Ebrands (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो इंटरनेट पर बिजनेस शुरू करने के लिए परफेक्ट मुहूर्त का इंतजार कर रहे हैं? मुबारक हो, आप अपनी नाकामी का रास्ता खुद साफ कर रहे हैं और मार्केट का सारा पैसा आपके कॉम्पीटिटर्स की जेब में जा रहा है। अगर आप ईब्रांड्स बुक के ये सीक्रेट्स नहीं जानते, तो आपका स्टार्टअप शुरू होने से पहले ही दम तोड़ देगा।

आज हम फिल कारपेंटर की किताब ईब्रांड्स से इंटरनेट बिजनेस को रॉकेट की रफ्तार देने वाले ३ सबसे पावरफुल लेसन्स के बारे में बात करेंगे।

Lesson : स्पीड ही असली खेल है (फर्स्ट मूवर एडवांटेज)

इंटरनेट की दुनिया में अगर आप कछुए की चाल चलेंगे, तो खरगोश सिर्फ रेस ही नहीं जीतेगा, बल्कि वह आपका पूरा मार्केट शेयर भी खा जाएगा। फिल कारपेंटर अपनी किताब ईब्रांड्स में साफ कहते हैं कि डिजिटल बिजनेस में परफेक्ट होने से कहीं ज्यादा जरूरी है तेज होना। लोग अक्सर अपना आइडिया लेकर बैठे रहते हैं कि जब सब कुछ चकाचक होगा, तब लॉन्च करेंगे। भाई साहब, तब तक तो दुनिया मंगल ग्रह पर कॉलोनी बसा लेगी। इंटरनेट पर जो पहले आता है, झंडा वही गाड़ता है। इसे कहते हैं फर्स्ट मूवर एडवांटेज। अगर आप पहले नंबर पर हैं, तो लोग आपके नाम को ही कैटेगरी मान लेते हैं। जैसे आज भी कई लोग फोटोकॉपी को जीरोक्स और सर्च करने को गूगल करना कहते हैं।

सोचिए, अगर शर्मा जी अपनी नई ईकॉमर्स वेबसाइट के लिए पिछले दो साल से सिर्फ लोगो का कलर ही चूज कर रहे हैं, तो क्या होगा? जब तक शर्मा जी अपना पिंक कलर का लोगो फाइनल करेंगे, तब तक कोई दूसरा बंदा बेसिक वेबसाइट बनाकर मार्केट के आधे कस्टमर्स को अपनी जेब में डाल चुका होगा। इंटरनेट पर बिजनेस करना किसी रेस जैसा है। यहाँ जो सबसे पहले बाउंड्री पार करता है, दर्शक उसी के लिए तालियां बजाते हैं। बाद में आने वाले चाहे कितना भी अच्छा परफॉर्म कर लें, उन्हें सिर्फ बचा-कुचा कचरा ही मिलता है। इसलिए अगर आपके पास कोई आइडिया है, तो उसे कल पर मत टालिए। आज ही उसे छोटे लेवल पर उतारिए।

मान लीजिए आपने एक ऑनलाइन समोसा डिलीवरी एप बनाने का सोचा। अब आप इस चक्कर में बैठे हैं कि पहले एक लग्जरी किचन बनाएंगे और शेफ को इटली से बुलाएंगे। इस बीच आपके पड़ोस के लड़के ने एक साधारण सा व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाकर पूरे मोहल्ले में समोसे बेचना शुरू कर दिया। अब आप अपने लग्जरी किचन में बैठकर खुद के ही बनाए हुए ठंडे समोसे खाइए, क्योंकि कस्टमर्स तो उस लड़के के पास जा चुके हैं। ईब्रांड्स हमें यही सिखाती है कि इंटरनेट बिजनेस में स्पीड ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है। जो तेज है, वही टिकेगा। जो सुस्त है, वह सिर्फ दूसरों की तरक्की देखकर आहें भरेगा।

अपनी स्ट्रेटेजी को इतना सिंपल रखिए कि आप उसे तुरंत एग्जीक्यूट कर सकें। मार्केट में घुसिए, गलतियां करिए और उन्हें ठीक करते हुए आगे बढ़िए। यह मत भूलिए कि फेसबुक और गूगल भी पहले दिन वैसे नहीं थे जैसे आज दिखते हैं। उन्होंने शुरुआत की, रफ्तार पकड़ी और फिर दुनिया पर छा गए। अगर आप भी अपने ईब्रांड को बड़ा बनाना चाहते हैं, तो परफेक्शन का भूत उतारिए और स्पीड का गियर डालिए। वरना आपके बिजनेस का अंत शुरू होने से पहले ही निश्चित है।


Lesson : ट्रस्ट और कम्युनिटी का जादू (सिर्फ बेचो मत, रिश्ता जोड़ो)

