ABCs of E-Learning (Hindi)


अगर आपको लगता है कि सिर्फ महंगे ऑनलाइन कोर्स खरीदकर आप दुनिया के सबसे बड़े ज्ञानी बन जाएंगे तो बधाई हो आप अपनी मेहनत की कमाई और कीमती वक्त दोनों को नाले में बहा रहे हैं क्योंकि बिना सही स्ट्रेटेजी के ई लर्निंग सिर्फ एक डिजिटल कचरा है।

आजकल हर कोई ऑनलाइन पढ़ रहा है पर क्या वाकई कोई कुछ सीख रहा है या सिर्फ सर्टिफिकेट इकट्ठे कर रहा है। चलिए ब्रुक ब्रॉडबेंट की इस बुक से जानते हैं ई लर्निंग के वो तीन लेसन जो आपकी आंखें खोल देंगे और आपको एक प्रो लर्नर बना देंगे।


लेसन १ : सिर्फ टेक्नोलॉजी के पीछे मत भागो अपना दिमाग भी लगाओ

आजकल का जमाना ऐसा है कि अगर आप ऑनलाइन कोर्स नहीं कर रहे तो लोग आपको ऐसे देखते हैं जैसे आपने कोई बहुत बड़ा जुर्म कर दिया हो। ई लर्निंग का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में बड़ी बड़ी वेबसाइट्स और महंगे हेडफोन्स आने लगते हैं। ब्रुक ब्रॉडबेंट अपनी बुक में सबसे पहला और बड़ा लेसन यही देते हैं कि ई लर्निंग का मतलब सिर्फ लेटेस्ट गैजेट्स या कूल दिखने वाले ऐप्स नहीं है। लोग सोचते हैं कि अगर उन्होंने दुनिया का सबसे महंगा टैबलेट खरीद लिया तो सारा ज्ञान उनके दिमाग में वाईफाई की तरह खुद ही डाउनलोड हो जाएगा। पर भाई साहब असलियत इससे कोसों दूर है।

मान लीजिए आपको कुकिंग सीखनी है। अब आप यूट्यूब पर जाकर दुनिया के सबसे बड़े शेफ का वीडियो ४के क्वालिटी में देख रहे हैं। आपके पास सबसे महंगा ओवन भी है और चिमटा भी। लेकिन अगर आपको यही नहीं पता कि नमक कब डालना है तो वो वीडियो सिर्फ एक एंटरटेनमेंट है लर्निंग नहीं। ई लर्निंग में भी हम यही गलती करते हैं। हम अक्सर चकाचौंध वाली वेबसाइट्स और एनीमेशन के चक्कर में असली कंटेंट को भूल जाते हैं। टेक्नोलॉजी सिर्फ एक जरिया है मंजिल नहीं।

इंसानी दिमाग को आज भी वही पुरानी कहानियाँ और लॉजिक समझ आते हैं जो सदियों पहले आते थे। बुक कहती है कि टेक्नोलॉजी को अपनी बैसाखी मत बनाओ। अगर कोई कोर्स आपको सिर्फ इसलिए पसंद आ रहा है क्योंकि उसकी वेबसाइट बहुत सुंदर है तो यकीन मानिए आप एक जाल में फंस रहे हैं। असली ई लर्निंग वो है जो आपके काम को आसान बनाए ना कि आपके लैपटॉप की रैम और आपके दिमाग का दही करे।

हमारे यहाँ शर्मा जी का लड़का है जिसने पिछले महीने दस ऑनलाइन कोर्सेज में एनरोल किया। अब उसके पास दस सर्टिफिकेट तो हैं पर अगर उससे बेसिक सवाल पूछ लो तो वो ऐसे बगलें झांकने लगता है जैसे उससे किसी ने उसकी किडनी मांग ली हो। यह है बिना समझे टेक्नोलॉजी का गुलाम बनने का नतीजा। ई लर्निंग का असली फायदा तभी है जब आप टूल से ज्यादा उस स्किल पर ध्यान दें जिसे आप सीखना चाहते हैं। वरना आप सिर्फ एक डिजिटल लाइब्रेरी बनकर रह जाएंगे जिसके पास किताबें तो बहुत हैं पर अक्ल एक पैसे की नहीं।

अगले लेसन में हम देखेंगे कि कैसे हम ऑनलाइन पढ़ाई के उन गड्ढों से बच सकते हैं जहाँ दुनिया के ज्यादातर लोग गिरकर अपना करियर खराब कर लेते हैं।


