Marketing Warfare (Hindi)


क्या आप भी अपनी मार्केटिंग को चैरिटी समझ रहे हैं? बधाई हो! आपका कॉम्पिटिटर आपकी इसी मासूमियत का फायदा उठाकर आपको मार्केट से बाहर फेंकने की तैयारी में है। बिजनेस कोई सत्संग नहीं बल्कि एक खूंखार जंग है। अगर आप मिलिट्री वाली ये चालाकी नहीं सीखे तो जल्द ही आप इतिहास के पन्नों में दफन मिलेंगे।

चलिए जानते हैं अल रीस और जैक ट्राउट की इस मास्टरक्लास के ३ जबरदस्त सबक जो आपको बिजनेस के मैदान का असली सिकंदर बनाएंगे।


Lesson : अपनी औकात पहचानो और सही जंग चुनो

देखिए भाई साहब, बिजनेस की दुनिया में सबसे बड़ी गलती यह है कि लोग खुद को शहंशाह समझने लगते हैं जबकि उनकी हैसियत एक प्यादे जितनी भी नहीं होती। अल रीस और जैक ट्राउट कहते हैं कि मार्केटिंग कोई प्यार-मोहब्बत का खेल नहीं है, यह शुद्ध खून-खराबे वाली जंग है। और किसी भी जंग को जीतने का पहला उसूल यह है कि आपको पता होना चाहिए कि आप खड़े कहाँ हैं। क्या आप मार्केट के 'लीडर' हैं, 'चैलेंजर' हैं या फिर 'फ्लैंक्र' यानी साइड से हमला करने वाले?

मान लीजिए आप मोहल्ले की एक छोटी सी किराने की दुकान चलाते हैं और अचानक आपका मन करता है कि आप रिलायंस रिटेल या एमेजॉन को टक्कर देंगे। भाई साहब, यह हिम्मत नहीं, यह खुदकुशी है। इसे कहते हैं बिना हथियार के टैंक के सामने खड़े हो जाना। अगर आप नंबर १ नहीं हैं, तो लीडर की तरह बर्ताव करना बंद कीजिए। लीडर का काम होता है 'डिफेंसिव वॉरफेयर' खेलना, यानी अपनी गद्दी बचाना। अगर आप लीडर नहीं हैं, तो आपको 'ऑफेंसिव' यानी हमलावर मोड में आना होगा, लेकिन वहाँ भी एक पेंच है।

जरा सोचिए, हमारे देश में जब कोई नई कोला ड्रिंक आती है, तो वह सीधे कोका-कोला या पेपसी से भिड़ने की कोशिश करती है। वह सोचते हैं कि हम उनसे सस्ता बेचेंगे और लोग हमें सिर पर बिठा लेंगे। अरे सर, कोका-कोला के पास इतना पैसा है कि वह विज्ञापन के धुएं में आपको उड़ा देगा। असली समझदारी इसमें है कि आप यह देखें कि लीडर कहाँ कमजोर है।

इसे एक रियल लाइफ उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपके शहर में एक बहुत बड़ा और मशहूर जिम है जहाँ सब जाते हैं। अब आप भी अपना जिम खोलना चाहते हैं। अगर आप वही मशीनें और वही म्यूजिक लगाएंगे जो वह बड़ा जिम लगा रहा है, तो आप हार जाएंगे। वह आपसे पुराना है, उसके पास ज्यादा मेंबर हैं और ज्यादा रसूख है। यहाँ सरकाज्म यह है कि आप उसके सामने 'डिस्काउंट' का बोर्ड लगाकर खुद को मार्केट का मसीहा समझते हैं, जबकि असल में आप अपनी बर्बादी का काउंटडाउन शुरू कर रहे होते हैं।

मार्केटिंग वॉरफेयर कहता है कि अपनी ताकत को पहचानो। अगर आप छोटे हैं, तो छोटे ही रहिए और 'गोरिल्ला' युद्ध लड़िए। ऐसी जगह पर दुकान खोलिए जहाँ बड़ा खिलाड़ी पहुँच ही न पाए। ऐसी सर्विस दीजिए जो वह बड़ा हाथी चाहकर भी न दे सके। जब आप अपनी पोजीशन समझ लेते हैं, तो आप फालतू की लड़ाइयों में अपनी एनर्जी और पैसा बर्बाद नहीं करते। ज्यादातर इंडियन स्टार्टअप्स इसलिए डूब जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि बर्निंग कैश और बड़े-बड़े होर्डिंग्स उन्हें लीडर बना देंगे। पर सच तो यह है कि बिना सही स्ट्रेटेजी के आप सिर्फ एक मोटे टारगेट हैं जिस पर कोई भी बड़ा शिकारी आसानी से निशाना लगा सकता है।

इसलिए अगली बार जब आप अपनी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बनाएं, तो आईने में अपनी कंपनी की शक्ल देखें और खुद से पूछें कि क्या मैं वाकई इस लड़ाई के लायक हूँ? कहीं मैं चूहा होकर बिल्ली के कान काटने की कोशिश तो नहीं कर रहा?


