Rules for Revolutionaries (Hindi)


अगर आप भी हर दिन 'बस थोड़ा और बेहतर' प्रॉडक्ट बनाने की रेस में भाग रहे हैं, तो रुकिए। आपको शायद पता नहीं है कि इसी रेस में आप अपनी कंपनी की क़ब्र ख़ुद खोद रहे हैं। लाखों कमा सकते थे, पर 'सेफ़' रहने के चक्कर में 'जीरो' पर अटके हैं। आपकी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी (strategy) किसी फिफ़्टी-ईयर्स-ओल्ड अंकल के 'टेक्नोलॉजी ज्ञान' जितनी पुरानी है। ये हैं गुय कावासाकी के वो तीन नियम, जिन्हें इग्नोर करके आप सच में क्रांति (Revolution) से चूक रहे हैं।


Lesson : नया कर्व बनाओ, बेहतर नहीं (Make a New Curve, Not a Better One)

आप अपनी पूरी जान लगाकर दौड़ रहे हैं। आप सोच रहे हैं, 'मैं अपने कॉम्पिटिटर (competitor) से बस 10% बेहतर बन जाऊँ।' आप अपने प्रॉडक्ट में बस एक और छोटा फ़ीचर (feature) जोड़ देते हैं। उसकी पैकेजिंग (packaging) थोड़ी और सुंदर कर देते हैं। एक छोटी सी बग (bug) फ़िक्स कर देते हैं। और फिर तालियाँ बजाते हैं।

आप ख़ुश हो जाते हैं। पर मार्केट (market) पर क्या असर पड़ा? जीरो (Zero)।

इसे गुय कावासाकी (Guy Kawasaki) कहते हैं 'इन्क्रीमेंटल इम्प्रूवमेंट ट्रैप' (Incremental Improvement Trap)। 'थोड़ा-थोड़ा बेहतर करने का जाल।' ये जाल आपको लगता है कि आप काम कर रहे हैं, पर असल में आप ख़ुद अपनी असफलता की नीव रख रहे हैं।

ज़रा सोचिए। मान लीजिए आप साइकिल बेचते हैं। आपका कॉम्पिटिटर भी साइकिल बेचता है। आपने अपनी साइकिल 10% हल्की बना दी। बढ़िया! अब जो कस्टमर (customer) कल तक 10,000 की साइकिल ख़रीद रहा था, वो आपकी 10,500 की साइकिल क्यों ख़रीदे? क्योंकि वो 10% हल्की है? उसके जीवन में क्या बड़ा बदलाव आया? कुछ नहीं। उसकी ज़िंदगी तो अब भी पसीने से भीगी हुई है। वह अब भी पहाड़ों पर चढ़ते हुए थक रहा है। 10% इम्प्रूवमेंट तो आँख की पुतली भी नोटिस (notice) नहीं करती।

यही है 'बेटर की बीमारी' (Better Disease)।

आप सब अपनी नोकिया (Nokia) कीबोर्ड की सफ़ाई में लगे थे। उसे और छोटा और चिकना बनाने में लगे थे। बटन का रंग बदल रहे थे। पर तभी, एक 'सनकी' आदमी आया। उसने कहा, "मैं बटन हटा रहा हूँ।" लोगों ने उसे पागल कहा। पर उसने एक ऐसा फ़ोन बनाया जो 10% बेहतर नहीं था। वो 500% बेहतर था। उसने एक नया 'कर्व' (Curve) बनाया।

नया कर्व मतलब - पूरा गेम ही बदल देना।

इसका मतलब है कि आपका प्रॉडक्ट या तो 10 गुना (10X) बेहतर हो। या फिर कम से कम 50% नया और बेहतर हो, ताकि लोग साफ़-साफ़ देख सकें कि पुरानी दुनिया ख़त्म हो गई।

