The Official Guide to Success (Hindi)


क्या आप भी अपनी बोरिंग लाइफ में सक्सेस का वेट करते करते बूढ़े होने का प्लान बना चुके हैं? अगर हाँ तो मुबारक हो आप फेलियर की रेस में सबसे आगे हैं। टॉम हॉपकिन्स की ये बातें नहीं जानी तो बस किस्मत को कोसते रहिये।

आज हम इस शानदार किताब के उन 3 सीक्रेट लेसन्स को समझेंगे जो आपकी लाइफ का गियर बदल देंगे।


Lesson : फियर यानी डर को अपना पर्सनल बॉडीगार्ड बनाइये

अगर आपको लगता है कि दुनिया के सबसे सक्सेसफुल लोग कभी डरते नहीं हैं तो भाई आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। सच तो ये है कि डर सबको लगता है गला सबका सूखता है। फर्क बस इतना है कि आम इंसान डर के आगे घुटने टेक देता है और टॉम हॉपकिन्स जैसा विनर उस डर को अपना फ्यूल बना लेता है।

हम में से ज्यादातर लोग नए काम शुरू करने से इसलिए डरते हैं क्योंकि हमें लगता है कि लोग क्या कहेंगे। मान लीजिये आपने एक नया बिजनेस शुरू करने का सोचा। अब आपके दिमाग में सबसे पहला ख्याल क्या आता है? यही न कि अगर पैसा डूब गया तो पड़ोस वाले शर्मा जी और वो चिढ़ाने वाले रिश्तेदार क्या सोचेंगे? इसी डर की वजह से आप अपनी पुरानी घिसी पिटी लाइफ में ही खुश रहने का नाटक करते रहते हैं। ये बिलकुल वैसा ही है जैसे आप एक डरावनी मूवी देख रहे हों और डर के मारे अपनी आँखें बंद कर लें। आँखें बंद करने से भूत गायब नहीं होता बस आपको दिखाई नहीं देता।

सक्सेस का सबसे बड़ा दुश्मन फेलियर नहीं बल्कि वो डर है जो आपको एक्शन लेने से रोकता है। टॉम हॉपकिन्स कहते हैं कि फियर असल में एक इंडिकेटर है। ये आपको बताता है कि आप अपनी कंफर्ट जोन से बाहर निकल रहे हैं और ग्रो कर रहे हैं। अगर आपको किसी काम को करने में डर नहीं लग रहा तो समझ जाइये कि आप कुछ बड़ा नहीं कर रहे हैं।

इमेजिन कीजिये कि आपको एक स्टेज पर जाकर स्पीच देनी है। आपके पैर कांप रहे हैं और पसीना आ रहा है। अब यहाँ दो रास्ते हैं। या तो आप बहाना बनाकर भाग जाइये और जिंदगी भर के लिए एक डरपोक इंसान बन जाइये। या फिर उस डर को गले लगाइये और सोचिये कि ये एक्साइटमेंट है। जब आप उस स्टेज पर जाकर बोलना शुरू करते हैं तो पहले दो मिनट बाद वही डर गायब हो जाता है।

डर असल में एक ऐसा कुत्ता है जो सिर्फ तभी तक भौंकता है जब तक आप भागते हैं। जैसे ही आप पलट कर उसे घूरते हैं वो दुम दबाकर भाग जाता है। टॉम हॉपकिन्स की ये गाइड हमें सिखाती है कि सक्सेसफुल लोग कभी डर खत्म होने का इंतजार नहीं करते। वो डर के साथ ही मैदान में उतर जाते हैं। वो जानते हैं कि डर का मतलब ये नहीं है कि आप रुक जाएं। डर का मतलब है कि अब आपको और ज्यादा सावधान और फोकस्ड होकर आगे बढ़ना है।

अपनी लाइफ की गाड़ी का स्टियरिंग डर के हाथ में मत दीजिये। उसे पिछली सीट पर बिठाइये और कहिये कि भाई तू शोर मचा सकता है पर रास्ता मैं ही तय करूँगा। याद रखिये अगर आज आप अपने डर से नहीं जीते तो कल आप अपनी गरीबी और अपनी नाकामी के साथ समझौता करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। क्या आप सच में ऐसी लाइफ चाहते हैं? मुझे तो नहीं लगता।


