The End of Marketing as We Know It (Hindi)


क्या आपको सच में लगता है कि मार्केटिंग का मतलब केवल सुंदर एड्स और भारी अवॉर्ड्स जीतना है? अगर हां, तो मुबारक हो, आप अपना पैसा नाले में बहा रहे हैं। बिना सेल्स वाली मार्केटिंग केवल एक महंगा शौक है जिसे पालकर आप खुद को बर्बाद कर रहे हैं।

इस आर्टिकल में हम कोका कोला के पूर्व मार्केटिंग हेड सर्जियो जायमन की किताब द एंड ऑफ मार्केटिंग एज वी नो इट से जानेंगे कि असली मार्केटिंग क्या है। यहाँ हम उन 3 बड़े लेसन्स पर बात करेंगे जो आपके बिजनेस और सेल्स को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल देंगे।


Lesson : मार्केटिंग का मतलब सिर्फ और सिर्फ सेल्स है

अगर आप सोचते हैं कि मार्केटिंग का मतलब सुंदर पेंटिंग्स बनाना या टीवी पर इमोशनल एड्स दिखाकर लोगों को रुलाना है, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। कोका कोला के पूर्व मार्केटिंग गुरु सर्जियो जायमन कहते हैं कि मार्केटिंग कोई आर्ट गैलरी नहीं है जहाँ लोग आकर आपकी क्रिएटिविटी की तारीफ करेंगे। मार्केटिंग का सीधा और सच्चा मतलब है ज्यादा से ज्यादा सामान बेचना, ज्यादा लोगों को बेचना, ज्यादा बार बेचना और ऊंचे दामों पर बेचना। अगर आपकी मार्केटिंग कैंपेन के बाद कंपनी के बैंक अकाउंट में पैसा नहीं बढ़ रहा, तो समझ लीजिए कि आपने सिर्फ अपना और अपनी कंपनी का समय बर्बाद किया है।

आजकल के सो कॉल्ड मार्केटिंग जीनियस आपको ब्रांड अवेयरनेस और इंगेजमेंट के चक्कर में फंसा देते हैं। वे कहेंगे कि देखो हमारे पोस्ट पर कितने लाइक्स आए हैं। अरे भाई, उन लाइक्स से बिजली का बिल नहीं भरता। असली सवाल यह है कि क्या उन लाइक्स की वजह से किसी ने आपकी दुकान से सामान खरीदा? सर्जियो जायमन का मानना है कि मार्केटिंग एक निवेश है, कोई खर्चा नहीं। और हर निवेश से मुनाफा मिलना जरूरी है। अगर आप एक रुपया मार्केटिंग में डाल रहे हैं, तो बदले में कम से कम दो रुपये आने चाहिए। वरना वह मार्केटिंग नहीं, बल्कि दान पुण्य है जो आपको बिजनेस में नहीं, बल्कि चैरिटी की लिस्ट में ले जाएगा।

मान लीजिए आपने एक बहुत ही कूल और फनी एड बनाया जिसमें एक कुत्ता स्केटबोर्ड चला रहा है। पूरा देश उस एड को देख रहा है, लोग हंस रहे हैं, वीडियो वायरल हो गया है। लेकिन एड खत्म होने के बाद किसी को यह याद ही नहीं रहा कि कुत्ता आखिर बेच क्या रहा था? क्या वह साबुन बेच रहा था या इंश्योरेंस? अगर कस्टमर दुकान पर जाकर आपका प्रोडक्ट नहीं मांग रहा, तो वह स्केटबोर्ड चलाने वाला कुत्ता सिर्फ एक मनोरंजन है, मार्केटिंग नहीं। मार्केटिंग का असली हीरो वह एड है जो शायद थोड़ा बोरिंग हो, लेकिन उसे देखने के बाद इंसान अपना बटुआ निकालने पर मजबूर हो जाए।

