क्या आप भी अपनी बोरिंग लाइफ के वही पुराने घिसे पिटे बहाने बना रहे हैं? बधाई हो! आप अपनी सक्सेस को खुद ही कुल्हाड़ी मार रहे हैं। टॉनी रॉबिन्स की यह बुक आपके अंदर सोए हुए उस आलसी राक्षस को जगाने आई है जो अभी तक सिर्फ सपने देख रहा है।
आज हम टॉनी रॉबिन्स की वर्ल्ड फेमस बुक अवेकन द जायंट विदिन से वे 3 सीक्रेट लेसन्स सीखेंगे जो आपकी मेंटल और फाइनेंशियल लाइफ को पूरी तरह बदल देंगे। चलिए शुरू करते हैं।
Lesson : डिसीजन मेकिंग की असली पावर (अपनी किस्मत खुद लिखना सीखें)
क्या आपको भी लगता है कि आपकी लाइफ की गाड़ी कोई और चला रहा है? कभी ऑफिस का बॉस, कभी पड़ोस वाले शर्मा जी का लड़का, तो कभी आपकी फूटी किस्मत! टॉनी रॉबिन्स कहते हैं कि यह सब बकवास है। आपकी लाइफ वैसी नहीं है जैसे आपके हालात हैं, बल्कि वैसी है जैसे आपने फैसले लिए हैं। हम में से ज्यादातर लोग फैसले नहीं लेते, बस "इच्छा" जताते हैं। जैसे, "यार, काश मेरे पास भी आईफोन होता" या "काश मेरी बॉडी भी ऋतिक रोशन जैसी होती"। यह फैसला नहीं है, यह तो बस एक हसीन सपना है जो आप सोकर देख रहे हैं।
असली फैसला वह होता है जिसके बाद आप पीछे मुड़कर नहीं देखते। इसे एक एग्जांपल से समझते हैं। मान लीजिए आपने नए साल पर जिम जाने का "फैसला" किया। पहले दिन आप जोश में ट्रैकसूट पहनकर निकलते हैं, लेकिन दूसरे दिन सुबह जैसे ही अलार्म बजता है, आप उसे ऐसे थप्पड़ मारते हैं जैसे उसने आपकी जायदाद मांग ली हो। यहां आपने फैसला नहीं लिया था, बस एक विश मांगी थी। टॉनी कहते हैं कि जिस पल आप एक सच्चा फैसला लेते हैं, उसी पल आपकी डेस्टिनी यानी किस्मत बदलनी शुरू हो जाती है।
अब थोड़ा कड़वा सच सुनिए। अगर आज आपकी जेब खाली है या आपका पेट बाहर निकला हुआ है, तो यह आपकी किस्मत का दोष नहीं है। यह उन छोटे छोटे गलत फैसलों का नतीजा है जो आपने पिछले 5 सालों में लिए हैं। आपने जिम जाने के बजाय समोसे खाने का फैसला लिया। आपने नई स्किल सीखने के बजाय इंस्टाग्राम रील्स पर ठुमके देखने का फैसला लिया। बुरा लगा? लगना भी चाहिए! क्योंकि जब तक चुभेगा नहीं, तब तक आप बदलेंगे नहीं।
टॉनी रॉबिन्स हमें सिखाते हैं कि हमें अपनी "कंडीशनिंग" बदलनी होगी। हम अक्सर कहते हैं कि "मैं क्या करूं, मेरी तो किस्मत ही खराब है"। भाई, किस्मत खराब नहीं है, आपकी डिसीजन मेकिंग की मसल कमजोर हो गई है। इसे ट्रेन करना पड़ता है। हर छोटा फैसला आपके फ्यूचर की ईंट रखता है। आज आप क्या पढ़ रहे हैं, किससे बात कर रहे हैं और अपना टाइम कहां इन्वेस्ट कर रहे हैं, यही तय करेगा कि 5 साल बाद आप मर्सिडीज में घूमेंगे या बस के धक्के खाएंगे।
सक्सेसफुल लोग इसलिए सफल नहीं होते कि उनके पास कोई जादू की छड़ी है। वे बस सही समय पर कठोर फैसले लेने की हिम्मत रखते हैं। वे डरते नहीं हैं। वे जानते हैं कि गलत फैसला लेना, कोई फैसला न लेने से हजार गुना बेहतर है। तो क्या आप आज अपनी लाइफ का वो एक बड़ा फैसला लेने के लिए तैयार हैं? या फिर वही पुराने बहानों की चादर ओढ़कर सो जाना चाहते हैं? याद रखिए, जागने का वक्त अभी है, क्योंकि जो सोता है, वह सिर्फ खोता ही है।
