Customers Rule! (Hindi)


क्या आपको लगता है कि भारी डिस्काउंट और इंस्टाग्राम एड्स चलाकर आप ई कॉमर्स के राजा बन जाएंगे। बड़े भाई यह आपकी सबसे बड़ी गलतफहमी है। अगर आप अभी भी पुराने ढर्रे पर बिजनेस चला रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप अपने पैसे को आग लगा रहे हैं और कस्टमर्स को पड़ोसी की दुकान पर भेज रहे हैं।

आज के इस दौर में ई कॉमर्स का हनीमून पीरियड खत्म हो चुका है। अब केवल वही टिकेगा जो कस्टमर के दिमाग को पढ़ना जानता है। इस आर्टिकल में हम रोजर ब्लैकवेल की किताब से ऐसे ३ लाइफ चेंजिंग लेसन्स सीखेंगे जो आपके डूबते हुए बिजनेस को बचा सकते हैं।


Lesson : कस्टमर इज द न्यू बॉस (उनकी मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता)

देखिये, वह जमाना गया जब दुकानदार राजा होता था और जो कूड़ा भी बेचता था लोग लाइन लगाकर खरीदते थे। आज का कस्टमर वह चिड़िया नहीं है जिसे आप बस दाना डालकर फंसा लेंगे। रोजर ब्लैकवेल अपनी किताब में साफ कहते हैं कि ई कॉमर्स का हनीमून पीरियड अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। पहले क्या होता था। आपने एक सस्ती सी वेबसाइट बनाई और फेसबुक पर थोड़े पैसे फूंके और ऑर्डर आने शुरू हो गए। लेकिन अब मार्केट में इतनी भीड़ है कि अगर आपने कस्टमर को भगवान नहीं समझा तो वह आपको फुटपाथ पर आने में देर नहीं लगाएगा।

आज के दौर में पावर पूरी तरह से कस्टमर के अंगूठे में है। एक गलत एक्सपीरियंस और वह आपकी ऐप को अनइंस्टॉल करके आपके कॉम्पिटिटर की गोद में जाकर बैठ जाएगा। आपको क्या लगता है कि आपने ५० परसेंट का डिस्काउंट दे दिया तो कस्टमर आपका गुलाम बन गया। बिल्कुल नहीं। वह तो बस उस सेल का फायदा उठाने आया है। जैसे ही आपकी सेल खत्म वह गायब। यह वैसा ही है जैसे शादी में वो रिश्तेदार जो सिर्फ पनीर की सब्जी के लिए आते हैं और नमक कम होने पर पूरी दुनिया में आपकी बुराई करते हैं।

इस लेसन का सबसे बड़ा सार यह है कि आपको अपने बिजनेस को कस्टमर के चश्मे से देखना होगा। मान लीजिए आप ऑनलाइन जूते बेचते हैं। अगर आपका जूता दिखने में तो हीरो जैसा है लेकिन पहनने में पैर का कचरा कर देता है तो भूल जाइये कि वह कस्टमर वापस आएगा। वह तो नहीं आएगा लेकिन अपने साथ १० और लोगों को ले डूबेगा। सोशल मीडिया पर एक नेगेटिव रिव्यू आपके ब्रांड की बैंड बजाने के लिए काफी है।

असली जीत तब होती है जब आप कस्टमर की प्रॉब्लम को अपनी प्रॉब्लम समझते हैं। अगर डिलीवरी में देरी हो रही है तो उन्हें पहले ही बता दीजिये। झूठ बोलकर या छिपकर आप केवल अपना नुकसान कर रहे हैं। आज का कस्टमर बहुत स्मार्ट है। उसे पता है कि कहाँ उसे वैल्यू मिल रही है और कहाँ उसे काटा जा रहा है। अगर आप उसे इज्जत नहीं देंगे तो वह आपको प्रॉफिट नहीं देगा। इसलिए अपने ऑफिस की दीवार पर बड़े अक्षरों में लिख लीजिये कि कस्टमर ही असली मालिक है और आप बस उनके एक छोटे से नौकर हैं। जो बिजनेस इस कड़वे सच को हजम कर लेता है वही इस ई कॉमर्स की रेस में लंबा टिकता है। बाकी तो बस आते हैं और दिवाली की सेल की तरह खत्म हो जाते हैं।


Lesson : वैल्यू ओवर डिस्काउंट (सस्ता रोए बार बार और महंगा रोए एक बार)

अगर आपको लगता है कि आप हर हफ्ते सेल लगाकर और भारी डिस्काउंट देकर अंबानी बन जाएंगे तो भाई साहब आप गलत ट्रैक पर हैं। रोजर ब्लैकवेल इस किताब में एक बहुत ही कड़वा सच बताते हैं। डिस्काउंट से आप भीड़ तो जमा कर सकते हैं लेकिन वफादार कस्टमर नहीं बना सकते। डिस्काउंट एक ड्रग की तरह है। एक बार आदत लग गई तो कस्टमर बिना सेल के आपके पास थूकने भी नहीं आएगा। क्या आप चाहते हैं कि आपका बिजनेस सिर्फ एक सेल का मोहताज बनकर रह जाए।

आज के ई कॉमर्स में असली खिलाड़ी वही है जो डिस्काउंट की जगह वैल्यू पर फोकस करता है। वैल्यू का मतलब सिर्फ बढ़िया प्रोडक्ट नहीं होता बल्कि पूरा एक्सपीरियंस होता है। मान लीजिये आपने एक मोबाइल मंगाया। वह मोबाइल बहुत सस्ता मिला लेकिन उसे डिलीवर होने में १५ दिन लग गए और जब डब्बा खुला तो उसमें से चार्जर गायब था। अब आप उस डिस्काउंट को चाटेंगे या कंपनी को कोसेंगे। जाहिर है आप दोबारा वहां से सुई भी नहीं खरीदेंगे।