उदाहरण के लिए:
  • पुरानी टैक्सी सर्विस (Taxi Service) क्या थी? फ़ोन उठाओ, कैब (Cab) बुक करो, वेट (Wait) करो, कैश (Cash) दो। फिर आया ऊबर (Uber)। आपने फ़ोन से कैब बुक की। कहाँ है, लाइव (Live) ट्रैक किया। पेमेंट (Payment) ऑटोमेटिक (automatic) हो गई। आपको लगा, 'यार, ये तो जादू है।' यह 10% बेहतर नहीं था। यह नया कर्व था। पुरानी टैक्सी कंपनियाँ अपनी कारों को थोड़ा और साफ़ करने में लगी रहीं, पर तब तक रेस ख़त्म हो चुकी थी।
  • या फिर देखिए 'टेस्ला' (Tesla) को। बाक़ी कार कंपनियाँ अपने पेट्रोल (petrol) इंजन को थोड़ा और फ़्यूल-इफ़िशिएंट (fuel-efficient) बना रही थीं। यानी 10% बेहतर। टेस्ला ने कहा, 'इंजन को मारो गोली। अब सिर्फ़ बिजली।' यह एक नया कर्व था। आज बाक़ी सब कंपनियाँ 'इन्क्रीमेंटल इम्प्रूवमेंट ट्रैप' से निकलने के लिए हाँफ रही हैं।

अगर आप सिर्फ़ 'बेहतर' हैं, तो आपका कस्टमर आपको इग्नोर कर देगा। अगर आप 'नया कर्व' बनाते हैं, तो वह आपको इग्नोर नहीं कर सकता। उसे आपका प्रॉडक्ट ट्राई (try) करना ही पड़ेगा।

तो आज ही अपने प्रॉडक्ट को देखिए। क्या यह सच में क्रांतिकारी (Revolutionary) है? या यह सिर्फ़ पिछले साल के मॉडल का 'ज़्यादा महँगा' वर्ज़न है?

अगर आप सिर्फ़ 10% बेहतर हैं, तो आप मार्केट में किसी की अटेंशन (attention) नहीं लेंगे। आप किसी की याद में नहीं रहेंगे। आपका बिज़नेस 'वहाँ भी है' और 'यहाँ भी है' की भीड़ में खो जाएगा।

पर यहाँ एक ख़तरा है। जब आप नया कर्व बनाते हैं, जब आप चीज़ों को 10X बेहतर करते हैं, तो लोग आपको आसानी से एक्सेप्ट (accept) नहीं करते।

जब आप इतना बड़ा बदलाव लाते हैं, तो कुछ लोग आपको सर आँखों पर बिठाते हैं। वो आपके फ़ैन (fan) बन जाते हैं। पर एक बड़ा वर्ग ऐसा होता है जो आपको पसंद नहीं करता। वह आपके विचार को 'अजीब' कहता है। वह आपकी हँसी उड़ाता है।

और यहीं से शुरू होता है गुय कावासाकी का दूसरा सबसे ख़तरनाक नियम। अगर आपने नया कर्व बना लिया है, तो अब आपको अगले स्टेप (step) के लिए तैयार रहना होगा। आपको अपने प्रॉडक्ट को ऐसा बनाना होगा कि वो 'पोलराइज़' (Polarize) करे। वह दूसरा नियम क्या है? जानने के लिए आगे पढ़िए।


Lesson : पोलराइज़ करो, इग्नोर मत होने दो (Polarize, Don't Be Ignored)

आपने नया कर्व बना लिया। मुबारक हो। अब एक नई समस्या। आपने एक कमाल की चीज़ बनाई है, पर आप चाहते हैं कि 'सबको' यह पसंद आ जाए। यह सबसे बड़ी बेवकूफ़ी है।

गुय कावासाकी कहते हैं, "अगर आप एक प्रॉडक्ट बनाते हैं जिसे हर कोई 'ठीक है' कहता है, तो आपने असल में एक 'रद्दी' प्रॉडक्ट बनाया है।"

क्या आप चाहते हैं कि लोग आपके बारे में कहें, "हाँ, वो वाला ब्रांड (brand)? ठीक ही है। कुछ ख़ास नहीं।"? क्या आप चाहते हैं कि आपके कॉम्पिटिटर आपको 'बस एवरेज' समझें?

