क्या आप अभी भी उन पुराने और मोटे बिजनेस प्लान्स को लेकर बैठे हैं जो डस्टबिन में जाने के ही लायक हैं? अगर हां, तो मुबारक हो, आप अपनी मेहनत और कीमती वक्त को नाली में बहाने की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। बिना फ्लेक्सिबिलिटी के बिजनेस चलाना मतलब अपनी बर्बादी का खुद ही प्लान बनाना है।
इस आर्टिकल में हम टिम बेरी की किताब द प्लान एज यू गो बिजनेस प्लान से वो 3 कीमती लेसन सीखेंगे जो आपके स्टार्टअप को फेल होने से बचाएंगे और आपको असली बिजनेस गुरु बनाएंगे।
लेसन १ : बिजनेस प्लान कोई पत्थर की लकीर नहीं है बल्कि एक जिंदा डॉक्यूमेंट है।
क्या आपको याद है जब बचपन में आप पिकनिक पर जाने का प्लान बनाते थे और ठीक उसी दिन बारिश हो जाती थी। आप रोते थे और घर के अंदर बैठकर पकोड़े खाते थे। बिजनेस में भी यही होता है। बहुत से लोग सोचते हैं कि एक बार भारी भरकम सौ पेज की फाइल बना ली तो बस अब तो करोड़ों की बारिश होगी। लेकिन सच तो ये है कि वो फाइल सिर्फ अलमारी की शोभा बढ़ाती है। टिम बेरी कहते हैं कि आपका बिजनेस प्लान कोई पत्थर की लकीर नहीं है जिसे बदला न जा सके। यह एक जिंदा चीज है जो आपके बिजनेस के साथ बड़ी होती है और बदलती है।
सोचिए आपने एक स्टार्टअप शुरू किया कि आप लोगों को ऑर्गेनिक करेले का जूस बेचेंगे क्योंकि आपको लगा कि दुनिया को सेहत की सख्त जरूरत है। आपने पूरे छह महीने लगाकर एक शानदार प्लान बनाया। उसमें ग्राफ्स डाले और बड़ी बड़ी बातें लिखीं। लेकिन जब आप मार्केट में उतरे तो पता चला कि लोगों को करेला नहीं बल्कि मीठा आम पसंद है। अब अगर आप अपने उसी पुराने प्लान से चिपके रहे तो आप जल्द ही अपनी दुकान बढ़ाकर घर बैठ जाएंगे। असल समझदारी इसमें है कि आप प्लान को उसी वक्त बदल दें।
हमारे देश में लोग अक्सर प्लान को एक धर्म की तरह मानने लगते हैं। अगर प्लान में लिखा है कि हम साल के अंत में दस दुकानें खोलेंगे तो चाहे जेब में फूटी कौड़ी न हो लोग कर्ज लेकर दुकानें खोलने लगते हैं। यह वही बात हुई कि गूगल मैप्स कह रहा है कि सामने खाई है लेकिन आपने मैप बनाया था कि वहां रास्ता होगा तो आप गाड़ी सीधा नीचे उतार दें। बिजनेस प्लान आपकी मदद के लिए है आपको बर्बाद करने के लिए नहीं।
मान लीजिए राहुल ने एक नया कैफे खोलने का प्लान बनाया। उसने सोचा था कि वह सिर्फ इटालियन कॉफी बेचेगा। उसने इटली से मशीनें मंगवाई और बहुत खर्चा किया। लेकिन उसके कैफे के पास एक कॉलेज था जहां बच्चों को सिर्फ मसाला चाय और समोसे चाहिए थे। राहुल का पुराना प्लान कहता था कि मसाला चाय बेचना स्टैंडर्ड के खिलाफ है। लेकिन एक महीने में जब बिजली का बिल भरने के पैसे नहीं बचे तो राहुल को समझ आया कि उसका प्लान गलत था। उसने तुरंत अपना प्लान बदला और चाय समोसा बेचना शुरू किया। आज राहुल का कैफे सुपरहिट है।
बिजनेस में ईगो को साइड में रखकर प्लान को हकीकत के हिसाब से मोड़ना ही असली कला है। अगर मार्केट बदल रहा है और आपके कस्टमर कुछ और मांग रहे हैं तो अपने उस पुराने प्लान को फ्रेम करवाकर दीवार पर टांगने की जरूरत नहीं है। उसे फाड़िए या उसमें सुधार करिए। टिम बेरी का सीधा फंडा है कि जैसे जैसे आप आगे बढ़ें वैसे वैसे प्लान को अपडेट करते रहें। यह एक प्रोसेस है जो कभी खत्म नहीं होता।
