60 Days to LinkedIn Mastery (Hindi)


क्या आप अभी भी लिंक्डइन पर उन घिसे पिटे मोटिवेशनल कोट्स को लाइक करके खुद को प्रोफेशनल समझ रहे हैं। बधाई हो आप अपनी ग्रोथ का गला खुद ही घोंट रहे हैं। जब पूरी दुनिया वहां से डॉलर्स और डील्स छाप रही है तब आप सिर्फ दूसरों की सक्सेस स्टोरी देखकर जलने में बिजी हैं।

इस बुक समरी में हम जोश स्टेमल के उन सीक्रेट्स को खोलेंगे जो आपके डेड प्रोफाइल को एक अपॉर्चुनिटी मशीन बना देंगे। बस १५ मिनट दीजिए और जानिए कैसे आप इस गेम के टॉप १ परसेंट खिलाडी बन सकते हैं। चलिए इन ३ पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : १५ मिनट का डेली कंसिस्टेंसी रूल - आलस छोड़ो और काम पर लगो

अगर आपको लगता है कि लिंक्डइन पर छाने के लिए आपको अपना पूरा दिन लैपटॉप के सामने बैठकर अपनी पीठ टेढ़ी करनी होगी तो आप बिल्कुल गलत हैं। सच तो यह है कि दुनिया के सबसे बिजी लोग भी सिर्फ १५ मिनट में वह कर लेते हैं जो आप १५ घंटे में नहीं कर पाते। जोश स्टेमल अपनी बुक में कहते हैं कि असली जादू घंटों काम करने में नहीं बल्कि उस छोटे से वक्त में सही काम करने में है। हमारे यहाँ इंडिया में लोगों को लगता है कि अगर दिन भर फेसबुक या इंस्टाग्राम की तरह लिंक्डइन स्क्रॉल करेंगे तो शायद कोई कंपनी का सीईओ खुद आकर उन्हें नौकरी या बिजनेस ऑफर कर देगा। भाई साहब ऐसा सिर्फ फिल्मों में होता है असल जिंदगी में तो आपको अपना हाथ और दिमाग दोनों चलाने पड़ेंगे।

सोचिए आप जिम जाते हैं और पहले ही दिन ५ घंटे वर्कआउट करते हैं। अगले दिन क्या होगा। आपकी बॉडी जवाब दे देगी और आप अगले १५ दिन तक बिस्तर से नहीं उठ पाएंगे। लिंक्डइन का खेल भी कुछ ऐसा ही है। लोग जोश जोश में आकर एक दिन में १० पोस्ट डाल देते हैं और फिर दो महीने तक गायब हो जाते हैं। इसे जोश नहीं इसे बेवकूफी कहते हैं। जोश स्टेमल का कहना है कि आप अपनी घड़ी में सिर्फ १५ मिनट का अलार्म लगाइए। बस इतना ही वक्त काफी है। इन १५ मिनटों में आपको दुनिया भर की पंचायत नहीं करनी है बल्कि सिर्फ तीन चीजों पर फोकस करना है। सबसे पहले ५ मिनट उन लोगों की पोस्ट पर कमेंट्स करें जिनसे आप जुड़ना चाहते हैं। अगले ५ मिनट नए लोगों को कनेक्शन रिक्वेस्ट भेजें लेकिन याद रहे कि बिना मैसेज वाला ब्लैंक रिक्वेस्ट मत भेजना वरना लोग आपको इग्नोर वैसे ही करेंगे जैसे आप यूट्यूब के एड्स को करते हैं। और आखिरी ५ मिनट में अपनी खुद की कोई छोटी सी बात या जानकारी शेयर करें।

यहाँ सबसे बड़ी दिक्कत पता है क्या है। हमारा ईगो। हमें लगता है कि अगर हम किसी बड़े आदमी की पोस्ट पर कमेंट करेंगे और उसने रिप्लाई नहीं दिया तो हमारी बेइज्जती हो जाएगी। अरे भाई अभी आपकी इज्जत ही कितनी है जो कम हो जाएगी। अभी तो आप गेम में आए भी नहीं हैं। बड़े लोग उन्हीं को नोटिस करते हैं जो बार बार उनके सामने आते हैं। इसे हम डिजिटल दुनिया का पीछा करना कह सकते हैं पर एक अच्छे मकसद के लिए। मान लीजिए आप एक फ्रीलांसर हैं और किसी बड़े स्टार्टअप फाउंडर के साथ काम करना चाहते हैं। अब अगर आप उन्हें रोज गुड मॉर्निंग मैसेज भेजेंगे तो वह आपको ब्लॉक कर देगा। लेकिन अगर आप उनके हर थॉटफुल पोस्ट पर एक शानदार कमेंट करेंगे तो एक हफ्ते बाद उन्हें आपका नाम रट जाएगा। यही तो असली पावर है।