सर्जियो कहते हैं कि हमें सेल्स को गंदा शब्द समझना बंद करना होगा। कई लोग सोचते हैं कि हम तो ब्रांड बना रहे हैं, सेल्स तो अपने आप हो जाएगी। यह वैसी ही बात है जैसे कोई कहे कि मैं तो बस जिम जा रहा हूँ, बॉडी तो अपने आप बन जाएगी। भाई, बिना सही एक्सरसाइज और डाइट के कुछ नहीं होता। वैसे ही बिना सेल्स टारगेट के मार्केटिंग बेकार है। आपको हर दिन खुद से पूछना चाहिए कि आज मेरी मार्केटिंग ने कितने नए कस्टमर जोड़े? अगर जवाब जीरो है, तो अपनी स्ट्रेटेजी को कचरे के डिब्बे में डाल दीजिए और नए सिरे से सोचना शुरू कीजिए।

मार्केटिंग का अंत वही है जहाँ से सेल्स शुरू होती है। अगर आप इस सच को स्वीकार नहीं कर सकते, तो आप बिजनेस की रेस से बाहर होने के लिए तैयार रहिए। क्योंकि अंत में केवल वही ब्रांड टिकता है जिसकी सेल्स रिपोर्ट हरी होती है, न कि वह जिसकी सोशल मीडिया फीड रंगीन होती है। तो अब अगली बार जब आप कोई मार्केटिंग प्लान बनाएं, तो सुंदरता पर नहीं, बल्कि मुनाफे पर ध्यान दें।


Lesson : ब्रांडिंग का दिखावा छोड़ो और वैल्यू देना शुरू करो

अगर आपको लगता है कि एक महंगा लोगो बनवा लेना, वेबसाइट के कलर्स कूल रखना या ऑफिस में महंगे सोफे डाल लेना ही ब्रांडिंग है, तो आप शायद किसी सपने की दुनिया में जी रहे हैं। सर्जियो जायमन कहते हैं कि ब्रांडिंग कोई कॉस्मेटिक सर्जरी नहीं है कि बस चेहरा चमका लिया और काम हो गया। असल में ब्रांड वह वादा है जो आप अपने कस्टमर से करते हैं और उसे हर बार पूरा करते हैं। लोग आपका लोगो नहीं खरीदते, वे उस फायदे को खरीदते हैं जो आपका प्रोडक्ट उन्हें देता है। अगर आपका प्रोडक्ट किसी की लाइफ में वैल्यू ऐड नहीं कर रहा, तो आपका ब्रांड सिर्फ एक खाली डिब्बा है जिस पर आपने चमकदार कागज लपेटा हुआ है।

जरा सोचिए, कोका कोला जैसी बड़ी कंपनी का मार्केटिंग हेड यह कह रहा है कि ब्रांड इमेज से ज्यादा जरूरी है ब्रांड की यूटिलिटी। इसका मतलब यह है कि कस्टमर को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी कंपनी कितनी पुरानी है या आपका ऑफिस कितना बड़ा है। उसे बस एक बात से मतलब है: "इसमें मेरा क्या फायदा है?" अगर आप उसे यह साफ़-साफ़ नहीं बता पा रहे, तो आपकी ब्रांडिंग फेल है। अक्सर कंपनियां अपनी तारीफ करने में इतनी मगन हो जाती हैं कि वे भूल जाती हैं कि कस्टमर को उनकी कहानी में कोई इंटरेस्ट नहीं है। उसे अपनी समस्या का समाधान चाहिए।

