Jump Start Your Business Brain (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो बिना दिमाग लगाए अपना पैसा और मेहनत बिजनेस की आग में झोंक रहे हैं? मुबारक हो, आप बहुत जल्द रोड पर आने वाले हैं। अगर आपको लगता है कि सिर्फ मेहनत से धंधा चलता है, तो आप शायद किसी और ही दुनिया में जी रहे हैं। डग हॉल की ये किताब आपको बताएगी कि आपका आईडिया क्यों फ्लॉप होने वाला है।

डग हॉल की 'जम्प स्टार्ट योर बिजनेस ब्रेन' हमें बिजनेस को एक नए और साइंटिफिक नजरिए से देखना सिखाती है। इस आर्टिकल में हम उन 3 लेसन्स की बात करेंगे जो आपके बिजनेस के फेलियर रेट को तुरंत आधा कर सकते हैं।


लेसन १ : मार्केटिंग फिजिक्स के तीन कानून - जो आपके धंधे को रॉकेट बना देंगे

अगर आप सोच रहे हैं कि आपका बिजनेस इसलिए नहीं चल रहा क्योंकि आपकी किस्मत खराब है, तो भाई आप गलतफहमी के बहुत बड़े शिकार हैं। असलियत तो यह है कि बिजनेस चलाने के लिए किस्मत नहीं, बल्कि फिजिक्स की जरूरत होती है। जी हां, डग हॉल कहते हैं कि मार्केटिंग के भी अपने कुछ कानून होते हैं। अगर आप इन कानूनों को तोड़ेंगे, तो मार्केट आपको तोड़ देगा। इसे 'मार्केटिंग फिजिक्स' कहते हैं। इसमें सबसे पहली चीज आती है 'ओवरट बेनिफिट'। इसका सीधा मतलब है कि कस्टमर को चिल्ला-चिल्ला कर बताओ कि उसे क्या फायदा मिलेगा। लोग अक्सर अपनी दुकान के बाहर लिख देते हैं 'सबसे पुरानी दुकान'। अबे भाई, कस्टमर को क्या फर्क पड़ता है कि आप कितने पुराने हो? उसे तो यह जानना है कि आपका समोसा खाकर उसका पेट खराब होगा या नहीं। अगर आप उसे यह नहीं बता सकते कि आपका प्रोडक्ट उसकी लाइफ कैसे आसान बना रहा है, तो आप सिर्फ शोर मचा रहे हैं। कस्टमर के दिमाग में सिर्फ एक सवाल चलता है, "इसमें मेरा क्या फायदा है?" अगर आपके पास इसका सीधा जवाब नहीं है, तो अपना शटर गिरा दीजिए और घर जाकर सो जाइए।

दूसरा कानून है 'रियल रीजन टू बिलीव'। आज के जमाने में लोग इतने चालाक हो गए हैं कि वो अपनी परछाई पर भी भरोसा नहीं करते। अगर आप कह रहे हैं कि आपका साबुन गोरा कर देगा, तो लोग पूछेंगे कि "कैसे?" क्या उसमें कोई जादुई जड़ी-बूटी है या सिर्फ झाग? आपको अपने वादे को सच साबित करने के लिए ठोस सबूत देना होगा। बिना सबूत के आपका दावा वैसा ही है जैसे इलेक्शन से पहले किसी नेता का वादा। लोग सुनते तो हैं, पर यकीन कोई नहीं करता। अगर आप चाहते हैं कि लोग अपना बटुआ खोलें, तो उन्हें यकीन दिलाना होगा कि आप उन्हें लूट नहीं रहे हैं।

तीसरा और सबसे जरूरी कानून है 'ड्रामेटिक डिफरेंस'। मार्केट में हर कोई एक ही जैसा माल बेच रहा है। अगर आप भी वही कर रहे हैं जो बगल वाला शर्मा जी कर रहा है, तो लोग आपके पास क्यों आएंगे? आपका प्रोडक्ट दूसरों से इतना अलग होना चाहिए कि लोग देखकर कहें, "अरे भाई, ये क्या चीज है!" अगर आपका अंतर मामूली सा है, तो लोग आपको भूल जाएंगे। आपको कुछ ऐसा करना होगा जो लोगों के दिमाग में बिजली की तरह कौंध जाए। जैसे अगर सब लोग काली चाय बेच रहे हैं, तो आप नीली चाय बेचना शुरू कर दीजिए। मजाक लग रहा है? लेकिन यही ड्रामा लोगों को खींचकर लाता है। बिना ड्रामेटिक डिफरेंस के आप बस भीड़ का हिस्सा हैं, और भीड़ में अक्सर लोग कुचल दिए जाते हैं। तो भाई, इन तीन कानूनों को अपने दिमाग में फिट कर लो वरना आपका बिजनेस शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाएगा।