अगली बार जब आप अपना बिजनेस शुरू करें तो यह याद रखें कि आपको कोई एग्जाम नहीं देना है जहां सिलेबस नहीं बदला जा सकता। यह आपका अपना बिजनेस है और आप इसके मालिक हैं। अगर आपको लगता है कि आज धूप तेज है तो छतरी खोल लीजिए और अगर बारिश रुक गई है तो उसे बंद कर दीजिए। प्लानिंग का मतलब सिर्फ ये नहीं कि आप कहां जाना चाहते हैं बल्कि ये भी है कि आप रास्ते की रुकावटों को देखकर कैसे अपना रास्ता बदलते हैं।
लेसन २ : लंबे और भारी शब्दों वाले प्लान्स बेकार हैं और आपका प्लान छोटा और सटीक होना चाहिए।
अक्सर जब लोग बिजनेस प्लान के बारे में सोचते हैं तो उन्हें लगता है कि जितनी मोटी फाइल होगी उतना ही बड़ा इन्वेस्टर मिलेगा। लोग उसमें ऐसी अंग्रेजी और टेक्निकल शब्द ठूस देते हैं जिन्हें पढ़कर खुद लिखने वाले को भी चक्कर आ जाए। टिम बेरी कहते हैं कि यह सबसे बड़ी बेवकूफी है। अगर आपका प्लान इतना लंबा है कि उसे पढ़ते पढ़ते लोग रिटायर हो जाएं तो यकीन मानिए उस पर कोई काम नहीं होने वाला। असली पावर छोटे और साफ प्लान में होती है।
मान लीजिए आप अपनी शादी के लिए शेरवानी खरीदने जा रहे हैं। अब अगर टेलर आपको दस पन्नों की रिपोर्ट दे कि धागा कहां से आया और सुई की धार कितनी तेज है तो आप बोर होकर भाग जाएंगे। आपको सिर्फ ये जानना है कि फिटिंग कैसी है और आप हीरो लगेंगे या नहीं। बिजनेस प्लान का भी यही हाल है। आपको लंबी कहानियां नहीं लिखनी हैं। आपको बस ये पता होना चाहिए कि आप क्या बेच रहे हैं और कौन उसे खरीदेगा।
इंडिया में हमें आदत है कि हम हर चीज को बढ़ा चढ़ाकर बताते हैं। अगर कोई छोटा सा स्टार्टअप शुरू कर रहा है तो वो भी अपनी फाइल में ग्लोबल मार्केट और इंटरनेशनल इकोनॉमी की बातें लिखता है। भाई अभी तो तुमने मोहल्ले में अपनी पहली डिलीवरी नहीं दी और सपने तुम मंगल ग्रह के देख रहे हो। टिम बेरी का सुझाव बहुत सिंपल है। अपना प्लान इतना छोटा रखो कि उसे एक पेज पर या कुछ बुलेट्स में समझा जा सके। इसे वो प्लान ऑन द गो कहते हैं।
सोचिए समीर ने एक मोबाइल रिपेयरिंग का बिजनेस शुरू किया। उसने साठ पन्नों का बिजनेस प्लान बनाया जिसमें उसने दुनिया भर के मोबाइल यूजर्स का डेटा डाला। लेकिन जब असल में दुकान खोलने की बारी आई तो उसे ये भी नहीं पता था कि उसके इलाके में सबसे ज्यादा कौन से ब्रांड के फोन खराब होते हैं। उसका सारा वक्त तो फाइल बनाने में निकल गया और जब तक उसने दुकान खोली तब तक उसके पड़ोस में एक लड़के ने बिना किसी लंबे प्लान के दुकान खोल ली और धंधा सेट कर लिया। समीर अपनी फाइल लेकर बैठा रह गया।
आपका प्लान एक फ्लैशलाइट की तरह होना चाहिए जो आपको बस अगला कदम दिखा सके। आपको पूरी मशाल लेकर पूरी दुनिया रोशन करने की जरूरत नहीं है। अगर आप छोटे प्लान बनाएंगे तो आप उन्हें जल्दी पढ़ पाएंगे और जल्दी एक्शन ले पाएंगे। लंबे प्लान अक्सर डर पैदा करते हैं और डर की वजह से इंसान काम शुरू ही नहीं कर पाता। याद रखिए कि असली बिजनेस मार्केट में होता है न कि माइक्रोसॉफ्ट वर्ड की फाइल में।
जब आप कम शब्दों का इस्तेमाल करते हैं तो आपकी सोच साफ होती है। आप फालतू की बातों को छोड़कर सिर्फ उन चीजों पर ध्यान देते हैं जिनसे पैसा आता है या जिनसे कस्टमर खुश होता है। अगर आपका प्लान ऐसा है जिसे आप अपने दोस्त को चाय पीते हुए पांच मिनट में नहीं समझा सकते तो समझ लीजिए कि आपका प्लान बहुत खराब है। टिम बेरी हमें सिखाते हैं कि सादगी ही सबसे बड़ी लग्जरी है। छोटे प्लान बनाइए और अपनी एनर्जी को काम पूरा करने में लगाइए।
