आप अभी भी वही घिसी पिटी मेहनत कर रहे हैं और फिर भी आपका बिजनेस चींटी की रफ्तार से चल रहा है। क्या आपको लगता है कि सिर्फ हार्ड वर्क से आप अंबानी बन जाएंगे। गलतफहमी में जीना छोड़िए वरना दुनिया आपको पीछे छोड़कर रॉकेट की तरह आगे निकल जाएगी।
मास्टर ऑफ स्केल बुक समरी में रीड हॉफमैन हमें वो सीक्रेट्स बताएंगे जो असल में स्टार्टअप्स को बड़ा बनाते हैं। चलिए जानते हैं वो 3 जादुई लेसन जो आपके बिजनेस की किस्मत हमेशा के लिए बदल देंगे।
लेसन १ : स्केल करने के लिए वो काम करें जो स्केल नहीं होते (Do Things That Don't Scale)
अगर आपको लगता है कि डे वन से ही आप ऑटोमेशन और मशीनों के भरोसे दुनिया जीत लेंगे तो आप सबसे बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। मास्टर ऑफ स्केल में रीड हॉफमैन एक बहुत ही कड़वी लेकिन मजेदार बात कहते हैं। वह कहते हैं कि अगर आप अपने बिजनेस को पहाड़ जैसा ऊंचा बनाना चाहते हैं तो शुरुआत में आपको खुद गड्ढे खोदने पड़ेंगे। ज्यादातर लोग स्टार्टअप शुरू करते ही सोचते हैं कि उनके पास लाखों कस्टमर्स रातों रात आ जाएंगे और सब कुछ अपने आप मैनेज हो जाएगा। लेकिन सच तो यह है कि शुरुआत में आपको अपने हर एक कस्टमर की गोद में बैठकर उसे लाड प्यार करना पड़ता है।
मान लीजिए आपने समोसे की एक दुकान खोली। अब आप पहले दिन ही रोबोटिक मशीन नहीं लगाएंगे जो समोसे तलकर पैक कर दे। आपको खुद दुकान के बाहर खड़े होकर लोगों को बुलाना होगा। उनसे पूछना होगा कि भाई साहब नमक कैसा है। चटनी और तीखी करूँ क्या। आपको हर कस्टमर के साथ वो पर्सनल कनेक्शन बनाना होगा जो कोई बड़ी कंपनी नहीं बना सकती। जब एयरबीएनबी (Airbnb) की शुरुआत हुई थी तो उनके फाउंडर्स खुद लोगों के घर जाकर उनके कमरों की फोटो खींचते थे। सोचिए अरबपति बनने वाले लोग आज दूसरों के बिस्तर की चादरें ठीक कर रहे थे। कितना अजीब लगता है सुनने में लेकिन यही वो जादू है जो ब्रांड बनाता है।
आजकल के 25 से 34 साल के युवा जोश में आकर सीधा स्केलिंग की बातें करते हैं। भाई पहले दस लोगों को तो खुश कर लो जो तुम्हारे प्रोडक्ट को छोड़कर कहीं न जाएं। अगर आप अपने शुरुआती 100 कस्टमर्स को अपना दीवाना नहीं बना सकते तो आप करोड़ों लोगों को अपना उल्लू भी नहीं बना पाएंगे। आपको वो अनप्रोफेशनल और थका देने वाले काम करने ही पड़ेंगे जिन्हें बाद में आप अपनी टीम को सौंप देंगे। शुरुआत में आपको खुद डिलीवरी बॉय बनना पड़ सकता है। खुद कस्टमर केयर पर बैठकर लोगों की गालियां सुननी पड़ सकती हैं।
यह सब सुनने में थोड़ा बेइज्जती भरा लग सकता है लेकिन यही असली फाउंडेशन है। जब आप हाथ से काम करते हैं तो आपको मार्केट की वो बारीकियां समझ आती हैं जो किसी एक्सेल शीट में नहीं मिलेंगी। आप समझते हैं कि कस्टमर को असली दर्द कहाँ हो रहा है। जब तक आप खुद कीचड़ में नहीं उतरेंगे तब तक आप महल खड़ा नहीं कर सकते। इसलिए ऑटोमेशन का सपना बाद में देखें। पहले खुद जाकर लोगों के दिल जीतें। क्योंकि जो शुरुआत में थकने से डर गया समझो उसका बिजनेस बढ़ने से पहले ही मर गया।
