Maximum Achievement (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो किस्मत को कोसते हुए अपनी फटी हुई लाइफ को सिलने की कोशिश कर रहे हैं? अगर हाँ तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी का जश्न मना रहे हैं। ब्रायन ट्रेसी की मैक्सिमम अचीवमेंट पढ़े बिना आप अपनी छिपी हुई ताकतों को कचरे के डिब्बे में डाल रहे हैं और दुनिया को लग रहा है कि आप बहुत बिजी हैं। इस आर्टिकल में हम उन ३ पावरफुल लेसन्स की बात करेंगे जो आपकी सोई हुई किस्मत को लात मारकर जगा देंगे।


Lesson : कंट्रोल का कानून और आपकी लाइफ का रिमोट

क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी लाइफ का रिमोट किसके हाथ में है? अगर आपका जवाब है 'किस्मत', 'पड़ोसी का लड़का' या 'ऑफिस का खडूस बॉस', तो भाई साहब आप अपनी लाइफ की टैक्सी की पिछली सीट पर बैठकर चिल्ला रहे हैं जबकि ड्राइवर कोई और है। ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि आप अपनी लाइफ के बारे में उतना ही खुश महसूस करते हैं जितना आप अपनी लाइफ पर कंट्रोल महसूस करते हैं। इसे 'लॉ ऑफ कंट्रोल' कहते हैं।

अब ज़रा सोचिए, सुबह अलार्म बजता है और आप उसे पाँच बार स्नूज़ करते हैं। यहाँ आपने अपनी सुबह का कंट्रोल उस छोटे से बटन को दे दिया। फिर आप ऑफिस पहुँचते हैं और आपका बॉस आप पर चिल्ला देता है। अब आपका पूरा दिन खराब हो गया क्योंकि आपने अपनी खुशी की चाबी उस इंसान को दे दी जिसे शायद खुद नहीं पता कि वो क्या कर रहा है। यह तो वही बात हुई कि आपके घर का एसी (AC) बाहर खड़ा कोई अजनबी कंट्रोल कर रहा है। वो चाहे तो आपको ठंड में जमा दे और चाहे तो गर्मी में भून दे।

ह्यूमर की बात ये है कि हम अपनी नाकामी के लिए पूरी दुनिया को दोषी ठहराते हैं सिवाय खुद के। 'अरे भाई, वो तो शुक्र है कि ट्रैफिक जाम था वरना मैं तो टाइम पर पहुँच ही जाता!' या 'मेरी किस्मत ही खराब है, वरना मैं तो आज करोड़पति होता!' सच तो ये है कि जब आप कहते हैं कि "मेरी लाइफ में जो हो रहा है उसका जिम्मेदार मैं हूँ", तब आप ड्राइवर की सीट पर बैठते हैं।

असली सक्सेस तब शुरू होती है जब आप अपनी शिकायतों का 'पिकनिक' मनाना बंद कर देते हैं। अगर आप अपनी लाइफ की हर छोटी-बड़ी चीज़ की जिम्मेदारी नहीं ले रहे, तो आप बस एक पैसेंजर हैं जो बिना टिकट के सफर कर रहा है और जिसे कभी भी धक्का मारकर उतारा जा सकता है। अपनी भावनाओं और अपने फैसलों का चार्ज खुद लीजिए, वरना लोग आपको अपनी धुनों पर नचाते रहेंगे और आप सिर्फ एक 'सांस्कृतिक प्रोग्राम' बनकर रह जाएंगे।


Lesson : सेल्फ कांसेप्ट और आपके दिमाग का फिल्टर

क्या आपने कभी गौर किया है कि कुछ लोग शीशे के सामने खड़े होकर खुद को 'अमिताभ बच्चन' समझते हैं और कुछ लोग खुद को 'फटी हुई बनियान'? ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि आपकी लाइफ वैसी नहीं होती जैसी दुनिया है, बल्कि वैसी होती है जैसा आप खुद को अंदर से देखते हैं। इसे कहते हैं 'सेल्फ कांसेप्ट'। यह आपके दिमाग का वो सॉफ्टवेयर है जो यह तय करता है कि आप लाइफ में 'अपडेट' होंगे या 'हैंग' होकर रह जाएंगे।

ज़रा सोचिए, अगर आप बचपन से खुद को यह समझा रहे हैं कि "भाई, मैथ्स तो अपने बस की बात नहीं है", तो यकीन मानिए कैलकुलेटर भी आपके हाथ में आकर शर्मा जाएगा। आपका दिमाग एक वफादार नौकर की तरह है। अगर आप उसे बोलेंगे कि "मैं तो फेल होने के लिए ही पैदा हुआ हूँ", तो वो पूरी मेहनत करेगा आपको फेल करवाने में। वो आपको ऐसे आइडिया देगा कि आप एग्जाम से एक रात पहले पूरी वेब सीरीज देख डालें। यह एक तरह का 'सेल्फ सबोटाज' है जिसे हम बड़े प्यार से 'किस्मत' का नाम दे देते हैं।

