क्या आप आज भी वही घिसी पिटी स्ट्रैटेजी अपना रहे हैं जो पिछले दस सालों से फेल हो रही है? मुबारक हो! आप अपनी पूरी इंडस्ट्री और फ्यूचर को खुद अपने हाथों से बर्बाद कर रहे हैं। जबकि आपके कॉम्पिटिटर्स कल की दुनिया पर कब्जा करने की प्लानिंग कर रहे हैं, आप बस आज के छोटे मोटे मुनाफे में खुश हैं। गैरी हैमल और सीके प्रहलाद की यह किताब आपको बताएगी कि कैसे आप अपनी आँखों पर बंधी पट्टी खोलकर आने वाले कल के असली लीडर बन सकते हैं। आइये जानते हैं वह तीन बड़े सीक्रेट्स जो आपकी सोच बदल देंगे।
Lesson : इंडस्ट्री फोरसाइट - कल की दुनिया को आज ही देख लेना
जरा सोचिये आप एक ऐसी रेस में दौड़ रहे हैं जहाँ फिनिश लाइन बार बार बदल रही है। आप पूरी जान लगाकर भाग रहे हैं पर जैसे ही आप करीब पहुँचते हैं लाइन और आगे खिसक जाती है। गैरी हैमल और सीके प्रहलाद कहते हैं कि ज्यादातर कंपनियां आज यही कर रही हैं। वे आज के मार्केट में नंबर वन बनने की कोशिश कर रही हैं जबकि असली खेल तो उस मार्केट का है जो अभी पैदा ही नहीं हुआ है। इसे ही ये दोनों दिग्गज इंडस्ट्री फोरसाइट कहते हैं। इसका सीधा सा मतलब है कि आपको ज्योतिष बनने की जरूरत नहीं है पर आपको यह पता होना चाहिए कि कल का कस्टमर क्या चाहता होगा।
आजकल के कई बिजनेस मैनेजर्स को लगता है कि वे बहुत स्मार्ट हैं क्योंकि वे हर महीने की सेल्स रिपोर्ट देख रहे हैं। भाई साहब सेल्स रिपोर्ट तो पास्ट टेंस है। वह तो बीत गया। असली मजा तो फ्यूचर टेंस में है। अगर आप सिर्फ आज के कस्टमर की सुन रहे हैं तो आप कभी कुछ नया नहीं बना पाएंगे। हेनरी फोर्ड ने एक बार बहुत पते की बात कही थी कि अगर मैं लोगों से पूछता कि उन्हें क्या चाहिए तो वे कहते कि हमें तेज दौड़ने वाला घोड़ा चाहिए। किसी ने कार के बारे में सोचा ही नहीं था। यही फर्क है एक आम दुकानदार और एक विजनरी लीडर में।
मान लीजिये आपके पड़ोस में एक शर्मा जी हैं जिनकी परचून की दुकान है। शर्मा जी बहुत खुश हैं क्योंकि उनकी दुकान अच्छी चल रही है। लेकिन उन्हें यह नहीं दिख रहा कि पड़ोस वाली गली में एक लड़का अपनी बाइक पर ऐप के जरिए सामान डिलीवरी करने की प्लानिंग कर रहा है। शर्मा जी को लगता है कि लोग हमेशा चलकर उनकी दुकान पर आएंगे क्योंकि वहां गप्पे मारने को मिलता है। लेकिन सच तो यह है कि कल का कस्टमर आलसी होने वाला है। उसे गप्पों से ज्यादा अपनी सोफे पर बैठकर शॉपिंग करने में मजा आएगा। शर्मा जी के पास आज का मार्केट है पर उस लड़के के पास फ्यूचर का फोरसाइट है।
ज्यादातर कंपनियां अपनी पुरानी यादों में जीती हैं। उन्हें लगता है कि जो कल चला था वही आज चलेगा और वही कल भी चलेगा। यह वैसी ही बात हुई जैसे कोई आज के जमाने में नोकिया का वह सांप वाला गेम खेलकर खुद को ई स्पोर्ट्स का किंग समझे। इंडस्ट्री फोरसाइट का मतलब है कि आपको अपनी इंडस्ट्री की बाउंड्री को तोड़कर बाहर देखना होगा। आपको यह सोचना होगा कि कौन सी नई टेक्नोलॉजी या कौन सा नया लाइफस्टाइल आपके बिजनेस को पूरी तरह बदल सकता है।
