How to Win Friends and Influence People (Hindi)


क्या आप आज भी अकेले कोने में बैठकर समोसे खा रहे हैं और सोच रहे हैं कि लोग आपसे बात क्यों नहीं करते? शायद आपकी पर्सनालिटी ही इतनी बोरिंग है कि लोग आपको इग्नोर करना बेहतर समझते हैं। अगर आप दुनिया के सबसे बड़े लूजर नहीं बनना चाहते, तो डेल कारनेगी के ये जादुई तरीके सीख लीजिए।

आज हम इस क्लासिक किताब से वो तीन कीमती सबक सीखेंगे जो आपकी सोशल लाइफ को पूरी तरह बदल देंगे।


Lesson : दूसरों में सच्ची दिलचस्पी लें

दोस्त बनाना और लोगों को इम्प्रेस करना कोई रॉकेट साइंस नहीं है, पर भाई साहब, हम इंडियन्स को लगता है कि बस स्वैग दिखाओ और काम हो गया। डेल कारनेगी अपनी इस क्लासिक किताब में सबसे पहला और सबसे धाकड़ सबक देते हैं: दूसरों में सच्ची दिलचस्पी लेना शुरू करो (Become Genuinely Interested In Other People)।

अब जरा इमेजिन करिए, आप एक पार्टी में गए हैं। वहां एक भाई साहब मिलते हैं जो बस अपनी नई गाड़ी, अपने प्रमोशन और अपनी ट्रिप की बातें किए जा रहे हैं। आपको कैसा लगेगा? मन करेगा न कि भाई बस कर, अब चुप हो जा! असल में हम सब की यही प्रॉब्लम है। हम चाहते हैं कि लोग हमें पसंद करें, लेकिन हम सारा वक्त बस मैं, मैंने, मेरा करने में बिता देते हैं। कारनेगी कहते हैं कि आप दो साल तक लोगों को अपनी तरफ अट्रैक्ट करने की कोशिश करके जितने दोस्त नहीं बना सकते, उससे कहीं ज्यादा दोस्त आप सिर्फ दो महीने में बना सकते हैं अगर आप उनमें इंटरेस्ट लेना शुरू कर दें।

चलिए एक रियल लाइफ एग्जांपल लेते हैं। मान लीजिए आपका एक पड़ोसी है जो हर वक्त अपनी पुरानी टूटी हुई साइकिल को साफ करता रहता है। आप पास से निकलते हैं और सोचते हैं, क्या पागल आदमी है, कचरे को चमका रहा है। लेकिन अगर आप रुककर उनसे पूछें, अंकल, यह साइकिल तो एकदम विंटेज लग रही है, आपने इसे इतना मेंटेन कैसे किया? बस, फिर देखिए जादू। अंकल अगले आधे घंटे तक आपको अपनी जवानी के किस्से सुनाएंगे और उनके लिए आप दुनिया के सबसे समझदार इंसान बन जाएंगे। क्यों? क्योंकि आपने उनके पैशन में इंटरेस्ट लिया।

हम अक्सर सोचते हैं कि कूल दिखने के लिए हमें बहुत बोलना पड़ेगा, लेकिन सच तो यह है कि एक अच्छा लिसनर (Listener) होना ही सबसे बड़ी कूलनेस है। लोग अपने बारे में बात करना पसंद करते हैं। अगर आप उनसे उनके काम, उनकी पसंद या उनके स्ट्रगल के बारे में पूछेंगे, तो उन्हें लगेगा कि आप उन्हें वैल्यू दे रहे हैं। और भाई, वैल्यू किसे पसंद नहीं?

लेकिन ध्यान रहे, यह इंटरेस्ट सच्चा होना चाहिए। ऐसा नहीं कि आप मुंह पर तारीफ कर रहे हैं और मन में सोच रहे हैं कि कब यह चुप हो और मैं भागूं। फेक स्माइल और फेक इंटरेस्ट पकड़ा जाता है, और फिर आप इम्प्रेसिव नहीं, बल्कि चिपकू और चापलूस लगने लगते हैं।

तो अगली बार जब किसी से मिलें, तो अपनी रामकथा सुनाने से पहले उनके बारे में दो सवाल पूछिए। उनकी आंखों में देखिए और सुनिए कि वो क्या कह रहे हैं। जब आप सामने वाले को स्पेशल फील कराते हैं, तो वो खुद-ब-खुद आपका मुरीद हो जाता है। यह दोस्ती का वो सीक्रेट सॉस है जिसके बिना आपकी पर्सनालिटी की खिचड़ी हमेशा फीकी ही रहेगी।


