The Ideafisher (Hindi)


अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो बाथरूम में शावर लेते समय करोड़ों का आइडिया आने का इंतजार करते हैं तो यकीन मानिये आपकी कंपनी और करियर दोनों डूबने वाले हैं। बिना किसी सिस्टम के आइडिया ढूंढना वैसा ही है जैसे अंधेरे कमरे में काली बिल्ली को ढूंढना जो वहां है ही नहीं।

मार्श फिशर की किताब The Ideafisher हमें सिखाती है कि क्रिएटिविटी कोई तुक्का नहीं बल्कि एक साइंस है। चलिए समझते हैं वो ३ बड़े सीक्रेट्स जो आपके दिमाग के जंग लगे ताले को खोल देंगे।


Lesson : दिमाग का जाल खोलना

मार्श फिशर अपनी किताब The Ideafisher में सबसे पहले एक कड़वा सच बताते हैं। हम सबको लगता है कि दुनिया बदलने वाला कोई बड़ा आइडिया ऊपर से किसी बिजली की तरह गिरेगा। आप चुपचाप बैठे रहेंगे और अचानक आपके दिमाग की बत्ती जल जाएगी। लेकिन भाई साहब असल जिंदगी में ऐसा सिर्फ कार्टून में होता है। हकीकत यह है कि हमारा दिमाग एक कबाड़खाना है। जी हां आपने सही सुना। बचपन से लेकर अब तक आपने जो भी देखा सुना या पढ़ा है वो सब आपके दिमाग के किसी कोने में पड़ा है। क्रिएटिविटी का असली मतलब नया आविष्कार करना नहीं बल्कि इस पुराने कबाड़ को नए तरीके से जोड़ना है।

मान लीजिये आप एक चाय की दुकान खोलना चाहते हैं। अब चाय तो दुनिया बना रही है इसमें नया क्या है। लेकिन अगर आप अपनी दादी के पुराने नुस्खे और आज के जमाने की फैंसी मार्केटिंग को मिला दें तो बन गई एमबीए चायवाला जैसी कोई बड़ी ब्रांड। यहाँ आपने कुछ नया पैदा नहीं किया बस दो पुरानी चीजों को एक नए फेविकोल से जोड़ दिया। फिशर कहते हैं कि अगर आप अपने दिमाग का जाल नहीं खोलेंगे तो आप वही पुराने घिसे पिटे रास्तों पर चलते रहेंगे। लोग अक्सर सोचते हैं कि वो बहुत बड़े जीनियस हैं और उन्हें किसी सिस्टम की जरूरत नहीं है। यही सबसे बड़ी बेवकूफी है। बिना किसी प्रोसेस के दिमाग चलाना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल के फरारी दौड़ाना। आप शोर तो बहुत मचाएंगे पर पहुंचेंगे कहीं नहीं।

इंसानी दिमाग की एक बहुत गंदी आदत है। यह हमेशा आसान रास्ता ढूंढता है। जब भी आपके सामने कोई मुश्किल आती है तो आपका दिमाग सबसे पहले वो जवाब देता है जो सबसे बोरिंग होता है। जैसे अगर बॉस ने कहा कि सेल बढ़ानी है तो दिमाग कहेगा कि डिस्काउंट दे दो। भाई ये तो गली का बच्चा भी बता देगा। असली खेल तब शुरू होता है जब आप इस पहले और आसान जवाब को कचरे के डिब्बे में फेंक देते हैं। फिशर समझाते हैं कि आपको अपने दिमाग को एक मशीन की तरह इस्तेमाल करना होगा। ऐसी मशीन जो अलग अलग जानकारी के टुकड़ों को आपस में टकराती है और फिर निकलता है एक धमाकेदार आइडिया।

अगर आप अभी भी इस इंतजार में बैठे हैं कि कोई फरिश्ता आएगा और आपके कान में बिजनेस का सीक्रेट मंत्र फूंक देगा तो बेहतर होगा कि आप सो जाएं। क्योंकि जागते हुए तो आप सिर्फ अपना टाइम बर्बाद कर रहे हैं। क्रिएटिविटी एक मांसपेशी की तरह है जिसे रोज जिम ले जाना पड़ता है। जितना ज्यादा आप अपने पुराने अनुभवों को खंगालेंगे उतने ही बेहतर आइडियाज बाहर आएंगे। याद रखिये कि दुनिया के सबसे सफल लोग सबसे ज्यादा बुद्धिमान नहीं थे बल्कि वो सबसे बेहतर कनेक्टर थे। उन्होंने उन चीजों को आपस में जोड़ दिया जिनके बारे में किसी और ने सोचा भी नहीं था।

