क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो कॉम्पिटिशन के नाम से पसीने छोड़ देते हैं? अगर आप अब भी पुराने घिसे पिटे तरीकों से बिजनेस कर रहे हैं तो मुबारक हो, आप बहुत जल्द मार्केट से गायब होने वाले हैं। अपनी हार का तमाशा देखने के बजाय क्या आप नहीं चाहेंगे कि आपका कॉम्पिटिशन खुद पागल होकर हार मान ले?
आज के इस आर्टिकल में हम गाय कावासाकी की किताब हाउ टू ड्राइव योर कॉम्पिटिशन क्रेजी से ३ ऐसे सीक्रेट सबक सीखेंगे जो आपके बिजनेस को एक नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
Lesson : कस्टमर को केवल यूजर नहीं, बल्कि इवेंजेलिस्ट बनाओ
अगर आप आज भी यह सोच रहे हैं कि आपने एक प्रोडक्ट बेचा और आपका काम खत्म हो गया, तो भाई साहब, आप बिजनेस नहीं बल्कि केवल एक छोटी सी दुकान चला रहे हैं। गाय कावासाकी कहते हैं कि मार्केट में अपने कॉम्पिटिशन का जीना हराम करने का सबसे पहला और आसान तरीका यह है कि आप अपने कस्टमर को अपना चेला बना लें। नहीं, वैसा वाला चेला नहीं, बल्कि एक ऐसा भक्त जो सोते जागते बस आपके ब्रांड का नाम जपे। इसे टेक्निकल भाषा में इवेंजेलिज्म कहते हैं।
मान लीजिए आपने एक नया समोसे का स्टार्टअप शुरू किया। अब एक तो वो दुकानदार है जो समोसा देकर पैसे लेता है और बात खत्म। लेकिन आप? आप समोसे के साथ ऐसी चटनी और ऐसा एक्सपीरियंस देते हैं कि कस्टमर घर जाकर अपनी चाची, ताई और मोहल्ले के व्हाट्सएप ग्रुप में आपके समोसे के कसीदे पढ़ने लगता है। अब आपका कॉम्पिटिटर चाहे कितनी भी होर्डिंग लगा ले या डिस्काउंट दे दे, वो उस भरोसे को नहीं तोड़ पाएगा जो आपके उस इवेंजेलिस्ट कस्टमर ने बनाया है।
अक्सर लोग सेल्स और इवेंजेलिज्म के बीच का फर्क भूल जाते हैं। सेल्स का मतलब है अपना फायदा देखना, लेकिन इवेंजेलिज्म का मतलब है कस्टमर का फायदा देखना। जब आप कस्टमर को यह महसूस कराते हैं कि आप उनकी प्रॉब्लम सॉल्व कर रहे हैं, न कि उनकी जेब खाली कर रहे हैं, तब वो आपके लिए बिना पैसे लिए मार्केटिंग करना शुरू कर देते हैं।
सोचिए, एप्पल के दीवाने लोग रात भर लाइन में लगकर फोन क्यों खरीदते हैं? क्या उन्हें कोई और फोन नहीं मिल सकता? बिल्कुल मिल सकता है। पर वो एप्पल के इवेंजेलिस्ट बन चुके हैं। उनके लिए वो केवल एक फोन नहीं, बल्कि एक पहचान है। अगर आप अपने बिजनेस में यह जादू पैदा कर दें, तो यकीन मानिए आपका कॉम्पिटिशन खुद अपने बाल नोचने लगेगा। वो सोचेगा कि आखिर यह बंदा ऐसा क्या खिला रहा है कि लोग इसके पीछे पागल हैं?