मान लीजिए आपने एक नया रेस्टोरेंट खोला है। आपने करोड़ों रुपये इंटीरियर पर खर्च किए, बहुत ही सुंदर लाइटिंग लगाई और वेटर को भी स्टाइलिश यूनिफॉर्म पहना दी। लेकिन जब खाना टेबल पर आया, तो वह ठंडा और बेस्वाद था। अब आप चाहे कितनी भी बड़ी-बड़ी बातें कर लें, चाहे कितना भी "प्रीमियम एक्सपीरियंस" का ढिंढोरा पीट लें, वह कस्टमर दोबारा कभी नहीं आएगा। वह अपने दोस्तों से कहेगा कि भाई वहां बस दिखावा है, खाना बेकार है। यहाँ आपकी सारी ब्रांडिंग धरी की धरी रह गई क्योंकि आपने असली वैल्यू यानी अच्छे खाने पर ध्यान ही नहीं दिया।

सर्जियो जायमन का कहना है कि ब्रांडिंग का असली मतलब है अपने प्रोडक्ट के फायदों को बार-बार और जोर-शोर से बताना। इसे वे "डेमोक्रेटाइजेशन ऑफ ब्रांडिंग" कहते हैं। यानी आपका ब्रांड हर उस इंसान के लिए होना चाहिए जो उसे खरीदना चाहता है, न कि सिर्फ कुछ खास लोगों के लिए। आपको अपने कस्टमर को यह यकीन दिलाना होगा कि आपका प्रोडक्ट उनकी जिंदगी को आसान, बेहतर या ज्यादा मजेदार बना देगा। अगर आप यह नहीं कर पा रहे, तो आप मार्केटिंग नहीं, बल्कि सिर्फ आर्ट वर्क कर रहे हैं। और याद रखिए, आर्ट म्यूजियम में अच्छा लगता है, मार्केट में नहीं।

मार्केटिंग में सबसे बड़ा पाप है अपने कस्टमर को बेवकूफ समझना। लोग स्मार्ट हैं, उन्हें पता है कि कब आप उन्हें सिर्फ सपने बेच रहे हैं और कब आप वाकई उनकी मदद कर रहे हैं। इसलिए, अपनी ब्रांडिंग को अपनी सेल्स स्ट्रेटजी का हिस्सा बनाइए। हर वह चीज जो आप अपने ब्रांड के बारे में कहते हैं, उसका सीधा संबंध सेल्स से होना चाहिए। अगर आपका नया विज्ञापन आपके ब्रांड की इमेज तो बढ़ा रहा है लेकिन सेल्स का ग्राफ वहीं का वहीं है, तो समझ लीजिए कि आप सिर्फ अपनी ईगो को संतुष्ट कर रहे हैं। असली ब्रांडिंग वह है जो कस्टमर के दिमाग में आपके प्रोडक्ट की एक ऐसी जगह बना दे कि वह किसी और के पास जाने की सोचे भी नहीं।


Lesson : मार्केटिंग एक प्योर साइंस है, कोई तुक्का नहीं

अगर आप अभी भी अपनी मार्केटिंग को "गुडलक" या "इंट्यूशन" के भरोसे छोड़ रहे हैं, तो आप जुआ खेल रहे हैं, बिजनेस नहीं कर रहे। सर्जियो जायमन साफ कहते हैं कि मार्केटिंग कोई मैजिक शो नहीं है जहाँ आप टोपी से खरगोश निकालेंगे और सब तालियाँ बजाएंगे। असल में, यह एक लेबोरेटरी है जहाँ आपको हर चीज को मापना (मेजर) और टेस्ट करना पड़ता है। मार्केटिंग एक डिसिप्लिन है, एक प्रोसेस है जिसे डेटा और रिजल्ट्स के आधार पर चलाया जाना चाहिए। अगर आप यह नहीं जानते कि आपका कौन सा एड पैसा बना रहा है और कौन सा डूबा रहा है, तो आप अंधेरे में तीर चला रहे हैं।

आजकल के कई मार्केटर्स को लगता है कि बस एक "ग्रेट आइडिया" काफी है। लेकिन सर्जियो का मानना है कि आइडिया चाहे कितना भी महान क्यों न हो, अगर उसका रिजल्ट डेटा में नहीं दिख रहा, तो वह बेकार है। आपको हर कैंपेन को एक एक्सपेरिमेंट की तरह देखना होगा। अगर कुछ काम कर रहा है, तो उसे और बढ़ाओ। अगर कुछ फेल हो रहा है, तो उसे तुरंत बंद करो और अपनी गलती सुधारो। यहाँ ईगो की कोई जगह नहीं है। आप यह नहीं कह सकते कि "मुझे यह एड पसंद है, इसलिए यह चलेगा।" असली सवाल यह है कि क्या "कस्टमर" को वह पसंद आया और क्या उसने पैसे खर्च किए?

