क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो गंजे को कंघी बेचने को टैलेंट समझते हैं। अगर हाँ तो मुबारक हो आप अपनी कंपनी को डुबाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। जब आपका कॉम्पिटिटर करोड़ों के सोल्यूशन बेच रहा है तब आप चिल्लर फीचर्स गिनाने में बिजी हैं। वाकई बहुत कूल लग रहे हैं आप अपनी गिरती हुई सेल्स के साथ।
इस आर्टिकल में हम कीथ ईड्स और रॉबर्ट कीर की मास्टरक्लास से सीखेंगे कि कैसे अपने पुराने घिसे पिटे सेल्स के तरीके को बदलकर एक हाई वैल्यू रेवेन्यू मशीन खड़ी करनी है। चलिए इन ३ पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : प्रोडक्ट के दीवाने मत बनिए बल्कि कस्टमर के दर्द की दवा बनिए
अगर आप आज भी अपने ऑफिस में बैठकर अपने प्रोडक्ट के फीचर्स की आरती उतार रहे हैं तो समझ जाइये कि आप बिजनेस नहीं बल्कि टाइमपास कर रहे हैं। कीथ ईड्स अपनी इस किताब में बहुत साफ कहते हैं कि दुनिया को आपके शानदार फीचर्स से कोई लेना देना नहीं है। लोगों को बस इस बात की फिक्र है कि आप उनके सिरदर्द को कैसे कम कर सकते हैं। मान लीजिए आप एक बहुत महंगा सॉफ्टवेयर बेच रहे हैं। आप क्लाइंट के पास जाते हैं और तीस मिनट तक उसे बताते हैं कि आपके सॉफ्टवेयर का बटन कितना चमकता है और उसका यूआई कितना स्मूद है। बधाई हो आपने क्लाइंट को सुला दिया है। असल में क्लाइंट यह सोच रहा है कि कल जो उसका डेटा चोरी हुआ था या जो उसकी टीम की प्रोडक्टिविटी गिर रही है वह कैसे ठीक होगी। जब तक आप उसे यह नहीं बताते कि आपका प्रोडक्ट उसकी उस स्पेसिफिक समस्या का हल यानी सोल्यूशन है तब तक आप सिर्फ शोर मचा रहे हैं।
सोचिए एक डॉक्टर के पास आप जाते हैं क्योंकि आपके पेट में दर्द है। डॉक्टर बिना आपकी बात सुने अपनी नई स्टेथोस्कोप की तारीफ करने लगे कि देखिए यह कितना नया है और इसकी पाइप कितनी फ्लेक्सिबल है। क्या आप वहां रुकेंगे। बिल्कुल नहीं। आप भाग खड़े होंगे क्योंकि आपको अपनी बीमारी का इलाज चाहिए डॉक्टर की मशीन का रिव्यू नहीं। सेल्स की दुनिया में भी हम यही गलती करते हैं। हम सेल्समैन बन जाते हैं जो बस अपना सामान बेचना चाहता है जबकि हमें एक डॉक्टर बनना चाहिए जो पहले बीमारी को समझता है और फिर दवा देता है। सॉल्यूशन सेंट्रिक होने का मतलब ही यही है कि आप अपने प्रोडक्ट को पीछे रखें और कस्टमर की प्रॉब्लम को फ्रंट सीट पर बिठाएं। जब आप क्लाइंट को यह अहसास करा देते हैं कि आप उसकी तकलीफ को समझते हैं तो वह कीमत पर बहस करना बंद कर देता है। वह आपको एक वेंडर नहीं बल्कि एक पार्टनर मानने लगता है।
अक्सर लोग कहते हैं कि मार्केट में बहुत कॉम्पिटिशन है। लेकिन सच तो यह है कि कॉम्पिटिशन सिर्फ उन लोगों के लिए है जो एक जैसा सामान बेच रहे हैं। अगर आप सोल्यूशन बेच रहे हैं तो आप एक अलग लीग में हैं। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए एक जिम ओनर को आप एयर कंडीशनर बेचने गए। अगर आप कहेंगे कि यह एसी ५ स्टार रेटिंग वाला है और इसमें कॉपर कोइल है तो वह शायद ही इंटरेस्ट ले। लेकिन अगर आप उसे यह बताएं कि यह एसी लगाने से उसके जिम का पसीना और बदबू कम होगी जिससे उसके क्लाइंट्स २० परसेंट ज्यादा देर तक वर्कआउट करेंगे और उसकी मेंबरशिप बढ़ेगी तो अब आप उसे ठंडा नहीं बल्कि प्रॉफिट बेच रहे हैं। यही है एक सोल्यूशन सेंट्रिक माइंडसेट का जादू। आप सामान नहीं बल्कि एक बेहतर भविष्य बेच रहे हैं जहाँ कस्टमर की समस्या का नामोनिशान नहीं है।