लोग पैसा खर्च करने को तैयार हैं बशर्ते उन्हें लगे कि उन्हें कुछ खास मिल रहा है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। एक तरफ वो रेस्टोरेंट है जो ५० परसेंट ऑफ देता है लेकिन वहां सफाई नहीं है और वेटर आपसे ऐसे बात करता है जैसे आप उससे उधार मांग रहे हों। दूसरी तरफ वो कैफे है जहाँ कॉफी थोड़ी महंगी है लेकिन वहां का माहौल और सर्विस आपको सुकून देती है। आप कहाँ जाना पसंद करेंगे। जाहिर है दूसरे वाले कैफे में। ई कॉमर्स में भी यही नियम लागू होता है। आपकी वेबसाइट कितनी तेज चलती है। क्या आपका कस्टमर केयर सच में केयर करता है। क्या आपकी पैकेजिंग ऐसी है जिसे खोलकर कस्टमर को खुशी मिले।

अगर आप केवल सस्ता बेचने की रेस में भागेंगे तो कोई और आएगा जो आपसे भी सस्ता बेचेगा और आपका बिजनेस ठप हो जाएगा। यह एक कभी न खत्म होने वाली सुसाइड रेस है। इसकी जगह अपनी सर्विस को इतना स्मूथ बनाइये कि कस्टमर को १० रुपये ज्यादा देने में भी दर्द न हो। उसे महसूस कराइये कि वह स्पेशल है। जब आप कस्टमर को एक ऐसा अनुभव देते हैं जो उसे और कहीं नहीं मिलता तब आप एक मोनोपॉली क्रिएट करते हैं। याद रखिये डिस्काउंट से आप केवल ट्रांजेक्शन करते हैं लेकिन वैल्यू देकर आप एक रिश्ता बनाते हैं। और बिजनेस में रिश्ते ही लंबे समय तक पैसा कमा कर देते हैं।


Lesson : डेटा और टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल (कस्टमर के दिल का रास्ता डेटा से होकर जाता है)

आजकल हर कोई चिल्लाता है कि डेटा ही नया तेल है। लेकिन भाई साहब अगर उस तेल से आप अपनी गाड़ी नहीं चला पा रहे तो वह सिर्फ आपके फर्श पर गंदगी फैलाएगा। रोजर ब्लैकवेल अपनी किताब में समझाते हैं कि डेटा इकट्ठा करना बहादुरी नहीं है बल्कि उस डेटा से कस्टमर की पसंद को समझना असली खेल है। आज के ई कॉमर्स में अगर आप अपने कस्टमर को वही पुराने घिसे पिटे ईमेल और मैसेज भेज रहे हैं जो आप सबको भेजते हैं तो यकीन मानिये आप अपना और उनका दोनों का टाइम खराब कर रहे हैं।

मान लीजिये आपने ऑनलाइन कभी जिम का सामान नहीं खरीदा लेकिन आपकी ऐप आपको रोज प्रोटीन पाउडर और डंबल के नोटिफिकेशन भेज रही है। आपको कैसा लगेगा। गुस्सा आएगा ना। वहीं दूसरी तरफ अगर आपको पता चले कि आपकी फेवरेट शर्ट का नया कलर स्टॉक में आया है तो आप तुरंत क्लिक करेंगे। यही फर्क है अंधाधुंध मार्केटिंग और स्मार्ट मार्केटिंग में। डेटा आपको बताता है कि आपका कस्टमर कब सोता है उसे क्या पसंद है और वह किस बात पर पैसा खर्च करेगा।

लेकिन यहाँ एक बड़ा पेच है। डेटा का इस्तेमाल सिर्फ बेचने के लिए नहीं बल्कि रिश्ते को पर्सनल बनाने के लिए करिये। अगर किसी कस्टमर ने पिछले साल अपनी एनिवर्सरी पर आपसे कुछ खरीदा था तो इस साल उसे एक पर्सनल विश और छोटा सा गिफ्ट कूपन भेज दीजिये। वह कस्टमर आपके लिए इमोशनल हो जाएगा। आज की टेक्नोलॉजी का मतलब केवल बड़ी मशीनें नहीं है बल्कि वह तरीका है जिससे आप हजारों किलोमीटर दूर बैठे इंसान को यह महसूस करा सकें कि आप उसे जानते हैं।

अगर आप डेटा को इग्नोर करेंगे तो आप उस अंधे आदमी की तरह हैं जो हाईवे पर गाड़ी चला रहा है। एक्सीडेंट तो होना ही है। अपनी टेक्नोलॉजी को इतना एडवांस बनाइये कि कस्टमर को वो चीज मिल जाए जिसकी उसे तलाश है इससे पहले कि वह उसे खुद सर्च करे। ई कॉमर्स में जीत उसी की होती है जो भविष्य को भांप लेता है।


दोस्तो, ई कॉमर्स की दुनिया अब बदल चुकी है। अगर आप अभी भी पुराने तरीके अपना रहे हैं तो संभल जाइये। आज ही अपने बिजनेस में कस्टमर को सबसे ऊपर रखिये और डिस्काउंट की जगह वैल्यू देना शुरू करिये। क्या आप तैयार हैं अपने बिजनेस को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए। नीचे कमेंट में जरूर बताएं कि आपका सबसे पसंदीदा लेसन कौन सा था। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपना ऑनलाइन बिजनेस शुरू करना चाहते हैं। याद रखिये अगर आप कस्टमर का ख्याल रखेंगे तो कस्टमर आपके बैंक बैलेंस का ख्याल रखेगा।

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