Cracking the Value Code (Hindi)


क्या आपको सच में लगता है कि सिर्फ ऑफिस की बिल्डिंग और गोदाम में रखा स्टॉक ही आपकी असली दौलत है। अगर हां तो मुबारक हो आप पुरानी इकोनॉमी के साथ डूबने की तैयारी कर चुके हैं। बिना वैल्यू कोड समझे बिजनेस चलाना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल की गाड़ी को धक्का मारना और फिर रोना कि तरक्की क्यों नहीं हो रही।

इस किताब के लेसन्स आपको बताएंगे कि कैसे मॉडर्न दुनिया के दिग्गज लोग बिना बड़ी मशीनों के अरबों की वेल्थ खड़ी कर रहे हैं। चलिए उन 3 पावरफुल लेसन्स को डीकोड करते हैं जो आपके बिजनेस और माइंडसेट को पूरी तरह बदल देंगे।


Lesson : फिजिकल एसेट्स का मोह छोड़ो और इनटेंजिबल की ताकत समझो

अगर आप आज भी यह सोच रहे हैं कि जिसके पास जितनी बड़ी फैक्ट्री है या जिसके गोदाम में जितना ज्यादा माल भरा है वही असली राजा है तो भाई साहब आप अभी भी 1990 के दौर में जी रहे हैं। रिचर्ड बोल्टन और बैरी लिबर्ट अपनी किताब क्रैकिंग द वैल्यू कोड में साफ कहते हैं कि पुरानी इकोनॉमी में फिजिकल चीजें जैसे जमीन मशीन और पैसा ही सब कुछ था। लेकिन आज की न्यू इकोनॉमी में खेल पूरी तरह पलट चुका है। अब वैल्यू उन चीजों से नहीं आती जिन्हें आप छू सकते हैं बल्कि उन चीजों से आती है जिन्हें आप सिर्फ महसूस कर सकते हैं जिन्हें हम इनटेंजिबल एसेट्स कहते हैं।

मान लीजिए आप एक रेस्टोरेंट खोलते हैं। आपने करोड़ों रुपये लगाकर एक आलीशान बिल्डिंग बनाई और उसमें सोने की परत वाली कुर्सियां लगा दीं। लेकिन अगर आपके पास उस रेस्टोरेंट का कोई खास फार्मूला नहीं है कोई ब्रांड वैल्यू नहीं है और आपके पास डेटा नहीं है कि आपके कस्टमर्स को क्या पसंद है तो आपकी वह सोने की कुर्सियां सिर्फ कबाड़ के भाव बिकेंगी। वहीं दूसरी तरफ एक छोटा सा क्लाउड किचन है जिसके पास कोई बैठने की जगह नहीं है लेकिन उसके पास एक जबरदस्त ब्रांड नेम और हजारों वफादार कस्टमर्स का डेटा है। अब आप खुद सोचिए कि मार्केट में किसकी वैल्यू ज्यादा होगी। बिल्कुल सही पकड़ा है आपने वह क्लाउड किचन आज के दौर का असली वेल्थ क्रिएटर है।

हकीकत तो यह है कि आज के बड़े-बड़े स्टार्टअप्स के पास खुद की कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं है। उबेर के पास अपनी खुद की टैक्सियां नहीं हैं और एयरबीएनबी के पास अपने खुद के होटल्स नहीं हैं। फिर भी ये कंपनियां अरबों की मालिक हैं। क्यों। क्योंकि इन्होंने वैल्यू कोड को क्रैक कर लिया है। इन्होंने समझ लिया है कि असली पैसा ईंट और पत्थर में नहीं बल्कि आइडियाज और नेटवर्क में छिपा है। अगर आप आज भी सिर्फ सामान बेचने के चक्कर में लगे हैं और अपने ब्रांड या पेटेंट पर ध्यान नहीं दे रहे हैं तो आप उस दुकानदार की तरह हैं जो पूरी जिंदगी गल्ले पर बैठता रहा लेकिन कभी बड़ा एम्पायर खड़ा नहीं कर पाया।