लेसन २ : रिजेक्शन का जश्न मनाना सीखें (Learn to Love the No)
अगर आप कोई नया आईडिया लेकर मार्केट में निकले हैं और लोग आपको शाबाशी दे रहे हैं तो समझ जाइए कि आपका आईडिया बहुत ही बोरिंग है। मास्टर ऑफ स्केल में एक बहुत ही मजेदार बात कही गई है कि एक महान बिजनेस आईडिया अक्सर शुरुआत में किसी पागलपन जैसा लगता है। अगर आपका आईडिया सुनकर कोई हंस नहीं रहा है या कोई आपको पागल नहीं बोल रहा है तो समझ लीजिए कि आप कुछ ऐसा कर रहे हैं जो दुनिया पहले से ही कर रही है। आपको 'ना' सुनने की आदत डालनी होगी क्योंकि वो 'ना' ही आपको सही रास्ते पर ले जाएगा।
जरा सोचिए जब किसी ने पहली बार कहा होगा कि लोग अपने घर का खाली कमरा किसी अनजान टूरिस्ट को किराए पर दे देंगे तो दुनिया ने क्या कहा होगा। सबने यही कहा होगा कि भाई क्या फूँक के आए हो। कोई पागल ही होगा जो अपना दरवाजा किसी अजनबी के लिए खोलेगा। लेकिन वही आईडिया आज एयरबीएनबी के नाम से जाना जाता है। रिजेक्शन का मतलब यह नहीं है कि आपका आईडिया खराब है। इसका मतलब बस यह है कि आप दुनिया की सोच से दो कदम आगे चल रहे हैं। और सच तो यह है कि दुनिया को समझदार लोगों ने नहीं बल्कि उन पागलों ने बदला है जिन्होंने रिजेक्शन को अपना नाश्ता बना लिया था।
ज्यादातर लोग पहली बार 'ना' सुनते ही दिल छोटा कर लेते हैं और कोने में बैठकर रोने लगते हैं। उन्हें लगता है कि उनकी इज्जत का कचरा हो गया। अरे भाई जब इज्जत ही नहीं बनी तो कचरा किस बात का। हमारे यहाँ 25 से 34 साल की उम्र में लोग अपनी ईगो को लेकर बहुत सीरियस रहते हैं। उन्हें लगता है कि अगर किसी इन्वेस्टर ने मना कर दिया तो उनकी खानदानी नाक कट गई। रीड हॉफमैन कहते हैं कि आपको उस 'ना' के पीछे का कारण ढूंढना चाहिए। अगर कोई आपके आईडिया को बेकार कह रहा है तो उससे पूछिए कि भाई क्या कमी है। वो कमी ही आपकी सफलता की सीढ़ी बनेगी।
रिजेक्शन एक फिल्टर की तरह काम करता है। यह कमजोर दिल वालों को बाहर निकाल देता है ताकि मैदान में सिर्फ असली खिलाड़ी बचे रहें। अगर सक्सेस इतनी ही आसान होती तो आज गली का हर लड़का मार्क जुकरबर्ग बना फिरता। आपको अपनी चमड़ी गैंडे जैसी मोटी करनी होगी। जब लोग आपको ताने मारें या आपके आईडिया का मजाक उड़ाएं तो समझ जाइए कि आप सही ट्रैक पर हैं। क्योंकि एक औसत आईडिया को सब पसंद करते हैं लेकिन एक क्रांतिकारी आईडिया को शुरुआत में सब नफरत करते हैं। इसलिए अगली बार जब कोई आपको 'ना' बोले तो दुखी होने के बजाय उसे धन्यवाद बोलें और अपने आईडिया को और भी ज्यादा खतरनाक बनाएं।
लेसन ३ : कल्चर को इग्नोर करना बिजनेस की खुदकुशी है (Culture is Your Compass)
