आप दिन रात मेहनत करके कस्टमर को भगवान की तरह पूज रहे हैं और वह फिर भी आपके कॉम्पिटिटर के पास भाग रहा है। बधाई हो आप अपनी मेहनत और पैसा दोनों कचरे के डिब्बे में डाल रहे हैं। रिचर्ड सी ह्वाइटली की यह किताब आपको आपकी इसी नाकामी का आईना दिखाएगी। चलिए समझते हैं वह ३ बड़े लेसन्स जो आपके डूबते हुए बिजनेस को बचा सकते हैं।
Lesson : कस्टमर को सिर पर मत चढ़ाओ, उसे अपना दोस्त बनाओ
अक्सर हमारे यहाँ कहा जाता है कि ग्राहक भगवान है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान को खुश करना कितना मुश्किल काम है। आप अपनी जान निकाल कर रख देते हैं और वह फिर भी दूसरे स्टोर पर डिस्काउंट के चक्कर में चला जाता है। रिचर्ड सी ह्वाइटली कहते हैं कि कस्टमर को भगवान मानकर उसे दूर से पूजना बंद करो। उसे अपना पार्टनर बनाओ। एक ऐसा दोस्त जिससे आप सच बोल सको और जो आपको सच बता सके।
सोचिए आप एक रेस्टोरेंट में जाते हैं। वेटर आपके पास आता है और बिल्कुल रोबोट की तरह रटा रटाया मेन्यू पढ़ देता है। क्या आपको वहां अपनापन लगेगा। बिल्कुल नहीं। अब दूसरी तरफ सोचिए। एक ढाबे वाला जो आपको नाम से जानता है। वह कहता है कि आज पनीर अच्छा नहीं है आप दाल तड़का खाइए। वह आपको धोखा नहीं दे रहा बल्कि वह आपके एक्सपीरियंस की जिम्मेदारी ले रहा है। यही तो पार्टनरशिप है। जो बिजनेस कस्टमर के साथ इमोशनल कनेक्शन नहीं बनाते वह बस एक ट्रांजेक्शन बनकर रह जाते हैं।
आजकल के दौर में डेटा ही सब कुछ है। लेकिन डेटा दिल की बात नहीं बताता। मान लीजिए आपकी एक कपड़े की दुकान है। आप हजार रुपए का कूपन भेजते हैं फिर भी कोई नहीं आता। क्यों। क्योंकि आपने कभी पूछा ही नहीं कि उन्हें चाहिए क्या। हो सकता है उन्हें आपका फिटिंग रूम पसंद न हो या आपके सेल्समैन का चेहरा देखकर उन्हें गुस्सा आता हो। ह्वाइटली कहते हैं कि टॉक यानी बड़ी बड़ी बातें करना आसान है लेकिन एक्शन लेना मुश्किल है।
एक्शन का मतलब है कस्टमर के साथ मिलकर प्रोडक्ट बनाना। अगर आप एक ऐप बना रहे हैं तो कोडिंग शुरू करने से पहले दस लोगों को चाय पर बुलाइए। उनसे पूछिए कि उन्हें क्या दिक्कत आ रही है। अगर आप उन्हें लगेगा कि उनकी सलाह मानी जा रही है तो वह आपके सेल्समैन बन जाएंगे। वह चार लोगों को और बताएंगे कि यह कंपनी हमारी सुनती है।
आजकल की दुनिया में लोग ब्रांड से नहीं बल्कि भरोसे से जुड़ते हैं। जब आप कस्टमर को पार्टनर बनाते हैं तो वह छोटे मोटे उतार चढ़ाव में आपका साथ नहीं छोड़ता। वह आपको सजेशन देता है न कि ट्विटर पर जाकर आपकी बुराई करता है। तो भाई साहब भगवान मत बनाइए क्योंकि भगवान तो मंदिर में भी मिल जाएंगे। बिजनेस में तो पार्टनर की जरूरत होती है जो कंधे से कंधा मिलाकर चले।
Lesson : सर्विस रिकवरी का जादू और कस्टमर का भरोसा
गलतियां तो इंसान से ही होती हैं और आपका बिजनेस भी इंसानों से ही चलता है। लेकिन मजे की बात यह है कि जब आप गलती करते हैं तो आपके पास एक सुनहरा मौका होता है। रिचर्ड सी ह्वाइटली कहते हैं कि सर्विस रिकवरी का मतलब सिर्फ माफी मांगना नहीं है बल्कि कस्टमर को यह महसूस कराना है कि वह आपके लिए कितना खास है।
मान लीजिए आपने ऑनलाइन एक चमचमाता हुआ फोन ऑर्डर किया। डिब्बा खुला तो अंदर से पुराना साबुन निकला। अब आपके तन बदन में आग लग गई होगी। आपने कस्टमर केयर को फोन किया और वहां से आवाज आई कि सर हम आपकी समस्या समझ रहे हैं। क्या सच में। वह बस एक स्क्रिप्ट पढ़ रहा है जिसे सुनकर आपका खून और खौलेगा। ह्वाइटली का कहना है कि यहीं पर असली खेल शुरू होता है।
अगर कंपनी उसी वक्त एक बंदा भेजकर नया फोन दे और साथ में एक छोटा सा गिफ्ट कार्ड भी दे दे तो क्या होगा। आपका गुस्सा पल भर में गायब हो जाएगा। आप दस लोगों को बताएंगे कि देखो भाई इनसे गलती हुई थी लेकिन इन्होंने दिल जीत लिया। यही है सर्विस रिकवरी का जादू। जब आप गिरकर उठते हैं और कस्टमर का हाथ थाम लेते हैं तो वह रिश्ता और भी मजबूत हो जाता है।