लेसन २ : आईडिया जनरेशन का असली साइंस - तुक्का मारना बंद करो

अगर आपको लगता है कि नहाते वक्त या छत पर टहलते वक्त जो 'ब्रिलियंट' आईडिया आपके दिमाग में आया है वो आपको करोड़पति बना देगा, तो आप अभी भी ख्याली पुलाव पका रहे हैं। डग हॉल कहते हैं कि आईडिया जनरेशन कोई जादू नहीं बल्कि एक प्योर साइंस है। ज्यादातर लोग बिजनेस में फेल इसलिए होते हैं क्योंकि उनका आईडिया किसी रिसर्च पर नहीं बल्कि उनकी अपनी पसंद पर टिका होता है। उन्हें लगता है कि अगर उन्हें करेले की आइसक्रीम पसंद है, तो पूरी दुनिया को पसंद आएगी। भाई, आपकी पसंद आपकी अपनी है, उसे बिजनेस मत बनाइए। डग हॉल का कहना है कि अगर आप चाहते हैं कि आपका दिमाग सुपरफास्ट तरीके से काम करे, तो उसे डाटा और स्ट्रक्चर की खुराक दीजिए। इसे 'सिस्टम थिंकिंग' कहते हैं। जब आप बिना किसी प्लान के आईडिया सोचते हैं, तो आपका दिमाग वही पुरानी घिसी-पिटी बातें दोहराता है। लेकिन जब आप अलग-अलग फील्ड की चीजों को आपस में जोड़ते हैं, तब असली धमाका होता है।

मान लीजिए आपको एक नया रेस्टोरेंट खोलना है। अब आप वही पनीर बटर मसाला बेचेंगे तो लोग बोर हो जाएंगे। लेकिन अगर आप 'डाटा' देखें कि आपके शहर में लोग हेल्थ को लेकर बहुत सीरियस हैं और उन्हें साउथ इंडियन खाना भी पसंद है, तो आप 'हेल्दी रागी डोसा' जैसा कुछ ला सकते हैं। यहाँ आपने अपनी मर्जी नहीं थोपी, बल्कि मार्केट की जरूरत को पकड़ा। आईडिया ऐसा होना चाहिए जो लोगों की किसी बड़ी समस्या का हल निकाले। अगर आप सिर्फ पैसा कमाने के लिए कोई आईडिया ढूंढ रहे हैं, तो यकीन मानिए आप बहुत जल्दी हार मान लेंगे। लेकिन अगर आप किसी प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए आईडिया जनरेट कर रहे हैं, तो पैसा आपके पीछे खुद दौड़ता हुआ आएगा।

ज्यादातर एंटरप्रेन्योर अपने आईडिया से प्यार कर बैठते हैं। वो उसे अपने बच्चे की तरह पालते हैं, भले ही वो आईडिया बिल्कुल बेकार क्यों न हो। बिजनेस में इमोशनल होना सबसे बड़ी बेवकूफी है। आपको अपने आईडिया का बेरहमी से टेस्ट करना चाहिए। अगर टेस्ट में रिजल्ट खराब आ रहे हैं, तो उस आईडिया को कूड़ेदान में फेंकने में एक सेकंड भी मत लगाइए। एक अच्छा बिजनेसमैन वो नहीं होता जो हर बार सही हो, बल्कि वो होता है जो अपनी गलती को जल्दी पकड़ ले और उसे सुधार ले। तो भाई, अगली बार जब कोई आईडिया आए, तो अपनी पीठ थपथपाने के बजाय खुद से पूछिए कि क्या ये वाकई में किसी की लाइफ बदल रहा है या सिर्फ आपके मन का एक वहम है। अगर आप इस साइंस को समझ गए, तो आप उन 90 परसेंट लोगों से आगे निकल जाएंगे जो सिर्फ किस्मत के भरोसे बैठे रहते हैं।