नहीं!

आप चाहते हैं कि लोग आपके प्रॉडक्ट को देखकर या तो दीवाने हो जाएँ या फिर गुस्से से तिलमिला उठें।

पोलराइज़ेशन (Polarization) का मतलब है, मार्केट को दो हिस्सों में बाँट देना। जो आपसे प्यार करते हैं, वो आपके 'एवेंजेलिस्ट' (Evangelists) बन जाएँ। और जो आपसे नफ़रत करते हैं, वो बस आपको नज़रअंदाज़ (Ignore) न कर पाएँ।

उदासीनता (Indifference) ही बिज़नेस की सबसे बड़ी दुश्मन है।

आप क्यों अपने प्रॉडक्ट को सबको ख़ुश करने वाला 'मीठा दलिया' बना रहे हैं?

मीठा दलिया सबको पसंद आता है, पर कोई उसके लिए झगड़ता नहीं। कोई उसकी तारीफ़ में पोस्ट (post) नहीं लिखता। कोई उसे अपने दोस्तों को रिकमेंड (recommend) नहीं करता। और यही तो ट्रैप (trap) है। आप 'सेफ़' रहने की कोशिश करते हैं और मार्केट में 'इनविजिबल' (Invisible) हो जाते हैं।

मान लो आप एक नया कॉफ़ी ब्रांड (coffee brand) लॉन्च (launch) करते हो।
  • ऑप्शन A: आप एक ऐसी कॉफ़ी बनाते हैं जो हल्की है, सबको पीनी आसान लगे। 'मीडियम रोस्ट' (medium roast)। कोई शिकायत नहीं करेगा। पर कोई तारीफ़ भी नहीं करेगा।
  • ऑप्शन B: आप एक एक्सट्रीमली (extremely) डार्क रोस्ट (dark roast) कॉफ़ी बनाते हैं। इतनी स्ट्रॉन्ग (strong) कि कुछ लोग कहेंगे, 'अरे बाप रे, ये क्या है? तारकोल जैसा स्वाद है।' और कुछ लोग कहेंगे, 'वाह! यह है असली कॉफ़ी। मुझे मेरी ज़िदगी का किक (kick) मिल गया।'

गुय कावासाकी ऑप्शन B को चुनेंगे।

जब आप पोलराइज़ करते हैं, तो:
  1. आप नॉइज़ (Noise) में खड़े हो जाते हैं: जो लोग आपकी कॉफ़ी को प्यार करते हैं, वो हर किसी को बताएँगे कि बाक़ी सारी कॉफ़ी बकवास है। और जो लोग नफ़रत करते हैं, वो भी आपकी बुराई करके आपका नाम फैलाएँगे। दोनों ही तरह से, आपका नाम 'इग्नोर' नहीं हो रहा।
  2. आप अपनी 'ट्राइब' (Tribe) ढूँढ़ते हैं: आपका प्रॉडक्ट अब 'हर किसी के लिए' नहीं है। यह 'हम' लोगों के लिए है। यह ख़ास महसूस कराता है। यह कस्टमर को एक पहचान देता है कि 'मैं यह पीता हूँ, क्योंकि मैं बाक़ियों जैसा नहीं हूँ।'

अब बात आती है 'Apple' (एप्पल) की।

जब उन्होंने अपना पहला मैक (Mac) निकाला, तो वह 'सबसे बेहतर' नहीं था। उसमें फ़्लॉज़ (flaws) थे। पर वह पोलराइज़िंग था। कुछ लोग उसके डिज़ाइन (design) और यूज़र-फ़्रेंडलीनेस (user-friendliness) पर फ़िदा हो गए। उन्होंने कहा, 'PC तो सिर्फ़ डरावने, ग्रे (grey) बॉक्स हैं।' और दूसरे, PC यूज़र (user) बोले, 'ये क्या खिलौना है? इसमें तो काम ही नहीं होता।'

