क्या आपको सच में लगता है कि आप अपना बिज़नस चला रहे हैं? सच तो यह है कि आप अपने खुद के बिज़नस में सबसे सस्ते मजदूर बन चुके हैं। बिना सिस्टम के गधों वाली मेहनत करना बहादुरी नहीं बल्कि बेवकूफी है। क्या आप भी इसी जाल में फंसे रहना चाहते हैं?
आज हम माइकल गरबर की द ई मिथ रिविज़िटेड से वह ३ बड़े लेसन सीखेंगे जो आपके काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल देंगे।
Lesson : द ई मिथ - आप बिजनेसमैन हैं या सिर्फ एक मजदूर?
ज्यादातर लोग जो अपना खुद का काम शुरू करते हैं, वे एक बहुत बड़े धोखे का शिकार होते हैं। इसे ही माइकल गरबर द ई मिथ यानी एंटरप्रेन्योरियल मिथ कहते हैं। मान लीजिये आपको चाय बहुत अच्छी बनानी आती है। आपके दोस्त कहते हैं कि यार तेरे हाथ में तो जादू है, तू दुकान क्यों नहीं खोल लेता? आप जोश में आकर दुकान खोल लेते हैं। अब आप सुबह से रात तक बस चाय ही बना रहे हैं। बधाई हो! आप बिजनेसमैन नहीं बने, आपने बस अपने लिए एक नौकरी ढूंढ ली है जहाँ आपका बॉस दुनिया का सबसे खड़ूस आदमी है और वह आदमी आप खुद हैं।
यही सबसे बड़ी समस्या है। हमें लगता है कि अगर हमें कोई काम टेक्निकल लेवल पर आता है, तो हम उस काम का बिजनेस भी चला सकते हैं। यह वैसा ही है जैसे किसी को कोडिंग आती हो और वह सोचे कि वह अगली गूगल खड़ी कर देगा। भाई, कोडिंग करना और कंपनी चलाना दो अलग ग्रह की बातें हैं। जब आप अपनी दुकान पर खुद ही झाड़ू मार रहे हैं, खुद ही हिसाब लिख रहे हैं और खुद ही कस्टमर से चिक-चिक कर रहे हैं, तो आप बिजनेस ओनर नहीं बल्कि अपने ही बिजनेस के सबसे सस्ते और थके हुए कर्मचारी हैं।
एक असली एंटरप्रेन्योर वह होता है जो काम करता नहीं है, बल्कि काम करवाता है। लेकिन हमारे यहाँ क्या होता है? "अरे भाई, मेरे बिना तो पत्ता भी नहीं हिलता ऑफिस में!" लोग इसे गर्व से कहते हैं। सच तो यह है कि यह गर्व की बात नहीं, डूब मरने की बात है। अगर आपके बिना पत्ता नहीं हिल रहा, तो इसका मतलब है कि आपने बिजनेस नहीं, एक सर्कस खड़ा किया है जिसके जोकर आप खुद हैं। जिस दिन आप बीमार पड़े या छुट्टी पर गए, उस दिन आपका बिजनेस भी आईसीयू में पहुँच जाएगा।
मान लीजिये शर्मा जी ने एक समोसे की दुकान खोली। शर्मा जी समोसा तलने में एक्सपर्ट हैं। अब शर्मा जी पूरे दिन कड़ाही के सामने पसीना बहा रहे हैं। वह इतने बिजी हैं कि उन्हें यह देखने का समय ही नहीं है कि पड़ोस वाली दुकान वाला कम कीमत में ज्यादा चटनी दे रहा है। वह यह भी नहीं देख पा रहे कि उनके गल्ले से पैसे चोरी हो रहे हैं। क्यों? क्योंकि शर्मा जी को लगता है कि "मेरे जैसा समोसा कोई बना ही नहीं सकता!" यह ईगो ही छोटे बिजनेस को कभी बड़ा नहीं होने देती।
माइकल गरबर कहते हैं कि हर बिजनेस चलाने वाले के अंदर तीन लोग होते हैं। पहला है एंटरप्रेन्योर, जो भविष्य के सपने देखता है। दूसरा है मैनेजर, जो सब कुछ सलीके से रखना चाहता है। और तीसरा है टेक्नीशियन, जो असल में काम करता है। दिक्कत तब आती है जब आपके अंदर का टेक्नीशियन बाकी दोनों को मार देता है। आप बस काम में घुस जाते हैं और विजन गायब हो जाता है।
अगर आप भी सुबह से शाम तक बस "आग बुझाने" में लगे रहते हैं—कभी सप्लायर से लड़ रहे हैं, कभी स्टाफ को डांट रहे हैं—तो समझ जाइये कि आप ई मिथ के जाल में फंसे हैं। आप बिजनेस नहीं चला रहे, बिजनेस आपको चला रहा है। और यकीन मानिए, यह रास्ता आपको आजादी की तरफ नहीं बल्कि ब्लड प्रेशर की दवाइयों की तरफ ले जाएगा। असली खेल तब शुरू होता है जब आप उस कड़ाही से दूर हटकर यह सोचना शुरू करते हैं कि बिना मेरे वहां खड़े रहे, समोसा एकदम परफेक्ट कैसे बने।
Lesson : वर्किंग ऑन योर बिज़नेस, नॉट इन इट - आजाद होना सीखें