Lesson : दुश्मन की ताकत में ही उसकी कमजोरी ढूंढें

जंग का दूसरा सबसे बड़ा उसूल यह है कि सामने वाले की छाती पर वार करने के बजाय उसकी पीठ के उस हिस्से को खोजें जहाँ उसने कवच नहीं पहना है। अल रीस और जैक ट्राउट कहते हैं कि अगर आप नंबर २ या नंबर ३ खिलाड़ी हैं, तो आपकी पूरी लाइफ का एक ही मिशन होना चाहिए और वह है लीडर की कमजोरी का फायदा उठाना। लेकिन यहाँ एक ट्विस्ट है। आपको उसकी किसी भी रैंडम कमजोरी पर हमला नहीं करना है, बल्कि उसकी उस कमजोरी को पकड़ना है जो उसकी 'ताकत' से ही निकलती है।

सुनने में थोड़ा अजीब लग रहा है? चलिए इसे एक मजेदार उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपके शहर में एक बहुत पुरानी और मशहूर मिठाई की दुकान है। उनकी ताकत क्या है? उनकी साख, उनका बड़ा नाम और उनके यहाँ लगने वाली भारी भीड़। अब आप उनके सामने अपनी नई दुकान खोलते हैं। अगर आप भी वही पुरानी स्टाइल की मिठाई बनाएंगे, तो लोग कहेंगे कि भाई जब असली माल वहाँ मिल रहा है तो तेरे पास क्यों आएं?

आप सोचते हैं कि आप ज्यादा शक्कर डालकर या सुंदर डिब्बे देकर उन्हें हरा देंगे। नहीं सर, आप उनकी ताकत को ही उनकी मुसीबत बना दीजिए। उनकी ताकत है 'भीड़' और 'पुरानापन'। आप अपनी मार्केटिंग में कहिए कि हमारे यहाँ कोई भीड़ नहीं है, आपको लाइन में नहीं लगना पड़ेगा और हमारी मिठाइयां आज के जमाने के हिसाब से 'लो-कैलोरी' हैं। आपने उनकी भीड़ को 'असुविधा' बना दिया और उनके पुरानेपन को 'पुराने जमाने की सोच' साबित कर दिया।

मार्केटिंग वॉरफेयर में इसे 'ऑफेंसिव वॉर' कहते हैं। जब कोका-कोला ने खुद को 'ओरिजिनल' और 'क्लासिक' कहना शुरू किया, तो पेप्सी ने क्या किया? उन्होंने सीधे पेप्सी को 'न्यू जनरेशन' की ड्रिंक घोषित कर दिया। उन्होंने कोका-कोला की सबसे बड़ी ताकत यानी उसकी 'विरासत' को ही उसकी कमजोरी बना दिया कि यह तो तुम्हारे दादा-परदादा पीते थे, तुम तो कूल और जवान हो, तुम पेप्सी पियो।

इंडिया में भी यही होता है। जब बड़े बैंक अपनी हजारों शाखाओं और पुराने भरोसे की बात करते हैं, तो नए जमाने के फिनटेक स्टार्टअप्स कहते हैं कि हमें आपकी फिजिकल ब्रांच की जरूरत ही नहीं है। हम आपके मोबाइल में हैं, बिना किसी झंझट के। उन्होंने बैंक की विशालकाय मशीनरी को 'स्लो और थकाऊ' साबित कर दिया।

अगर आप भी अपने कॉम्पिटिटर से लड़ रहे हैं, तो यह मत देखिए कि वह कितना बड़ा है। यह देखिए कि वह कितना भारी और सुस्त है। जो जितना बड़ा होता है, उसे मुड़ने में उतनी ही तकलीफ होती है। वह अपनी इमेज के पिंजरे में कैद होता है। वह कुछ नया करने से डरता है क्योंकि उसे अपना पुराना साम्राज्य डूबने का डर होता है। आप इसी डर का फायदा उठाइए।

पर याद रहे, हमला हमेशा एक छोटे से पॉइंट पर होना चाहिए। अगर आप हर तरफ से हमला करेंगे, तो आप खुद बिखर जाएंगे। एक ही तीर चलाओ, पर ऐसा चलाओ कि सीधा कलेजे के पार हो जाए। अपनी मार्केटिंग को इतना धारदार बनाओ कि ग्राहक को लगे कि लीडर के पास जाना मतलब अपनी बेइज्जती कराना है।

असली जंग दिमाग में लड़ी जाती है, मार्केट के गल्ले पर नहीं। अगर आपने ग्राहक के दिमाग में यह बैठा दिया कि आपका कॉम्पिटिटर 'बीता हुआ कल' है, तो आप जीत गए। पर अगर आप सिर्फ उसके पीछे-पीछे भागते रहे, तो आप सिर्फ एक सस्ती कॉपी बनकर रह जाएंगे जिसे दुनिया कभी याद नहीं रखेगी।