Lesson : अपनी सेल्फ इमेज का मेकअप उतारिये और असली विनर बनिए

क्या आपने कभी आईने में खुद को देखकर ये सोचा है कि भाई तू तो लूजर है? अगर हाँ तो कांग्रेचुलेशन आपने खुद ही अपनी बर्बादी का कॉन्ट्रैक्ट साइन कर दिया है। टॉम हॉपकिन्स अपनी किताब में जोर देकर कहते हैं कि दुनिया आपको वैसा ही देखती है जैसा आप खुद को अंदर से महसूस करते हैं। अगर आप खुद को एक भिखारी की तरह ट्रीट करेंगे तो दुनिया आपको राजा वाला सम्मान कभी नहीं देगी।

इमेजिन कीजिये कि आप एक बहुत बड़े इंटरव्यू के लिए जा रहे हैं। आपने सबसे महंगे कपड़े पहने हैं और परफ्यूम भी लगाया है। लेकिन अंदर से आपके दिमाग में चल रहा है कि यार मैं तो इस जॉब के लायक ही नहीं हूँ। क्या होगा? आपकी बॉडी लैंग्वेज ही सब कुछ बता देगी। आप झुककर चलेंगे और आपकी आवाज में वो कॉन्फिडेंस गायब होगा। सामने वाला बंदा समझ जाएगा कि ये तो खुद अपनी काबिलियत पर शक कर रहा है।

हम अक्सर दूसरों की बातों को पत्थर की लकीर मान लेते हैं। अगर बचपन में किसी ने कह दिया कि तुम्हारी मैथ कमजोर है तो आपने उसे सच मान लिया। अगर किसी ने कह दिया कि आप कभी अमीर नहीं बन सकते तो आपने उसे अपनी किस्मत मान लिया। टॉम हॉपकिन्स कहते हैं कि ये सब बकवास है। आपकी सेल्फ इमेज एक पुराने कंप्यूटर की तरह है जिसे अपडेट करने की सख्त जरूरत है।

मान लीजिये आप अपनी क्रश से बात करने जा रहे हैं। अगर आपके मन में ये चल रहा है कि वो मुझे रिजेक्ट कर देगी तो आपके चेहरे पर ही वो डर दिख जाएगा। आप हकलाने लगेंगे और अजीब हरकतें करेंगे। लेकिन अगर आप इस माइंडसेट से जाएं कि आप खुद एक प्राइस हैं और सामने वाले को आपको खोने का डर होना चाहिए तो आपका जादू ही कुछ और होगा। सक्सेस का यही तो फंडा है।

सक्सेसफुल लोग सुबह उठकर खुद को ये नहीं कहते कि आज का दिन कितना बुरा है। वो खुद को बताते हैं कि वो कितने पावरफुल और कैपेबल हैं। इसे आप एरोगेंस यानी घमंड कह सकते हैं पर असल में ये सेल्फ रेस्पेक्ट है। जब तक आप अपनी वैल्यू खुद नहीं करेंगे तब तक शर्मा जी का लड़का आपसे आगे ही निकलता रहेगा।

अपनी पुरानी और टूटी फूटी सेल्फ इमेज को कचरे के डिब्बे में डाल दीजिये। आज से खुद को एक विनर की तरह देखना शुरू कीजिये। जब आप अंदर से महसूस करेंगे कि आप एक चैंपियन हैं तो आपके काम करने का तरीका भी बदल जाएगा। आप ज्यादा मेहनत करेंगे और छोटी छोटी मुश्किलों से घबराना छोड़ देंगे। याद रखिये कि दुनिया के सबसे बड़े लीडर्स में एक बात कॉमन थी और वो थी खुद पर अटूट भरोसा।

अगर आप खुद को एक घटिया इंसान मानकर जियेंगे तो आपकी जिंदगी भी घटिया ही रहेगी। टॉम हॉपकिन्स की ये गाइड हमें आइना दिखाती है कि असली बदलाव बाहर से नहीं बल्कि अंदर से आता है। अपनी सेल्फ इमेज को इतना स्ट्रॉन्ग बनाइये कि कोई भी नेगेटिव कमेंट आपकी दीवार को हिला न सके। क्या आप आज से खुद को एक विनर मानने के लिए तैयार हैं?


Lesson : कंसिस्टेंट डिसिप्लिन यानी खुद का बॉस खुद बनिए

अगर आपको लगता है कि मोटिवेशनल वीडियो देख लेने से या एक दिन जोश में आकर 18 घंटे काम करने से आप अरबपति बन जाएंगे, तो भाई आप किसी और ही दुनिया में जी रहे हैं। टॉम हॉपकिन्स अपनी किताब में बड़े प्यार से समझाते हैं कि मोटिवेशन तो सिर्फ उस माचिस की तीली की तरह है जो आग लगाती है, लेकिन उस आग को जलाए रखने का काम सिर्फ डिसिप्लिन यानी अनुशासन ही करता है।