अक्सर छोटे बिज़नस चलाने वाले लोग एक बात बड़े गर्व से कहते हैं कि भाई हम तो चौबीस घंटे काम करते हैं। हमें तो चैन की नींद भी नहीं आती। माइकल गरबर कहते हैं कि अगर आप अपने बिज़नस के अंदर घुसकर काम कर रहे हैं, तो आप उसे कभी बढ़ा नहीं पाएंगे। आपको अपने बिज़नस के अंदर (IN) काम करने के बजाय, उस पर बाहर से (ON) काम करना सीखना होगा। इसका मतलब है कि आप खिलाड़ी नहीं, बल्कि कोच बनें।
सोचिये अगर विराट कोहली मैच के बीच में खुद ही पिच पर झाड़ू लगाने लगे, खुद ही टिकट बेचने लगे और खुद ही बाउंड्री पर पानी पिलाने लगे, तो क्या वह सेंचुरी मार पाएगा? बिल्कुल नहीं। यही हाल हमारे छोटे बिज़नस ओनर्स का है। वे समोसे तल रहे हैं, बिल काट रहे हैं और कस्टमर को सॉरी भी बोल रहे हैं। वे इतने बिजी हैं कि उन्हें यह सोचने का टाइम ही नहीं है कि अगले साल उनकी दस दुकानें कैसे होंगी।
जब आप बिज़नस के अंदर काम करते हैं, तो आप बस आज का सोचते हैं। आज कितने का गल्ला हुआ? आज कौन सा स्टाफ छुट्टी पर है? लेकिन जब आप बिज़नस पर काम करते हैं, तो आप सिस्टम बनाते हैं। आप यह सोचते हैं कि अगर मैं कल ऑफिस न आऊं, तो क्या काम रुक जाएगा? अगर जवाब हाँ है, तो दोस्त, आप एक जेल में बंद हैं और उस जेल की चाबी भी आपके पास ही है, बस आप उसे घुमाना नहीं चाहते।
मान लीजिये आपने एक मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान खोली। आप खुद पेचकस लेकर बैठ जाते हैं क्योंकि आपको लगता है कि आपसे अच्छा जैक कोई नहीं बदल सकता। अब आपके पास दस कस्टमर खड़े हैं और आप एक ही फोन में घुसे हुए हैं। बाकी नौ लोग बोर होकर दूसरी दुकान पर चले गए। यहाँ आपने क्या खोया? आपने एक बड़ा बिज़नस बनने का मौका खोया क्योंकि आप खुद को एक टेक्नीशियन से ऊपर नहीं उठा पाए।
असली बिज़नस ओनर वह है जो एक ऐसा सिस्टम बनाता है जहाँ एक कम पढ़ा-लिखा लड़का भी वही काम उसी परफेक्शन से कर सके जो आप करते हैं। आपको खुद को रिप्लेस करना होगा। माइकल गरबर कहते हैं कि आपका लक्ष्य एक ऐसा बिज़नस बनाना होना चाहिए जिसे आप किसी को भी बेच सकें या जो आपके बिना भी नोट छाप सके।
ज्यादातर लोग अपने बिज़नस के गुलाम होते हैं। वे छुट्टी पर जाते हैं तो फोन कान से चिपका रहता है। "अरे वो नीले वाले डब्बे में सामान रखा है देख ले", "अरे उस कस्टमर को डिस्काउंट मत देना।" भाई, अगर आप गोवा के बीच पर बैठकर भी ऑफिस की फाइलें सुलझा रहे हैं, तो आप छुट्टी पर नहीं, बस अपना दफ्तर शिफ्ट करके ले गए हैं।
बिज़नस पर काम करने का मतलब है—स्ट्रेटजी बनाना, मार्केटिंग पर ध्यान देना और यह देखना कि आपका ब्रांड लोगों के दिमाग में कैसे घुस रहा है। आपको आग बुझाने वाला नहीं, बल्कि आग रोकने वाला सिस्टम बनाना है। जब आप कड़ाही छोड़कर गल्ले पर बैठते हैं और फिर गल्ले को छोड़कर केबिन में बैठते हैं, तब जाकर आप एक असली एंटरप्रेन्योर बनते हैं। याद रखिये, दुनिया के सबसे अमीर लोग सबसे ज्यादा मेहनत नहीं करते, वे सबसे अच्छा सिस्टम बनाते हैं।
Lesson : द फ्रैंचाइज़ प्रोटोटाइप - बिज़नस को मशीन बनाना सीखें
क्या आपने कभी सोचा है कि मैकडोनाल्ड्स का बर्गर पूरी दुनिया में एक जैसा क्यों लगता है? क्या वहां का शेफ कोई खानदानी रसोइया है जिसे बहुत बड़ा अवॉर्ड मिला है? बिल्कुल नहीं। वहां तो उन्नीस साल के लड़के काम कर रहे होते हैं जिन्हें शायद घर पर चाय बनाना भी न आता हो। फिर भी हर बार वही टेस्ट, वही क्रिस्प और वही सर्विस कैसे मिलती है? इसे माइकल गरबर द फ्रैंचाइज़ प्रोटोटाइप कहते हैं।
असली बिज़नस वह है जिसे कोई भी चला सके। अगर आपका बिज़नस आपकी "खास काबिलियत" पर टिका है, तो आप कभी बड़े नहीं हो पाएंगे। आपको अपना बिज़नस एक ऐसी मशीन की तरह डिज़ाइन करना होगा जिसकी आप हजारों कॉपियां बना सकें। मान लीजिये आज आपकी एक दुकान है। अब आप यह सोचिये कि अगर मुझे कल ऐसी ही एक और दुकान मद्रास में खोलनी हो और मुझे वहां खुद न जाना पड़े, तो मुझे क्या करना होगा?