कुछ लोग तो ऐसे भी होते हैं जो खराब प्रोडक्ट बनाकर भी उम्मीद करते हैं कि कस्टमर उनकी जय-जयकार करे। भाई, अगर आप जहर बेच रहे हैं तो लोग आपकी शव यात्रा निकालेंगे, ब्रांड इवेंजेलिस्ट नहीं बनेंगे। इसलिए पहले वैल्यू देना सीखिए, फिर दुनिया को अपना दीवाना बनाइए। जब आपके कस्टमर आपके ब्रांड के लिए लड़ने को तैयार हो जाएं, समझ लेना कि आपने आधी जंग तो वहीं जीत ली है। कॉम्पिटिशन को पागल करने का असली मजा तभी आता है जब आपके दुश्मन का कस्टमर भी चोरी-छुपे आपका प्रोडक्ट इस्तेमाल करने लगे।
Lesson : परिवर्तन का फायदा उठाना और रूल्स बदलना
अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो मार्केट में बदलाव आने पर छुपकर बैठ जाते हैं और पुराने जमाने की माला जपते रहते हैं, तो सच मानिए, आप अपने कॉम्पिटिशन के लिए सबसे आसान शिकार हैं। गाय कावासाकी कहते हैं कि मार्केट में जब भी कोई बड़ा बदलाव या हंगामा हो, तो घबराने के बजाय उस पर सवार हो जाइए। जो लोग स्टेटस को यानी पुरानी लकीर के फकीर बने रहते हैं, वो अक्सर इतिहास के पन्नों में ही दफन हो जाते हैं।
सोचिए, एक जमाना था जब लोग केवल दुकान पर जाकर राशन खरीदते थे। फिर आया इंटरनेट का दौर। कुछ स्मार्ट लोगों ने इसे देख लिया और ऑनलाइन डिलीवरी शुरू कर दी। पुराने दुकानदार चश्मा ठीक करते रह गए और सोचते रहे कि भाई, ये लड़का फोन पर समोसे कैसे बेच रहा है? देखते ही देखते वो पुराने धुरंधर मार्केट से गायब हो गए। इसे कहते हैं डिसरप्शन का फायदा उठाना। कॉम्पिटिशन को पागल करने का सबसे सही तरीका है कि आप वो काम करें जो वो करने की हिम्मत भी न कर सकें।
मार्केट में जब कोई नई टेक्नोलॉजी या नया ट्रेंड आए, तो उसे एक आफत नहीं बल्कि एक गिफ्ट समझें। मान लीजिए आपके पास एक टैक्सी सर्विस है और अचानक मार्केट में इलेक्ट्रिक गाड़ियां आ जाती हैं। अब आपके पास दो रास्ते हैं। या तो आप पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का रोना रोएं, या फिर सबसे पहले अपनी फ्लीट को इलेक्ट्रिक बनाकर अपने कॉम्पिटिशन को आइना दिखाएं। जब तक वो डीजल की बदबू में फंसे रहेंगे, आप साइलेंट और क्लीन एनर्जी के साथ मार्केट के राजा बन चुके होंगे।
कुछ लोग तो ऐसे होते हैं जो नोकिया की तरह जिद्दी होते हैं। उन्हें लगता है कि दुनिया बदल जाएगी पर उनका पुराना डब्बा हमेशा बिकेगा। भाई, अगर आप जमाने के साथ नहीं बदले, तो जमाना आपको पुराने कबाड़ की तरह किनारे कर देगा। कॉम्पिटिशन को डराने का असली मजा तब आता है जब आप खेल के नियम ही बदल दें। अगर वो प्राइस पर लड़ रहे हैं, तो आप एक्सपीरियंस पर लड़िए। अगर वो एडवर्टाइजमेंट पर पैसा फूंक रहे हैं, तो आप पर्सनल टच और कम्युनिटी पर फोकस कीजिए।
जब आप अचानक से कुछ ऐसा करते हैं जो किसी ने सोचा भी नहीं था, तो आपके कॉम्पिटिटर का दिमाग चकरा जाता है। वो अपनी पुरानी स्ट्रेटेजी की फाइलें लेकर बैठे रहते हैं और आप उनकी नाक के नीचे से उनके कस्टमर उड़ा ले जाते हैं। इसलिए, मार्केट में होने वाली हर हलचल पर अपनी नजर रखें और जैसे ही मौका मिले, उस बदलाव की लहर पर सर्फिंग शुरू कर दें। याद रखिए, समंदर की लहरें सबको भिगोती हैं, लेकिन जो उन पर खड़ा होना जानता है, वही असली चैंपियन कहलाता है।