Lesson : पेन और प्लेजर का खेल (दिमाग को बेवकूफ बनाना सीखें)
कभी सोचा है कि आपको पता है कि सुबह उठना अच्छा है, फिर भी आप रजाई में घुसे रहते हैं? आपको पता है कि पिज्जा आपकी सेहत के लिए जहर है, फिर भी आप उसका आखिरी कोना तक चाट जाते हैं? टॉनी रॉबिन्स कहते हैं कि इंसान कंप्यूटर नहीं है जो लॉजिक से चले, हम तो इमोशन्स के गुलाम हैं। हमारी लाइफ सिर्फ दो चीजों के इर्द-गिर्द घूमती है: दर्द (Pain) से बचना और खुशी (Pleasure) पाना।
इसे एक कॉमेडी के साथ समझते हैं। मान लीजिए आपको पढ़ाई करनी है। आपका दिमाग कहता है, "भाई, किताब खोलने में बहुत दर्द है, सिर दुखेगा, बोरियत होगी।" लेकिन जैसे ही आप फोन उठाते हैं, दिमाग चिल्लाता है, "अरे वाह! इंस्टाग्राम पर रील देखने में तो बहुत मजा है, डोपामिन मिलेगा!" बस, आप पढ़ाई छोड़कर रील्स की दुनिया में खो जाते हैं। यहां आपके दिमाग ने 'पेन' से बचने और 'प्लेजर' पाने के लिए आपको पढ़ाई से दूर कर दिया।
टॉनी कहते हैं कि अगर आप अपनी लाइफ बदलना चाहते हैं, तो आपको इस पेन और प्लेजर के कनेक्शन को उल्टा करना होगा। जब तक आपको अपनी बुरी आदत में 'दर्द' नहीं दिखेगा, आप उसे नहीं छोड़ेंगे। मान लीजिए आप स्मोकिंग छोड़ना चाहते हैं। अभी आपको सिगरेट पीने में प्लेजर मिलता है। लेकिन जिस दिन आप यह सोचने लगेंगे कि "अगर मैंने आज यह सिगरेट पी, तो मेरा फेफड़ा काला हो जाएगा, मुझे कैंसर हो सकता है और मेरे बच्चे अनाथ हो सकते हैं", उस दिन सिगरेट देखते ही आपको डर (दर्द) लगेगा।
ज्यादातर लोग "चेंज" इसलिए नहीं हो पाते क्योंकि वे बदलाव को दर्दनाक समझते हैं। वे सोचते हैं, "अरे यार, जिम जाऊंगा तो पसीना बहेगा, मसल्स दुखेंगी।" टॉनी कहते हैं कि इस सोच को बदलो! जिम न जाने के दर्द को इतना बड़ा बना दो कि जिम जाना आपको प्लेजर लगने लगे। खुद से कहिए, "अगर मैं आज जिम नहीं गया, तो मेरा पेट इतना बड़ा हो जाएगा कि लोग मुझे 'छोटा भीम' का ढोलू-भोलू कहेंगे।" जब बेइज्जती का डर (पेन) बढ़ेगा, तो आप अपने आप जूते पहनकर बाहर निकलेंगे।
यह सारा खेल हमारे दिमाग की वायरिंग का है। हम जिस चीज को खुशी से जोड़ देते हैं, हमारा मन वही करने को तड़पता है। टॉनी रॉबिन्स खुद इसका इस्तेमाल करते थे। वे अपनी पुरानी आदतों को इतना गंदा और दर्दनाक बना देते थे कि उनका मन उनसे नफरत करने लगता था। और अच्छी आदतों को इतना शानदार और मजेदार बना देते थे कि वे उनके लिए पागल हो जाते थे।
क्या आप भी अपनी आलस वाली लाइफ से खुश हैं? अगर हां, तो मुबारक हो, आप अगले दस साल भी वहीं खड़े रहेंगे। लेकिन अगर आप आज अपने आलस को 'मौत' के समान दर्दनाक बना लें और मेहनत को 'करोड़पति' बनने वाले प्लेजर से जोड़ दें, तो आपको कोई नहीं रोक सकता। यह माइंड गेम है बॉस! और इस गेम में या तो आप खिलाड़ी बनेंगे या फिर अपनी ही आदतों के खिलौने। फैसला आपका है।