ह्यूमर की बात ये है कि हम अपनी कमियों को बड़े गर्व से बताते हैं जैसे कोई मेडल मिला हो। "अरे यार, मैं तो बहुत भुलक्कड़ हूँ" या "मुझे तो गुस्सा बहुत जल्दी आता है"। भाई साहब, ये कोई टैलेंट नहीं है, ये आपके दिमाग का वो कचरा है जिसे आपने कभी साफ ही नहीं किया। आप वही बनते हैं जो आप अपने बारे में 'बिलीव' करते हैं। अगर आप खुद को एक लूज़र की तरह ट्रीट करेंगे, तो दुनिया आपको 'रेड कार्पेट' बिछाकर स्वागत नहीं करने वाली।

असली बदलाव तब आता है जब आप अपने इस पुराने और घिसे हुए 'सॉफ्टवेयर' को डिलीट मारते हैं। अपनी काबिलियत पर शक करना बंद कीजिए क्योंकि आपसे ज्यादा शक तो पड़ोसी भी नहीं करते। जब आप अपनी नजरों में अपनी वैल्यू बढ़ाते हैं, तो आपकी बाहरी दुनिया की वैल्यू अपने आप बढ़ने लगती है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे गंदे चश्मे से दुनिया धुंधली दिखती है, दुनिया खराब नहीं है, बस आपका चश्मा यानी आपका 'सेल्फ कांसेप्ट' गंदा है। उसे साफ करिए और फिर देखिए कि आप कितने पावरफुल हैं।


Lesson : क्लैरिटी का जादू और आपके गोल्स की रडार

क्या आपने कभी बिना एड्रेस वाली चिट्ठी पोस्ट की है? अगर हाँ, तो शायद वो पोस्ट ऑफिस के डस्टबिन में ही मिलेगी। ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि दुनिया के ९५ परसेंट लोग बिना एड्रेस वाली चिट्ठी की तरह जी रहे हैं। उनके पास इच्छाएं तो बहुत हैं जैसे 'मुझे अमीर बनना है' या 'मुझे पतला होना है', लेकिन उनके पास कोई क्लैरिटी नहीं है। भाई साहब, 'अमीर बनना' कोई गोल नहीं है, ये तो बस एक हसीन सपना है जो सुबह उठते ही गायब हो जाता है।

ज़रा सोचिए, आप एक टैक्सी में बैठते हैं और ड्राइवर पूछता है कि "कहाँ जाना है?" और आप कहते हैं कि "बस कहीं भी ले चलो जहाँ अच्छी हवा आती हो"। ड्राइवर आपको पागल समझकर वहीं उतार देगा या फिर पूरे शहर का चक्कर लगवाकर आपका बटुआ खाली कर देगा। लाइफ भी बिल्कुल वैसी ही है। अगर आपको यह नहीं पता कि आपको अगले ३ महीने में क्या हासिल करना है, तो आप बस दूसरों के गोल्स पूरा करने के लिए 'किराए के मजदूर' बनकर रह जाएंगे।

ह्यूमर की बात ये है कि हम शॉपिंग करने से पहले ३ घंटे रिसर्च करते हैं कि कौन सा फोन लेना है या कौन सी शर्ट अच्छी लगेगी, लेकिन अपनी लाइफ के अगले ५ साल के लिए हमारे पास ३ मिनट का भी प्लान नहीं होता। हम सोचते हैं कि "देख लेंगे जो होगा", और यकीन मानिए जो होता है वो अक्सर हमें पसंद नहीं आता। क्लैरिटी का मतलब है कि आपके पास कागज पर लिखा हुआ एक प्लान होना चाहिए। ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि जो चीजें कागज पर नहीं लिखीं, वो सिर्फ 'विश' (Wish) हैं, 'गोल' नहीं।

जब आपके पास क्लियर गोल्स होते हैं, तो आपका दिमाग एक 'मिसाइल' की तरह काम करता है। वो फालतू की चीजों को नजरअंदाज कर देता है और सिर्फ अपने टारगेट पर फोकस करता है। अगर आप अभी भी अंधेरे में तीर चला रहे हैं, तो सावधान हो जाइए क्योंकि वो तीर घूमकर आपको ही लग सकता है। अपनी लाइफ का ब्लूप्रिंट आज ही तैयार कीजिए, वरना आप किसी और के ब्लूप्रिंट का हिस्सा बनकर रह जाएंगे जिसे आपकी कोई फिक्र नहीं है।


दोस्तो, 'मैक्सिमम अचीवमेंट' सिर्फ एक किताब नहीं है, यह आपके सोए हुए 'सुपरहीरो' को जगाने का एक अलार्म है। हमने सीखा कि अपनी लाइफ का रिमोट अपने हाथ में लेना होगा, अपने दिमाग के पुराने सॉफ्टवेयर को अपडेट करना होगा और अपने लक्ष्यों को कागज पर उतारना होगा। अगर आप आज भी वही कर रहे हैं जो कल तक कर रहे थे, तो आपको आज भी वही मिलेगा जो कल तक मिल रहा था।

क्या आप अपनी लाइफ की ड्राइवर सीट संभालने के लिए तैयार हैं या अभी भी 'किस्मत' के भरोसे पिछली सीट पर ही बैठना चाहते हैं? नीचे कमेंट में अपना सबसे बड़ा 'एक गोल' लिखिए जिसे आप अगले ९० दिनों में पूरा करना चाहते हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो अपनी लाइफ से हमेशा शिकायत करता रहता है, शायद उसकी लाइफ का रिमोट भी उसे वापस मिल जाए।

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