अगर आप अपनी इंडस्ट्री को लीड करना चाहते हैं तो आपको सिर्फ कॉम्पिटिटर को कॉपी करना छोड़ना होगा। अगर आप वही कर रहे हैं जो सब कर रहे हैं तो आप बस भीड़ का हिस्सा हैं। आपको अपनी एक अलग खिड़की बनानी होगी जिससे आप आने वाले कल का मंजर देख सकें। क्या आप वह देख पा रहे हैं जो दूसरे नहीं देख पा रहे? अगर नहीं तो समझ लीजिये कि आप अपनी बर्बादी की स्क्रिप्ट खुद लिख रहे हैं।
Lesson : कोर कॉम्पिटेंस - वह सुपरपावर जो कोई चुरा नहीं सकता
अब मान लीजिये आपको पता चल गया कि भविष्य कैसा होगा। पर क्या आपके पास वह औजार हैं जिनसे आप उस भविष्य पर कब्जा कर सकें? गैरी हैमल और सीके प्रहलाद कहते हैं कि ज्यादातर कंपनियां यह गलती करती हैं कि वे खुद को अपने प्रोडक्ट्स से पहचानती हैं। जैसे कोई कहे कि मैं साबुन बनाता हूँ या मैं कार बेचता हूँ। भाई साहब यह तो बहुत छोटी सोच है। असली खिलाड़ी वह है जो अपनी कोर कॉम्पिटेंस को पहचानता है। यह आपकी वह अंदरूनी ताकत है जो कई अलग अलग प्रोडक्ट्स में काम आ सकती है और जिसे आपका दुश्मन चाहकर भी कॉपी नहीं कर सकता।
इसे एक मजेदार मिसाल से समझते हैं। सोचिये एक हलवाई है जिसकी जलेबियाँ पूरे शहर में मशहूर हैं। अब अगर वह हलवाई सोचे कि मेरा बिजनेस सिर्फ जलेबी है तो वह कल को फेल हो सकता है। पर अगर उसे पता हो कि उसकी असली ताकत जलेबी नहीं बल्कि वह चाशनी बनाने का सीक्रेट तरीका और उसकी कलाकारी है तो वह उसी ताकत से रसगुल्ले और गुलाब जामुन भी नंबर वन बना सकता है। यही कोर कॉम्पिटेंस है। यह वह जड़ है जिससे पूरा पेड़ खड़ा होता है। आप फल गिनते रह जाते हैं पर असली जादू तो जड़ों में छुपा होता है।
आजकल के कई स्टार्टअप्स को देखिये। वे बस एक ऐप बना लेते हैं और सोचते हैं कि वे दुनिया जीत लेंगे। अरे भाई ऐप तो कोई भी बना लेगा। आपकी कोर कॉम्पिटेंस क्या है? क्या आपकी सर्विस इतनी फास्ट है कि लोग पलक झपकते ही सामान पा जाते हैं? या आपका डेटा इतना तगड़ा है कि आप कस्टमर के मन की बात जान लेते हैं? अगर आपके पास ऐसी कोई ताकत नहीं है तो आप बस एक और दुकान हैं जो सेल के नाम पर डिस्काउंट बांट रही है।
मान लीजिये आपका एक दोस्त है जो बहुत बढ़िया बातें करता है। वह चाहे तो सामान बेच दे या किसी का झगड़ा सुलझा दे। अब उसकी कोर कॉम्पिटेंस है उसकी कम्यूनिकेशन स्किल्स। वह चाहे तो सेल्समैन बने या वकील या फिर एक मोटिवेशनल स्पीकर। उसकी ताकत एक जॉब तक सीमित नहीं है। वैसे ही एक कंपनी को अपनी स्किल्स का एक पोर्टफोलियो बनाना चाहिए न कि सिर्फ प्रोडक्ट्स का ढेर।
अगर आप सिर्फ एक प्रोडक्ट के भरोसे बैठे हैं तो आप उस नोकिया की तरह हैं जिसने सिर्फ मोबाइल बनाने पर ध्यान दिया पर अपनी सॉफ्टवेयर वाली ताकत को भूल गया। और फिर क्या हुआ? एक टचस्क्रीन वाला फोन आया और पूरी सल्तनत ढह गई। गैरी हैमल हमें समझाते हैं कि अपनी कोर कॉम्पिटेंस को पहचानना उसे पालना और फिर उसे नए मार्केट्स में इस्तेमाल करना ही असली मर्दानगी है। क्या आपके पास ऐसी कोई स्किल है जो आपको भीड़ से अलग करती है? या आप भी बस वही घिसा पिटा काम कर रहे हैं जो आपका पड़ोसी पिछले बीस साल से कर रहा है?