Lesson : छोटे बनो पर खोटे बनो - गोरिल्ला और फ्लैंकिंग का जादू

अगर आप मार्केट के सबसे बड़े खिलाड़ी नहीं हैं, तो सीधे टकराना छोड़ दीजिए। अल रीस और जैक ट्राउट कहते हैं कि एक छोटा सा पत्थर भी बड़े पहाड़ को हिला सकता है, बस उसे सही जगह मारना आना चाहिए। इसे कहते हैं 'फ्लैंकिंग' यानी दुश्मन के बगल से निकलकर पीछे से वार करना। यह उन लोगों के लिए है जो अभी बड़े तो नहीं हुए हैं, पर जिनके पास दिमाग बहुत तेज है।

फ्लैंकिंग का असली मतलब है ऐसी जगह पर दुकान सजाना जहाँ किसी का ध्यान ही न गया हो। मान लीजिए आप एक नया स्मार्टफोन ब्रांड लॉन्च करना चाहते हैं। अगर आप एप्पल या सैमसंग जैसे फीचर्स और उसी प्राइस पर बेचेंगे, तो जनता आपको भाव भी नहीं देगी। सरकाज्म यह है कि आप सोचते हैं कि आप 'बजट फ्लैगशिप' बोलकर दुनिया जीत लेंगे, जबकि हकीकत में आप सिर्फ एक और भीड़ का हिस्सा बन रहे होते हैं। फ्लैंकिंग तब होती है जब आप कहें कि मेरा फोन सिर्फ और सिर्फ 'कंटेंट क्रिएटर्स' के लिए है या यह दुनिया का सबसे 'मजबूत' फोन है जो पहाड़ से गिरने पर भी नहीं टूटेगा। आपने एक ऐसा कोना पकड़ लिया जहाँ बड़े ब्रांड्स का ध्यान नहीं था।

और अगर आप बहुत ही छोटे हैं, जैसे कि एक लोकल स्टार्टअप या फ्रीलांसर, तो आपके लिए 'गोरिल्ला वॉरफेयर' ही इकलौता सहारा है। गोरिल्ला जंग का सबसे बड़ा नियम है - 'कभी भी मैदान छोड़कर भागने के लिए तैयार रहो'। इसका मतलब यह नहीं कि आप डरपोक हैं, बल्कि इसका मतलब है कि आप इतने फुर्तीले हैं कि जब तक बड़ा ब्रांड अपनी मीटिंग खत्म करके कोई फैसला लेगा, तब तक आप अपना काम करके गायब हो चुके होंगे।

इसे एक देसी उदाहरण से समझते हैं। आपके शहर में एक बहुत बड़ी मिठाई की चैन होगी। वह करोड़ों का विज्ञापन करते हैं। अब आप एक छोटा सा स्टार्टअप शुरू करते हैं जो सिर्फ 'शुगर-फ्री' और 'ऑर्गेनिक' मिठाइयां घर-घर डिलीवर करता है। आप उनके शोरूम के सामने अपनी दुकान नहीं खोलते, बल्कि आप सिर्फ इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के जरिए अपनी कम्युनिटी बनाते हैं। यह गोरिल्ला वॉरफेयर है। आप इतने छोटे हैं कि वह बड़ी कंपनी आपको कुचलने के लिए अपना वक्त बर्बाद नहीं करेगी, और यही आपकी सबसे बड़ी जीत है।

अक्सर लोग गलती यह करते हैं कि जैसे ही थोड़ा सा मुनाफा होता है, वह बड़ी कंपनियों की नकल करने लगते हैं। वह ऑफिस बड़ा कर लेते हैं, फालतू का स्टाफ रख लेते हैं और खुद को लीडर समझने की भूल कर बैठते हैं। याद रखिए, जैसे ही आप 'बड़े' दिखने की कोशिश करेंगे, आप सुस्त हो जाएंगे। और सुस्त शिकार को मारना सबसे आसान होता है।

मार्केटिंग वॉरफेयर की इस पूरी कहानी का निचोड़ यह है कि बिजनेस को एक ठंडी कोल्ड वॉर की तरह लें। अपनी इमोशंस को घर पर छोड़कर आएं। अगर आप हार रहे हैं, तो पीछे हट जाइए और नई जगह से हमला कीजिए। अगर आप जीत रहे हैं, तो रुकिए मत, अपनी पोजीशन को और मजबूत कीजिए। यह दुनिया सिर्फ उन्हीं को याद रखती है जो अंत तक मैदान में टिके रहते हैं, चाहे वह किसी भी तरीके से टिके हों।


तो दोस्तों, क्या आप भी अपने कॉम्पिटिटर के सामने सीधे जाकर सर फोड़ रहे हैं या फिर कोई चालाकी वाली स्ट्रेटेजी बना रहे हैं? आज ही अपनी बिजनेस पोजीशन को पहचानिए और तय कीजिए कि आप लीडर हैं या गोरिल्ला। अगर यह आर्टिकल आपकी आंखें खोलने के लिए काफी था, तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो बिना किसी प्लान के अपना स्टार्टअप चलाने की कोशिश कर रहा है। नीचे कमेंट में बताएं कि आपके बिजनेस का सबसे बड़ा दुश्मन कौन है?

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