जब आप इस पहले लेसन को समझ लेते हैं कि सब कुछ पहले से आपके अंदर मौजूद है तब आप अगले कदम की ओर बढ़ते हैं। लेकिन सिर्फ सामान होने से घर नहीं बनता उसके लिए ईंटों का ढेर भी चाहिए होता है। और यही से शुरू होता है हमारा दूसरा सबसे बड़ा सबक।


Lesson : आइडिया बैंक बनाना

अब जब आप समझ गए हैं कि दिमाग एक कबाड़खाना है तो समझिये कि उस कबाड़ में से सोना कैसे निकालना है। मार्श फिशर कहते हैं कि दुनिया का हर बड़ा बिजनेस एक सिंगल आइडिया से नहीं बल्कि हजारों छोटे छोटे बेकार आइडियाज के ढेर से निकला है। लेकिन हम इंडियन्स की एक बड़ी बीमारी है। हम परफेक्शन के पीछे ऐसे भागते हैं जैसे पड़ोस वाली शर्मा जी की लड़की के पीछे लड़के भागते हैं। हमें लगता है कि जो भी आइडिया आए वो सीधा गूगल या फेसबुक जैसा क्रांतिकारी होना चाहिए। वरना हम उसे अपने दिमाग की डायरी में जगह ही नहीं देते। यही आपकी सबसे बड़ी गलती है।

फिशर का मंत्र बहुत सीधा है। आपको अपना एक आइडिया बैंक बनाना होगा। यह बैंक वैसा नहीं है जहाँ आप पैसे जमा करते हैं। यह वो जगह है जहाँ आप अपने हर उस ख्याल को कैद करते हैं जो आपके दिमाग में बिजली की तरह कौंधता है। चाहे वो कितना भी फालतू या मजाक जैसा क्यों न लगे। मान लीजिये आप ऑफिस जा रहे हैं और आपने देखा कि सड़क पर ट्रैफिक बहुत है। आपके दिमाग में आया कि काश उड़ने वाली टैक्सी होती। अब आप खुद पर हंसेंगे और उसे भूल जाएंगे। लेकिन एक असली आइडिया फिशर उसे नोट करेगा। शायद उड़ने वाली टैक्सी न बने पर शायद ट्रैफिक में खाना डिलीवर करने का कोई नया तरीका निकल आए।

अगर आप सिर्फ एक ही जैकपॉट आइडिया के भरोसे बैठे हैं तो समझिये आप जुआ खेल रहे हैं। और जुए में अक्सर घर बिक जाते हैं करियर नहीं बनता। फिशर के हिसाब से क्वांटिटी ही क्वालिटी पैदा करती है। यानी जब आप १०० खराब और घटिया आइडियाज कागज पर उतारेंगे तब जाकर कहीं १०१ नंबर वाला आइडिया करोड़ों का निकलेगा। हमारे यहाँ लोग मीटिंग्स में बैठते हैं और आधे घंटे तक सन्नाटा रहता है क्योंकि सबको लगता है कि अगर उन्होंने कुछ बेवकूफी भरा बोला तो लोग हंसेंगे। भाई साहब लोग तो वैसे भी आप पर हंस रहे हैं क्योंकि आपके पास कोई काम का आइडिया नहीं है। तो कम से कम कुछ बोलकर ही हंसवा लो।

जोमैटो ने जब शुरू किया था तब वो सिर्फ मेनू कार्ड की फोटो डालते थे। कितना छोटा और मामूली काम था। उन्होंने कोई रॉकेट साइंस नहीं लगाई थी। बस छोटे छोटे आइडियाज को जमा किया और धीरे धीरे वो आज की बड़ी कंपनी बन गई। अगर वो उस समय सोचते कि हमें सीधा ड्रोन से खाना पहुंचाना है तो आज वो कहीं नहीं होते। फिशर समझाते हैं कि आपका दिमाग एक जाल की तरह होना चाहिए। जो भी छोटी मछली फँसे उसे पकड़ लो। क्योंकि बड़ी मछली पकड़ने के लिए पहले छोटी मछलियों का चारा डालना पड़ता है।

अगर आप आज भी इस घमंड में हैं कि आपकी याददाश्त बहुत तेज है और आप सब कुछ याद रख लेंगे तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं। एक पेंसिल की कीमत उस दिमाग से ज्यादा है जो आइडियाज को भूल जाता है। जब आप अपने आइडिया बैंक को भरना शुरू करते हैं तब आपको असलियत पता चलती है कि आप कितने पानी में हैं। और जब आपके पास आइडियाज का भंडार होता है तब आपको समझ आता है कि इनमें से हीरा कौन सा है।

लेकिन सिर्फ आइडियाज का ढेर लगाने से कुछ नहीं होगा। आपको उन आइडियाज से सही काम करवाने के लिए खुद से कुछ कड़वे सवाल पूछने होंगे। और यही हमारे अगले और सबसे जरूरी लेसन का आधार है।


