अगर आप आज भी वही घिसे पिटे पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं तो मुबारक हो आप बहुत जल्द मार्केट से गायब होने वाले हैं। अपनी बोरिंग स्ट्रेटेजी को संभाल कर रखिये क्योंकि दुनिया बदल चुकी है और टॉम पीटर्स की यह किताब आपको आईना दिखाने वाली है।
आज के इस ब्लॉग में हम टॉम पीटर्स सेमिनार बुक के वह तीन बड़े सबक देखेंगे जो आपके करियर और ऑर्गेनाइजेशन की काया पलट कर देंगे। चलिए इस क्रेजी दुनिया के सफर पर चलते हैं।
Lesson : पागलपन को गले लगाओ वरना गायब हो जाओ
आज की दुनिया में अगर आप यह सोच रहे हैं कि सब कुछ शांति से चलेगा और आपका बिजनेस या करियर पुराने ढर्रे पर चलता रहेगा तो आप गहरी नींद में सो रहे हैं। टॉम पीटर्स साफ कहते हैं कि यह वक्त नॉर्मल लोगों का नहीं बल्कि क्रेजी लोगों का है। याद करिये वह जमाना जब नोकिया और कोडक जैसे नाम शेर की तरह दहाड़ते थे। आज वह कहाँ हैं। शायद किसी म्यूजियम के कोने में धूल फांक रहे होंगे। क्यों। क्योंकि उन्होंने बदलते वक्त के पागलपन को समझने से इनकार कर दिया। वह अपनी पुरानी कामयाबी के नशे में इतने चूर थे कि उन्हें लगा कि दुनिया रुक जाएगी। लेकिन दुनिया तो सुपरफास्ट ट्रेन की तरह आगे निकल गई और वह स्टेशन पर खड़े रह गए।
अगर आप आज के दौर में सर्वाइव करना चाहते हैं तो आपको भी थोड़ा क्रेजी होना पड़ेगा। क्रेजी होने का मतलब यह नहीं कि आप सड़क पर चिल्लाने लगें। इसका मतलब है अपनी सोच को बदलना। पुरानी सड़ी गली फाइलों और बोरिंग मीटिंग्स से बाहर निकलना। टॉम पीटर्स कहते हैं कि अगर आपके पास कोई ऐसा आईडिया नहीं है जो लोगों को हैरान कर दे तो समझो आप बस भीड़ का हिस्सा हैं। आज के मार्केट में वही टिकेगा जो रिस्क लेगा। जो हर दिन कुछ ऐसा करेगा जो पहले कभी नहीं हुआ।
मिसाल के तौर पर अपने उस पड़ोसी को देखिये जो पिछले दस साल से एक ही पुरानी दुकान चला रहा है। वह आज भी वही पुराने बिस्कुट और साबुन बेच रहा है। दूसरी तरफ एक लड़का आता है जो मोबाइल ऐप से उसी गली में ग्रोसरी डिलीवर करने लगता है। अब पड़ोसी अंकल परेशान हैं कि ग्राहक कहाँ गए। अंकल जी ग्राहक तो वहीं हैं बस आपकी सोच पुरानी हो गई। आपको लगा कि दुनिया आपकी दुकान के चक्कर लगाएगी पर दुनिया तो अब स्क्रीन पर उंगलियां घुमा रही है।
यही हाल ऑफिस जाने वालों का भी है। अगर आप आज भी वही एक्सेल शीट भर रहे हैं जो आपके दादा जी के जमाने में चलती थी तो बॉस बहुत जल्द आपको पिंक स्लिप थमा देगा। आपको अपने काम में इनोवेशन लाना होगा। टॉम पीटर्स का सेमिनार हमें यही सिखाता है कि जो ऑर्गेनाइजेशन अपनी गलतियों से नहीं सीखती और खुद को हर दिन अपडेट नहीं करती वह बहुत जल्द इतिहास बन जाती है। इसलिए अगर आप अपनी जॉब या बिजनेस बचाना चाहते हैं तो पागलपन को अपनी ताकत बनाइये। बदलाव से डरिये मत बल्कि उसे अपनी बाहों में भर लीजिये। क्योंकि जो बदलता है वही बढ़ता है। बाकी सब तो बस वक्त काटने के लिए पैदा हुए हैं।
Lesson : अपनी कुर्सी छोड़ो और प्रोजेक्ट बनाओ
