क्या आप अभी भी उसी घिसे पिटे तरीके से जी रहे हैं जहाँ सैलरी आते ही गायब हो जाती है? गजब है भाई। आप अपनी मेहनत की कमाई दुनिया भर को बांट देते हैं पर खुद के लिए चवन्नी भी नहीं बचाते। यह कंगाली का रास्ता आपको ले डूबेगा।
आज हम अरकाद के उन सीक्रेट्स की बात करेंगे जो आपको खाली जेब से भारी तिजोरी तक ले जाएंगे। चलिए देखते हैं बेबीलोन के वह ३ बड़े लेसन्स जो आपकी लाइफ बदल देंगे।
Lesson : पे योरसेल्फ फर्स्ट यानी अपनी कमाई का हिस्सा खुद के लिए बचाएं
भाई साहब बात ऐसी है कि हम सब एक बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। हम सोचते हैं कि जो पैसा जेब में आया है वह सब हमारा है। पर सच तो यह है कि वह पैसा सबका है सिवाय आपके। जैसे ही सैलरी आती है आप दूध वाले को पैसे देते हैं। फिर मकान मालिक को किराया पकड़ाते हैं। इसके बाद मोबाइल का रिचार्ज और जोमैटो वाले भैया का बिल। अंत में आपकी जेब में क्या बचता है? बाबा जी का ठुल्लू। आप दरअसल दूसरों के लिए काम कर रहे हैं। आप बस एक जरिया हैं जो पैसा एक हाथ से लेकर दूसरे हाथ में ट्रांसफर कर देता है। अरकाद जो बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी था वह कहता है कि यह कंगाली की सबसे बड़ी निशानी है। उसका पहला और सबसे पावरफुल नियम है कि आप जो भी कमाते हैं उसका कम से कम १० परसेंट हिस्सा आपका अपना होना चाहिए। इसका मतलब है कि किसी को भी एक पैसा देने से पहले वह १० परसेंट अपनी तिजोरी में डाल दें।
अब आप कहेंगे कि भाई साहब अभी तो गुजारा नहीं हो रहा ऊपर से १० परसेंट और बचा लें? तो भाई सुनो। आप अपने खर्चों को अपनी कमाई के हिसाब से फैला लेते हैं। अगर आज आपकी सैलरी १० परसेंट कम हो जाए तो क्या आप भूखे मर जाएंगे? बिल्कुल नहीं। आप बस फालतू के खर्चे कम कर देंगे। जैसे वह रोज शाम को बाहर से मंगवाई गई एक्स्ट्रा चीज वाली पिज्जा या वह नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन जिसका पासवर्ड आधा मोहल्ला चला रहा है। अरकाद का यह नियम कहता है कि अपनी मेहनत का एक हिस्सा अपने भविष्य के लिए बचाना ही असल अमीरी की शुरुआत है।
मान लीजिए आपका दोस्त बब्लू हर महीने ५० हजार कमाता है। बब्लू बहुत दिलदार आदमी है। वह हर किसी का बिल भरता है। वह लेटेस्ट आईफोन भी किश्तों पर ले आता है। महीने के आखिर में बब्लू के पास बचता है जीरो। वहीं दूसरी तरफ आप हैं जो ५० हजार में से चुपचाप ५ हजार अलग निकाल कर भूल जाते हैं। एक साल बाद बब्लू के पास सिर्फ पुरानी यादें और टूटी हुई स्क्रीन वाला फोन होगा। लेकिन आपके पास ६० हजार रुपए होंगे जो अब आपके गुलाम बनकर काम करने के लिए तैयार हैं। यह ५ हजार रुपए सिर्फ कागज के टुकड़े नहीं हैं। यह आपके फाइनेंसियल फ्रीडम की सेना के सिपाही हैं। जितना ज्यादा आप इन सिपाहियों को बचाएंगे उतनी बड़ी आपकी सेना होगी।
अमीर बनना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। यह बस अपनी इच्छाओं पर थोड़ा काबू पाने और खुद को इज्जत देने का मामला है। अगर आप खुद को पे नहीं कर रहे तो आप खुद के सबसे बड़े दुश्मन हैं। आप बस एक मजदूर की तरह काम कर रहे हैं जो दूसरों को अमीर बना रहा है। तो आज से ही कसम खाइए। चाहे कुछ भी हो जाए आप अपनी कमाई का दसवां हिस्सा कभी खर्च नहीं करेंगे। यह पैसा आपका है और इसे आप अपने पास ही रखेंगे। याद रखिए जब आप अपने लिए पैसा बचाते हैं तो आप दरअसल अपनी आजादी खरीद रहे होते हैं। और आजादी से बढ़कर इस दुनिया में कुछ भी नहीं है।