Lesson : सवालों की ताकत (जैसे सवाल, वैसी लाइफ)
कभी सोचा है कि जब लाइफ में कोई प्रॉब्लम आती है, तो हम खुद से क्या पूछते हैं? "मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है?" या "मेरी किस्मत इतनी खराब क्यों है?" टॉनी रॉबिन्स कहते हैं कि हमारे दिमाग की क्वालिटी हमारे द्वारा पूछे गए सवालों पर टिकी होती है। आपका दिमाग एक गूगल सर्च इंजन की तरह है। आप जैसा कीवर्ड यानी सवाल डालेंगे, वह वैसे ही रिजल्ट्स यानी जवाब ढूंढकर लाएगा।
इसे एक कॉमेडी सिचुएशन से समझते हैं। मान लीजिए आपका ब्रेकअप हो गया। अब आप खुद से पूछ रहे हैं, "वो मुझे छोड़कर क्यों गई? क्या मुझमें कोई कमी थी?" आपका दिमाग तुरंत 101 कमियां गिना देगा: "हां भाई, तू दिखता भी तो कद्दू जैसा है, तेरी जेब में फूटी कौड़ी नहीं है, और तू खर्राटे भी तो मारता है!" बधाई हो! आपने खुद को डिप्रेशन की गर्त में धकेल दिया। लेकिन अगर आप यही सवाल बदल दें और पूछें, "इस सिचुएशन से मैं क्या सीख सकता हूं ताकि अगली बार मैं एक बेहतर पार्टनर बनूं?" तो आपका दिमाग आपको ग्रो करने के तरीके बताएगा।
टॉनी रॉबिन्स कहते हैं कि सफल और असफल लोगों के बीच सिर्फ एक बड़ा फर्क है। सफल लोग मुश्किल वक्त में "पॉवरफुल सवाल" पूछते हैं। जब बिजनेस में घाटा होता है, तो वे यह नहीं रोते कि "सब बर्बाद हो गया", बल्कि वे पूछते हैं, "मैं इस सिचुएशन को अपने फायदे के लिए कैसे इस्तेमाल कर सकता हूं?" यह एक छोटा सा बदलाव आपके पूरे नजरिए को बदल देता है।
आपकी लाइफ की गाड़ी का स्टीयरिंग आपके हाथ में है, और वो स्टीयरिंग हैं आपके 'सवाल'। अगर आप खुद से घटिया सवाल पूछेंगे, तो लाइफ भी घटिया ही रहेगी। अक्सर लोग खुद को कोसने में इतने बिजी रहते हैं कि उन्हें समाधान यानी सोल्यूशन दिखता ही नहीं। टॉनी का मंत्र सिंपल है: "सवालों को बदलो, लाइफ अपने आप बदल जाएगी।"
अब जरा सोचिए, आप कल सुबह उठकर खुद से क्या पूछेंगे? "आज फिर ऑफिस जाना पड़ेगा?" या "आज मैं ऐसा क्या खास कर सकता हूं जिससे मेरी लाइफ एक कदम आगे बढ़े?" याद रखिए, आपका दिमाग आपका सबसे वफादार नौकर है। आप इसे जो काम (सवाल) देंगे, यह उसे पूरा करने में अपनी जान लगा देगा। तो क्या आप तैयार हैं अपने अंदर के उस 'जायंट' यानी राक्षस को जगाने के लिए जो अभी तक गलत सवालों के जाल में फंसा हुआ था?
दोस्तो, टॉनी रॉबिन्स की यह बुक हमें सिखाती है कि हम मजबूर नहीं, बल्कि मजबूत हैं। बस हमें अपने फैसलों, अपने इमोशन्स और अपने सवालों पर कंट्रोल करना है। आज ही अपनी लाइफ का वो एक फैसला लीजिए जिसे आप सालों से टाल रहे हैं। नीचे कमेंट में मुझे बताइए कि वो कौन सा एक 'बड़ा बदलाव' है जो आप आज से ही अपनी जिंदगी में लाने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अपनी किस्मत का रोना रोता रहता है। जागिए, क्योंकि आपके अंदर एक महान इंसान छिपा है!
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