अगर आपकी डेस्क और दिमाग दोनों कबाड़खाने जैसे दिखते हैं तो मुबारक हो आप अपनी सक्सेस को खुद ही लात मार रहे हैं। बिना सिस्टम के गधों वाली मेहनत करके आप सिर्फ स्ट्रेस कमा रहे हैं और असली ग्रोथ आपके हाथ से फिसल रही है।
पेश है जेफ ओल्सन की किताब द एजाइल मैनेजर्स गाइड टू गेटिंग ऑर्गनाइज्ड से ३ ऐसे पावरफुल लेसन्स जो आपके काम करने के पुराने और थकाऊ तरीके को पूरी तरह बदल देंगे।
Lesson : क्लटर का कचरा साफ करो और असली काम पकड़ो
क्या आपकी डेस्क ऐसी दिखती है जैसे वहां किसी ने छोटा सा बम फोड़ दिया हो। चारों तरफ फालतू की फाइल्स, पुराने पेन और वो अधखाया बिस्किट का पैकेट। अगर हां, तो जेफ ओल्सन कहते हैं कि आप सिर्फ अपनी डेस्क नहीं बल्कि अपना करियर भी गंदा कर रहे हैं। क्लटर यानी बिखराव सिर्फ जगह नहीं घेरता, यह आपके दिमाग की कीमती प्रोसेसिंग पावर को भी चाट जाता है। एक एवरेज मैनेजर अपना आधा समय उन चीजों को ढूंढने में बिता देता है जो उसकी आंखों के सामने ही कहीं दफन होती हैं। यह बहुत शर्म की बात है कि आप दुनिया बदलने चले हैं और आपको अपनी खुद की चाबी नहीं मिल रही।
जेफ ओल्सन हमें समझाते हैं कि ऑर्गनाइज्ड होने का मतलब सजावट करना नहीं है। इसका मतलब है हर उस चीज को लात मारना जो आपके गोल के बीच में आ रही है। अगर आपकी ईमेल इनबॉक्स में ५००० अनपढ़ मेल्स पड़ी हैं, तो आप मैनेज नहीं कर रहे, आप बस डूब रहे हैं। लेखक का कहना है कि एक असली एजाइल मैनेजर अपनी प्रायोरिटी को शीशे की तरह साफ रखता है। उसे पता होता है कि कौन सा काम उसे प्रमोशन दिलाएगा और कौन सा काम बस वक्त की बर्बादी है। सार्केज्म की बात यह है कि हम अक्सर उन फालतू मीटिंग्स में सबसे पहले पहुंचते हैं जिनका कोई एजेंडा ही नहीं होता, लेकिन अपने फ्यूचर के प्लान बनाने के लिए हमारे पास ५ मिनट भी नहीं होते।
मान लीजिए आप एक प्रोजेक्ट मैनेजर हैं। आपकी टीम आपसे पूछ रही है कि अगला कदम क्या है। लेकिन आप अपनी डायरी ढूंढ रहे हैं जिसमें आपने पिछले हफ्ते कुछ नोट्स लिखे थे। अब आपकी टीम आपको देख रही है और आप अपनी मेज के नीचे झांक रहे हैं। क्या यह लीडरशिप है। बिल्कुल नहीं। यह एक कॉमेडी सर्कस है जिसके जोकर आप खुद बन चुके हैं। ओल्सन का मंत्र सिंपल है: अगर कोई चीज काम की नहीं है, तो उसे फेंक दो या उसे किसी और को दे दो। अपनी आंखों के सामने सिर्फ वही रखो जो आज खत्म करना जरूरी है।
जब आप क्लटर कम करते हैं, तो आपके दिमाग को सांस लेने की जगह मिलती है। आपको पता चलता है कि असली काम क्या है। अक्सर हम बिजी दिखने के चक्कर में उन कामों को पकड़ लेते हैं जो आसान होते हैं लेकिन जिनसे कोई बड़ा रिजल्ट नहीं निकलता। इसे ओल्सन क्लटर ऑफ माइंड कहते हैं। फालतू की चिंताएं, दूसरों की गॉसिप और वो काम जो आपके रोल का हिस्सा ही नहीं हैं, उन्हें हटाना ही ऑर्गेनाइजेशन की पहली सीढ़ी है। तो आज ही अपनी डेस्क और अपने दिमाग का कचरा डस्टबिन के हवाले कीजिए। तभी आप उस ग्रोथ को देख पाएंगे जो इस कबाड़ के नीचे छुपी हुई थी।
Lesson : विलपावर का भरोसा छोड़ो और सॉलिड सिस्टम बनाओ