लेसन २ : मार्केटिंग और सेल्स की लड़ाई बंद करिए और रेवेन्यू इंजन को अलाइन करिए
क्या आपके ऑफिस में भी मार्केटिंग टीम और सेल्स टीम एक दूसरे को ऐसे देखती हैं जैसे भारत और पाकिस्तान का मैच चल रहा हो। मार्केटिंग वाले कहते हैं कि हमने तो इतने सारे लीड्स लाकर दिए पर सेल्स वालों को बेचना ही नहीं आता। वहीं सेल्स वाले रोते हैं कि मार्केटिंग ने जो कचरा लीड्स दी हैं उन्हें तो फ्री का सामान भी नहीं बेचा जा सकता। कीथ ईड्स कहते हैं कि अगर आपके रेवेन्यू इंजन के ये दो पुर्जे अलग दिशा में भाग रहे हैं तो आपकी ग्रोथ का सपना सिर्फ एक सपना ही रह जाएगा। एक सोल्यूशन सेंट्रिक आर्गेनाइजेशन में मार्केटिंग और सेल्स अलग अलग टापू नहीं होते बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं। मार्केटिंग का काम सिर्फ सुंदर पोस्टर बनाना या फेसबुक पर लाइक्स बटोरना नहीं है बल्कि उन लोगों को ढूंढना है जिनका दर्द आपके सोल्यूशन से ठीक हो सकता है।
इसे एक शादी के एग्जांपल से समझते हैं। मार्केटिंग का काम है रिश्ता ढूंढना और सेल्स का काम है शादी पक्की करना। अब सोचिए अगर मार्केटिंग वाले ने लड़के को बताया कि लड़की को खाना बनाना बहुत पसंद है लेकिन असल में लड़की को सिर्फ रील बनाना पसंद है तो सेल्स वाला कितनी भी कोशिश कर ले रिश्ता कभी नहीं जुड़ पाएगा। बिजनेस में भी यही होता है। अगर आपकी मार्केटिंग टीम मार्केट में यह मैसेज दे रही है कि आपका सोल्यूशन सस्ता है और सेल्स टीम वहां जाकर प्रीमियम वैल्यू की बात कर रही है तो कस्टमर कन्फ्यूज हो जाएगा। उसे लगेगा कि दाल में कुछ काला है। जब तक आपकी पूरी टीम एक ही सुर में नहीं गाएगी तब तक कस्टमर को आपके ब्रांड पर भरोसा नहीं होगा।
रेवेन्यू इंजन को अलाइन करने का मतलब है कि मार्केटिंग टीम को पता होना चाहिए कि सेल्स टीम को किस तरह के क्लाइंट्स की जरूरत है। उन्हें उन प्रॉब्लम्स की लिस्ट बनानी चाहिए जिन्हें आपका सोल्यूशन सॉल्व करता है और फिर उसी के ईर्द गिर्द अपनी सारी कैंपेन चलानी चाहिए। इससे होता यह है कि जब सेल्स टीम क्लाइंट से मिलती है तो क्लाइंट पहले से ही माइंडसेट बनाकर बैठा होता है कि हाँ मुझे इसी चीज की तलाश थी। यह किसी फिल्म के ट्रेलर और पूरी मूवी की तरह है। अगर ट्रेलर हॉरर है और मूवी कॉमेडी निकल जाए तो दर्शक बीच में ही उठकर भाग जाएगा। अपने बिजनेस को फ्लॉप होने से बचाने के लिए अपनी दोनों टीमों को एक ही रूम में बिठाएं और उन्हें समझाएं कि उनका दुश्मन एक दूसरे नहीं बल्कि वह प्रॉब्लम है जो कस्टमर फेस कर रहा है। जब आपकी पूरी कंपनी एक सुर में सोल्यूशन की बात करती है तब जाकर रेवेन्यू का इंजन सच में तेज दौड़ना शुरू करता है।
लेसन ३ : डिस्काउंट के भिखारी मत बनिए बल्कि हाई वैल्यू पार्टनर बनिए