ज्यादातर कंपनियां अपनी गलतियों को कालीन के नीचे छुपा देती हैं। वह सोचती हैं कि अगर हम चुप रहेंगे तो कस्टमर भूल जाएगा। भाई साहब कस्टमर भूलता नहीं है वह बस दूसरे ब्रांड के पास चला जाता है। ह्वाइटली के हिसाब से एक्शन का मतलब है अपनी गलती को जिम्मेदारी के साथ मानना। अगर पिज्जा ठंडा आया है तो उसे फ्री कर देना केवल नुकसान नहीं है बल्कि वह एक इनवेस्टमेंट है उस कस्टमर के आने वाले दस सालों के ऑर्डर्स के लिए।
इंडिया में तो लोग इमोशनल होते हैं। अगर आपने एक बार उनकी बात सुन ली और उनकी परेशानी हल कर दी तो वह आपके लिए लड़ने को तैयार हो जाएंगे। सर्विस रिकवरी के लिए अपने एम्प्लॉई को पावर दीजिए। उन्हें यह मत कहिए कि हर चीज के लिए मैनेजर से पूछो। अगर वेटर को लगे कि सब्जी में नमक ज्यादा है तो उसे हक होना चाहिए कि वह उसे तुरंत बदल दे।
बिना किसी रुकावट के काम करना अच्छी बात है लेकिन रुकावट आने पर उसे जिस तरह आप संभालते हैं वही आपकी असली ब्रांड वैल्यू बनाता है। याद रखिए एक नाराज कस्टमर जो फिर से खुश हो गया है वह उस कस्टमर से ज्यादा वफादार होता है जिससे कभी कोई शिकायत ही नहीं थी। तो अपनी गलतियों से डरिए मत बस उन्हें सुधारने का जज्बा रखिए।
Lesson : एम्प्लॉई खुश तो कस्टमर खुश और आपका गल्ला भी खुश
रिचर्ड सी ह्वाइटली अपनी किताब में एक कड़वी सच्चाई बताते हैं। वह कहते हैं कि आप चाहे जितनी भी बड़ी बातें कर लें या मार्केटिंग पर करोड़ों खर्च कर दें। अगर आपका एम्प्लॉई दुखी है तो आपका कस्टमर कभी खुश नहीं हो सकता। सोचिए आप एक शोरूम में जाते हैं और वहां का सेल्समैन ऐसे बैठा है जैसे उसकी दुनिया लुट गई हो। आप उससे कुछ पूछते हैं और वह बिना आपकी तरफ देखे जवाब देता है। क्या आप वहां दोबारा जाएंगे। बिल्कुल नहीं। भले ही वहां दुनिया का सबसे अच्छा डिस्काउंट मिल रहा हो।
ह्वाइटली का कहना है कि एम्प्लॉई ही आपकी कंपनी का चेहरा होते हैं। अगर वे अंदर से खुश नहीं हैं तो वह मुस्कान नकली होगी और कस्टमर को यह तुरंत पता चल जाता है। इंडिया में अक्सर बॉस खुद को शहंशाह समझते हैं और एम्प्लॉई को गुलाम। वे चाहते हैं कि कस्टमर को तो राजा जैसा ट्रीटमेंट मिले लेकिन एम्प्लॉई को वे ढंग से पानी भी नहीं पूछते। यह फॉर्मूला कभी काम नहीं करता।
एक्शन लेने का मतलब है कि अपने स्टाफ को वह इज्जत और पावर देना जिससे वे खुद को मालिक समझें। अगर आपके ऑफिस का गार्ड भी मुस्कुराकर कस्टमर का स्वागत करता है तो समझ लीजिए आपने आधी जंग जीत ली है। एक खुश एम्प्लॉई अपनी तरफ से एक्स्ट्रा मेहनत करेगा ताकि कस्टमर का काम बन जाए। वह घड़ी नहीं देखेगा कि कब पांच बजेंगे और मैं घर भागूंगा। वह देखेगा कि कस्टमर की प्रॉब्लम कैसे सॉल्व होगी।
जरा सोचिए उस एयरलाइन के बारे में जहां स्टाफ हमेशा गुस्से में रहता है और उस छोटे से कैफे के बारे में जहां वेटर आपको देखकर सच में खुश होता है। फर्क केवल पैसे का नहीं बल्कि कल्चर का है। ह्वाइटली कहते हैं कि जब आप अपने एम्प्लॉई का ख्याल रखते हैं तो वे आपके कस्टमर का ख्याल रखते हैं। और जब कस्टमर का ख्याल रखा जाता है तो आपका बैंक बैलेंस अपने आप बढ़ता है।
तो भाई साहब अगर आप चाहते हैं कि आपका बिजनेस रॉकेट की तरह उड़े तो पहले अपने उन लोगों का हाथ थामिए जो आपके लिए जमीन पर काम कर रहे हैं। उन्हें ट्रेनिंग दीजिए उन्हें फैसले लेने की आजादी दीजिए और सबसे जरूरी उन्हें यह महसूस कराइए कि वे इस कंपनी का एक बहुत बड़ा हिस्सा हैं। जब टीम एक होकर खेलती है तो जीत पक्की होती है।
अंत में बस इतना ही कहूंगा कि बिजनेस कोई रॉकेट साइंस नहीं है। यह सिर्फ लोगों का लोगों के लिए काम करना है। अगर आप आज से ही इन बातों पर एक्शन लेंगे तो यकीन मानिए कल आपका ब्रांड सबसे आगे होगा। तो क्या आप आज से अपने कस्टमर को अपना पार्टनर बनाने के लिए तैयार हैं। नीचे कमेंट्स में जरूर बताएं कि आप पहला कदम क्या उठाएंगे।
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