जब आप यह पहला स्टेप पार कर लेते हैं तो आपके अंदर एक अलग ही कॉन्फिडेंस आता है। आपको लगता है कि अब आप लाइफ के कंट्रोल में हैं। लेकिन सिर्फ पैसा बचाना काफी नहीं है। उस बचे हुए पैसे को फालतू चीजों में उड़ाने से कैसे रोकना है यह सबसे बड़ी चुनौती है। इसी चुनौती का हल अरकाद अपने दूसरे नियम में बताता है जो आपके खर्चों को मैनेज करने के बारे में है।
Lesson : अपने खर्चों पर लगाम कसें और अपनी इच्छाओं को पहचानें
आपने १० परसेंट तो बचा लिया, पर अब असली परीक्षा शुरू होती है। आप जैसे ही थोड़े पैसे बचाते हैं, आपका मन मचलने लगता है। अचानक आपको लगता है कि वह नया सेलफोन जिसके बिना आपका काम चल रहा था, अब वह आपकी सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। या फिर वह सेल वाली टी शर्ट जो बस देखने में अच्छी है पर पहनोगे आप उसे कभी नहीं। अरकाद का दूसरा सबक यही है कि अपने खर्चों को कंट्रोल करें। वह कहता है कि जो चीजें आपको 'जरूरी' लगती हैं, उनमें से आधी तो बस आपकी 'इच्छाएं' होती हैं।
अब आप कहेंगे, "भाई, मैं तो बस बेसिक चीजों पर खर्च करता हूँ।" अच्छा? तो फिर वह जिम की मेंबरशिप क्यों ली थी जहाँ आप पिछले तीन महीने से बस डोनेशन दे रहे हैं? और वह ओटिटि सब्स्क्रिप्शन जिसका पासवर्ड आप खुद भूल चुके हैं? असलियत तो यह है कि इंसान की इच्छाएं उसकी कमाई से हमेशा एक कदम आगे रहती हैं। अगर आपकी सैलरी कल दोगुनी हो जाए, तो यकीन मानिए आपके खर्चे भी अपने आप दोगुने हो जाएंगे। इसे 'लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन' कहते हैं, और यह अच्छे-भले अमीर आदमी को भी सड़क पर ले आता है।
बेबीलोन के सबसे अमीर आदमी ने सिखाया कि अपने खर्चों का बजट बनाना ही समझदारी है। बजट का मतलब कंजूसी नहीं है। बजट का मतलब है कि आप अपने पैसों को बताते हैं कि उन्हें कहाँ जाना है, न कि महीने के आखिर में यह सोचें कि पैसे कहाँ चले गए। जब आप बजट बनाते हैं, तो आप अपनी उन इच्छाओं को पहचान पाते हैं जो आपकी जेब में छेद कर रही हैं। यह वैसा ही है जैसे आप एक बाल्टी में पानी भर रहे हों जिसमें नीचे छोटे-छोटे छेद हों। आप चाहे जितना पानी भर लें, बाल्टी कभी नहीं भरेगी जब तक आप उन छेदों को बंद नहीं करते।
आपका एक दोस्त है 'पिंकू'। पिंकू को लगता है कि उसे हर हफ्ते बाहर खाना खाना बहुत जरूरी है क्योंकि ऑफिस में बहुत स्ट्रेस है। वह कहता है, "भाई, इतनी मेहनत करते हैं तो थोड़ा एन्जॉय तो बनता है।" अब पिंकू भाई साहब महीने के १० हजार रुपये सिर्फ बाहर के खाने और फालतू की पार्टियों में उड़ा देते हैं। साल के अंत में पिंकू के पास बस बढ़ी हुई तोंद और खाली बैंक बैलेंस बचता है। वहीं दूसरी तरफ अगर आप अपनी उन इच्छाओं को पहचान लें जो आपकी प्रोग्रेस रोक रही हैं, तो आप वह पैसा सही जगह लगा सकते हैं।
हंसी की बात तो यह है कि हम अक्सर उन लोगों को इम्प्रेस करने के लिए पैसे खर्च करते हैं जिन्हें हम पसंद भी नहीं करते। वह पड़ोसी वाली शर्मा जी की आंटी को दिखाने के लिए नया सोफा लेना या दोस्तों के सामने टशन मारने के लिए महंगी गाड़ी की ईएमआई भरते रहना। यह सब गुलामी के लक्षण हैं। अरकाद कहता है कि अपनी इच्छाओं की एक लिस्ट बनाओ और उनमें से सिर्फ उन्हीं को चुनो जो सच में जरूरी हैं। बाकी सबको काट दो। याद रखिए, आपकी हर एक 'इच्छा' आपकी मेहनत की कमाई की दुश्मन है।
जब आप अपने खर्चों पर काबू पा लेते हैं, तो आपकी बचाई हुई रकम धीरे-धीरे बढ़ने लगती है। अब आपके पास एक ऐसी पूंजी है जिसे आप बढ़ते हुए देख सकते हैं। लेकिन सिर्फ पैसा बचाना और उसे संभाल कर रखना ही काफी नहीं है। अगर वह पैसा अलमारी में पड़ा रहा, तो वह कभी बढ़ेगा नहीं। पैसे को खुद काम पर लगाना पड़ता है। और यहीं से शुरू होता है अरकाद का तीसरा और सबसे रोमांचक लेसन, जो आपकी दौलत को मल्टीप्लाई कर देगा।