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सुबह नौ बजे ऑफिस जाते हैं और शाम को पांच बजने का इंतज़ार करते हैं। अगर हाँ तो बधाई हो आप एक चलते फिरते फर्नीचर बन चुके हैं। टॉम पीटर्स कहते हैं कि पुराने जमाने की वह पक्की नौकरी जहाँ आप बस फाइलें इधर से उधर करते थे अब वह दौर खत्म हो चुका है। अब जमाना है प्रोजेक्ट्स का। अब यह मायने नहीं रखता कि आपका पद क्या है या आप कितने साल से उसी पुरानी डेस्क पर जमे हुए हैं। असली बात यह है कि आपने पिछले महीने कौन सा धमाका किया।
आज की दुनिया में हर काम एक प्रोजेक्ट है। चाहे आप एक सॉफ्टवेयर बना रहे हों या ऑफिस की कैंटीन का मेन्यू बदल रहे हों। अगर आप अपने काम को एक यादगार प्रोजेक्ट की तरह नहीं देखते तो आप बस एक रोबोट हैं और रोबोट्स के लिए अब मार्केट में कोई जगह नहीं बची है। टॉम पीटर्स का कहना है कि आपको खुद को एक ब्रांड की तरह सोचना होगा। जैसे एप्पल या नाइकी अपने हर प्रोडक्ट को लेकर एक्साइटेड रहते हैं वैसे ही आपको अपने हर टास्क को लेकर पागलपन दिखाना होगा।
जरा सोचिये उस सहकर्मी के बारे में जो बस इसलिए खुश है क्योंकि उसने आज दस ईमेल के जवाब दिए। भाई साहब ईमेल के जवाब देना कोई अचीवमेंट नहीं है यह तो बस जिंदा रहने की निशानी है। असली मजा तब है जब आप कोई ऐसी प्रॉब्लम सॉल्व करें जिससे कंपनी का करोड़ों का फायदा हो जाए या कम से कम बॉस की कुर्सी हिल जाए। टॉम पीटर्स हमें सिखाते हैं कि हमें अपनी जॉब डिस्क्रिप्शन से बाहर निकलना होगा। अगर आप केवल वही कर रहे हैं जो आपकी चिट्ठी में लिखा है तो आप बहुत ही बोरिंग इंसान हैं।
मिसाल के तौर पर एक सेल्समैन को देखिये जो बस घर घर जाकर घंटी बजाता है और वही रटा रटाया भाषण देता है। दूसरी तरफ एक ऐसा बंदा है जो अपनी सेल को एक कहानी बना देता है। वह कस्टमर की मुश्किलों को समझता है और उसे एक ऐसा सॉल्युशन देता है जो उसने कभी सोचा भी नहीं था। अब आप ही बताइये कंपनी किसे रखेगी। जाहिर है उसे जो रिजल्ट लाता है न कि उसे जो बस हाजिरी लगाता है।
इस लेसन का बड़ा सार यही है कि आपको अपनी पूरी वर्क लाइफ को छोटे छोटे शानदार प्रोजेक्ट्स में बांटना होगा। हर प्रोजेक्ट का एक नाम होना चाहिए उसका एक मकसद होना चाहिए और उसमें आपकी छाप होनी चाहिए। अगर लोग आपका काम देखकर यह न कहें कि वाह यह तो कमाल कर दिया तो समझो आपने बस वक्त बर्बाद किया है। आज के क्रेजी ऑर्गेनाइजेशन में वही लोग लीडर बनते हैं जो खुद को एक इंटरप्रेन्योर की तरह देखते हैं। अपनी कुर्सी से प्यार करना छोड़िये और अपने काम से प्यार करना शुरू करिये। क्योंकि कुर्सियां तो बदलती रहती हैं पर आपका टैलेंट और आपके बनाए प्रोजेक्ट्स ही आपकी असली पहचान हैं।
Lesson : कस्टमर के दिल में घुस जाओ वरना घर बैठो
क्या आपको लगता है कि आपका प्रोडक्ट या सर्विस दुनिया में सबसे बेस्ट है। अगर हाँ, तो अपनी पीठ थपथपाना बंद कीजिये क्योंकि कस्टमर को इससे रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ता। टॉम पीटर्स का तीसरा और सबसे कड़वा सबक यही है कि कस्टमर को आपके ऑफिस की सजावट या आपकी डिग्री से कोई लेना देना नहीं है। उसे बस इस बात से मतलब है कि आपने उसे कैसा महसूस कराया। आज के कॉम्पिटिशन वाले दौर में अगर आप बस एक और दुकान या एक और सर्विस प्रोवाइडर हैं, तो आप बहुत जल्द भीड़ में खो जाएंगे। आपको कस्टमर के लिए एक यादगार अनुभव बनना होगा।