इंटरनेट पर बिजनेस करना किसी अनजान शहर में दुकान खोलने जैसा है। वहां लोग आपको नहीं जानते, और सच तो यह है कि वो आप पर भरोसा भी नहीं करते। फिल कारपेंटर अपनी किताब ईब्रांड्स में एक बहुत कड़वी मगर सच्ची बात कहते हैं। अगर आपके पास दुनिया का सबसे बेहतरीन प्रोडक्ट है, लेकिन आपका कस्टमर आप पर भरोसा नहीं करता, तो आपका बिजनेस एक खाली डिब्बे जैसा है। इंटरनेट बिजनेस में सिर्फ ट्रांजैक्शन नहीं होता, यहाँ इमोशन और ट्रस्ट का खेल चलता है। एक सफल ईब्रांड वही है जो अपने कस्टमर्स को सिर्फ खरीदार नहीं बल्कि एक वफादार कम्युनिटी का हिस्सा बना लेता है। जब लोग आपके ब्रांड से जुड़ते हैं, तो वे सिर्फ सामान नहीं खरीदते, वे आपकी कहानी और आपकी वैल्यूज का हिस्सा बनते हैं।

अब जरा सोचिए, आप एक ऑनलाइन स्टोर से जूते मंगवाते हैं। जूते तो अच्छे हैं, लेकिन जब आप उन्हें पहनते हैं और सोल निकल जाता है, तो आप कस्टमर केयर को फोन करते हैं। वहां से जवाब आता है कि भाई साहब, हमने तो सही भेजा था, अब आप ही शायद पहाड़ों पर चढ़ गए होंगे। कैसा लगेगा आपको? आप कसम खा लेंगे कि अगली बार इस साइट का नाम भी नहीं लेंगे। लेकिन वहीं अगर दूसरी कंपनी तुरंत माफ़ी मांगकर आपको नया जोड़ा भेज दे और साथ में एक छोटा सा सॉरी नोट भी लिखे, तो आप उनके मुरीद हो जाएंगे। आप सिर्फ खुद नहीं खरीदेंगे, बल्कि मोहल्ले के दस लोगों को और बताएंगे कि देखो यार, कितनी बढ़िया सर्विस है। यही है कम्युनिटी और ट्रस्ट की ताकत।

इंटरनेट पर एड्स चलाकर ट्रैफिक लाना तो आसान है, लेकिन उस ट्रैफिक को रुकने और बार-बार आने के लिए मजबूर करना असली कला है। ईब्रांड्स हमें सिखाती है कि अपने कस्टमर को भगवान नहीं, अपना दोस्त मानिए। उनकी समस्याओं को अपनी समस्या समझिए। जब आप लोगों की बातों को सुनते हैं और उन्हें महसूस कराते हैं कि उनकी राय मायने रखती है, तो वे आपके ब्रांड के एडवोकेट बन जाते हैं। वे सोशल मीडिया पर आपकी तारीफ करेंगे, आपके पोस्ट्स शेयर करेंगे और आपके ब्रांड की ढाल बनकर खड़े रहेंगे। यह फ्री की मार्केटिंग दुनिया के किसी भी महंगे एड कैंपेन से हजार गुना ज्यादा असरदार होती है।

मान लीजिए आपने एक फिटनेस एप बनाया। अब आप सिर्फ एक्सरसाइज की वीडियो डाल रहे हैं, तो लोग शायद एक हफ्ता देखेंगे और भूल जाएंगे। लेकिन अगर आप एक ऐसा ग्रुप बनाते हैं जहाँ लोग अपनी प्रोग्रेस शेयर करें, एक-दूसरे को मोटिवेट करें और आप खुद भी उनसे बात करें, तो वह एक कम्युनिटी बन जाएगी। लोग वहां वर्कआउट के लिए नहीं, बल्कि उस अपनेपन के लिए आएंगे। इंटरनेट बिजनेस में जो ब्रांड अपने कस्टमर्स के दिल में जगह बना लेता है, उसे कॉम्पीटिशन की चिंता नहीं करनी पड़ती। क्योंकि ट्रस्ट एक ऐसी चीज है जिसे पैसा देकर नहीं, बल्कि वक्त और ईमानदारी देकर कमाया जाता है।

अगर आप आज भी सिर्फ सेल्स के पीछे भाग रहे हैं और अपने कस्टमर्स के फीडबैक को इग्नोर कर रहे हैं, तो आप अपने ब्रांड की कब्र खुद खोद रहे हैं। ईब्रांड्स का यह सबक याद रखिए कि ऑनलाइन दुनिया में आपकी साख ही आपकी असली करेंसी है। एक बार भरोसा टूट गया, तो उसे फेविकोल भी नहीं जोड़ पाएगा। इसलिए सिर्फ प्रोडक्ट मत बेचिए, एक ऐसा अहसास बेचिए जिससे लोग बार-बार आपके पास लौटकर आएं।


Lesson : वायरल मार्केटिंग और ब्रांडिंग (जंगल की आग जैसा असर)

