अगर आपको लगता है कि बिल गेट्स जैसे जायंट को हराना नामुमकिन है, तो शायद आप अपनी फेलियर की कहानी पहले ही लिख चुके हैं। दुनिया बदल गई पर आप वही पुरानी घिसी पिटी सोच लेकर बैठे हैं। एओएल ने वो कर दिखाया जो आपकी सोच से बाहर है।
आज हम इस शानदार किताब से तीन ऐसे सबक सीखेंगे जो आपके बिजनेस करने के नजरिए को पूरी तरह बदल देंगे।
Lesson : टेक जायंट्स को उनकी ही पिच पर धूल चटाना
दोस्तो, अक्सर हमें लगता है कि अगर मार्केट में बिल गेट्स जैसा कोई बड़ा खिलाडी बैठा है, तो छोटे स्टार्टअप्स के लिए कोई जगह नहीं बची। पर स्टीव केस और एओएल की कहानी हमें कुछ और ही सिखाती है। जब एओएल ने शुरुआत की, तब माइक्रोसॉफ्ट के पास पैसा, पावर और पूरी दुनिया का कंट्रोल था। लेकिन स्टीव केस के पास एक ऐसी चीज थी जो माइक्रोसॉफ्ट के पास नहीं थी, और वो थी आम आदमी की नब्ज को पहचानना।
जरा सोचिए, उस दौर में इंटरनेट चलाना रॉकेट साइंस जैसा था। कोड्स डालो, कमांड्स याद करो, और फिर प्रार्थना करो कि कनेक्शन न कट जाए। नेटहेड्स यानी वो लोग जो खुद को इंटरनेट का भगवान समझते थे, चाहते थे कि इंटरनेट केवल उनके जैसे जीनियस लोगों के लिए ही रहे। पर स्टीव केस ने सोचा, भाई, अगर मेरी मम्मी को ईमेल भेजना है, तो उन्हें कोडिंग सीखने की क्या जरूरत है? उन्होंने इंटरनेट को इतना आसान बना दिया कि एक बच्चा भी उसे चला सके।
यहाँ सबक यह है कि बड़े कॉम्पिटिटर से डरने की जरूरत नहीं है। अगर आप अपने कस्टमर की सबसे बड़ी सिरदर्दी को खत्म कर सकते हैं, तो आप दुनिया के सबसे अमीर आदमी को भी पछाड़ सकते हैं। बिल गेट्स ने एओएल को खरीदने की कोशिश की, उसे डराने की कोशिश की, और यहाँ तक कि अपने विंडोज में अपना खुद का नेटवर्क भी डाल दिया। पर एओएल के यूजर इतने वफादार थे कि उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट को घास तक नहीं डाली।
आज के दौर में भी अगर आप कोई नया बिजनेस शुरू कर रहे हैं, तो यह मत देखिए कि सामने वाला कितना बड़ा है। यह देखिए कि वह कहाँ आलसी हो रहा है। बड़ी कंपनियां अक्सर अपने ईगो में इतनी डूबी होती हैं कि उन्हें लगता है कस्टमर उनके पीछे आएगा। स्टीव केस ने इसका उल्टा किया। उन्होंने हर घर में अपनी सीडी भेज दी। लोग अपना दरवाजा खोलते और उन्हें एओएल की फ्री ट्रायल वाली सीडी मिलती। यह वैसी ही बात है जैसे आज के जमाने में कोई आपको नेटफ्लिक्स का फ्री सब्सक्रिप्शन आपके तकिये के नीचे रख कर चला जाए।
बिल गेट्स जैसे लोग सोचते थे कि सॉफ्टवेयर ही सब कुछ है, पर स्टीव केस ने उन्हें सिखाया कि असली किंग तो कम्युनिटी और कन्वीनियंस है। अगर आप लोगों को एक जगह जोड़ सकते हैं, तो आप करोड़ों बना सकते हैं। स्टीव केस ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ वो किया जो आज के दौर में शायद एक छोटा सा युटुब चैनल किसी बड़े टीवी नेटवर्क के साथ कर रहा है। उन्होंने रूल्स बदले और गेम ही पलट दिया।
Lesson : मार्केटिंग का असली जादू और पार्टनरशिप का खेल