अगर आपकी सेल्स क्लोज करने की आखिरी ट्रिक सिर्फ "सर १० परसेंट डिस्काउंट दे दूंगा" है तो समझ जाइये कि आपने अपनी वैल्यू का खुद ही गला घोंट दिया है। कीथ ईड्स अपनी किताब में बहुत स्पष्ट हैं कि सोल्यूशन बेचने वाले डिस्काउंट नहीं देते बल्कि आरओआई यानी रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट देते हैं। जब आप अपनी कीमत कम करते हैं तो आप क्लाइंट को अनजाने में यह सिग्नल भेज रहे होते हैं कि आपके सोल्यूशन में उतनी दम नहीं है जितनी आप बता रहे थे। हाई वैल्यू सोल्यूशंस कभी भी सड़कों पर बिकने वाले सामान की तरह मोलभाव करके नहीं बेचे जाते। आपको क्लाइंट की नजर में एक सप्लायर से ऊपर उठकर एक भरोसेमंद सलाहकार यानी ट्रस्टेड एडवाइजर बनना होगा।
मान लीजिए आपको अपने घर की वायरिंग करानी है। एक इलेक्ट्रीशियन आता है जो कहता है कि वह ५०० रुपये में काम कर देगा पर उसे यह नहीं पता कि शॉर्ट सर्किट क्यों हो रहा है। दूसरा आता है जो ५००० रुपये मांगता है पर वह आपको बताता है कि आपकी वायरिंग में कहाँ गड़बड़ है जिससे भविष्य में आग लग सकती है और वह इसे जड़ से ठीक कर देगा। आप किसे चुनेंगे। जाहिर है दूसरे वाले को क्योंकि वह आपको सुरक्षा का सोल्यूशन दे रहा है कम कीमत का झांसा नहीं। बिजनेस में भी क्लाइंट को सस्त नहीं चाहिए बल्कि उसे यह पक्का करना है कि उसका पैसा डूबेगा नहीं। जब आप उसे दिखाते हैं कि आपके सोल्यूशन से उसका करोड़ों का नुकसान बच सकता है या उसकी एफिशिएंसी कई गुना बढ़ सकती है तो आपका महंगा सोल्यूशन भी उसे एक स्मार्ट इन्वेस्टमेंट लगने लगता है।
अक्सर सेल्स वाले डर जाते हैं कि अगर कीमत कम नहीं की तो डील हाथ से निकल जाएगी। लेकिन सच तो यह है कि जो क्लाइंट सिर्फ डिस्काउंट के लिए आपके पास आया है वह कल किसी और के पास भी चला जाएगा जो आपसे ५ रुपये कम मांगेगा। आपको ऐसे क्लाइंट्स के साथ पार्टनरशिप करनी है जो वैल्यू की कदर करते हैं। अपनी बातचीत में फीचर्स की जगह उन रिजल्ट्स पर फोकस करिए जो क्लाइंट को मिलने वाले हैं। जब आप टेबल पर बैठकर क्लाइंट को यह अहसास कराते हैं कि आप उसकी ग्रोथ के लिए उतने ही सीरियस हैं जितना वह खुद है तो पैसे की बात सेकंडरी हो जाती है। यही वह तरीका है जिससे आप मार्केट में अपनी एक अलग साख बनाते हैं और लोग आपकी सर्विस के लिए प्रीमियम देने को तैयार रहते हैं।
तो दोस्तों क्या आप अब भी वही पुराना सामान बेचने वाले सेल्समैन बने रहना चाहते हैं या फिर एक सोल्यूशन सेंट्रिक लीडर बनकर मार्केट पर राज करना चाहते हैं। याद रखिए दुनिया बदलने वालों को याद रखती है सामान बेचने वालों को नहीं। आज ही अपने बिजनेस मॉडल को पलटिए और फीचर्स की जगह वैल्यू बेचना शुरू कीजिए।
अगर आपको यह लेसन पावरफुल लगे तो इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करिए जो अपनी गिरती हुई सेल्स से परेशान है। नीचे कमेंट में बताएं कि इन ३ लेसन में से कौन सा आपकी लाइफ बदल सकता है। अभी एक्शन लें क्योंकि कल कभी नहीं आता।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#SolutionSelling #BusinessGrowth #SalesStrategy #RevenueEngine #ValueCreation
_