Negotiation Genius (Hindi)


क्या आप अभी भी वही पुराने घिसे पिटे तरीके से बारगेनिंग कर रहे हैं और फिर भी हर बार कम पैसे में मान जाते हैं? बधाई हो। आप अपनी मेहनत की कमाई और इज्जत दोनों को टेबल पर ही छोड़कर आ रहे हैं। आपकी इसी मासूमियत का फायदा दुनिया उठा रही है।

लेकिन अब और नहीं। अगर आप भी नेगोशिएशन जीनियस बनकर हर डील में अपनी शर्तें मनवाना चाहते हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए गेम चेंजर साबित होगा। चलिए समझते हैं इस किताब के ३ पावरफुल लेसन जो आपकी लाइफ बदल देंगे।


लेसन १ : इंफॉर्मेशन ही असली पावर है

क्या आपको भी लगता है कि नेगोशिएशन का मतलब केवल जोर से चिल्लाना या फिर बारगेनिंग टेबल पर अपनी जिद्द मनवाना है। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो बधाई हो। आप उन लोगों की लिस्ट में टॉप पर हैं जिन्हें सामने वाला बड़ी आसानी से चूना लगा देता है। दीपक मल्होत्रा और मैक्स बेजरमैन अपनी किताब नेगोशिएशन जीनियस में सबसे पहला और सबसे जरूरी लेसन यही देते हैं कि इंफॉर्मेशन ही असली पावर है। जब तक आप बिना तैयारी के किसी डील में जाते हैं तब तक आप केवल एक तुक्का मार रहे होते हैं। असली जीनियस वह नहीं है जो बहुत अच्छा बोलता है। असली जीनियस वह है जो बोलने से पहले सामने वाले की पूरी कुंडली निकाल लेता है।

मान लीजिए आप एक पुरानी सेकंड हैंड कार खरीदने गए हैं। वहां जाकर आप सेलर से कहते हैं कि भाई साहब यह कार तो बहुत पुरानी है। इसके टायर घिस गए हैं और पेंट भी निकल रहा है। मैं इसके दो लाख से ज्यादा नहीं दूंगा। अब सेलर आपको देखता है और मुस्कुराते हुए कहता है कि भाई कल ही मुझे ढाई लाख का ऑफर मिला है। बस अब आपकी हवा निकल जाती है। आप सोचते हैं कि कहीं यह अच्छी डील हाथ से न निकल जाए। आप तुरंत दो लाख साठ हजार देने को तैयार हो जाते हैं। यहाँ क्या हुआ। आपके पास कोई जानकारी नहीं थी। आपने बस अंदाजे से अपनी बात रखी और सेलर ने एक ही झटके में आपकी जेब खाली कर दी।

एक नेगोशिएशन जीनियस यहाँ क्या करता। वह कार देखने से पहले ही मार्केट रिसर्च करता। उसे पता होता कि इस मॉडल की सेकंड हैंड वैल्यू क्या है। वह सेलर से बातों ही बातों में यह जान लेता कि वह कार क्यों बेच रहा है। क्या उसे पैसों की सख्त जरूरत है। क्या वह शहर छोड़कर जा रहा है। या फिर उसे नई कार की डिलीवरी मिलने वाली है। जब आपको यह पता चल जाता है कि सामने वाला जल्दी में है या उसके पास दूसरा कोई खरीदार नहीं है तब गेम आपके हाथ में होता है। आप अपनी शर्तें मनवा सकते हैं क्योंकि अब आपके पास इंफॉर्मेशन की ताकत है।