Lesson : सबको साथ लेकर चलना और सिम्पलिसिटी का जादू
अगर आप सोचते हैं कि बिजनेस एक जंग है जहां आपको सबको कुचलकर आगे बढ़ना है, तो भाई साहब, आप शायद पुरानी बॉलीवुड फिल्मों के विलेन वाले दौर में जी रहे हैं। गाय कावासाकी का तीसरा सबसे बड़ा सीक्रेट यह है कि कॉम्पिटिशन को पागल करने का सबसे शातिर तरीका है "सबका साथ, अपना विकास"। नहीं, यह कोई पॉलिटिकल नारा नहीं है, बल्कि एक गहरी बिजनेस स्ट्रेटेजी है। जब आप अपने पार्टनर्स, वेंडर्स और यहां तक कि अपने कॉम्पिटिटर के दुखी कस्टमर्स को भी वैल्यू देने लगते हैं, तो आप एक ऐसा इकोसिस्टम बना लेते हैं जिसे तोड़ना नामुमकिन है।
आजकल के दौर में लोग चीजें इतनी मुश्किल बना देते हैं कि कस्टमर बेचारा प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले ही सर पकड़कर बैठ जाता है। अगर आपका कॉम्पिटिटर १० पन्नों का फॉर्म भरवा रहा है, तो आप बस एक क्लिक में काम खत्म कर दीजिए। अगर वो अपनी शर्तों के जाल में कस्टमर को फंसा रहा है, तो आप अपनी ईमानदारी और सिम्पलिसिटी से उनका दिल जीत लीजिए। जब आप चीजें आसान कर देते हैं, तो कॉम्पिटिशन खुद-ब-खुद अपनी पेचीदगियों के बोझ तले दबकर पागल हो जाता है। वो सोचता रह जाएगा कि "यार, मैं करोड़ों की एडवरटाइजिंग कर रहा हूं और यह बंदा बस सादगी से बाजी मार ले गया?"
कुछ लोग तो ऐसे होते हैं जो अपना ऐप या वेबसाइट ऐसे बनाते हैं जैसे कोई खजाना ढूंढने का नक्शा हो। कस्टमर बेचारा 'बाय नाउ' का बटन ढूंढते-ढूंढते बूढ़ा हो जाता है। भाई, अगर आप अपने कस्टमर को पहेलियां सुलझाने पर मजबूर करेंगे, तो वो आपके कॉम्पिटिटर के पास ही जाएगा। लेकिन अगर आप उसे राजा वाली फीलिंग देंगे और उसकी लाइफ आसान बनाएंगे, तो वो कहीं और जाने की सोचेगा भी नहीं। असली जीत तब होती है जब लोग कहें, "काम तो वो भी करते हैं, पर तुम्हारे साथ जुड़ने में जो सुकून है, वो कहीं और नहीं।"
अब वक्त आ गया है कि आप अपनी स्ट्रेटेजी बदलें। कॉम्पिटिशन से डरना बंद करें और खुद इतने शानदार बनें कि कॉम्पिटिशन आपसे डरने लगे। अपनी सर्विस में वो जान डालिए कि लोग आपकी मिसालें दें। याद रखिए, मार्केट में वही टिकता है जो शोर कम मचाता है और काम ज्यादा करता है। तो क्या आप तैयार हैं अपने कॉम्पिटिशन को अपनी कामयाबी से पागल करने के लिए? आज ही अपने बिजनेस का एक ऐसा पहलू चुनिए जिसे आप आज से ही सिंपल और बेहतर बना सकें।
गाय कावासाकी की यह बातें हमें सिखाती हैं कि बिजनेस केवल पैसों का खेल नहीं, बल्कि दिमाग और दिल का मेल है। अगर आप अपने कस्टमर को भगवान मानकर उनकी सेवा करेंगे और बदलते वक्त के साथ खुद को ढालेंगे, तो दुनिया की कोई ताकत आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।
अब आपकी बारी है! नीचे कमेंट में बताइए कि आपके बिजनेस या काम में आपका सबसे बड़ा कॉम्पिटिटर कौन है और आप इस आर्टिकल का कौन सा लेसन आज ही अप्लाई करने वाले हैं? इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो कॉम्पिटिशन से घबराए हुए हैं। याद रखिए, शेयर करने से नॉलेज बढ़ती है और कॉम्पिटिशन कम होता है!
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