अगर आप आज भी पुराने जमाने की तरह अखबार में इश्तहार देकर या सड़कों पर पोस्टर चिपकाकर अपने इंटरनेट बिजनेस को बढ़ाना चाहते हैं, तो भाई साहब, आप अभी भी बैलगाड़ी के दौर में जी रहे हैं। फिल कारपेंटर अपनी किताब ईब्रांड्स में साफ कहते हैं कि डिजिटल दुनिया में मार्केटिंग का मतलब सिर्फ पैसा फूंकना नहीं, बल्कि लोगों के दिमाग में घर करना है। असली मार्केटिंग वह है जो आपके बिना कहे लोग खुद करें। इसे कहते हैं वायरल मार्केटिंग। जब आपका कंटेंट या आपका प्रोडक्ट इतना जबरदस्त होता है कि लोग उसे खुद दूसरों को फॉरवर्ड करने पर मजबूर हो जाएं, तब समझ लीजिए कि आपका ईब्रांड सही रास्ते पर है। इंटरनेट पर ब्रांडिंग का मतलब सिर्फ एक अच्छा लोगो बनाना नहीं, बल्कि एक ऐसी आवाज पैदा करना है जिसे भीड़ में भी पहचाना जा सके।

जरा सोचिए, आपने एक नई ऑनलाइन चाय की पत्ती का ब्रांड शुरू किया। अब आप टीवी पर चिल्ला रहे हैं कि हमारी चाय सबसे कड़क है। लोग सुनेंगे और भूल जाएंगे। लेकिन अगर आपने एक ऐसी कैंपेन चलाई जिसमें आपने उन लोगों की कहानियां दिखाई जो रात भर जागकर काम करते हैं और आपकी चाय उनके संघर्ष की साथी है, तो लोग उससे इमोशनली जुड़ेंगे। लोग आपकी चाय का डिब्बा हाथ में लेकर फोटो खींचेंगे और इंस्टाग्राम पर डालेंगे। अब आपको मार्केटिंग करने की जरूरत नहीं है, आपके कस्टमर्स ही आपके सेल्समैन बन चुके हैं। यही है वायरल मार्केटिंग का असली जादू। जो चीज दिल को छूती है या जो चीज हैरान करती है, वही इंटरनेट पर तेजी से फैलती है।

ईब्रांड्स हमें सिखाती है कि मार्केटिंग को इतना बोरिंग मत बनाइए कि लोग उसे देखते ही स्किप कर दें। अगर आपके विज्ञापन में ह्यूमर है, सच्चाई है या कोई अनोखी बात है, तो लोग उसे खुद वायरल कर देंगे। आज के दौर में अटेंशन ही असली पैसा है। अगर आप लोगों का ध्यान पांच सेकंड के लिए भी अपनी तरफ खींच सकते हैं, तो आप आधी जंग जीत चुके हैं। लेकिन याद रहे, वायरल होना सिर्फ किस्मत का खेल नहीं है, इसके पीछे एक सोची-समझी स्ट्रेटेजी होती है। आपको अपने ब्रांड की एक यूनिक पहचान बनानी होगी। क्या आपका ब्रांड फनी है? क्या वह गंभीर है? या क्या वह बहुत ज्यादा मददगार है? अपनी उस एक आवाज को पकड़िए और उसी पर टिके रहिए।

मान लीजिए आपने एक नया गैजेट बनाया जो सोए हुए इंसान को पानी छिड़ककर जगा देता है। अब आप इसे सीरियस होकर बेचेंगे तो कोई नहीं खरीदेगा। लेकिन अगर आप इसके फनी वीडियो बनाएंगे जिसमें लोग इस मशीन से परेशान हो रहे हैं, तो लोग उसे हंसते-हंसते करोड़ों बार देख लेंगे। देखते ही देखते आपका ब्रांड घर-घर में मशहूर हो जाएगा। इंटरनेट पर ब्रांडिंग का मतलब है लोगों के अनुभव का हिस्सा बनना। अगर आप सिर्फ बेचना चाहेंगे तो लोग भाग जाएंगे, लेकिन अगर आप उन्हें एंटरटेन करेंगे या उनकी कोई बड़ी प्रॉब्लम सॉल्व करेंगे, तो वे खुद चलकर आपके पास आएंगे।

तो दोस्तों, फिल कारपेंटर की इस किताब से हमने सीखा कि स्पीड, ट्रस्ट और वायरल मार्केटिंग ही वो तीन खंभे हैं जिस पर एक कामयाब ईब्रांड खड़ा होता है। अगर आप इन तीनों को मास्टर कर लेते हैं, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपके स्टार्टअप को रॉकेट बनने से नहीं रोक सकती। पर अगर आप अब भी पुराने ढर्रे पर चलना चाहते हैं, तो फिर दूसरों की तरक्की देखकर जलने के लिए तैयार रहिए। अब फैसला आपका है कि आप एक लीडर बनना चाहते हैं या सिर्फ एक फॉलोअर।


आज ही अपने बिजनेस आइडिया पर काम शुरू करें। परफेक्शन का इंतजार छोड़िए और मार्केट में अपनी जगह बनाइए। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया और आप भी एक सफल ईब्रांड बनाना चाहते हैं, तो कमेंट में सक्सेस जरूर लिखें और इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहता है। याद रखिए, आपकी एक छोटी सी शुरुआत ही बड़े बदलाव की नींव है।

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