सर्कस के हाथी की तरह अपनी पुरानी सोच की जंजीरों में बंधे रहना छोड़ दीजिए। न्यू इकोनॉमी में आपकी नॉलेज आपका डेटा और आपका ब्रांड ही आपकी असली तिजोरी है। अगर आप अपने बिजनेस में सिर्फ फिजिकल एसेट्स बढ़ाते जा रहे हैं और डिजिटल या इनटेंजिबल एसेट्स पर ध्यान नहीं दे रहे हैं तो आप एक ऐसी नाव चला रहे हैं जिसमें छेद हो चुका है। लोग आपको हंसते हुए देखेंगे क्योंकि आप मेहनत तो गधों वाली कर रहे हैं लेकिन रिजल्ट जीरो आ रहा है। वेल्थ क्रिएट करनी है तो अपनी सोच को ईंट-पत्थर से निकालकर डेटा और एल्गोरिदम की तरफ ले जाइए।

जब आप इस लेसन को समझ लेते हैं कि आपकी असली ताकत क्या है तब आप अगले पड़ाव के लिए तैयार होते हैं। क्योंकि सिर्फ एसेट्स होना काफी नहीं है उन एसेट्स को लोगों के भरोसे के साथ जोड़ना भी जरूरी है जो हम अगले लेसन में देखेंगे।


Lesson : कस्टमर रिलेशनशिप को कैश में बदलना सीखिए

पहले लेसन में हमने समझा कि ईंट और पत्थर से बड़ी ताकत आपके आइडियाज में है। लेकिन भाई साहब आइडियाज तब तक बेकार हैं जब तक आपके पास ऐसे लोग न हों जो आप पर आँख बंद करके भरोसा करें। रिचर्ड बोल्टन कहते हैं कि न्यू इकोनॉमी में कस्टमर कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसे आप बस एक बार सामान बेचें और भूल जाएं। आज का कस्टमर आपकी कंपनी का सबसे बड़ा एसेट है। अगर आपके पास एक लाख ऐसे लोग हैं जो आपके ब्रांड के दीवाने हैं तो समझ लीजिए कि आप एक सोने की खान पर बैठे हैं।

मोहल्ले के उस बनिए को याद कीजिए जो डायरी में हिसाब रखता था। वह आपको नाम से जानता था और उसे पता होता था कि आपके घर में कौन सी चाय पत्ती इस्तेमाल होती है। वह पुरानी इकोनॉमी का छोटा सा जादूगर था। लेकिन आज के डिजिटल दौर में कई कंपनियां अरबों खर्च करके भी यह नहीं जान पातीं कि उनके कस्टमर को असल में चाहिए क्या। वे बस डिस्काउंट के पीछे भागते हैं और सोचते हैं कि लोग उनके पास आएंगे। भाई साहब डिस्काउंट से भीड़ आती है और वैल्यू से वफादारी। अगर आप सिर्फ सस्ता बेचकर मार्केट जीतना चाहते हैं तो तैयार रहिए क्योंकि आपसे सस्ता बेचने वाला कोई और कल पैदा हो जाएगा और आपके कस्टमर्स उसे देखते ही पलटी मार लेंगे।

सच्चाई तो यह है कि आज के दौर में डेटा ही नया तेल है। लेकिन उस तेल का क्या फायदा अगर आप उससे आग न जला सकें। सफल बिजनेस वो हैं जो अपने कस्टमर की आदतों को समझते हैं। वे उन्हें सिर्फ एक नंबर नहीं समझते बल्कि उनके साथ एक रिश्ता बनाते हैं। एप्पल को ही देख लीजिए। लोग एप्पल का फोन सिर्फ फीचर्स के लिए नहीं खरीदते बल्कि वे उस कम्युनिटी का हिस्सा बनने के लिए एक्स्ट्रा पैसे देते हैं। यह एक इमोशनल बॉन्ड है जिसे वैल्यू कोड में सबसे ऊपर रखा गया है। अगर आपके बिजनेस में लोग सिर्फ इसलिए आ रहे हैं क्योंकि आप सस्ते हैं तो आप एक बहुत ही कमजोर पिच पर बैटिंग कर रहे हैं। जिस दिन सामने वाले ने एक रुपया भी कम किया आप क्लीन बोल्ड हो जाएंगे।