लेसन ३ : प्लानिंग से ज्यादा जरूरी है उसे लागू करना क्योंकि सिर्फ पेपर पर प्लानिंग करने से पैसे नहीं आते।
दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। एक वो जो हिमालय चढ़ने का पूरा मैप घर पर बैठकर रट लेते हैं और दूसरे वो जो अपना झोला उठाते हैं और चढ़ना शुरू कर देते हैं। बिजनेस में भी ज्यादातर लोग पहले वाली कैटेगरी में आते हैं। वो सालों तक ये सोचते रह जाते हैं कि जब सब कुछ परफेक्ट होगा तब मैं अपना काम शुरू करूंगा। टिम बेरी कहते हैं कि दुनिया का सबसे बढ़िया प्लान भी तब तक कचरा है जब तक आप उस पर एक्शन नहीं लेते। प्लानिंग सिर्फ एक शुरुआत है असली गेम तो मैदान में उतरने के बाद शुरू होता है।
क्या आपने कभी वो लोग देखे हैं जो जिम जाने का प्लान बनाते हैं? वो पहले हफ्ता भर यूट्यूब पर वीडियो देखेंगे फिर ब्रांडेड जूते खरीदेंगे और फिर एक बढ़िया सा डाइट चार्ट बनाएंगे। लेकिन जब सुबह अलार्म बजता है तो वो सो जाते हैं। बिजनेस में भी लोग यही गलती करते हैं। वो मार्केट रिसर्च के नाम पर महीनों बिता देते हैं लेकिन अपनी पहली सेल करने से डरते हैं। टिम बेरी का साफ कहना है कि आप चाहे कितनी भी प्लानिंग कर लें मार्केट आपको कोई न कोई सरप्राइज जरूर देगा। इसलिए बेहतर यही है कि आप जल्दी से जल्दी अपना काम शुरू करें और रास्ते में जो कमियां दिखें उन्हें ठीक करते जाएं।
मान लीजिए अमित को एक ऑनलाइन मिठाई की दुकान खोलनी है। अब अमित सोच रहा है कि पहले वो वेबसाइट बनवाएगा फिर बड़ी सी फैक्ट्री डालेगा और फिर पूरी दुनिया में मार्केटिंग करेगा। इस सब में उसे दो साल लग जाएंगे। वहीं दूसरी तरफ सुमित है जिसने सिर्फ एक फेसबुक पेज बनाया और अपने पड़ोस की मशहूर दुकान से मिठाई लेकर डिलीवर करना शुरू कर दिया। सुमित को पहले दिन ही पता चल गया कि लोग कौन सी मिठाई ज्यादा पसंद कर रहे हैं। जब तक अमित अपना रिबन काटेगा तब तक सुमित आधा मार्केट कब्जा चुका होगा।
प्लानिंग करना अच्छी बात है लेकिन उसे अपनी ढाल मत बनाइए। बहुत से लोग फेल होने के डर से प्लानिंग के पीछे छुपते हैं। उन्हें लगता है कि अगर वो और ज्यादा प्लानिंग करेंगे तो रिस्क कम हो जाएगा। पर सच तो ये है कि असली रिस्क कुछ न करने में है। टिम बेरी हमें सिखाते हैं कि जैसे जैसे आप काम करना शुरू करते हैं वैसे वैसे आपको नया डेटा मिलता है। उस डेटा के हिसाब से आप अपने प्लान को हर महीने या हर हफ्ते अपडेट कर सकते हैं। इसे ही वो प्लानिंग प्रोसेस कहते हैं जो कभी नहीं रुकता।
इतिहास उन लोगों का नहीं लिखा जाता जो बहुत अच्छी डायरी लिखते थे बल्कि उनका लिखा जाता है जिन्होंने दुनिया में बाहर निकलकर कुछ बड़ा किया। आपका बिजनेस प्लान आपकी मदद के लिए एक गाइड की तरह है न कि आपको बांधने वाली जंजीर। तो अपनी उन फाइलों को बंद करिए और आज ही अपना पहला छोटा सा कदम उठाइए। क्योंकि बिना एक्शन के विजन सिर्फ एक सपना है और बिना विजन के एक्शन सिर्फ टाइमपास है। असली सक्सेस इन दोनों के सही तालमेल में है।
तो दोस्तों क्या आप भी अभी तक सिर्फ फाइलों में अपना साम्राज्य बना रहे हैं या वाकई मार्केट में उतरने के लिए तैयार हैं? नीचे कमेंट्स में जरूर बताएं कि आपका अगला बड़ा कदम क्या होने वाला है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो पिछले पांच साल से सिर्फ प्लान ही बना रहा है।
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