पर क्या हुआ? Apple के 'लवर्स' ही उनके सबसे बड़े प्रचारक बन गए।

याद रखिए: क्रांति तब आती है जब आप खड़े होते हैं और कहते हैं, "दुनिया ऐसे चलती है, पर मैं इसे ऐसे चलाऊँगा।" इसमें रिस्क (risk) है, लोग आपको 'अजीब' कहेंगे, पर आप 'इग्नोर' नहीं होंगे।

अब जब आपका प्रॉडक्ट 'नया कर्व' बना चुका है और 'पोलराइज़' कर रहा है, तो तीसरा और आख़िरी स्टेप आता है। इन लवर्स को, इन दीवानों को, इन्हें 'कस्टमर' से बदलकर 'एवेंजेलिस्ट' कैसे बनाएँ? इन्हें वो शक्ति कैसे दें कि ये बिना पैसे लिए, बिना सैलरी (salary) लिए, आपका बिज़नेस दुनिया में फैला दें? यही है तीसरा और सबसे क्रूशियल (crucial) नियम।


Lesson : यूज़र्स को 'एवेंजेलिस्ट' बनाओ (Convert Users into Evangelists)

पिछले लेसन में हमने देखा कि पोलराइज़ेशन (polarization) ज़रूरी है। अब आपके पास एक छोटा, पर बहुत दमदार ग्रुप (group) है। ये वो लोग हैं जिन्होंने आपका नया कर्व एक्सेप्ट (accept) किया। इन्हें आपका प्रॉडक्ट 'ठीक' नहीं, बल्कि 'बेहतरीन' लगता है।

पर क्या आप उन्हें सिर्फ़ एक 'कस्टमर' बनाए रखना चाहते हैं?

अगर हाँ, तो आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं।

कस्टमर वो होता है जो पैसे देता है, प्रॉडक्ट इस्तेमाल करता है, और फिर अगर कोई और बेहतर चीज़ मिली, तो चला जाता है। वह वफ़ादार (loyal) नहीं होता।

एवेंजेलिस्ट (Evangelist) वह है जो पैसे देता है, प्रॉडक्ट इस्तेमाल करता है, और साथ ही आपकी कंपनी का प्रचारक बन जाता है। वह एक ऐसा भक्त है जो बिना किसी सैलरी के आपके लिए मार्केटिंग (marketing) करता है।

यही है गुय कावासाकी का मास्टरस्ट्रोक (masterstroke)।

आपको अपने कस्टमर को एक 'वजह' देनी होगी। उन्हें अपना 'सीक्रेट (secret) पार्टनर' महसूस कराओ। उन्हें वह 'फीलिंग (feeling)' दो कि वो सिर्फ़ चीज़ें ख़रीद नहीं रहे, बल्कि क्रांति का हिस्सा हैं।

आप क्यों उन्हें एक बुज़दिल (scared) कंपनी की तरह ट्रीट (treat) करते हैं जो अपने सारे राज़ छिपाकर रखती है?

आप उनसे डरते क्यों हैं? कि वो आपका प्रॉडक्ट हैक (hack) कर लेंगे?

इसके बजाय, उन्हें वो पॉवर दो! उन्हें 'बीटा टेस्टिंग' (Beta Testing) में शामिल करो। उन्हें अपने आइडियाज़ (ideas) पर फीडबैक (feedback) देने के लिए बुलाओ। उन्हें नया प्रॉडक्ट बाज़ार में आने से पहले ही इस्तेमाल करने का मौक़ा दो। इससे उन्हें क्या मिलता है?

