क्या आप भी अपनी घिसी पिटी सोच के साथ अमीर बनने के सपने देख रहे हैं। सच तो यह है कि आपकी यही एवरेज थिंकिंग आपको लाइफ में पीछे धकेल रही है और आप चुपचाप फेलियर का तमाशा देख रहे हैं। अगर जॉन सी मैक्सवेल के यह रूल्स नहीं सीखे तो बस भीड़ का हिस्सा बनकर ही रह जाओगे।
आज हम थिंकिंग फॉर अ चेंज बुक से वह सीक्रेट्स जानेंगे जो दुनिया के टॉप १ परसेंट लोग इस्तेमाल करते हैं। यह आर्टिकल आपकी सोच के पुराने जंग लगे ताले खोलकर आपको सक्सेस की असली राह दिखाएगा। चलिए इन ३ पावरफुल लेसन्स को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : बिग पिक्चर थिंकिंग - अपनी नजर को चील जैसा बनाओ
दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। एक वो जो केवल आज रात के खाने के बारे में सोचते हैं और दूसरे वो जो आने वाले दस साल का पूरा मैप लेकर चलते हैं। जॉन सी मैक्सवेल कहते हैं कि अगर आपको सक्सेस की सीढ़ी चढ़नी है तो आपको अपनी छोटी सोच को कचरे के डिब्बे में डालना होगा। हम में से ज्यादातर लोग अपनी लाइफ को एक ऐसी तंग गली की तरह देखते हैं जहाँ सिर्फ आज की मुश्किलें दिखाई देती हैं। बिग पिक्चर थिंकिंग का मतलब है उस गली से बाहर निकलकर आसमान से पूरी दुनिया को देखना। जब आप बड़ा सोचना शुरू करते हैं तो आपको पता चलता है कि जिस छोटी सी प्रॉब्लम पर आप बाल नोच रहे थे वह असल में कोई मुद्दा ही नहीं था।
इमेजिन कीजिए आप अपने पड़ोस के शर्मा जी के साथ एक ऑटो में फंसे हैं। ट्रैफिक जाम है और शर्मा जी मीटर की बढ़ती हुई रीडिंग देखकर ऐसे पसीने छोड़ रहे हैं जैसे उनकी किडनी दांव पर लगी हो। शर्मा जी का पूरा फोकस उस दस रुपये के एक्स्ट्रा किराए पर है। यह है छोटी सोच। वहीं दूसरी तरफ एक इंसान वो है जो उस जाम में बैठकर यह सोच रहा है कि यह ट्रैफिक कम करने के लिए कौन सा ऐप बनाया जा सकता है। वह इंसान बड़े प्रॉफिट की सोच रहा है जबकि शर्मा जी चवन्नी बचाकर खुश हैं। अगर आप सिर्फ कल की ईएमआई और अगले हफ्ते की सेल के बारे में सोचेंगे तो आप कभी वह बड़ा एम्पायर खड़ा नहीं कर पाएंगे जिसका सपना आपने देखा था।
बिग पिक्चर थिंकिंग आपको एक लीडर बनाती है। लोग आपके पीछे इसलिए नहीं आते क्योंकि आप उनसे अच्छी बातें करते हैं बल्कि इसलिए आते हैं क्योंकि आपके पास एक विजन होता है। जब आप बड़ा सोचते हैं तो आप दूसरों की गलतियों को भी इग्नोर करना सीख जाते हैं। आपको पता होता है कि छोटे मोटे झगड़े और ऑफिस की गॉसिप आपको आपके लक्ष्य से भटकाने के लिए बिछाए गए जाल हैं। जो इंसान यह समझ जाता है कि उसकी मंजिल पहाड़ की चोटी है वह रास्ते में मिलने वाले कंकड़ों से नहीं लड़ता। वह बस चलता रहता है क्योंकि उसकी नजर उस खूबसूरत नजारे पर होती है जो ऊपर से दिखने वाला है।
लेकिन भाई साहब बड़ा सोचना इतना आसान भी नहीं है। हमारा दिमाग अक्सर हमें डराता है। यह हमें बताता है कि तुम तो एक छोटे से शहर के लड़के हो तुम बड़ा बिजनेस कैसे करोगे। यह वही दिमाग है जो संडे की दोपहर को सोफे पर पड़े रहने के लिए हजार बहाने ढूंढता है। जॉन मैक्सवेल कहते हैं कि अपनी सोच को स्ट्रेच करो। अगर आप एक कप के बराबर सोचेंगे तो आपको सिर्फ एक कप ही मिलेगा। लेकिन अगर आप एक समंदर की तरह सोचेंगे तो कायनात भी आपको उतना ही देने पर मजबूर हो जाएगी। अपनी लाइफ की पिक्चर को ज़ूम आउट कीजिए और देखिए कि आप कहाँ खड़े हैं और आपको कहाँ पहुंचना है।
