The One Thing You Need to Know (Hindi)


अगर आप आज भी वही घिसे पिटे मैनेजमेंट के तरीके अपना रहे हैं तो मुबारक हो। आप अपनी ग्रोथ का खुद ही गला घोंट रहे हैं। क्या आपको लगता है कि आप लीडर हैं। असल में आप बस एक भीड़ का हिस्सा हैं जो बिना किसी मंजिल के भाग रही है।

आज हम मार्कस बकिंघम की बुक द वन थिंग यू नीड टू नो से वो कड़वे सच जानेंगे जो आपको ऑफिस का कूली बनने से बचा सकते हैं। चलिए इन ३ बेहतरीन लेसन्स से आपकी जिंदगी और करियर की असली कहानी शुरू करते हैं।


लेसन १ : हर इंसान की यूनिकनेस को हथियार बनाना ही असली मैनेजमेंट है

अगर आप सोचते हैं कि सबको एक ही लाठी से हांक कर आप दुनिया के सबसे बड़े मैनेजर बन जाएंगे तो आप गलतफहमी के शिकार हैं। असल में यह मैनेजमेंट नहीं बल्कि भेड़ चाल है। मार्कस बकिंघम कहते हैं कि एक महान मैनेजर वह नहीं होता जो लोगों को बदलने की कोशिश करे। बल्कि वह होता है जो यह समझ जाए कि उसके पास मौजूद हर इंसान अलग है। अब आप अपने ऑफिस के उस चिंटू को ही देख लीजिए जो एक्सेल शीट बनाने में तो उस्ताद है लेकिन क्लाइंट से बात करते समय उसकी जुबान लड़खड़ाने लगती है। अब अगर आप एक घटिया मैनेजर हैं तो आप उसे जबरदस्ती सेल्स कॉल पर लगाएंगे ताकि वह अपनी कमजोरी सुधार सके। नतीजा क्या होगा। वह सेल्स में तो जीरो रहेगा ही और एक्सेल वाली अपनी असली ताकत भी भूल जाएगा।

सच्चाई तो यह है कि लोग अपनी कमियों को सुधारने में पूरी जिंदगी निकाल देते हैं और आखिर में बस एक एवरेज इंसान बनकर रह जाते हैं। एक स्मार्ट मैनेजर चेस यानी शतरंज के खिलाड़ी की तरह होता है। उसे पता होता है कि ऊंट टेढ़ा चलेगा और घोड़ा ढाई घर कूदेगा। वह कभी घोड़े को सीधा चलने के लिए मजबूर नहीं करता। वह बस उसे सही जगह पर रखता है। हमारी इंडियन सोसाइटी में हमें बचपन से सिखाया जाता है कि जिस सब्जेक्ट में कम नंबर आए हैं उस पर ज्यादा ध्यान दो। मतलब जो नहीं आता वही सीखो। लेकिन कॉर्पोरेट वर्ल्ड में यह फॉर्मूला आपको बर्बाद कर देगा।

आपको अपने साथ काम करने वालों के टैलेंट को पहचानना होगा। कोई कोडिंग में जीनियस है तो उसे मीटिंग्स में बिठाकर उसका टाइम वेस्ट मत कीजिए। कोई बातों का जादूगर है तो उसे डेटा एंट्री के काम में मत फंसाइए। जब आप लोगों को उनकी ताकत के हिसाब से काम देते हैं तो वो काम नहीं बल्कि एक खेल बन जाता है। इससे आपकी टीम की प्रोडक्टिविटी तो बढ़ती ही है और आपको भी चिल्लाने की जरूरत नहीं पड़ती। वरना अगर आप सबको मछली की तरह पेड़ पर चढ़ाने की कोशिश करेंगे तो पूरी टीम खुद को बेवकूफ ही समझती रहेगी। याद रखिए मैनेजमेंट का मतलब कंट्रोल करना नहीं बल्कि हर इंसान की यूनिकनेस को कैश करना है। जब आप यह समझ जाएंगे तब आपको समझ आएगा कि असली काम लोगों से करवाना कितना आसान है बशर्ते आप उनकी खूबियों के साथ खिलवाड़ न करें।


लेसन २ : लीडरशिप का मतलब है कल की धुंधली तस्वीर को साफ आइना बनाना

अक्सर लोगों को लगता है कि कुर्सी पर बैठकर हुक्म चलाना लीडरशिप है। लेकिन बॉस और लीडर में वही फर्क है जो एक अलार्म क्लॉक और सुबह की सूरज की किरण में होता है। मार्कस बकिंघम कहते हैं कि एक ग्रेट लीडर बनने के लिए आपको फ्यूचर के बारे में बहुत ज्यादा क्लियर होना पड़ेगा। असल में हम इंसानों के अंदर एक बहुत बड़ा डर होता है और वो है अनिश्चितता यानी फ्यूचर में क्या होगा इसका खौफ। जब पूरी टीम को लग रहा हो कि कंपनी डूबने वाली है या प्रोजेक्ट हाथ से निकल जाएगा तब लीडर का काम यह नहीं है कि वह भी बैठकर रोने लगे। उसका काम है सबको यह बताना कि हम कल कहाँ होंगे और वहाँ पहुँचने का रास्ता क्या है।