जवाब है—सिस्टम और प्रोसेस। आपको हर छोटे काम के लिए एक मैन्युअल तैयार करना होगा। सुबह शटर कितने बजे खुलेगा? काउंटर पर पोंछा कैसे लगेगा? कस्टमर को नमस्ते कैसे कहना है? पेमेंट कैसे लेनी है? यह सब कुछ लिखा होना चाहिए। जब सब कुछ सिस्टम पर होता है, तो स्टाफ आपकी मर्जी से नहीं, सिस्टम की मर्जी से चलता है।
हमारे यहाँ क्या होता है? "अरे छोटू, जरा देख तो वो सामान कहाँ रखा है?" छोटू कहता है, "साहब, वो तो रामू को पता है और रामू आज शादी में गया है।" अब साहब और छोटू मिलकर पूरा गोदाम छान रहे हैं क्योंकि किसी को पता ही नहीं कि सामान कहाँ है। यह कोई बिज़नस नहीं है, यह एक कन्फ्यूजन की दुकान है।
अगर आपके पास एक सिस्टम होता जहाँ हर रैक पर नंबर होता और हर सामान की एंट्री कंप्यूटर में होती, तो रामू के शादी में जाने से आपके बिज़नस को फर्क नहीं पड़ता। फ्रैंचाइज़ प्रोटोटाइप का मतलब है कि आप एक ऐसा मॉडल बनाएं जिसे कोई भी औसत दिमाग वाला इंसान चला सके। अगर आपको अपने बिज़नस को चलाने के लिए सुपरमैन जैसे स्टाफ की जरूरत पड़ रही है, तो आपका मॉडल ही खराब है। क्योंकि सुपरमैन मिलना मुश्किल है, और अगर मिल गया तो वह अपनी खुद की कंपनी खोल लेगा।
इसलिए, अपनी दुकान को एक लैब की तरह समझें। वहां एक्सपेरिमेंट्स करें, गलतियां सुधारें और फिर उन सुधारों को एक सिस्टम में बदल दें। जब आपका यह "प्रोटोटाइप" तैयार हो जाएगा, तब आप सच में आजाद होंगे। तब आप एक दुकान से दस और दस से सौ दुकानें बना पाएंगे।
दोस्त, जिंदगी बहुत छोटी है। क्या आप सच में अपनी पूरी जवानी बस बिल काटने और स्टाफ से बहस करने में बिताना चाहते हैं? द ई मिथ रिविज़िटेड हमें सिखाती है कि आज़ादी काम से भागने में नहीं, बल्कि काम को सिस्टम में ढालने में है। आज ही अपने आप से पूछिये—क्या मैं अपने बिज़नस का मालिक हूँ या उसका सबसे बड़ा नौकर?
अगर यह आर्टिकल आपकी आँखें खोलने में कामयाब रहा, तो इसे अपने उस दोस्त के साथ जरूर शेयर करें जो अपनी दुकान को छोड़कर कहीं जा नहीं पाता। नीचे कमेंट में बताएं कि आप अपने बिज़नस का कौन सा काम आज ही सिस्टम पर डालने वाले हैं। चलिए, साथ मिलकर खुद को आज़ाद करते हैं!
-----
अगर आप इस बुक की पूरी गहराई में जाना चाहते हैं, तो इस बुक को यहाँ से खरीद सकते है - Buy Now
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#BusinessGrowth #Entrepreneurship #SmallBusinessTips #SuccessMindset #SystemBuild
_