अक्सर हम सैलरी की बात करते वक्त भी यही गलती करते हैं। हम बॉस के केबिन में जाते हैं और कहते हैं कि सर मुझे पांच साल हो गए हैं और अब मेरी सैलरी बढ़नी चाहिए। बॉस कहता है कि कंपनी अभी घाटे में है। हम बस इतना सुनकर चुपचाप बाहर आ जाते हैं। लेकिन अगर आप अपनी तैयारी करके गए होते। आपको पता होता कि आपकी स्किल वाले लोगों को दूसरी कंपनियां कितना पे कर रही हैं। आपको पता होता कि आपने पिछले साल कंपनी को कितना प्रॉफिट कमा कर दिया है। तब आप डंके की चोट पर अपनी बात रखते। नेगोशिएशन एक चेस का गेम है। यहाँ हर चाल से पहले यह सोचना पड़ता है कि सामने वाला क्या सोच रहा है।

अगर आप सामने वाले की मजबूरी और उसकी खुशी दोनों को समझ लेते हैं तो आप आधी जंग तो वैसे ही जीत जाते हैं। इंफॉर्मेशन इकट्ठा करना बोरिंग काम लग सकता है लेकिन यही वह सीक्रेट सॉस है जो आपको एक आम आदमी से जीनियस बनाता है। लोग अक्सर अपनी ईगो की वजह से हार जाते हैं। उन्हें लगता है कि वह बस अपनी बात ऊपर रखकर जीत जाएंगे। लेकिन याद रखिए टेबल पर आपकी ईगो से ज्यादा आपकी तैयारी की वैल्यू होती है। अगर आप बिना होमवर्क के स्कूल जाएंगे तो टीचर तो डांटेगा ही। वैसे ही बिना इंफॉर्मेशन के नेगोशिएशन टेबल पर जाएंगे तो दुनिया आपको लूटेगी ही। इसलिए अगली बार जब भी किसी से कोई डील करें तो पहले अपनी जासूसी वाली टोपी पहनें और सारी जानकारी जुटाएं। तभी आप अपनी शर्तों पर हाथ मिला पाएंगे।


लेसन २ : बैटना (BATNA) की पावर को समझना

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो किसी शोरूम में घुसते हैं और सेल्समैन की चिकनी चुपड़ी बातों में आकर वह महंगी घड़ी खरीद लेते हैं जिसकी आपको जरूरत भी नहीं थी। और फिर घर आकर सोचते हैं कि यार उसने तो मुझे लूट लिया। असल में गलती उसकी नहीं बल्कि आपकी है। आपने बिना किसी बैकअप प्लान के उस डील में कदम रखा था। नेगोशिएशन जीनियस बनने का दूसरा सबसे बड़ा मंत्र है अपना बैटना (BATNA) यानी 'बेस्ट अल्टरनेटिव टू अ नेगोशिएटेड एग्रीमेंट' जानना। सीधा मतलब यह है कि अगर यह डील फेल हो गई तो आपके पास दूसरा सबसे अच्छा रास्ता क्या है।

मान लीजिए आप अपने मोहल्ले के शर्मा जी की दुकान पर एक ब्रांड न्यू फोन खरीदने गए हैं। शर्मा जी को पता है कि आप उनके पुराने कस्टमर हैं और आपको वही फोन आज ही चाहिए। वह आपको फोन की कीमत पचास हजार बताते हैं। आप कहते हैं कि शर्मा जी थोड़ा तो कम करो। वह कहते हैं कि भाई साहब मार्केट में यही रेट है लेना है तो लो वरना भीड़ कम करो। अब अगर आपके पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है तो आप चुपचाप पैसे निकाल कर दे देंगे। लेकिन अगर आप एक जीनियस होते तो आप पहले ही बगल वाली मार्केट के दो तीन दुकानदारों से रेट लेकर आते।

अब सीन बदल देते हैं। आप शर्मा जी के पास जाते हैं और वह वही पचास हजार वाला डायलॉग मारते हैं। आप शांति से मुस्कुराते हैं और कहते हैं कि शर्मा जी बाजू वाली गली में वर्मा जी यही फोन सैंतालीस हजार में दे रहे हैं और साथ में एक कवर भी फ्री दे रहे हैं। मैं तो बस पुरानी जान पहचान की वजह से आपके पास आया था। अब देखिए शर्मा जी के पसीने कैसे छूटते हैं। वह तुरंत कहेंगे कि अरे भाई आप तो दिल पर ले गए। बैठिए चाय पीजिए। आपके लिए हम छियालीस हजार में कर देंगे। यहाँ क्या बदला। यहाँ आपका बैटना मजबूत था। आपके पास एक ठोस दूसरा रास्ता था इसलिए आप टेबल पर डरे हुए नहीं थे।