मान लीजिए आपने जिम की मेंबरशिप बेचने के लिए दो अलग-अलग एड बनाए। पहले एड में आपने एक बहुत ही हैंडसम मॉडल की फोटो लगाई जो मुस्कुरा रहा है। दूसरे एड में आपने साफ़-साफ़ लिखा कि "30 दिन में 5 किलो वजन कम करें वरना पैसे वापस।" अब हो सकता है कि आपको पहला एड बहुत क्लासी और सुंदर लगे। लेकिन अगर दूसरा एड दस गुना ज्यादा सेल्स ला रहा है, तो भूल जाइए अपनी पसंद को। डेटा चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा है कि लोग रिजल्ट चाहते हैं, मॉडल की मुस्कुराहट नहीं। यही वह साइंस है जिसे समझना बहुत जरूरी है।

सर्जियो जायमन हमें सिखाते हैं कि हमें अपनी स्ट्रेटेजी को लेकर कभी भी जिद्दी नहीं होना चाहिए। मार्केट हर पल बदल रहा है, कस्टमर की पसंद बदल रही है। अगर आप वही पुरानी घिसी-पिटी तरकीबें आजमाते रहेंगे, तो आप कोका कोला जैसी बड़ी कंपनी को भी डुबा सकते हैं। आपको हर हफ्ते, हर महीने अपने नंबर्स देखने होंगे। कन्वर्जन रेट क्या है? कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट कितनी है? एक बार जब आप डेटा के साथ दोस्ती कर लेते हैं, तो मार्केटिंग का डर खत्म हो जाता है। फिर आप सिर्फ एक मार्केटर नहीं, बल्कि एक साइंटिस्ट बन जाते हैं जो जानता है कि कौन सा बटन दबाने से पैसा बरसेगा।

अंत में, याद रखिए कि मार्केटिंग का अंत कभी नहीं होता, वह लगातार बदलती रहती है। जो कल काम कर रहा था, वह आज शायद बेकार हो जाए। इसलिए हमेशा तैयार रहिए, सीखते रहिए और टेस्ट करते रहिए। सर्जियो जायमन की यह किताब हमें यही याद दिलाती है कि मार्केटिंग कोई बोझ नहीं, बल्कि आपके बिजनेस का सबसे पावरफुल इंजन है। बस शर्त यह है कि आप उसे सही तरीके से चलाना सीख लें।


तो दोस्त, अब समय आ गया है कि आप अपनी मार्केटिंग की पुरानी और धूल जमी किताबों को खिड़की से बाहर फेंक दें। क्या आप तैयार हैं अपने बिजनेस को केवल एक "ब्रांड" से बदलकर एक "प्रॉफिट मशीन" बनाने के लिए? सेल्स को अपना दोस्त बनाइए, वैल्यू को अपना हथियार और डेटा को अपना मार्गदर्शक। याद रखिए, मार्केट में वही टिकता है जो शोर कम मचाता है और रिजल्ट ज्यादा दिखाता है।

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया और आप भी अपनी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बदलने वाले हैं, तो नीचे कमेंट में "मार्केटिंग जीनियस" जरूर लिखें। इस जानकारी को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अभी भी केवल 'लाइक्स' के पीछे भाग रहे हैं। चलिए मिलकर बिजनेस की इस दुनिया में असली क्रांति लाते हैं!

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