लेसन २ : ई लर्निंग के मायाजाल और गड्ढों से बचकर निकलना सीखो

ई लर्निंग की दुनिया किसी जादुई नगरी से कम नहीं है जहाँ हर कोई आपको यह सपना बेच रहा है कि बस एक क्लिक करो और करोड़पति बन जाओ। ब्रुक ब्रॉडबेंट हमें आगाह करते हैं कि यहाँ जितने फायदे हैं उससे कहीं ज्यादा खतरनाक गड्ढे यानी पिटफॉल्स हैं। सबसे बड़ा गड्ढा है इन्फॉर्मेशन ओवरलोड। आज के दौर में गूगल और यूट्यूब पर इतना ज्ञान बिखरा पड़ा है कि इंसान समझ ही नहीं पाता कि शुरुआत कहाँ से करे। लोग एक साथ पांच कोर्सेज शुरू कर देते हैं और फिर दो दिन बाद उनका मोटिवेशन वैसे ही फुस्स हो जाता है जैसे दिवाली के अगले दिन बिना जला हुआ पटाखा।

कल्पना कीजिए कि आप एक बुफे डिनर में गए हैं जहाँ सौ तरह की डिशेज रखी हैं। अब आप लालच में आकर अपनी प्लेट में सब कुछ भर लेते हैं। नतीजा क्या होगा। या तो आपका पेट खराब होगा या फिर आप कुछ भी ढंग से एन्जॉय नहीं कर पाएंगे। ई लर्निंग में भी यही होता है। हम हर फ्री वेबिनार और हर सस्ते कोर्स की तरफ ऐसे लपकते हैं जैसे मोहल्ले की चाची सेल देखकर लपकती हैं। बुक कहती है कि सबसे पहले अपनी जरूरत को पहचानो। क्या आपको वाकई उस डेटा साइंस के कोर्स की जरूरत है या आप सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आपके पड़ोसी का कुत्ता भी आजकल कोडिंग सीख रहा है।

एक और बड़ा पिटफॉल है आइसोलेशन यानी अकेले पड़ जाना। ऑनलाइन पढ़ाई करते वक्त आपके पास कोई ऐसा टीचर नहीं होता जो आपको चॉक फेंक कर मारे या कोई ऐसा दोस्त नहीं होता जिससे आप कैंटीन में जाकर उस टॉपिक पर बहस कर सकें। अकेले कमरे में स्क्रीन के सामने बैठकर पढ़ना बहुत बोरिंग हो सकता है। यहीं पर ज्यादातर लोग हार मान लेते हैं। बुक हमें सिखाती है कि ई लर्निंग का मतलब खुद को काल कोठरी में बंद करना नहीं है। आपको उन कम्युनिटीज और ग्रुप्स का हिस्सा बनना चाहिए जहाँ आप अपने जैसे दूसरे पागलों से बात कर सकें जो वही सीख रहे हैं।

मेरे एक दोस्त ने सोचा कि वो ऑनलाइन वीडियो देखकर जिमिंग सीख लेगा। उसने महंगे डंबल मंगा लिए और मोबाइल चालू करके कसरत करने लगा। तीन दिन बाद उसके हाथ में मोच आ गई क्योंकि वीडियो में कोच तो सही कर रहा था पर मेरे दोस्त का पोस्चर एकदम खराब था और उसे टोकने वाला कोई नहीं था। ई लर्निंग में भी आपको एक गाइड या फीडबैक सिस्टम की जरूरत होती है। अगर आप सिर्फ एकतरफा वीडियो देख रहे हैं तो आप खुद को धोखा दे रहे हैं। गड्ढों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप छोटे छोटे लक्ष्य बनाएं और सिर्फ वही सीखें जिसकी आपको सच में जरूरत है वरना इंटरनेट का समंदर आपको डुबोने के लिए तैयार बैठा है।

तीसरे और आखिरी लेसन में हम बात करेंगे उस सीक्रेट सॉस की जो आपकी ऑनलाइन लर्निंग को सच में सफल बनाती है और आपको भीड़ से अलग खड़ा करती है।