जिंदगी में अक्सर हम नौकरी बदलते वक्त भी यही गलती करते हैं। जब हमारे पास कोई दूसरा जॉब ऑफर नहीं होता तब हम करंट कंपनी में सैलरी बढ़ाने की बात करते हैं। बॉस को पता होता है कि आप कहीं नहीं जाने वाले। इसलिए वह आपको मूंगफली पकड़ा कर खुश कर देता है। लेकिन अगर आपके हाथ में पहले से ही एक दूसरी कंपनी का ऑफर लेटर हो तो आपकी चाल और आवाज दोनों बदल जाती है। आप वहां डरने के लिए नहीं बल्कि अपनी वैल्यू वसूलने के लिए जाते हैं। नेगोशिएशन में जिसके पास उठकर जाने की ताकत होती है वही असली राजा होता है।

लेकिन याद रखिए अपना बैटना कभी भी झूठ मत बोलिए। अगर आप पकड़े गए तो आपकी इज्जत का कचरा हो जाएगा। कुछ लोग हवा में तीर मारते हैं कि मुझे तो वहां से बहुत बड़ा ऑफर मिला है। जब सामने वाला कहता है कि ठीक है वहीं चले जाओ तब उनकी शक्ल देखने लायक होती है। जीनियस वह है जो सच में अपने लिए ऑप्शंस तैयार रखता है। यह एक इंश्योरेंस पॉलिसी की तरह है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो बढ़िया है लेकिन अगर बात बिगड़ी तो आपके पास डूबने के लिए कोई गहरा समंदर नहीं बल्कि एक मजबूत लाइफबोट है।

जो लोग बिना किसी प्लान बी के किसी एग्रीमेंट में घुसते हैं वह असल में नेगोशिएशन नहीं बल्कि भीख मांग रहे होते हैं। अगर आप चाहते हैं कि सामने वाला आपको सीरियसली ले तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि आपको उसकी उतनी जरूरत नहीं है जितनी उसे आपकी है। अपनी वैल्यू बढ़ाना और ऑप्शंस हाथ में रखना ही आपको एक शातिर खिलाड़ी बनाता है। तो अगली बार जब भी किसी बड़ी डील के लिए बैठें तो खुद से एक सवाल जरूर पूछें कि अगर आज बात नहीं बनी तो मेरा अगला कदम क्या होगा। अगर आपके पास इसका जवाब है तो समझ लीजिए जीत आपकी ही होगी।


लेसन ३ : ट्रस्ट और रिलेशनशिप की असली कीमत

क्या आपको लगता है कि एक बार सामने वाले को लूट लिया तो आप बहुत बड़े सूरमा बन गए। अगर आप किसी को बातों में फंसाकर उसका नुकसान करवा देते हैं तो मुबारक हो। आपने एक छोटी सी जीत के लिए अपना पूरा करियर और साख दांव पर लगा दी है। दीपक मल्होत्रा और मैक्स बेजरमैन अपनी किताब नेगोशिएशन जीनियस में यह बहुत साफ कहते हैं कि असली जीत वह नहीं है जिसमें सामने वाला रोता हुआ घर जाए। असली जीत वह है जिसमें दोनों को लगे कि उन्हें कुछ अच्छा मिला है। इसे प्रोफेशनल भाषा में 'विन विन' सिचुएशन कहते हैं और देसी भाषा में इसे 'इज्जत की कमाई' कहते हैं।