Lesson : अपनी दौलत को काम पर लगाएं और उसकी रक्षा करें
आपने पैसा बचा लिया और फालतू खर्चे भी कम कर दिए। अब क्या? क्या उस पैसे को तकिये के नीचे दबा कर सो जाएं? बिल्कुल नहीं। अरकाद का तीसरा सबसे बड़ा सीक्रेट यही है कि अपने हर सिक्के को अपना गुलाम बना लो। वह कहता है कि आपका हर एक रुपया एक छोटा सा मजदूर है जो आपके लिए और ज्यादा पैसे कमा कर ला सकता है। अगर आप पैसे को बस बचा कर रखेंगे, तो वह कभी नहीं बढ़ेगा। लेकिन अगर आप उसे सही जगह इन्वेस्ट करेंगे, तो वह खुद के बच्चे पैदा करेगा, और फिर उसके बच्चे भी आपके लिए काम करेंगे। यही असली अमीरी का रास्ता है।
पर यहाँ एक बहुत बड़ा पेंच है। लोग अक्सर जोश में आकर अपना पैसा कहीं भी लगा देते हैं। अब जैसे मान लीजिए आपका दोस्त 'गप्पू' है। गप्पू को अचानक सपना आता है कि वह रातों-रात अमीर बन जाएगा। वह अपनी सारी सेविंग्स किसी ऐसी स्कीम में डाल देता है जो २१ दिन में पैसा डबल करने का वादा करती है। या फिर वह किसी ऐसे आदमी की सलाह पर शेयर मार्केट में पैसा लगा देता है जिसे खुद यह नहीं पता कि निफ्टी और सेंसेक्स में क्या फर्क है। नतीजा? गप्पू का पैसा डूब जाता है और वह फिर से जीरो पर आ जाता है। अरकाद कहता है कि यह बेवकूफी है। अपनी मेहनत की कमाई की रक्षा करना उतना ही जरूरी है जितना उसे बढ़ाना।
हम अक्सर गलत लोगों से सलाह लेते हैं। अगर आपको दांत में दर्द है, तो क्या आप किसी सुनार के पास जाएंगे? नहीं न? तो फिर जब पैसे की बात आती है, तो आप उस रिश्तेदार की सलाह क्यों मानते हैं जो खुद कर्जे में डूबा हुआ है? अरकाद का नियम साफ है: केवल उन्हीं लोगों की सलाह लें जो उस काम के एक्सपर्ट हों। अगर आपको सोने के बारे में जानना है, तो जौहरी के पास जाएं, ईंट बनाने वाले के पास नहीं। सही सलाह आपके पैसे को सुरक्षित रखती है और उसे बढ़ने का मौका देती है।
एक और बात याद रखिए, रिस्क उतना ही लें जितना आप बर्दाश्त कर सकें। लालच में आकर अपनी पूरी जमापूंजी किसी ऐसी जगह न फंसाएं जहाँ से वापस मिलने की उम्मीद न हो। अरकाद कहता है कि छोटे और सुरक्षित प्रॉफिट बड़े और अनिश्चित प्रॉफिट से कहीं बेहतर हैं। धीरे-धीरे ही सही, पर आपका पैसा बढ़ना चाहिए। जब आप समझदारी से इन्वेस्ट करते हैं, तो आपकी दौलत की एक ऐसी नदी बन जाती है जो सोते समय भी आपकी जेब भरती रहती है। यही वह पॉइंट है जहाँ आप काम के लिए नहीं, बल्कि काम आपके लिए होने लगता है।
तो दोस्तों, बेबीलोन के यह तीन पुराने नियम आज भी उतने ही सच हैं जितने हजारों साल पहले थे। खुद को पे करें, खर्चों पर लगाम लगाएं और पैसे को सही जगह इन्वेस्ट करें। अगर आप इन नियमों को अपनी लाइफ में उतार लेते हैं, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको अमीर बनने से नहीं रोक सकती। कंगाली एक बीमारी है और यह किताब उसका सबसे सटीक इलाज है। आज ही से अपनी पहली १० परसेंट की बचत शुरू करें और अपनी किस्मत खुद लिखें।
क्या आप भी अपनी सैलरी का सारा हिस्सा दूसरों को बांट रहे हैं? आज कमेंट में 'आजादी' टाइप करें अगर आप आज से अपनी कमाई का १० परसेंट बचाने का वादा करते हैं। इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ जरूर शेयर करें जो महीने के अंत में आपसे उधार मांगता है। चलिए साथ मिलकर अपनी गरीबी को बेबीलोन की यादों में दफन करते हैं।
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