हम में से ज्यादातर लोगों की प्रॉब्लम क्या है? हम एक दिन जिम जाते हैं और अगले दिन आईने में अपनी एब्स ढूंढने लगते हैं। जब कुछ नहीं दिखता तो हम पिज्जा ऑर्डर कर लेते हैं और कहते हैं कि ये सब बेकार है। ये बिलकुल वैसा ही है जैसे आप एक पौधा लगाएं और हर पांच मिनट में उसे जमीन से उखाड़कर देखें कि जड़ें कितनी बढ़ी हैं। ऐसे में तो पौधा भी मर जाएगा और आपकी मेहनत भी पानी में चली जाएगी।

असली सक्सेस उन छोटे छोटे कामों को बार-बार करने से मिलती है जिन्हें करने का आपका बिलकुल मन नहीं होता। इमेजिन कीजिये कि आपको एक ब्लॉग शुरू करना है। पहले दिन आप बहुत एक्साइटेड हैं, आपने लोगो बनाया, थीम सेट की। लेकिन दस दिन बाद जब व्यूज नहीं आते, तो आपका मोटिवेशन फुस्स हो जाता है। अब यहाँ पर एक आम इंसान हार मान लेगा और नेटफ्लिक्स पर बिंज वाचिंग शुरू कर देगा। लेकिन एक विनर जानता है कि उसे आज भी लिखना है, चाहे उसका मन हो या न हो।

मान लीजिये आपके पास एक सेल्स की जॉब है। आपको पता है कि 50 कॉल करने पर एक सेल क्लोज होगी। अब आप 49 कॉल कर चुके हैं और थक गए हैं। आपका मन कह रहा है कि बस भाई अब सो जा, कल देखेंगे। यही वो पल है जहाँ डिसिप्लिन आपकी परीक्षा लेता है। अगर आपने वो 50वीं कॉल कर ली, तो आप जीत गए। सक्सेसफुल लोग कोई जादुई चिराग नहीं रखते, वो बस उबाऊ कामों को भी पूरी ईमानदारी से रोज करते हैं।

टॉम हॉपकिन्स कहते हैं कि अनुशासन का मतलब है खुद को वो करने के लिए मजबूर करना जो जरूरी है, उस वक्त पर जब उसे करना चाहिए, चाहे आपका मन करे या न करे। ये सुनने में थोड़ा कड़वा लगता है क्योंकि हम सबको आज़ादी पसंद है। लेकिन सच तो ये है कि अगर आप खुद के अनुशासन के गुलाम नहीं बनेंगे, तो आप दूसरों की गुलामी करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

सक्सेस का रास्ता कोई हाईवे नहीं है जहाँ आप 100 की स्पीड में गाड़ी भगाएंगे। ये एक पहाड़ी रास्ता है जहाँ आपको हर कदम संभलकर और लगातार बढ़ाना होगा। अगर आप रुक गए तो आप पीछे खिसक जाएंगे। इसलिए छोटे गोल्स बनाइये और उन्हें पूरा करने की आदत डालिए। जब आप छोटे वादे खुद से पूरे करते हैं, तो आपका कॉन्फिडेंस बढ़ता है और धीरे-धीरे आप बड़े पहाड़ भी चढ़ जाते हैं।

आज खुद से एक वादा कीजिये कि आप बहाने बनाना बंद करेंगे। किस्मत, सरकार या मौसम को कोसने से बैंक बैलेंस नहीं बढ़ता। काम करने से बढ़ता है। और काम तब होता है जब आप बिस्तर छोड़कर अपनी कुर्सी पर बैठते हैं। क्या आप तैयार हैं अपने आलस को टाटा बाय-बाय कहने के लिए?


टॉम हॉपकिन्स की ये गाइड सिर्फ पन्नों का ढेर नहीं है, ये एक लाइफ चेंजिंग ब्लूप्रिंट है। हमने सीखा कि डर से दोस्ती कैसे करनी है, अपनी इमेज को विनर जैसा कैसे बनाना है और अनुशासन के साथ मैदान में कैसे टिके रहना है। अब बॉल आपके पाले में है।

क्या आप आज भी वही पुरानी लाइफ जीना चाहते हैं या फिर कदम बढ़ाकर अपनी सक्सेस स्टोरी लिखना चाहते हैं? कमेंट में लिखिए मैं तैयार हूँ अगर आप आज से ही इन लेसन्स को अपनी लाइफ में लागू करने वाले हैं। इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो सिर्फ सपने देखता है पर काम नहीं करता। चलिए मिलकर इंडिया को और भी ज्यादा सक्सेसफुल बनाते हैं।

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