मान लीजिए आप एक फ्रीलांस ग्राफिक डिजाइनर हैं। आपके पास एक नया क्लाइंट आता है जिसे अपने स्टार्टअप के लिए लोगो बनवाना है। आपको पता है कि वह नया है और उसे मार्केट रेट का अंदाजा नहीं है। आप उसे पांच हजार के काम के लिए पच्चीस हजार का बिल थमा देते हैं। वह बेचारा भरोसा करके पैसे दे देता है। आप खुश हैं कि आज तो मोटी मुर्गी फंसी। लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं होती। दो महीने बाद उसे पता चलता है कि आपने उससे पांच गुना ज्यादा पैसे लिए हैं। अब क्या होगा। वह कभी आपके पास वापस नहीं आएगा। वह अपने दस दोस्तों को बताएगा कि आपसे दूर रहें। आपने एक बार के बीस हजार के लिए अपनी जिंदगी भर की कमाई और भरोसे का गला घोंट दिया।

एक नेगोशिएशन जीनियस यहाँ क्या करता। वह उसे सही रेट बताता और समझाता कि वह उसकी ब्रांडिंग में और कैसे मदद कर सकता है। जब आप सामने वाले के फायदे के बारे में सोचते हैं तो आप उसके लिए केवल एक वेंडर नहीं बल्कि एक पार्टनर बन जाते हैं। ट्रस्ट बिल्डिंग एक स्लो प्रोसेस है लेकिन इसके फायदे बहुत लंबे चलते हैं। जब सामने वाले को लगता है कि आप उसे धोखा नहीं देंगे तो वह टेबल पर अपनी गार्ड्स नीचे कर देता है। वह आपसे अपनी असली परेशानियां शेयर करता है और तभी आप ऐसी डील्स क्रैक कर पाते हैं जो पहले नामुमकिन लगती थीं।

अक्सर लोग सोचते हैं कि नेगोशिएशन एक जंग है जहाँ किसी एक का हारना जरूरी है। लेकिन असल में यह एक साथ मिलकर एक बड़ी समस्या को सुलझाना है। अगर आप केवल अपने टुकड़े के बारे में सोचेंगे तो केक छोटा ही रहेगा। लेकिन अगर आप मिलकर काम करेंगे तो केक बड़ा हो सकता है और दोनों को ज्यादा मिल सकता है। धोखेबाजी और चालाकी आपको एक बार जिता सकती है लेकिन ईमानदारी और रिलेशनशिप आपको बार बार जिताएगी। नेगोशिएशन टेबल पर आपकी जुबान की कीमत आपके साइन किए हुए कॉन्ट्रैक्ट से ज्यादा होनी चाहिए।

इसलिए अगली बार जब भी आप किसी डील के आखिरी मोड़ पर हों तो खुद से पूछिए कि क्या यह इंसान कल भी मेरे साथ काम करना चाहेगा। अगर जवाब ना है तो समझ लीजिए आप जीनियस नहीं बल्कि एक छोटे खिलाड़ी हैं। लॉन्ग टर्म सोचना ही वह क्वालिटी है जो बड़े बिजनेसमैन को आम लोगों से अलग करती है। रिश्ते बनाइए पैसे तो अपने आप पीछे पीछे चले आएंगे।


तो दोस्तों, यह थे "नेगोशिएशन जीनियस" के ३ सबसे बड़े लेसन। अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप वही पुराने तरीके से लोगों को चूना लगाकर छोटी खुशियां मनाना चाहते हैं या फिर एक असली जीनियस बनकर बड़ी और लंबी डील्स क्रैक करना चाहते हैं। याद रखिए टेबल पर आपकी तैयारी और आपकी ईमानदारी ही आपकी असली पहचान है। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया और आप भी अपनी लाइफ में एक नेगोशिएशन मास्टर बनना चाहते हैं तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अक्सर बारगेनिंग में हार जाते हैं। नीचे कमेंट में बताएं कि आपका सबसे पसंदीदा लेसन कौन सा था।

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