लेसन ३ : फेलियर रेट को आधा करना - रिस्क के साथ खेलना सीखो

बिजनेस शुरू करना कोई जुआ नहीं है कि आपने सिक्का उछाला और दुआ मांगने लगे। अगर आप अंधेरे में तीर मार रहे हैं, तो बहुत मुमकिन है कि वो तीर घूमकर आपकी ही छाती पर लग जाए। डग हॉल कहते हैं कि बिजनेस में फेल होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि लोग अपनी पूरी जमा-पूंजी और सारा समय उस चीज पर लगा देते हैं जिसे मार्केट कभी चाहता ही नहीं था। इसे कहते हैं 'ओवर-कॉन्फिडेंस में खुद को बर्बाद करना'। अगर आप चाहते हैं कि आपका फेलियर रेट 50 परसेंट कम हो जाए, तो आपको अपने आईडिया को मार्केट में उतारने से पहले उसे छोटे लेवल पर 'एक्सपेरिमेंट' करना होगा। मान लीजिए आपको एक नया मोबाइल ऐप बनाना है। अब आप सीधे लाखों रुपये लगाकर ऐप बनवाने के बजाय पहले एक छोटा सा वेब पेज बनाइए और देखिए कि क्या लोग उस पर क्लिक भी कर रहे हैं? अगर कोई क्लिक ही नहीं कर रहा, तो इसका मतलब है कि लोग उस ऐप के लिए अपना इंटरनेट भी खर्च नहीं करना चाहते।

डग हॉल का साइंटिफिक तरीका कहता है कि रिस्क को मैनेज करना सीखिए। अगर आप गिरते हैं, तो कम से कम इतनी ऊंचाई से गिरिए कि आपकी हड्डियां न टूटें। कई लोग तो अपनी पुश्तैनी जमीन बेचकर बिजनेस शुरू करते हैं और फिर जब वो फेल होता है, तो पूरा खानदान उन्हें ताने मारता है। भाई, बिजनेस कोई 'करो या मरो' वाली जंग नहीं है, ये एक कैलकुलेटेड गेम है। आपको हर कदम पर डेटा चेक करना चाहिए। अगर कस्टमर को आपका प्रोडक्ट पसंद नहीं आ रहा, तो उससे बहस मत कीजिए। कस्टमर भगवान नहीं है, लेकिन वो आपके बैंक बैलेंस का असली मालिक जरूर है। अगर उसे आपका सामान महंगा लग रहा है या उसकी क्वालिटी खराब लग रही है, तो उसकी बात सुनिए। अपने ईगो को साइड में रखिए और अपने प्रोडक्ट को बदलिए।

असल में, असली सक्सेस उन्हीं को मिलती है जो फेलियर से डरते नहीं हैं, बल्कि उसे पहले से ही अपनी प्लानिंग का हिस्सा बना लेते हैं। जब आप छोटे-छोटे फेलियर्स से सीखते हैं, तब जाकर आप एक बड़ा और सफल बिजनेस खड़ा कर पाते हैं। तो याद रखिए, जम्प स्टार्ट का मतलब ये नहीं है कि आप सीधे खाई में कूद जाएं। इसका मतलब है कि आप अपने दिमाग को चालू करें, डेटा पर भरोसा करें और एक ऐसी चीज बनाएं जिसकी लोगों को वाकई जरूरत हो। अगर आपने इन तीन लेसन्स को अपनी लाइफ और बिजनेस में उतार लिया, तो यकीन मानिए, आपको रोकने वाला फिर कोई पैदा नहीं हुआ। अब फैसला आपके हाथ में है - या तो आप भीड़ का हिस्सा बनकर गुमनाम हो जाइए, या फिर इन साइंटिफिक तरीकों को अपनाकर अपने सपनों का साम्राज्य खड़ा कीजिए। उठिए और अपने बिजनेस ब्रेन को वो बिजली का झटका दीजिए जिसकी उसे सख्त जरूरत है।

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