अगर आपको लगता है कि आपकी इच्छाशक्ति यानी विलपावर आपको दुनिया का सबसे बड़ा मैनेजर बना देगी, तो आप किसी मीठी गलतफहमी में जी रहे हैं। जेफ ओल्सन बड़े प्यार से समझाते हैं कि विलपावर एक बैटरी की तरह है जो सुबह फुल होती है और लंच तक आते-आते फुस्स हो जाती है। शाम को जब आपको असली बड़े फैसले लेने होते हैं, तब आपका दिमाग बस यह सोच रहा होता है कि डिनर में पनीर टिक्का खाऊं या दाल मखनी। ओल्सन का कहना है कि एक असली एजाइल मैनेजर अपनी मर्जी के भरोसे नहीं बैठता, वह एक ऐसा सिस्टम खड़ा करता है जो उसे न चाहते हुए भी सही काम करने पर मजबूर कर दे।
सोचिए आप जिम जाने का फैसला करते हैं। पहले दिन जोश में आप सुबह ५ बजे उठते हैं। दूसरे दिन बारिश हो जाती है और आपकी विलपावर रजाई के अंदर दुबक कर सो जाती है। लेकिन अगर आपका सिस्टम ऐसा हो कि आपके जिम के कपड़े रात को ही आपके जूतों के पास रखे हों और आपकी अलार्म घड़ी दूसरे कमरे में चिल्ला रही हो, तो आपको न चाहते हुए भी बेड छोड़ना पड़ेगा। यही फर्क है एक लूजर और एक सिस्टम वाले मैनेजर में। ऑफिस में भी हम अक्सर सोचते हैं कि हम सब कुछ याद रख लेंगे। क्या आप वाकई इतने बड़े कंप्यूटर हैं। आपकी याददाश्त पर भरोसा करना वैसा ही है जैसे किसी नेता के वादे पर यकीन करना। दोनों ही वक्त आने पर धोखा दे जाते हैं।
जेफ ओल्सन कहते हैं कि हर उस काम के लिए एक फिक्स्ड रूटीन या प्रोसेस बनाओ जो बार-बार होता है। अगर आपको अपनी टीम की रिपोर्ट देखनी है, तो उसके लिए एक पक्का समय और जगह तय होनी चाहिए। ऐसा नहीं कि जब मन किया तब ईमेल खोल लिया और फिर घंटों तक फालतू के रिप्लाई करते रहे। सार्केज्म यह है कि हम खुद को बहुत बिजी समझते हैं लेकिन असल में हम सिर्फ अपनी अव्यवस्था का शिकार होते हैं। एक अच्छा सिस्टम आपको उन छोटे-छोटे फैसलों से बचाता है जो आपकी दिमागी ऊर्जा को चूस लेते हैं। जब आपका सिस्टम मजबूत होता है, तो आपको यह सोचने की जरूरत नहीं पड़ती कि अब क्या करना है। आपका कैलेंडर आपको बताता है कि भाई अब यह काम निपटाओ।
मान लीजिए आपकी टीम में हर कोई अपनी मर्जी से काम कर रहा है। कोई व्हाट्सएप पर अपडेट दे रहा है, कोई ईमेल पर और कोई कैंटीन में मिलते वक्त। यह कोहराम है, मैनेजमेंट नहीं। एक एजाइल मैनेजर एक सिंगल प्लेटफॉर्म या टूल बनाता है जहां सब कुछ ट्रैक होता है। इससे आपको बार-बार पूछना नहीं पड़ता कि काम कहां तक पहुंचा। ओल्सन का तर्क है कि ऑर्गेनाइजेशन का मतलब बोरिंग होना नहीं है, बल्कि आजादी पाना है। जब आपके पास एक काम करने वाला सिस्टम होता है, तभी आपके पास बड़े आइडियाज पर काम करने का वक्त बचता है। वरना आप पूरी जिंदगी बस छोटी-छोटी आग बुझाते रह जाएंगे और खुद कभी बड़ी मशाल नहीं बन पाएंगे।
Lesson : कल पर टालना छोड़ो और तुरंत फैसला लो
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो एक ईमेल का जवाब देने के लिए भी शुभ मुहूर्त का इंतज़ार करते हैं। जेफ ओल्सन कहते हैं कि एक मैनेजर की सबसे बड़ी दुश्मन उसकी अपनी सुस्ती नहीं, बल्कि उसका कंफ्यूजन है। हम अक्सर छोटे-छोटे फैसलों को 'बाद में देखूंगा' कहकर टाल देते हैं और फिर वो काम पहाड़ बनकर हमारे सिर पर गिरते हैं। ओल्सन का मानना है कि एक ऑर्गनाइज्ड मैनेजर वो नहीं है जिसके पास बहुत समय है, बल्कि वो है जो फैसला लेने में बिजली जैसी फुर्ती दिखाता है। अगर कोई काम दो मिनट से कम समय लेता है, तो उसे उसी वक्त निपटा दो वरना वो आपके दिमाग की बैकग्राउंड में किसी वायरस की तरह चलता रहेगा।
