क्या आप अभी भी मेहनत से बिजनेस बढ़ाने का सपना देख रहे हैं? कितनी मासूमियत है! जब तक आप माइक्रोसॉफ्ट की तरह दूसरों को खेल से बाहर करना नहीं सीखेंगे तब तक आप सिर्फ एक छोटे प्लेयर ही रहेंगे। अपनी नाकामी का जश्न मनाना छोड़िए और बिल गेट्स के असली सीक्रेट्स समझिए।
इस आर्टिकल में हम द माइक्रोसॉफ्ट वे बुक से वह ३ बड़े लेसन्स सीखेंगे जो आपको मार्केट का असली सुल्तान बना देंगे।
Lesson : मार्केट डोमिनेंस थ्रू इकोसिस्टम (मार्केट का जाल बिछाना सीखो)
अगर आप सोच रहे हैं कि सिर्फ एक अच्छा प्रोडक्ट बनाकर आप अमीर बन जाएंगे, तो माफ कीजिये, आप अभी भी परियों की कहानियों में जी रहे हैं। रैंडल स्ट्रॉस अपनी किताब द माइक्रोसॉफ्ट वे में बताते हैं कि बिल गेट्स कभी भी सिर्फ एक सॉफ्टवेयर नहीं बेच रहे थे। वह एक ऐसा जाल बुन रहे थे जिसमें एक बार जो घुसा, वह फिर कभी बाहर नहीं निकल पाया। इसे हम टेक्निकल भाषा में इकोसिस्टम कहते हैं, लेकिन देसी भाषा में इसे कहते हैं 'मजबूरी का सौदा'।
जरा सोचिये, आपके पड़ोस वाले शर्मा जी ने नया कंप्यूटर खरीदा। अब उन्हें टाइपिंग के लिए वर्ड चाहिए और हिसाब के लिए एक्सेल। माइक्रोसॉफ्ट ने गेम ऐसा खेला कि अगर आप एक चीज इस्तेमाल करते हैं, तो दूसरी आपकी जरूरत बन जाती है। यह वैसा ही है जैसे कोई आपको फ्री में समोसा खिलाए, लेकिन चटनी के पांच सौ रुपये मांग ले। अब बिना चटनी के समोसा गले से नीचे उतरेगा नहीं, तो पैसे तो देने ही पड़ेंगे। माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज को हर कंप्यूटर की रूह बना दिया। जब रूह उनकी है, तो शरीर पर कब्जा तो उनका होना ही था।
आज के दौर में अगर आप अपना स्टार्टअप या बिजनेस कर रहे हैं, तो खुद से पूछिए कि क्या आपका कस्टमर आपके बिना रह सकता है? बिल गेट्स का स्टाइल बहुत सीधा था। वह कॉम्पिटिशन को खत्म नहीं करते थे, वह कॉम्पिटिशन को बेअसर कर देते थे। वह मार्केट में ऐसी सिचुएशन बना देते थे कि बाकी कंपनियां सिर्फ उनके बनाए हुए रास्तों पर चलने को मजबूर हो जाती थीं। इसे कहते हैं असली लीडरशिप। अगर आप मार्केट के छोटे मोटे खिलाड़ी बनकर खुश हैं, तो यह किताब आपके लिए नहीं है। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपके दुश्मन भी आपकी परमिशन के बिना सांस न ले सकें, तो इस लेसन को गांठ बांध लीजिये।
मार्केट में घुसना बहादुरी नहीं है, मार्केट को अपना गुलाम बना लेना असली खेल है। माइक्रोसॉफ्ट ने सॉफ्टवेयर को सिर्फ एक टूल नहीं, बल्कि एक आदत बना दिया। और याद रखिये, इंसान अपनी जरूरतों को छोड़ सकता है, लेकिन अपनी आदतों का गुलाम हमेशा बना रहता है। जब दुनिया बदल रही थी, तब गेट्स सिर्फ कोड नहीं लिख रहे थे, वह आने वाले कल का नक्शा बना रहे थे। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि हर घर और हर ऑफिस की मेज पर उनका साम्राज्य हो। यह कोई इत्तेफाक नहीं था, यह एक बहुत ही सोची समझी और चालाक प्लानिंग का नतीजा था।
Lesson : हायरिंग द स्मार्टेस्ट पीपल (सबसे होशियार दिमागों को अपनी टीम में शामिल करो)