दोस्तो, अगर आपको लगता है कि सिर्फ एक बढ़िया प्रोडक्ट बना लेने से आप दुनिया जीत लेंगे, तो आप शायद किसी और ही दुनिया में जी रहे हैं। स्टीव केस ने हमें सिखाया कि प्रोडक्ट चाहे जितना भी धाकड़ हो, अगर लोगों को उसके बारे में पता ही नहीं, तो वह कचरे के डिब्बे में पड़े पुराने अखबार जैसा है। एओएल ने मार्केटिंग में जो किया, वह आज के दौर के इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग से भी कहीं ज्यादा एडवांस्ड था।
जरा इमेजिन कीजिए, आप पिज्जा आर्डर करते हैं और बॉक्स के साथ आपको इंटरनेट की फ्री सीडी मिलती है। आप हवाई जहाज में बैठते हैं और सीट की पॉकेट में एओएल की सीडी आपका स्वागत करती है। आप अपनी फेवरेट मैगजीन खोलते हैं और वहां से भी एक चमकती हुई एओएल की डिस्क बाहर गिरती है। स्टीव केस ने अमेरिका के हर कोने में एओएल की डिस्क ऐसे बिछा दी थी जैसे हमारे यहाँ दिवाली पर सोन पापड़ी के डिब्बे घूमते हैं। फर्क बस इतना था कि लोग सोन पापड़ी से भागते हैं और एओएल की फ्री डिस्क को लपक लेते थे।
यह कोई तुक्का नहीं था, बल्कि एक सोची समझी पार्टनरशिप की स्ट्रेटेजी थी। स्टीव केस जानते थे कि अकेले लड़ने से अच्छा है कि उन लोगों के साथ हाथ मिलाया जाए जिनके पास पहले से ही कस्टमर्स हैं। उन्होंने कंप्यूटर बनाने वाली कंपनियों से लेकर मीडिया हाउस तक, सबको अपना पार्टनर बना लिया। उनका लॉजिक सिंपल था: अगर आप मेरे पार्टनर हो, तो आप माइक्रोसॉफ्ट के नहीं हो सकते। उन्होंने बिल गेट्स के चारों तरफ ऐसी घेराबंदी की कि बेचारे गेट्स अपनी विंडोज की खिड़की से बस देखते रह गए।
उस समय के बड़े बड़े टेक एक्सपर्ट्स एओएल का मजाक उड़ाते थे। वो कहते थे, "अरे, यह तो बस एक सस्ता सा चैट रूम है, इसमें असली टेक्नोलॉजी कहाँ है?" स्टीव केस बस मुस्कुराते रहे और अपनी सीडी बांटते रहे। उन्हें पता था कि आम आदमी को कोडिंग से मतलब नहीं है, उसे तो बस अपने दोस्तों से गप्पें मारनी हैं और ईमेल भेजना है। उन्होंने इंटरनेट को "एलीट" लोगों की मुट्ठी से निकाल कर "कॉमन मैन" की हथेली पर रख दिया।
आज के स्टार्टअप्स के लिए यहाँ एक बहुत बड़ी सीख है। अगर आप अपने कॉम्पिटिटर से बजट में नहीं जीत सकते, तो अपनी रीच में उन्हें पछाड़िए। एओएल ने करोड़ों डॉलर की सीडी मुफ्त में बांटी, जो उस वक्त एक बहुत बड़ा रिस्क था। लोग कहते थे कि स्टीव केस पागल हो गए हैं, पैसा पानी में बहा रहे हैं। पर जब उन फ्री ट्रायल्स ने करोड़ों पेड सब्सक्राइबर्स में बदल कर एओएल को बिलियंस की कंपनी बना दिया, तब सबकी बोलती बंद हो गई। यह वही बात है जैसे आज कोई ऐप आपको फ्री कैशबैक देकर अपना आदि बना ले और फिर आपसे महीने के चार्ज वसूलने लगे।
स्टीव केस ने दिखाया कि मार्केटिंग सिर्फ विज्ञापन देना नहीं है, बल्कि कस्टमर की लाइफ का हिस्सा बन जाना है। उन्होंने इंटरनेट को एक लग्जरी से एक आदत बना दिया। और जब एक बार किसी को आपकी आदत लग जाती है, तो फिर वह बिल गेट्स हो या कोई और, आपकी जगह कोई नहीं ले सकता।
Lesson : सफलता का नशा और ईगो की सबसे बड़ी कीमत
दोस्तो, कहानी का यह हिस्सा सबसे ज्यादा रोमांचक और थोड़ा सा दर्दनाक भी है। एओएल ने बिल गेट्स को हरा दिया, दुनिया भर में अपनी सीडी बांट दी, और करोड़ों यूजर्स बना लिए। अब एओएल इंटरनेट की दुनिया का बेताज बादशाह था। पर कहते हैं न कि जब आप पहाड़ की चोटी पर पहुँचते हैं, तो वहाँ की हवा बहुत तेज होती है और आपका संतुलन बिगड़ने का डर सबसे ज्यादा होता है। स्टीव केस के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