सोचिए आपकी टीम को आपसे एक छोटी सी मंजूरी चाहिए। आप कहते हैं कि मैं लंच के बाद बताऊंगा। लंच के बाद आप चाय का बहाना बनाते हैं। शाम को आपको याद आता है कि अरे वो तो रह ही गया। अब आपकी पूरी टीम हाथ पर हाथ धरे बैठी रही और प्रोजेक्ट एक दिन पीछे चला गया। क्या यह मैनेजमेंट है। यह तो आलस की पराकाष्ठा है। सार्केज्म की बात यह है कि हम खुद को 'परफेक्ट' दिखाने के चक्कर में इतने एनालिसिस में डूब जाते हैं कि लकवा मार जाता है यानी एनालिसिस पैरालिसिस। हम सोचते हैं कि जब तक बेस्ट आईडिया नहीं आएगा, तब तक कुछ नहीं करेंगे। और फिर अंत में हम वही घिसा-पिटा काम करते हैं जो हम पहले दिन कर सकते थे।
जेफ ओल्सन समझाते हैं कि एजाइल होने का असली मतलब है 'टच इट वन्स' यानी किसी भी कागज या ईमेल को सिर्फ एक बार छुओ। या तो उसे अभी खत्म करो, या उसे किसी और को सौंप दो, या उसे हमेशा के लिए डिलीट कर दो। उसे अपनी डेस्क पर सड़ने के लिए मत छोड़ो। ऑफिस में आधे से ज्यादा तनाव सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि हमने फैसलों का ढेर लगा रखा होता है। मान लीजिए आपकी अलमारी में दस साल पुराने कपड़े भरे हैं और आप हर रोज उन्हें हटाकर नए कपड़े ढूंढते हैं। क्या आप पागल नहीं कहलाएंगे। ऑफिस में भी हम वही कर रहे हैं। पुराने और पेंडिंग काम नए और जरूरी कामों का रास्ता रोक कर खड़े हैं।
ओल्सन का तर्क है कि ऑर्गेनाइजेशन का असली जादू आपकी स्पीड में है। जब आप तुरंत फैसला लेते हैं, तो आपकी टीम का हौसला बढ़ता है और काम का फ्लो बना रहता है। यह एक ऐसी स्किल है जो आपको भीड़ से अलग खड़ी कर देती है। एक मैनेजर के तौर पर आपका काम सिर्फ हुक्म चलाना नहीं, बल्कि रुकावटों को हटाना है। अगर आप खुद ही एक बड़ी रुकावट बन गए हैं, तो फिर भगवान ही आपका मालिक है। इसलिए आज से ही 'बाद में करेंगे' वाले कीड़े को मार डालिए। जो है, अभी है। फैसला लीजिए और आगे बढ़िए। यही वो सीक्रेट है जो आपको एक थके हुए क्लर्क से एक पावरफुल लीडर बना देगा।
दोस्तों, ऑर्गनाइज्ड होना कोई टैलेंट नहीं, बल्कि एक चुनाव है। जेफ ओल्सन की यह किताब हमें याद दिलाती है कि अगर हम अपने काम और समय को काबू में नहीं रखेंगे, तो काम हमें काबू करने लगेगा। क्या आप तैयार हैं अपनी डेस्क और अपनी जिंदगी से उस कचरे को साफ करने के लिए जिसने आपकी तरक्की रोक रखी है। आज ही एक छोटा सा कदम उठाइए, अपनी सबसे पुरानी पेंडिंग फाइल को डस्टबिन में डालिए या उस रुके हुए काम पर फैसला लीजिए। कमेंट्स में हमें बताएं कि आप अपनी ऑर्गेनाइजेशन की शुरुआत किस छोटे बदलाव से करेंगे। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसकी डेस्क देखकर आपको डर लगता है।
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