अगर आप सोचते हैं कि बिल गेट्स अकेले कमरे में बैठकर पूरी दुनिया का सॉफ्टवेयर लिख रहे थे, तो आप बहुत बड़े भ्रम में हैं। द माइक्रोसॉफ्ट वे किताब का दूसरा सबसे बड़ा सबक यह है कि आपकी कंपनी उतनी ही महान होती है जितने महान आपके कर्मचारी होते हैं। माइक्रोसॉफ्ट का वर्क कल्चर कोई सरकारी दफ्तर जैसा नहीं था जहाँ लोग सिर्फ फाइलें इधर से उधर करते थे। रैंडल स्ट्रॉस बताते हैं कि बिल गेट्स का एक ही मंत्र था: 'हायर द स्मार्टेस्ट पीपल'। उन्हें ऐसे लोग चाहिए थे जो उनसे भी ज्यादा तेज दिमाग वाले हों, भले ही वह थोड़े सनकी क्यों न हों।
अब जरा सोचिए, आप एक टीम बना रहे हैं और आपने अपने से भी ज्यादा काबिल बंदे को काम पर रख लिया। आम तौर पर लोग डर जाते हैं कि कहीं यह मेरी कुर्सी न छीन ले। लेकिन माइक्रोसॉफ्ट में खेल उल्टा था। वहाँ कॉम्पिटिशन इतना तगड़ा था कि लोग कोडिंग करते वक्त खाना पीना तक भूल जाते थे। यह वैसा ही है जैसे आप मोहल्ले की क्रिकेट टीम बना रहे हों और आपने सचिन तेंदुलकर को ओपनर रख लिया। अब बाकी खिलाड़ियों की तो वैसे ही हवा टाइट हो जाएगी, और वह अपनी जान लगा देंगे ताकि सचिन के सामने बेइज्जती न हो जाए। माइक्रोसॉफ्ट ने यही किया। उन्होंने दुनिया के बेहतरीन कॉलेज से टॉपर्स को उठाया और उन्हें ऐसी चुनौतियां दीं कि उनका दिमाग चकरा जाए।
माइक्रोसॉफ्ट का इंटरव्यू प्रोसेस किसी टॉर्चर से कम नहीं था। वह आपसे यह नहीं पूछते थे कि आपका पसंदीदा रंग क्या है, वह आपसे यह पूछते थे कि एक हवाई जहाज में कितनी टेनिस बॉल समा सकती हैं? अब कोई आम इंसान होगा तो सोचेगा कि भाई मुझे कोडिंग करनी है या बॉल गिननी है? लेकिन माइक्रोसॉफ्ट को वह बंदा चाहिए था जो अजीब से अजीब प्रॉब्लम का हल चुटकियों में निकाल सके। उन्हें रट्टू तोते नहीं, बल्कि शिकारी चाहिए थे। अगर आप अपने बिजनेस में 'जी हजूरी' करने वाले लोग रखेंगे, तो आप सिर्फ एक छोटे से बॉस बनकर रह जाएंगे। लेकिन अगर आप अपने से ज्यादा स्मार्ट लोग रखेंगे, तो आप एक एम्पायर खड़ा करेंगे।
माइक्रोसॉफ्ट की असली पावर उनके कोड की लाइन्स में नहीं, बल्कि उन उंगलियों में थी जो वह कोड लिख रही थीं। बिल गेट्स को पता था कि अगर मार्केट में टिकना है, तो हर रोज कुछ नया करना होगा। और नया वही कर सकता है जिसके पास सोचने की ताकत हो। आज के दौर में अगर आप अपनी टीम बना रहे हैं, तो चापलूसी करने वालों से दूर रहिये। उन लोगों को ढूंढिए जो आपको टोक सकें, जो आपको चैलेंज कर सकें। क्योंकि जब दिमाग आपस में टकराते हैं, तभी असली आईडिया पैदा होता है। माइक्रोसॉफ्ट ने लोगों को सिर्फ सैलरी नहीं दी, उन्हें एक ऐसा माहौल दिया जहाँ वह खुद को खुदा समझने लगे थे। और यही पागलपन उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी बना गया।
Lesson : एडेप्टेबिलिटी और स्पीड (पलक झपकते ही खुद को बदल डालो)
अगर आप सोचते हैं कि कामयाबी एक बार मिल गई तो जिंदगी भर टिकी रहेगी, तो आप शायद किसी पुरानी हिंदी फिल्म के हीरो हैं। हकीकत की दुनिया में मार्केट का मूड आपकी गर्लफ्रेंड के मूड से भी ज्यादा तेजी से बदलता है। द माइक्रोसॉफ्ट वे का तीसरा और सबसे खतरनाक सबक है 'एडेप्टेबिलिटी'। रैंडल स्ट्रॉस बताते हैं कि बिल गेट्स को हारने से इतना डर लगता था कि वह रात को सोते वक्त भी यही सोचते थे कि कल सुबह कौन सा नया स्टार्टअप उनकी दुकान बंद कर सकता है। इसे कहते हैं 'पॉजिटिव पैरानोइया' यानी सही वाला डर।