एओएल ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने पूरी बिजनेस की दुनिया को हिला कर रख दिया। उन्होंने टाइम वार्नर जैसी दिग्गज मीडिया कंपनी को खरीद लिया। यह उस समय का दुनिया का सबसे बड़ा मर्जर यानी दो कंपनियों का जुड़ाव था। एओएल के पास इंटरनेट की ताकत थी और टाइम वार्नर के पास कंटेंट का खजाना। स्टीव केस को लगा कि अब वो एक ऐसा एंपायर खड़ा कर देंगे जिसे कोई नहीं हिला पाएगा। पर यहाँ उनके ईगो और पुरानी सोच के बीच एक ऐसी टक्कर हुई जिसने सब कुछ तहस नहस कर दिया।
जरा सोचिए, एक तरफ एओएल के यंग और जींस पहनने वाले टेक गिक्स थे और दूसरी तरफ टाइम वार्नर के सूट बूट पहनने वाले पुराने जमाने के एग्जीक्यूटिव्स। दोनों की सोच में जमीन आसमान का फर्क था। एओएल के लोग तेज भागना चाहते थे और टाइम वार्नर के लोग हर चीज को अपनी पुरानी फाइलों और मीटिंग्स में उलझाना चाहते थे। यह कुछ वैसा ही था जैसे किसी तेज रफ़्तार फेरारी कार में एक पुराना बैलगाड़ी का पहिया लगा दिया जाए। सार्केज्म की बात तो यह है कि उन्होंने सोचा था कि वो इतिहास रचेंगे, पर उन्होंने अपनी ही बर्बादी का रास्ता चुन लिया।
सफलता का नशा इतना चढ़ गया था कि उन्होंने आने वाली नई टेक्नोलॉजी यानी ब्रॉडबैंड की रफ़्तार को नजरअंदाज कर दिया। एओएल अपनी पुरानी डायल अप सर्विस में खुश था क्योंकि वहां से पैसा बरस रहा था। पर दुनिया वाई फाई और हाई स्पीड इंटरनेट की तरफ बढ़ रही थी। एओएल ने अपनी पिछली जीत के घमंड में अपनी आँखें बंद कर लीं। उन्हें लगा कि उन्होंने एक बार बिल गेट्स को हरा दिया है, तो अब कोई उन्हें टच भी नहीं कर सकता। पर टेक्नोलॉजी किसी का इंतजार नहीं करती।
यहाँ सबसे बड़ा सबक यह है कि बिजनेस में आपकी पिछली जीत आपकी अगली हार का कारण बन सकती है अगर आप खुद को बदलना बंद कर दें। स्टीव केस ने शुरुआत में जिस सादगी और कस्टमर फोकस से मार्केट जीता था, अंत में वो उसे ही भूल गए। बड़े कॉर्पोरेट ड्रामे और ईगो की लड़ाई में एओएल की वो चमक धीरे धीरे फीकी पड़ने लगी। करोड़ों की कंपनी देखते ही देखते बिखरने लगी।
तो दोस्तो, एओएल की यह कहानी हमें सिखाती है कि मार्केट में घुसना आसान हो सकता है, वहां टिकना मुश्किल, पर वहां राज करते रहना नामुमकिन है अगर आप अपने ईगो को कंट्रोल में न रखें। चाहे आप एक छोटा सा स्टार्टअप चला रहे हों या एक बड़ी कंपनी, हमेशा याद रखिए कि आपका असली मालिक आपका कस्टमर है, आपका ईगो नहीं।
तो क्या आप भी अपनी पिछली छोटी सी जीत को लेकर बैठे हैं या आने वाले बड़े बदलाव के लिए तैयार हैं? एओएल की कहानी हमें याद दिलाती है कि मार्केट का राजा वही रहता है जो वक्त के साथ अपनी खाल बदलता रहता है। अगर आपको यह कहानी और इससे मिले सबक पसंद आए, तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपना नया बिजनेस शुरू करने का सपना देख रहे हैं। कमेंट्स में बताएं कि स्टीव केस की कौन सी बात आपको सबसे ज्यादा इंस्पायरिंग लगी!
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