कुछ लोग सोचते हैं कि सोशल मीडिया पर हजारों फेक फॉलोअर्स खरीद लेने से उनकी वैल्यू बढ़ जाएगी। यह वैसा ही है जैसे आप प्लास्टिक के फूलों पर परफ्यूम छिड़ककर कहें कि आपका गार्डन महक रहा है। असली वैल्यू तब क्रिएट होती है जब आपका कस्टमर खुद जाकर चार लोगों को बताए कि यार यह ब्रांड तो गजब है। न्यू इकोनॉमी में आपका मार्केटिंग बजट आपके काम नहीं आता बल्कि आपका कस्टमर ही आपका मार्केटिंग मैनेजर बन जाता है। अगर आप अपने कस्टमर को सिर्फ एक ट्रांजैक्शन की तरह देख रहे हैं तो आप अपनी ही कब्र खोद रहे हैं।

रिश्ते बनाना और उन्हें निभाना सिर्फ शादियों में जरूरी नहीं होता साहब बिजनेस में भी यही फॉर्मूला चलता है। जब आप कस्टमर के साथ एक अटूट रिश्ता बना लेते हैं तो आपका बिजनेस एक ऑटो पायलट मोड पर आ जाता है। लेकिन याद रखिए रिश्ता बनाना एक बात है और बदलती दुनिया के साथ उस रिश्ते को नया रूप देना दूसरी बात। और यही हमें ले जाता है हमारे अगले और सबसे जरूरी लेसन की तरफ।


Lesson : इनोवेशन और अडैप्टेबिलिटी का तड़का लगाओ वरना गायब हो जाओगे

अब तक हमने समझ लिया कि ईंट पत्थर की मोह माया छोड़नी है और कस्टमर के साथ फेरे लेने हैं। लेकिन सोचिए अगर आपने यह सब कर लिया और फिर एक दिन सुबह उठे और पता चला कि आपकी पूरी इंडस्ट्री ही बदल गई है तो क्या करेंगे। रिचर्ड बोल्टन कहते हैं कि न्यू इकोनॉमी में जो रुक गया वह झुक गया और जो झुक गया वह पूरी तरह बिक गया। वैल्यू कोड का तीसरा और सबसे बड़ा पिलर है इनोवेशन और अडैप्टेबिलिटी। मतलब यह कि आपको वक्त से दो कदम आगे की सोच रखनी होगी वरना लोग आपको नोकिया के पुराने फोन की तरह भूल जाएंगे।

याद है वो दौर जब आप सड़कों पर खड़े होकर टैक्सी का इंतजार करते थे और टैक्सी वाला आपको ऐसे इग्नोर करता था जैसे आप उसके पुराने उधार मांगने वाले रिश्तेदार हों। फिर अचानक एक दिन उबेर और ओला आए और उन्होंने गेम ही बदल दिया। टैक्सी वालों ने सोचा कि अरे यह ऐप वैप क्या चलेगा। लेकिन आज आलम यह है कि वही टैक्सी वाले अपनी गाड़ियां पीली पट्टी से बदलकर सफेद करवा रहे हैं। क्यों। क्योंकि उन्होंने वक्त के साथ खुद को नहीं बदला और वैल्यू कोड को समझने में देरी कर दी। अगर आप अपने बिजनेस में आज भी वही घिसे पिटे तरीके अपना रहे हैं जो दादा जी के जमाने में चलते थे तो समझ लीजिए कि आप अपनी बरबादी का मुहूर्त निकाल रहे हैं।