ज्यादातर स्टार्टअप फाउंडर्स को लगता है कि बिजनेस का मतलब सिर्फ पैसा कमाना और बड़ा ऑफिस बनाना है। उन्हें लगता है कि जब कंपनी बड़ी हो जाएगी तब एच आर पॉलिसी और कल्चर के बारे में सोचेंगे। लेकिन मास्टर ऑफ स्केल के अनुसार कल्चर कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप बाद में फिट कर सकें। यह आपके बिजनेस का डी एन ए (DNA) है। अगर आपके ऑफिस का माहौल जहरीला है तो दुनिया की कोई भी फंडिंग आपको डूबने से नहीं बचा सकती। रीड हॉफमैन का मानना है कि जैसे जैसे आपकी कंपनी स्केल करती है आप हर एक एम्प्लॉई पर नजर नहीं रख सकते। तब सिर्फ आपका कल्चर ही होता है जो लोगों को सही काम करने के लिए प्रेरित करता है।
मान लीजिए आपने एक बहुत बड़ी बस खरीदी और उसमें बेहतरीन इंजन लगवा लिया। लेकिन अगर बस के अंदर के लोग एक दूसरे का सिर फोड़ने में लगे हैं या ड्राइवर को गलत रास्ता बता रहे हैं तो वो बस कभी मंजिल तक नहीं पहुंचेगी। कंपनी का कल्चर वो अदृश्य हाथ है जो तब भी काम करता है जब बॉस ऑफिस में नहीं होता। अगर आपके एम्प्लॉई सिर्फ इसलिए काम कर रहे हैं क्योंकि उन्हें सैलरी मिलती है तो आप कभी एक बड़ा ब्रांड नहीं बन पाएंगे। आपको ऐसे पागलों की फौज चाहिए जो आपके विजन पर वैसा ही भरोसा करें जैसा आप करते हैं।
आजकल के कॉर्पोरेट जगत में लोग सोचते हैं कि फ्री पिज्जा खिलाने या ऑफिस में टेबल टेनिस बोर्ड लगा देने से कल्चर बन जाता है। भाई साहब यह कल्चर नहीं यह तो बस दिखावा है। असली कल्चर वो होता है जब मुश्किल वक्त आए और आपकी टीम बिना कहे रात के दो बजे तक आपके साथ खड़ी रहे। जब कोई गलती हो जाए तो लोग एक दूसरे पर उंगली उठाने के बजाय मिलकर समाधान ढूंढें। अगर आप शुरुआत में ही गलत लोगों को हायर कर लेते हैं जो सिर्फ अपनी कुर्सी बचाना चाहते हैं तो आप अपने बिजनेस की जड़ों में तेजाब डाल रहे हैं।
याद रखिए स्केल करने का मतलब सिर्फ रेवेन्यू बढ़ाना नहीं है बल्कि अपने विजन को सुरक्षित रखते हुए बढ़ाना है। जैसे जैसे नए लोग जुड़ेंगे वो पुराने कल्चर को बिगाड़ने की कोशिश करेंगे। आपको एक गार्ड की तरह अपने कल्चर की रक्षा करनी होगी। अगर आप चाहते हैं कि आपका बिजनेस आपके बिना भी चलता रहे तो आपको एक ऐसा सिस्टम और माहौल बनाना होगा जहाँ हर इंसान खुद को मालिक समझे। क्योंकि अंत में आपका प्रोडक्ट तो कोई भी कॉपी कर सकता है लेकिन आपका कल्चर कोई नहीं चुरा सकता। यही वो इकलौती चीज है जो एक छोटी सी कंपनी को एक साम्राज्य में बदल देती है।
मास्टर ऑफ स्केल हमें सिखाती है कि बड़ा बनने के लिए पहले छोटा बनकर मेहनत करनी पड़ती है। रिजेक्शन से डरने वाले लोग कभी इतिहास नहीं रचते और जो अपने कल्चर की इज्जत नहीं करते वो कभी टिक नहीं पाते। अब समय है कि आप अपनी मेहनत को सही दिशा दें। क्या आप तैयार हैं अपने बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए। नीचे कमेंट में बताएं कि इन तीनों लेसन्स में से कौन सा लेसन आपकी जिंदगी या बिजनेस में सबसे ज्यादा काम आने वाला है। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो स्टार्टअप शुरू करने का सपना देख रहे हैं। चलिए मिलकर इंडिया के हर बिजनेस को मास्टर ऑफ स्केल बनाते हैं।
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