Lesson : सही सवाल पूछने की कला

मार्श फिशर कहते हैं कि अगर आप गलत सवाल पूछेंगे तो दुनिया का सबसे बड़ा जीनियस भी आपको सही जवाब नहीं दे पाएगा। हम इंडियन्स के साथ दिक्कत यह है कि हम समस्या आने पर सीधा समाधान की तरफ भागते हैं। जैसे ही बिजनेस में सेल कम हुई हम चिल्लाने लगते हैं कि ग्राहक कहाँ है। भाई ग्राहक वही है जहाँ कल था। शायद आपका सवाल गलत है। फिशर समझाते हैं कि एक क्रांतिकारी आइडिया तक पहुँचने का रास्ता गहरे और थोड़े अजीब सवालों से होकर गुजरता है।

मान लीजिये आप एक नया साबुन बेचना चाहते हैं। अब अगर आप खुद से पूछेंगे कि मैं साबुन कैसे बेचूँ तो आपका दिमाग वही घिसे पिटे जवाब देगा कि टीवी पर एड चला दो या डिस्काउंट दे दो। लेकिन अगर आप खुद से यह पूछें कि लोग नहाना क्यों पसंद नहीं करते तो शायद आपको एक ऐसा आइडिया मिले जो मार्केट हिला दे। शायद आप बिना पानी के नहाने वाला स्प्रे बना दें। देखा आपने सिर्फ सवाल बदलने से आपका दिमाग किस दिशा में दौड़ने लगा। फिशर का कहना है कि जब आप खुद को एक कमरे में बंद करके मुश्किल सवाल पूछते हैं तब आपका असली क्रिएटिव राक्षस बाहर आता है।

ज्यादातर लोग अपने आइडियाज को लेकर बहुत इमोशनल हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि उनका आइडिया उनका सगा बच्चा है। और इसी चक्कर में वो कभी खुद से यह नहीं पूछते कि मेरा ये आइडिया फेल क्यों होगा। भाई साहब अगर आप खुद की गलती नहीं ढूंढेंगे तो मार्केट आपकी लंका लगा देगा। फिशर की तकनीक यह है कि अपने हर आइडिया को एक वकील की तरह कटघरे में खड़ा करो। उससे पूछो कि तुम्हारी जरूरत किसे है। तुम दुनिया की कौन सी मुश्किल हल कर रहे हो। अगर जवाब गोल गोल है तो समझ जाइये कि आप सिर्फ ख्याली पुलाव पका रहे हैं।

एक और कड़वा सच सुनिये। हम अक्सर उन लोगों से राय मांगते हैं जो खुद अपनी जिंदगी में कुछ नहीं कर पाए। अगर आप अपने पड़ोस वाले चाचा से पूछेंगे कि क्या मुझे स्टार्टअप करना चाहिए तो वो यही कहेंगे कि बेटा सरकारी नौकरी की तैयारी कर लो। यहाँ गलती चाचा की नहीं आपकी है क्योंकि आपने सवाल ही गलत इंसान से पूछा है। फिशर कहते हैं कि सही सवाल और सही डेटा का मिलन ही वह धमाका करता है जिसे हम द बिग आइडिया कहते हैं।

जब आप इन तीनों लेसन्स को जोड़ते हैं यानी पुराने कबाड़ को नए तरीके से जोड़ना फिर अपना एक तगड़ा आइडिया बैंक बनाना और अंत में खुद से बेरहम सवाल पूछना तब जाकर आप एक सच्चे आइडिया फिशर बनते हैं। यह कोई किस्मत का खेल नहीं है। यह एक मेहनत वाला रास्ता है जिस पर चलने की हिम्मत बहुत कम लोगों में होती है।


तो दोस्तों क्या आप अभी भी उस बिजली के गिरने का इंतजार कर रहे हैं या आज से ही अपना आइडिया बैंक बनाना शुरू करेंगे। याद रखिये कि दुनिया के पास आइडियाज की कमी नहीं है बल्कि उन लोगों की कमी है जो उन आइडियाज को तराशना जानते हैं। अगर आप वही करते रहेंगे जो अब तक करते आए हैं तो आपको वही मिलता रहेगा जो अब तक मिलता आया है। उठिये अपने दिमाग के कबाड़खाने को साफ कीजिये और खुद से वो सवाल पूछिए जिनसे आप अब तक डरते रहे हैं।

कमेंट्स में बताइये कि आपका वो कौन सा एक पागलपन भरा आइडिया है जिसे आप दुनिया के डर से दबाए बैठे हैं। क्या पता आज का आपका वो एक छोटा सा कमेंट कल का सबसे बड़ा बिजनेस बन जाए। शेयर कीजिये इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ जो हमेशा नए बिजनेस की बातें तो करता है पर शुरू कभी नहीं करता।

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