जरा सोचिये उस रेस्टोरेंट के बारे में जहाँ खाना तो बढ़िया मिलता है पर वेटर ऐसे घूरता है जैसे आपने उसकी जायदाद मांग ली हो। क्या आप वहाँ दोबारा जाएंगे। बिल्कुल नहीं। भले ही खाना अमृत हो, पर वह कड़वा अनुभव आपको वहां से दूर रखेगा। टॉम पीटर्स कहते हैं कि क्रेजी ऑर्गेनाइजेशन वही है जो अपने कस्टमर को भगवान नहीं, बल्कि एक खास मेहमान की तरह ट्रीट करती है। आपको उनकी जरूरतों को उनके बोलने से पहले समझना होगा। अगर आप उनके चेहरे पर मुस्कान नहीं ला पा रहे, तो आप बस एक ट्रांजेक्शन कर रहे हैं, कोई रिश्ता नहीं बना रहे। और याद रखिये, ट्रांजेक्शन एक बार होता है, पर रिश्ता बार बार बिजनेस लाता है।
मिसाल के तौर पर आज के ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स को देखिये। अगर आपका पार्सल एक दिन भी लेट हो जाए तो वह आपको सॉरी बोलते हुए डिस्काउंट कूपन दे देते हैं। उन्हें पता है कि एक नाराज कस्टमर सोशल मीडिया पर आपकी लंका लगा सकता है। वहीं दूसरी तरफ हमारे मोहल्ले के वह लाला जी हैं जो खराब सामान वापस लेने पर ऐसे चिल्लाते हैं जैसे आपने उनका गुर्दा मांग लिया हो। लाला जी को लगता है कि वह जीत गए, पर असल में उन्होंने एक लाइफटाइम कस्टमर खो दिया। आज के डिजिटल युग में वर्ड ऑफ माउथ आग की तरह फैलता है। टॉम पीटर्स का सेमिनार हमें यही याद दिलाता है कि बिजनेस केवल नंबर्स का खेल नहीं है, यह जज्बातों का खेल है।
अगर आप अपने क्लाइंट को वह वैल्यू नहीं दे रहे जो कोई और नहीं दे सकता, तो आप खतरे में हैं। आपको अपने काम में वह पागलपन और वह जुनून दिखाना होगा जो कस्टमर को मजबूर कर दे कि वह आपके बारे में सबको बताए। हर छोटा टच पॉइंट, चाहे वह एक थैंक यू नोट हो या एक कॉल, आपके ब्रांड की इमेज बनाता है। टॉम पीटर्स कहते हैं कि कस्टमर के साथ आपका हर इन्टरेक्शन एक मौका है खुद को साबित करने का। अगर आप इस मौके को गंवा देते हैं, तो समझिये आपने अपना भविष्य गंवा दिया। इसलिए अपनी फाइलों से सिर उठाइये और देखिये कि आपका कस्टमर असल में चाहता क्या है। उसे वह दीजिये जो उसे कहीं और न मिले, और फिर देखिये कैसे आपका बिजनेस रॉकेट की तरह ऊपर जाता है।
तो दोस्तों, टॉम पीटर्स की यह किताब हमें बस एक ही बात सिखाती है कि पुराने ढर्रे पर चलना अब मौत के बराबर है। चाहे आप एक एम्प्लॉई हों या बिजनेस ओनर, आपको हर दिन खुद को रीइन्वेंट करना होगा। क्या आप तैयार हैं उस पागलपन को अपनाने के लिए जो आपको टॉप पर ले जाएगा। या फिर आप वही पुरानी एक्सेल शीट भरकर अपनी लाइफ बर्बाद करना चाहते हैं। आज ही अपने काम करने के तरीके को बदलिये और एक प्रोजेक्ट लीडर बनिये। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया और आप भी बदलाव के लिए तैयार हैं, तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो अब भी पुरानी सोच में फंसा है। नीचे कमेंट में बताइये कि आप आज से अपना कौन सा नया प्रोजेक्ट शुरू करने वाले हैं।
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