एक पहचान।

जब आप अपने कस्टमर को 'इंसाइडर' (Insider) की फ़ीलिंग देते हैं, तो वह 'मैं' से 'हम' बन जाता है। अब यह आपका प्रॉडक्ट नहीं है, यह 'हमारा' प्रॉडक्ट है।

इसे ऐसे समझो। मान लो आप एक नया सॉफ्टवेयर (software) बनाते हैं।
  • ग्रम्पी कंपनी (Grumpy Company): वो सॉफ्टवेयर बेचती है, कस्टमर को गाइड (guide) नहीं देती, और कहती है, 'रूल्स (rules) फॉलो (follow) करो।'
  • एवेंजेलिस्ट कंपनी (Evangelist Company): वो सॉफ्टवेयर बेचती है, पर साथ ही एक ऑनलाइन कम्युनिटी (online community) बनाती है। यूज़र्स को आपस में बात करने देती है। उन्हें बताती है कि वो इस सॉफ्टवेयर को कैसे तोड़-मरोड़कर अपनी मर्ज़ी से इस्तेमाल कर सकते हैं। वो यूज़र्स को प्रॉडक्ट में फ़ीचर जोड़ने का क्रेडिट (credit) देती है।

कौन सी कंपनी ज़्यादा फैलेगी? साफ़ है। दूसरी वाली।

एवेंजेलिस्ट बनाने का सीधा सा मतलब है: उन्हें सम्मान दो।

जब आपका कोई एवेंजेलिस्ट किसी दूसरे को आपका प्रॉडक्ट रिकमेंड करता है, तो वह किसी सेल्स पिच (pitch) की तरह नहीं लगता। वह एक सच्ची गवाही लगती है। यह आपकी मार्केटिंग एजेंसी (agency) की १०० घंटे की मेहनत से ज़्यादा असरदार होती है।

अगर आपने 'नया कर्व' बनाया, 'पोलराइज़' किया, और अब अपने दीवानों को 'एवेंजेलिस्ट' बना दिया है, तो आपकी क्रांति शुरू हो चुकी है। अब आपको सिर्फ़ बैठना नहीं है। आपको उस आग को और हवा देनी है।

क्रांति का मतलब है काम करना। अभी!

अगर आप सिर्फ़ पढ़ते रहेंगे, नोट्स (notes) बनाते रहेंगे, और कहेंगे, "मैं कल से शुरू करूँगा," तो आप बस अपनी जिंदगी के अगले ५ साल बर्बाद कर रहे हैं। आप बस अपनी '10% बेहतर' वाली आरामदायक ज़ोन (zone) में हैं।

ये तीनों नियम सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं हैं। ये आपकी नींद उड़ाने के लिए हैं। ये आपको मजबूर करते हैं कि आप 'औसत' (average) से ऊपर उठें।

अब आप बताइए: आप कल से अपने बिज़नेस में कौन सा नया कर्व बनाने वाले हैं? क्या आप इतने बहादुर (brave) हैं कि आप एक ऐसा प्रॉडक्ट बना सकें जिसे आधा मार्केट नफ़रत करे, और आधा उसके लिए जान दे दे?

अब समय आ गया है कि आप अपनी इंक्रीमेंटल इम्प्रूवमेंट वाली कॉपी (copy) को फ़ाड़कर फेंक दें। और क्रांतिकारी (Revolutionary) बन जाएँ।


सोचना बंद करो, करना शुरू करो। अगर आप इस आर्टिकल को पढ़ रहे हैं, तो आप पहले से ही उन लाखों लोगों से आगे हैं जो बस शिकायत करते हैं। अब इस ज्ञान को ज़िंदगी में उतारो। कमेंट (comment) में बताएँ कि आपका सबसे बड़ा एवेंजेलिस्ट कौन है? और आप उसे अपनी कंपनी का 'इंसाइडर' कैसे बनाएँगे? इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर (share) करें जो सिर्फ़ 'बेहतर' बनने में लगा है, उसे 'नया कर्व' बनाने की ज़रूरत है। क्रांति कभी इंतज़ार नहीं करती!

-----

अगर आप इस बुक की पूरी गहराई में जाना चाहते हैं, तो इस बुक को यहाँ से खरीद सकते है - Buy Now

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#StartupRevolution #GuyKawasaki #BusinessStrategy #EvangelismMarketing #InnovationMindset


_

Post a Comment

Previous Post Next Post