लेसन ३ : एंगेजमेंट का असली खेल और खुद को मोटिवेटेड रखने की कला

ऑनलाइन पढ़ाई की सबसे बड़ी दुश्मन है आपकी बगल वाली टैब जिसमें यूट्यूब पर कोई मजेदार मीम या नेटफ्लिक्स की नई फिल्म चल रही होती है। ब्रुक ब्रॉडबेंट अपनी बुक में साफ कहते हैं कि अगर आप एंगेज्ड नहीं हैं तो आप सीख नहीं रहे हैं बल्कि सिर्फ अपना डेटा फूक रहे हैं। ई लर्निंग में कोई आपको डंडा लेकर डराने वाला नहीं होता कि चलो पढ़ाई करो। यहाँ सारा खेल आपके अपने अनुशासन का है। अगर आप सोचते हैं कि आप बिस्तर पर लेटकर मोबाइल हाथ में लेकर कुछ महान सीख लेंगे तो आप अपनी जिंदगी के सबसे बड़े भ्रम में जी रहे हैं।

इसे ऐसे समझिये जैसे आप किसी बोरिंग शादी की वीडियो देख रहे हों जहाँ आपको सिर्फ खाने का इंतजार है। अगर वीडियो में आपका इंटरेस्ट नहीं है तो आप उसे फॉरवर्ड कर करके ही देखेंगे। ई लर्निंग को भी हम अक्सर फॉरवर्ड मोड पर ही चलाते हैं। बुक सिखाती है कि लर्निंग को एक्टिव बनाना पड़ता है। सिर्फ सुनना काफी नहीं है। आपको नोट्स बनाने होंगे सवाल पूछने होंगे और जो सीखा है उसे तुरंत अप्लाई करना होगा। वरना दिमाग का स्वभाव ऐसा है कि वो कल तक सब कुछ साफ कर देगा जैसे म्युनिसिपैलिटी वाले सड़क साफ करते हैं।

मोटिवेशन कोई ऐसी चीज नहीं है जो एक बार मिल गई तो हमेशा रहेगी। यह उस परफ्यूम की तरह है जो सुबह लगाओ तो शाम तक उड़ जाता है। ऑनलाइन लर्निंग में मोटिवेशन बचाए रखने का सबसे अच्छा तरीका है रिवॉर्ड सिस्टम। अपने आप से वादा कीजिये कि अगर मैंने आज यह मॉड्यूल खत्म कर लिया तो ही मैं सोशल मीडिया देखूंगा। वरना हम तो वो लोग हैं जो पांच मिनट की पढ़ाई के बाद खुद को दो घंटे का ब्रेक देते हैं क्योंकि हमें लगता है हमने हिमालय फतह कर लिया है।

मेरी एक कजिन है जो कहती है कि उसे ऑनलाइन पढ़ाई से नफरत है क्योंकि उसे नींद आती है। अब भाई अगर आप रात को दो बजे अंधेरे कमरे में नीली रोशनी वाली स्क्रीन के सामने बैठकर रॉकेट साइंस पढ़ोगे तो नींद नहीं आएगी तो क्या परियां आएंगी। बुक कहती है कि अपना माहौल बदलिए। ई लर्निंग का मतलब यह नहीं कि आप अपनी सेहत और नींद का बलिदान दे दें। सही वक्त और सही तरीके से पढ़ना ही आपको असली विनर बनाता है। जब तक आप खुद को उस प्रोसेस में इन्वॉल्व नहीं करेंगे तब तक दुनिया का कोई भी महंगा कोर्स आपकी अक्ल में इजाफा नहीं कर पाएगा।

ई लर्निंग एक सुपरपावर है अगर आप इसे सही से इस्तेमाल करना जानते हैं। वरना यह सिर्फ एक डिजिटल भूलभुलैया है जहाँ लोग खो जाते हैं। आज ही अपनी लर्निंग की जिम्मेदारी खुद लें और इन लेसन को अपनी लाइफ में उतारें।


तो दोस्तों, ई लर्निंग का सफर जितना आसान दिखता है उतना है नहीं। लेकिन अगर आप इन तीन लेसन को याद रखेंगे तो आप कभी भी फेल नहीं होंगे। अब आप कमेंट में बताइए कि ऐसा कौन सा ऑनलाइन कोर्स है जो आपने खरीदा तो था पर आज तक पूरा नहीं किया। देखते हैं कि कितने लोग इस डिजिटल आलस का शिकार हैं। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो हर दूसरे दिन नया कोर्स शुरू करने का नाटक करते हैं।

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