Lesson : कभी किसी की आलोचना या निंदा न करें

अब बात करते हैं उस सबसे बड़ी गलती की जो हम इंडियन्स अक्सर जोश-जोश में कर बैठते हैं: किसी की बुराई या आलोचना करना (Don't Criticize, Condemn, or Complain)। डेल कारनेगी साफ कहते हैं कि अगर आप शहद इकट्ठा करना चाहते हैं, तो मधुमक्खी के छत्ते पर लात मत मारिए। लेकिन हमारा क्या है? हम तो पैदाइशी जज हैं। ऑफिस का कलीग हो या मोहल्ले का शर्मा जी का लड़का, हमें सबकी कमियां निकालने में जो मजा आता है, वह शायद ही कहीं और मिले।

पर भाई साहब, सच तो यह है कि आलोचना (Criticism) एक ऐसा खतरनाक हथियार है जो सामने वाले के ईगो को चोट पहुंचाता है। जब आप किसी को बताते हैं कि वह गलत है, तो वह सुधरता नहीं है, बल्कि अपना बचाव करने के लिए सौ बहाने ढूंढने लगता है। कारनेगी एक बहुत बड़ा सच बताते हैं कि इंसान लॉजिकल नहीं, बल्कि इमोशनल होता है। हम सब अपनी नजर में हीरो हैं। तो जब कोई विलेन बनकर हमें टोकता है, तो हमारा खून खौलने लगता है।

एक मजेदार एग्जांपल देखिए। मान लीजिए आपकी शादी हुई है और आपकी वाइफ ने पहली बार पनीर की सब्जी बनाई है। अब पनीर थोड़ा रबर जैसा हो गया है और नमक इतना कि बीपी बढ़ जाए। अब आपके पास दो रास्ते हैं। पहला, आप कहें, भाग्यवान, क्या यह पनीर है या चप्पल का टुकड़ा? नमक डाला है या पूरा समुद्र उड़ेल दिया है? यकीन मानिए, अगले सात जन्मों तक आपको सिर्फ टिंडे की सब्जी ही नसीब होगी। और वह आपसे नफरत करने लगेंगी सो अलग।

दूसरा रास्ता कारनेगी वाला है। आप एक बाइट लें और कहें, अरे वाह! पनीर का मसाला तो एकदम लाजवाब है, बिलकुल ढाबे वाला स्वाद आ रहा है। बस नमक थोड़ा सा ज्यादा हो गया है, अगली बार इसे कम कर दोगी तो यह डिश एकदम फाइव स्टार लेवल की हो जाएगी। अब देखिए कमाल! वाइफ को बुरा भी नहीं लगेगा, उन्हें अपनी गलती का अहसास भी होगा और वो अगली बार और मेहनत करेंगी। इसे कहते हैं स्मार्टली अपनी बात मनवाना बिना किसी का दिल दुखाए।

आलोचना करना बहुत आसान है, कोई भी बेवकूफ कर सकता है। लेकिन समझदार वही है जो सामने वाले को समझने की कोशिश करे और उसे माफ कर सके। लोग बुरे नहीं होते, बस उनके हालात और नजरिया अलग होता है। अगर आप किसी को बदलना चाहते हैं, तो पहले खुद को बदलिए। दूसरों की कमियां निकालने के बजाय उनकी खूबियों को ढूंढिए।

जब आप किसी की तारीफ करते हैं, तो आप उनके दिल में एक जगह बना लेते हैं। लेकिन अगर आप हमेशा शिकायत करते रहेंगे, तो लोग आपको देखते ही रास्ता बदल लेंगे। तो याद रखिए, अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी इज्जत करें और आपकी बात सुनें, तो आज ही से अपनी जीभ पर लगाम लगाइए और दूसरों को नीचा दिखाना बंद कीजिए। दुनिया में नफरत फैलाने वाले बहुत हैं, आप प्यार और समझदारी बांटने वाले बनिए।


Lesson : सामने वाले के नजरिए से बात करें

अब आते हैं उस आखिरी और सबसे तगड़े ब्रह्मास्त्र पर जिसे डेल कारनेगी कहते हैं: सामने वाले के नजरिए से बात करना (Arouse In The Other Person An Eager Want)। हम इंडियन्स की एक बड़ी बीमारी है - हम हमेशा अपनी जरूरतों का ढिंढोरा पीटते रहते हैं। "भाई मुझे नौकरी चाहिए", "मुझे प्रमोशन चाहिए", "मुझे डिस्काउंट चाहिए"। लेकिन भाई साहब, दुनिया को इस बात से रत्ती भर फर्क नहीं पड़ता कि आपको क्या चाहिए। हर कोई बस अपने फायदे की सोच रहा है।