लेसन २ : क्रिएटिव थिंकिंग - लकीर के फकीर बनना छोड़ो
हम में से ज्यादातर लोग एक ऐसी मशीन बन गए हैं जो बस वही काम करती है जो उसे सिखाया गया है। जॉन सी मैक्सवेल कहते हैं कि क्रिएटिविटी का मतलब सिर्फ पेंटिंग करना या गाना गाना नहीं है। इसका असली मतलब है मुश्किलों का नया और अनोखा हल ढूंढना। अगर आप अभी भी वही घिसे पिटे तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं जो आपके दादा जी के जमाने में चलते थे तो समझ लीजिए कि आप अपनी तरक्की के दरवाजे पर खुद ही ताला मार रहे हैं। दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि अगर आप हर रोज अपनी सोच को अपडेट नहीं करेंगे तो आप मार्केट से वैसे ही गायब हो जाएंगे जैसे नोकिया के फोन गायब हो गए।
सोचिए आप एक दुकान पर जाते हैं जहाँ दुकानदार आपको वही पुराना और बोरिंग सामान दिखाने की कोशिश करता है जो उसे बेचना है। उसे फर्क नहीं पड़ता कि आपको क्या चाहिए। वह बस अपनी पुरानी घिसी पिटी स्क्रिप्ट पढ़ रहा है। इसे कहते हैं बॉक्स के अंदर सोचना। वहीं दूसरी तरफ एक ऐसा बंदा है जो आपको सामान बेचने के बजाय आपकी प्रॉब्लम समझता है और उसका ऐसा जुगाड़ बताता है कि आप हैरान रह जाते हैं। क्रिएटिव थिंकिंग वही जुगाड़ है जो आपको भीड़ से अलग खड़ा करता है। लोग अक्सर कहते हैं कि मेरे पास आइडियाज नहीं आते। सच तो यह है कि आप आइडियाज ढूंढते ही नहीं हैं क्योंकि आपको कंफर्ट जोन में रहने की आदत पड़ गई है।
क्रिएटिव लोग कभी भी फेलियर से नहीं डरते। उनके लिए हर गलती एक नया लेसन होती है। मान लीजिए आपने कोई नया बिजनेस शुरू किया और वह बुरी तरह पिट गया। एक नॉर्मल इंसान रोना रोएगा और किस्मत को कोसेगा। लेकिन एक क्रिएटिव थिंकर सोचेगा कि चलो यह तरीका काम नहीं किया तो अब कोई दूसरा रास्ता निकालते हैं। वह अपनी हार में भी एक अवसर ढूंढ लेगा। क्रिएटिविटी का सबसे बड़ा दुश्मन है वह जुमला जो हम अक्सर सुनते हैं कि यहाँ तो काम ऐसे ही होता है। जिस दिन आपने यह मान लिया कि काम सिर्फ एक ही तरीके से हो सकता है उसी दिन आपकी ग्रोथ रुक गई।
जॉन मैक्सवेल समझाते हैं कि क्रिएटिव होने के लिए आपको अपनी ईगो को साइड में रखना होगा। आपको दूसरों के आइडियाज सुनने होंगे और उनसे सीखना होगा। कभी कभी एक छोटा सा बच्चा भी आपको ऐसी बात बता सकता है जो बड़े बड़े एक्सपर्ट्स नहीं सोच पाते। अपने दिमाग की खिड़कियों को खुला रखिए। नई जगह घूमिए नए लोगों से मिलिए और अजीब सवाल पूछिए। जितना ज्यादा आप खुद को चैलेंज करेंगे उतना ही ज्यादा आपका दिमाग नए रास्ते बनाएगा। याद रखिए कि दुनिया के हर बड़े आविष्कार के पीछे एक ऐसी सोच थी जिसे शुरू में सबने पागलपन कहा था। अगर लोग आपको पागल नहीं कह रहे तो शायद आपकी सोच अभी भी बहुत साधारण है।
लेसन ३ : स्ट्रेटेजिक थिंकिंग - बिना प्लानिंग के जीतना मुमकिन नहीं है