नई इकोनॉमी में सक्सेस का मतलब यह नहीं है कि आपने एक बार कोई अच्छा प्रोडक्ट बना दिया और अब आप जिंदगी भर उसकी रॉयल्टी खाएंगे। भाई साहब यहाँ हर दूसरे दिन एक नया स्टार्टअप आता है जो आपके पूरे बिजनेस मॉडल को एक चुटकी में उड़ा सकता है। असली वेल्थ वो लोग बनाते हैं जो खुद को बार-बार रीइन्वेंट करते हैं। नेटफ्लिक्स को देखिए। पहले वे घर-घर सीडी भेजते थे। अगर वे उसी में खुश रहते तो आज शायद कबाड़ की दुकान चला रहे होते। लेकिन उन्होंने समझा कि दुनिया अब स्ट्रीमिंग की तरफ बढ़ रही है और उन्होंने खुद को बदला। आज वे पूरी दुनिया के मनोरंजन के राजा हैं।

कुछ लोग सोचते हैं कि उन्होंने एक बार डिजिटल मार्केटिंग सीख ली या एक वेबसाइट बनवा ली तो बस उनका काम हो गया। यह वैसा ही है जैसे आप जिम जाकर एक दिन डोले बनाएं और सोचें कि पूरी जिंदगी सलमान खान दिखेंगे। इनोवेशन एक बार का काम नहीं है यह एक आदत है। अगर आप हर दिन यह नहीं सोच रहे कि आप अपने कस्टमर को और बेहतर वैल्यू कैसे दे सकते हैं तो यकीन मानिए कोई और आपके कस्टमर के कान में जाकर कह देगा कि भाई मेरे पास आ जाओ मैं तुम्हें ज्यादा फायदा दूंगा।

वेल्थ क्रिएट करना कोई जादू नहीं है बल्कि यह एक अनुशासन है। जो लोग वैल्यू कोड को क्रैक करते हैं वे सिर्फ पैसे के पीछे नहीं भागते बल्कि वे सिस्टम के पीछे भागते हैं। वे जानते हैं कि अगर उनका सिस्टम और उनका इनोवेशन सही है तो पैसा उनके पीछे खुद चलकर आएगा। इस किताब का असली सार यही है कि पुराने तरीके अब मर चुके हैं। नई दुनिया में वही टिकेगा जो अपनी पुरानी चमड़ी उतारकर नई सोच और नई टेक्नोलॉजी को गले लगाएगा।

तो अब सवाल यह है कि क्या आप अब भी अपनी पुरानी सोच के साथ चिपके रहना चाहते हैं या फिर आप तैयार हैं उस नए रास्ते पर चलने के लिए जहाँ वेल्थ आपका इंतजार कर रही है। फैसला आपका है क्योंकि वक्त किसी का इंतजार नहीं करता और मार्केट तो बिल्कुल भी नहीं।


वैल्यू कोड को क्रैक करना कोई रॉकेट साइंस नहीं है बस अपनी नजरिया बदलने की बात है। अगर आप भी अपने बिजनेस या करियर में वो बड़ी छलांग लगाना चाहते हैं तो आज ही अपने इनटेंजिबल एसेट्स पर काम करना शुरू कीजिए। नीचे कमेंट में बताएं कि आपको इन 3 लेसन्स में से कौन सा लेसन सबसे ज्यादा असरदार लगा। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो आज भी पुरानी सोच में फंसे हुए हैं। चलिए मिलकर इस न्यू इकोनॉमी में अपनी जगह बनाते हैं।

-----

अगर आप इस बुक की पूरी गहराई में जाना चाहते हैं, तो इस बुक को यहाँ से खरीद सकते है - Buy Now

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#BusinessStrategy #WealthCreation #BookSummary #ValueCode #Entrepreneurship


_

Post a Comment

Previous Post Next Post