जरा याद कीजिये वह दौर जब इंटरनेट नया नया आया था। माइक्रोसॉफ्ट को लगा कि यह सिर्फ एक चोंचला है। लेकिन जैसे ही उन्हें अहसास हुआ कि दुनिया अब ब्राउजर पर चलने वाली है, उन्होंने अपनी पूरी शिप का रुख मोड़ दिया। उन्होंने अपने पुराने प्लान्स को रद्दी की टोकरी में फेंका और अपनी पूरी ताकत इंटरनेट एक्सप्लोरर बनाने में लगा दी। यह वैसा ही है जैसे आप पूरी रात जागकर मैथ की पढ़ाई करें और सुबह पता चले कि पेपर तो हिस्ट्री का है, और आप बिना रोए आधे घंटे में पूरी हिस्ट्री पढ़ डालें। माइक्रोसॉफ्ट ने यही किया। वह जिद्दी नहीं थे, वह लालची थे—कामयाबी के लालची।
बहुत सी कंपनियां अपने पुराने गौरव में ही खोई रह जाती हैं। वह सोचती हैं कि 'अरे हम तो दिग्गज हैं, हमें कौन हिलाएगा?' और फिर नोकिया और कोडक जैसी कंपनियों का जो हाल हुआ, वह हम सब जानते हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने कभी यह गलती नहीं की। उन्होंने देखा कि कॉम्पिटिशन नेटस्केप जैसा कोई नया खिलौना लाया है, तो उन्होंने उससे बेहतर खिलौना बनाकर उसे फ्री में बांट दिया। अब मुफ्त की चंदन तो घिस मेरे नंदन! जब लोगों को विंडोज के साथ ब्राउजर फ्री मिला, तो नेटस्केप का बोरिया बिस्तर बंध गया। इसे कहते हैं स्पीड के साथ एग्रेशन।
आज के इस भागते हुए इंडिया में, अगर आप अपने पुराने तरीकों को पकड़कर बैठे रहेंगे, तो लोग आपको म्यूजियम में ढूंढेंगे। बिल गेट्स का स्टाइल बहुत सीधा था: अगर मार्केट बदल रहा है, तो उससे पहले तुम खुद बदल जाओ। अपनी ईगो को साइड में रखो और देखो कि हवा किस तरफ बह रही है। माइक्रोसॉफ्ट ने सिर्फ सॉफ्टवेयर नहीं बनाया, उन्होंने वक्त के साथ कदम मिलाना सीखा। उन्होंने साबित किया कि बड़ा होना जरूरी नहीं है, तेज होना जरूरी है। क्योंकि इस जंगल में अब बड़ा जानवर छोटे को नहीं खाता, बल्कि तेज जानवर सुस्त को खा जाता है।
दोस्तों, द माइक्रोसॉफ्ट वे हमें सिखाती है कि कामयाबी कोई मंजिल नहीं है, बल्कि एक कभी न खत्म होने वाली जंग है। बिल गेट्स ने हमें दिखाया कि कैसे एक तीखा दिमाग, बेहतरीन टीम और वक्त के साथ बदलने का हुनर आपको दुनिया का बेताज बादशाह बना सकता है। क्या आप भी अपने अंदर वह 'गेट्स वाला विजन' रखते हैं? क्या आप तैयार हैं अपने कॉम्पिटिशन को धूल चटाने के लिए?
आज ही कमेंट्स में बताएं कि इन ३ लेसन्स में से आपको सबसे ज्यादा कौन सा पसंद आया? क्या आप अपनी टीम में खुद से स्मार्ट लोग रखते हैं या सिर्फ 'हां में हां' मिलाने वाले? इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अपना स्टार्टअप शुरू करने का ख्वाब देख रहा है। याद रखिये, दुनिया सिर्फ जीतने वालों का इतिहास पढ़ती है, कोशिश करने वालों को तो लोग नाम तक नहीं पूछते। तो उठिए और अपना साम्राज्य खड़ा कीजिये!
-----
अगर आप इस बुक की पूरी गहराई में जाना चाहते हैं, तो इस बुक को यहाँ से खरीद सकते है - Buy Now
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#TheMicrosoftWay #BillGates #BusinessStrategy #SuccessMindset #StartupIndia
_