अगर आप अपनी टीम के सामने खड़े होकर बस लंबी लंबी बातें करेंगे तो लोग आपको नेता समझेंगे लीडर नहीं। लोग उसी के पीछे चलते हैं जिसके पास एक साफ विजन होता है। अब मान लीजिए आप अपनी टीम को कह रहे हैं कि हमें अगले साल तक बहुत बड़ा बनना है। अब इस बहुत बड़ा का क्या मतलब है। यह तो उतना ही कन्फ्यूजिंग है जितना कि किसी रेस्टोरेंट में जाकर वेटर को कहना कि कुछ अच्छा ले आओ। वेटर अपनी मर्जी का लाएगा और आप बिल भरते वक्त दुखी होंगे। एक लीडर को एकदम स्पेसिफिक होना चाहिए। उसे बताना होगा कि अगले साल हम दस करोड़ का रेवेन्यू छुएंगे या फिर हम मार्केट के टॉप तीन खिलाड़ियों में होंगे।

महान लीडर वो नहीं होते जो सबसे ज्यादा स्मार्ट होते हैं। महान लीडर वो होते हैं जो सबसे ज्यादा क्लियर होते हैं। जब लोगों को पता होता है कि उनकी मेहनत किस दिशा में जा रही है तो वो अपनी जान लगा देते हैं। लेकिन अगर आप खुद ही कन्फ्यूज हैं तो आपकी टीम बस ऑफिस में आकर अपनी शिफ्ट खत्म होने का इंतजार करेगी। और सच तो यह है कि क्लैरिटी के बिना दी गई मोटिवेशन बस चार दिन की चांदनी होती है। आप चाहे जितना मर्जी जोश भर लें अगर मंजिल का पता नहीं है तो सब वापस अपनी पुरानी सुस्ती पर आ जाएंगे। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी बात सुनें और आपको फॉलो करें तो पहले खुद के दिमाग से कोहरा हटाओ। जब आप सबको एक ही विजन की माला में पिरो देते हैं तब जाकर एक एवरेज टीम भी वर्ल्ड क्लास परफॉरमेंस देने लगती है।


लेसन ३ : अपनी कमियों को ढोने के बजाय अपनी खूबियों को अपनी पहचान बनाओ

अब बात करते हैं आपकी और मेरी। हम सब एक ऐसी मशीन की तरह जी रहे हैं जिसे बचपन से ही रिपेयर होने की आदत डाल दी गई है। स्कूल की रिपोर्ट कार्ड याद है। जिस सब्जेक्ट में कम नंबर आते थे घर वाले उसी के लिए ट्यूशन लगवा देते थे। मतलब जो हमें पसंद नहीं था या जिसमें हम कमजोर थे उसी के पीछे पूरी एनर्जी बर्बाद कर दी गई। मार्कस बकिंघम कहते हैं कि सस्टेंड सक्सेस यानी लंबे समय तक टिकने वाली सफलता का सिर्फ एक ही रास्ता है और वो है अपनी स्ट्रेंथ पर फोकस करना। अगर आप एक मछली हैं और पूरी जिंदगी बस पहाड़ पर चढ़ने की प्रैक्टिस कर रहे हैं तो यकीन मानिए आप एक बहुत ही दुखी और नाकाम मछली बनकर मरेंगे।

दुनिया आपको बार बार कहेगी कि अपनी कमियों पर काम करो। लेकिन सच तो यह है कि अपनी कमियों को सुधार कर आप ज्यादा से ज्यादा बस एवरेज बन सकते हैं महान नहीं। अगर आप पेंटिंग में खराब हैं तो दस साल मेहनत करके आप शायद एक ठीक ठाक पेंटर बन जाएं लेकिन पिकासो कभी नहीं बन पाएंगे। जबकि अगर आप कोडिंग में पहले से ही अच्छे हैं और उसी में अपनी पूरी जान लगा देते हैं तो आप दुनिया के टॉप १ परसेंट लोगों में शामिल हो सकते हैं। हमें लगता है कि जो काम हमें आसानी से आता है उसकी कोई वैल्यू नहीं है। हम मुश्किल रास्तों पर चलने को ही मेहनत समझ लेते हैं। लेकिन भाई साहब ये गधा मजदूरी है स्मार्ट वर्क नहीं।

जिंदगी में वो एक चीज ढूंढिए जिसे करते समय आप वक्त भूल जाते हैं। वही आपकी असली ताकत है। जब आप अपनी खूबियों के साथ काम करते हैं तो आपका कॉन्फिडेंस सातवें आसमान पर होता है। लोग आपकी कमियों को नजरअंदाज करना शुरू कर देते हैं क्योंकि आपकी एक खूबी इतनी चमक रही होती है कि बाकी सब धुंधला पड़ जाता है। याद रखिए दुनिया सक्सेसफुल लोगों की कमियां नहीं गिनती बल्कि उनकी एक बड़ी जीत का जश्न मनाती है। इसलिए आज से ही अपनी उन आदतों और स्किल्स की लिस्ट बनाइए जो आपको भीड़ से अलग करती हैं। अपनी कमजोरी को बस इतना ही संभालिए कि वह आपके रास्ते का कांटा न बने लेकिन अपनी पूरी ताकत अपनी स्ट्रेंथ को निखारने में लगा दीजिए। यही वो इकलौता राज है जो आपको एक आम इंसान से एक लेजेंड बना सकता है।


तो दोस्तों, क्या आप अभी भी अपनी कमजोरियों का रोना रोते रहेंगे या फिर आज ही अपनी उस एक खूबी को पहचान कर उस पर काम शुरू करेंगे। जिंदगी बहुत छोटी है और इसे एवरेज बनकर बिताने का कोई फायदा नहीं है। कमेंट में अपनी वो एक स्ट्रेंथ जरूर बताएं जिसे आप आज से अपनी पहचान बनाने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अभी भी ऑफिस में गधा मजदूरी कर रहा है। याद रखिए आपकी एक सही चॉइस आपकी पूरी तकदीर बदल सकती है।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#SuccessTips #Leadership #Management #CareerGrowth #BookSummary


_

Post a Comment

Previous Post Next Post