सिर्फ बड़े सपने देखना और क्रिएटिव होना ही काफी नहीं है। अगर आपके पास उन सपनों को पूरा करने के लिए कोई सॉलिड प्लान नहीं है तो आप बस हवा में तीर चला रहे हैं। जॉन सी मैक्सवेल कहते हैं कि स्ट्रेटेजिक थिंकिंग वह पुल है जो आपके आज को आपके सुनहरे कल से जोड़ता है। बहुत से लोग बड़ी जोश और ऊर्जा के साथ काम शुरू तो करते हैं लेकिन महीने भर बाद उनका गुब्बारा फुस्स हो जाता है। क्यों। क्योंकि उनके पास कोई रोडमैप नहीं था। वह बस बिना मैप के एक अंजान शहर में गाड़ी चला रहे थे।
कल्पना कीजिए कि आपको अपने दोस्त की शादी में जाना है जो शहर के दूसरे कोने पर है। आप कार निकालते हैं और बस निकल पड़ते हैं। न आपको रास्ता पता है न आपने जीपीएस चालू किया है और न ही आपको यह पता है कि गाड़ी में पेट्रोल कितना है। आप हर चौराहे पर रुककर किसी न किसी से रास्ता पूछते हैं और हर कोई आपको अलग दिशा बता देता है। नतीजा यह होता है कि जब आप वहां पहुंचते हैं तब तक शादी खत्म हो चुकी होती है और मेहमान पनीर के टुकड़े ढूंढ रहे होते हैं। यह है बिना स्ट्रेटेजी के लाइफ जीना। स्ट्रेटेजिक थिंकिंग वाला इंसान पहले गूगल मैप चेक करेगा शॉर्टकट देखेगा और यह पक्का करेगा कि रास्ते में कोई जाम न मिले।
रणनीति बनाने का मतलब यह नहीं है कि आप बहुत बड़े और भारी शब्द इस्तेमाल करें। इसका सिंपल सा मतलब है यह जानना कि आप अभी कहाँ खड़े हैं आपको कहाँ जाना है और वहां जाने का सबसे आसान तरीका क्या है। अपनी बड़ी प्रॉब्लम को छोटे छोटे टुकड़ों में बांटना ही असली समझदारी है। अगर आपको १० किलो वजन कम करना है तो आप एक दिन में भूखे रहकर यह नहीं कर सकते। आपको एक प्रॉपर डाइट और वर्कआउट प्लान बनाना होगा। स्ट्रेटेजिक थिंकर हमेशा दो कदम आगे की सोचता है। उसे पता होता है कि अगर प्लान ए फेल हुआ तो उसके पास प्लान बी तैयार है। वह अपनी किस्मत के भरोसे नहीं बैठता बल्कि अपनी मेहनत को सही दिशा में लगाता है।
जॉन मैक्सवेल एक बहुत बड़ी बात कहते हैं कि स्ट्रेटेजी आपको आज के दबाव से बचाती है। जब आपके पास एक स्पष्ट प्लान होता है तो आप छोटी छोटी रुकावटों से परेशान नहीं होते। आपको पता होता है कि आज की मेहनत कल रंग लाएगी। आप अपने समय और ऊर्जा को उन चीजों पर बर्बाद नहीं करते जो आपको आपके लक्ष्य की तरफ नहीं ले जातीं। रणनीतिक सोच आपको यह कहने की हिम्मत देती है कि नहीं यह काम मेरे लिए जरूरी नहीं है। तो क्या आपने अपनी लाइफ का ब्लूप्रिंट तैयार किया है या आप भी बस उसी भीड़ का हिस्सा हैं जो हवा के झोंके के साथ कहीं भी मुड़ जाती है। जागिए और अपनी लाइफ के कमांडर खुद बनिए।
दोस्तो, सोच बदलना कोई एक दिन का काम नहीं है बल्कि यह एक सफर है। जॉन सी मैक्सवेल की यह बातें हमें याद दिलाती हैं कि हमारी सबसे बड़ी शक्ति हमारा हाथ या पैर नहीं बल्कि हमारा दिमाग है। अगर आप वही सोचते रहेंगे जो अब तक सोचते आए हैं तो आपको वही मिलता रहेगा जो अब तक मिलता आया है। क्या आप तैयार हैं अपनी लिमिट्स को तोड़ने के लिए। क्या आप तैयार हैं दुनिया को एक नए नजरिए से देखने के लिए।
आज ही नीचे कमेंट्स में लिखकर बताइए कि इन ३ लेसन्स में से कौन सा लेसन आपकी लाइफ को बदलने वाला है। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो लाइफ में कुछ बड़ा करना चाहते हैं पर रास्ता नहीं मिल रहा। याद रखिए आपकी एक छोटी सी शुरुआत आपकी पूरी दुनिया बदल सकती है।
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