अगर आप किसी से अपना काम निकलवाना चाहते हैं, तो आपको यह सोचना होगा कि इसमें उनका क्या फायदा है। कारनेगी एक बहुत ही फनी और सिंपल सा उदाहरण देते हैं। वो कहते हैं कि उन्हें स्ट्रॉबेरी और क्रीम बहुत पसंद है, लेकिन जब वो मछली पकड़ने जाते हैं, तो कांटे में स्ट्रॉबेरी नहीं लगाते। क्यों? क्योंकि मछली को कीड़े पसंद हैं, स्ट्रॉबेरी नहीं। तो अगर आप मछली पकड़ना चाहते हैं, तो आपको वही खिलाना पड़ेगा जो उसे पसंद है, न कि वो जो आपको पसंद है।

चलिए इसे एक रियल लाइफ ऑफिस वाले एग्जांपल से समझते हैं। मान लीजिए आपको अपने बॉस से छुट्टी चाहिए क्योंकि आपके साले की शादी है। अब आप जाकर रोने लगें कि "सर, साले की शादी है, जाना बहुत जरूरी है, प्लीज छुट्टी दे दो", तो बॉस शायद ही पिघले। वो सोचेगा कि मेरा प्रोजेक्ट कौन पूरा करेगा?

लेकिन अगर आप कारनेगी स्टाइल में बात करें: "सर, मैं चाहता हूं कि अगले हफ्ते जो क्लाइंट मीटिंग है, उसके लिए मैं सारा डेटा अभी तैयार कर दूं ताकि मेरे बिना भी टीम को कोई दिक्कत न हो। अगर मैं वीकेंड पर एक्स्ट्रा काम करके यह खत्म कर लूं, तो क्या मैं मंडे और ट्यूसडे को ऑफ ले सकता हूं? इससे प्रोजेक्ट की डेडलाइन भी मिस नहीं होगी और मैं अपनी फैमिली कमिटमेंट भी पूरी कर पाऊंगा।" अब देखिए, बॉस को क्या दिख रहा है? उसे दिख रहा है कि काम समय पर खत्म हो रहा है। उसे आपकी छुट्टी से कोई प्रॉब्लम नहीं होगी क्योंकि आपने उसके फायदे की बात की है।

दुनिया में सिर्फ एक ही तरीका है किसी से कुछ करवाने का, और वो है सामने वाले के मन में उस काम को करने की इच्छा जगा देना। जब आप किसी को यह महसूस कराते हैं कि यह काम करने से उनका ईगो बढ़ेगा, उनका पैसा बचेगा या उनकी लाइफ आसान होगी, तो वो खुशी-खुशी आपका काम कर देंगे।

हम अक्सर बहस करते हैं, चिल्लाते हैं और अपनी बात थोपने की कोशिश करते हैं। लेकिन कारनेगी सिखाते हैं कि बहस जीतना असल में हारना ही है, क्योंकि आपने सामने वाले का दिल दुखा दिया है। अपनी बात मनवाने का सबसे स्मार्ट तरीका है - नम्रता और सामने वाले की पसंद का ध्यान रखना। अगर आप किसी को अपना दोस्त बनाना चाहते हैं या उनसे अपना काम करवाना चाहते हैं, तो अपनी स्ट्रॉबेरी अपनी जेब में रखिए और उन्हें वो कीड़ा (उनका फायदा) दीजिए जिसकी उन्हें तलाश है।


तो दोस्तों, डेल कारनेगी की यह बातें आज भी उतनी ही सच हैं जितनी अस्सी साल पहले थीं। लोगों का दिल जीतना कोई जादू टोना नहीं है, बस थोड़ा सा इमोशनल इंटेलिजेंस और दूसरों की इज्जत करना है। अगर आप आज से ही इन तीन सबकों को अपनी लाइफ में उतार लें, तो यकीन मानिए, आप न सिर्फ एक बेहतर इंसान बनेंगे, बल्कि लोग आपकी मौजूदगी के लिए तरसेंगे।

अब मुझे कमेंट्स में यह बताइए कि इनमें से कौन सा लेसन आपको सबसे ज्यादा जरूरी लगा? क्या आप भी अपनी बातों से लोगों को इम्प्रेस करना चाहते हैं या अभी भी वही पुराने "मैं, मेरा" वाले जोन में अटके हैं? इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ जरूर शेयर करें जिसे बात करने की तमीज थोड़ी कम है!

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