेल्स क्लोज करना अंत नहीं है, बल्कि एक लंबे रिश्ते की शुरुआत है।
तो दोस्तों, क्या आप अभी भी पुराने घिसे-पिटे तरीके से सेल्स कर रहे हैं या अब कस्टमर के दिमाग के उन ८ सीक्रेट रोल्स को इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं। सेल्स कोई मजबूरी नहीं, एक माइंड गेम है। आज ही अपनी सेल्स पिच बदलिए और देखिए कैसे लोग आपके पीछे भागते हैं। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया और आप भी अपनी सेल्स की गेम बदलना चाहते हैं, तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हर वक्त डिस्काउंट मांगता रहता है। नीचे कमेंट में बताएं कि आपको सेल्स में सबसे ज्यादा डर किस बात का लगता है। चलिए, मिलकर सेल्स के असली खिलाड़ी बनते हैं।
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