अपनी कंपनी को सिर्फ डिपार्टमेंट्स में मत बांटिये बल्कि उसे स्किल्स का एक समंदर बनाइये। जब आपके पास वह खास हुनर होगा तो आप सिर्फ एक मार्केट में नहीं बल्कि आने वाले हर नए मार्केट में किंग बनकर उभरेंगे। याद रखिये प्रोडक्ट तो आते जाते रहेंगे पर आपकी कोर कॉम्पिटेंस ही आपको हमेशा जिंदा रखेगी।
Lesson : स्ट्रेटेजिक इंटेंट - एक पागलपन भरा सपना जो दुनिया बदल दे
अब आपने फ्यूचर देख लिया और अपनी ताकत भी पहचान ली। पर क्या आपके पास वह जिगर है कि आप अपनी पूरी टीम को एक ऐसे मिशन पर लगा सकें जो सुनने में नामुमकिन लगे? गैरी हैमल और सीके प्रहलाद इसे स्ट्रेटेजिक इंटेंट कहते हैं। यह कोई बोरिंग सा विजन स्टेटमेंट नहीं है जो ऑफिस की दीवार पर धूल खा रहा हो। यह एक ऐसी भूख है जो आपको चैन से सोने नहीं देती। यह वह जिद है कि हमें अपनी इंडस्ट्री का हुलिया बदल देना है चाहे दुनिया हमें पागल ही क्यों न कहे।
इसे एक मजेदार और कड़वे सच से समझते हैं। आजकल की ज्यादातर कंपनियों के गोल्स क्या होते हैं? इस साल दस परसेंट प्रॉफिट बढ़ाना है या पिछले साल से थोड़ी ज्यादा सेल्स करनी है। भाई साहब यह गोल नहीं है यह तो बस जिंदा रहने की जद्दोजहद है। यह वैसी ही बात हुई जैसे कोई कहे कि मेरा जीवन का लक्ष्य है कि कल सुबह मुझे चाय के साथ दो बिस्किट एक्स्ट्रा मिल जाएं। अरे भाई कुछ बड़ा सोचो। स्ट्रेटेजिक इंटेंट का मतलब है एक ऐसा पहाड़ खड़ा करना जिस पर चढ़ने की हिम्मत कोई और न कर सके।
साठ के दशक में जब जापान की कोमत्सु कंपनी छोटी सी थी तो उनका एक ही स्ट्रेटेजिक इंटेंट था और वह था एनसर्कल कैटरपिलर। कैटरपिलर उस समय दुनिया की सबसे बड़ी जाइंट कंपनी थी। कोमत्सु ने यह नहीं कहा कि हमें थोड़ा प्रॉफिट चाहिए उन्होंने सीधे शेर की मांद में हाथ डाला। उनका हर कर्मचारी हर इंजीनियर बस इसी एक मिशन के लिए जी रहा था। और फिर क्या हुआ? कुछ ही सालों में उन्होंने कैटरपिलर की कुर्सी हिला दी। इसे कहते हैं विजन का पावर।
आजकल के कई मैनेजर्स को लगता है कि वे बहुत प्रैक्टिकल हैं। वे कहते हैं कि उतना ही पैर फैलाओ जितनी चादर हो। गैरी हैमल कहते हैं कि भाई चादर छोटी है तो नई चादर बुनो पर अपने पैर मत सिकोड़ो। अगर आप सिर्फ उतना ही सोच रहे हैं जितना आपके पास आज संसाधन हैं तो आप कभी लीडर नहीं बन पाएंगे। स्ट्रेटेजिक इंटेंट का मतलब है अपनी औकात से बड़ा सपना देखना और फिर उस सपने को पूरा करने के लिए अपनी औकात बढ़ाना।
क्या आपके पास कोई ऐसा बड़ा सपना है जो आपकी टीम के रोंगटे खड़े कर दे? या आप बस नौ से पांच की नौकरी में एक्सेल शीट्स भरकर खुद को बहुत बड़ा तुर्रम खान समझ रहे हैं? अगर आपके अंदर वह आग नहीं है जो पूरे सिस्टम को हिला दे तो आप बस वक्त गुजार रहे हैं। याद रखिये इतिहास उन्हीं का नाम लेता है जिन्होंने नामुमकिन को मुमकिन बनाने की ठानी थी।
तो दोस्तों कम्पिटिंग फॉर द फ्यूचर का यही सार है। अपनी आँखें खोलिये कल का सूरज देखिये अपनी असली ताकत को पहचानिये और एक ऐसी जिद पालिये जो पूरी इंडस्ट्री का नक्शा बदल दे। दुनिया उन लोगों का इंतजार नहीं करती जो कल के आने का रास्ता देखते हैं बल्कि उनका स्वागत करती है जो कल को खुद अपने हाथों से लिखते हैं।
आज ही खुद से एक सवाल पूछिये कि क्या आप सिर्फ आज के सर्वाइवर हैं या कल के विनर? इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिये जो सिर्फ आज में जी रहे हैं ताकि उनकी भी आँखें खुल सकें। नीचे कमेंट्स में बताइये कि आपकी कोर कॉम्पिटेंस क्या है और आप भविष्य में अपनी इंडस्ट्री में क्या बड़ा बदलाव देखना चाहते हैं। उठिये और कल पर कब्जा कर लीजिये।
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