लोग अक्सर बहाना बनाते हैं कि मेरे पास टाइम नहीं है। लेकिन वही लोग रात को सोने से पहले २ घंटे रील्स देखते हुए बिता देते हैं जहाँ कोई रसोड़े में क्या था ढूंढ रहा होता है। अगर आप उन २ घंटों में से सिर्फ १५ मिनट निकाल कर लिंक्डइन पर सही तरीके से एक्टिव हो जाएं तो ६० दिन बाद आपकी प्रोफाइल एक भूतिया हवेली नहीं बल्कि एक चलता फिरता बिजनेस हब बन जाएगी। आपको बस अपना आलस और वो डर छोड़ना होगा कि लोग क्या कहेंगे। यकीन मानिए लोगों के पास आपके बारे में सोचने का वैसे भी टाइम नहीं है। तो बस यह १५ मिनट का रूल अपनी जिंदगी में उतार लीजिए। कंसिस्टेंसी का मतलब यह नहीं है कि आप परफेक्ट हों बल्कि इसका मतलब यह है कि आप बस वहां मौजूद हों। जब आप रोज दिखते हैं तो लोग आप पर भरोसा करने लगते हैं। और बिजनेस की दुनिया में भरोसा ही सबसे बड़ी करेंसी है।


लेसन २ : प्रोफाइल को लैंडिंग पेज बनाना - अपनी दुकान को शोरूम बनाओ

जरा सोचिए आप एक दुकान पर जाते हैं जहाँ बाहर कोई बोर्ड नहीं लगा है, अंदर बहुत सारा कबाड़ पड़ा है और दुकानदार कोने में सो रहा है। क्या आप वहां से एक सुई भी खरीदेंगे। बिल्कुल नहीं। अब जरा अपनी लिंक्डइन प्रोफाइल की तरफ नजर घुमाइए। क्या वहां आपकी फोटो ऐसी है जैसे आप किसी शादी में पनीर के पकोड़े पकड़ने की तैयारी कर रहे थे। क्या आपका हेडलाइन इतना बोरिंग है कि उसे पढ़कर नींद आ जाए। जोश स्टेमल कहते हैं कि आपकी प्रोफाइल एक बायोडाटा नहीं बल्कि एक लैंडिंग पेज होनी चाहिए। अब कुछ लोग पूछेंगे कि भाई यह लैंडिंग पेज क्या बला है। आसान भाषा में कहें तो यह आपकी वो पर्सनल वेबसाइट है जिसे देखकर सामने वाला यह फैसला करता है कि आपको पैसे देने हैं या नहीं।

इंडिया में लोग अक्सर प्रोफाइल फोटो में अपनी वो फोटो लगाते हैं जिसमें उनके पीछे किसी पहाड़ का दृश्य होता है या फिर किसी दोस्त का कटा हुआ कंधा दिख रहा होता है। भाई साहब आप वहां अपनी किस्मत चमकाने आए हैं, ट्रेवल ब्लॉगिंग करने नहीं। एक साफ़ सुथरी और प्रोफेशनल फोटो आपकी आधी मुश्किल हल कर देती है। इसके बाद आती है आपकी हेडलाइन। ज्यादातर लोग वहां लिखते हैं - वर्किंग एट फलाना ढिकाना कंपनी। सच कहूँ तो किसी को रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ता कि आप कहाँ काम करते हैं। लोग यह देखना चाहते हैं कि आप उनके लिए क्या कर सकते हैं। अगर आप लिखते हैं कि आप एक ग्राफिक डिजाइनर हैं तो यह बहुत साधारण है। लेकिन अगर आप लिखते हैं कि आप बिजनेस को उनकी ब्रांडिंग सुधार कर ज्यादा सेल्स दिलाने में मदद करते हैं, तो अब आप एक एक्सपर्ट बन गए हैं। इसे कहते हैं खुद को बेचना, और इसमें कोई बुराई नहीं है।

अब बात करते हैं आपके अबाउट सेक्शन की। लोग इसे अपनी पूरी कुंडली बना देते हैं जैसे कि किसी मैट्रिमोनी साइट पर अपनी शादी का विज्ञापन दे रहे हों। मैं बहुत मेहनती हूँ, मुझे टीम में काम करना पसंद है - यह सब सुनकर अब जमाना थक चुका है। जोश स्टेमल का कहना है कि यहाँ आपको अपनी कहानी नहीं बल्कि क्लाइंट की परेशानी और उसका समाधान लिखना चाहिए। आपको यह दिखाना होगा कि आपने पास्ट में क्या उखाड़ा है और आप फ्यूचर में उनके लिए क्या कमाल कर सकते हैं। इसे ऐसे समझिये जैसे आप अपनी पहली डेट पर गए हों। अगर आप सिर्फ अपने बारे में ही डिंगें हांकते रहेंगे तो दोबारा कॉल आने की उम्मीद छोड़ दीजिए। आपको सामने वाले की जरूरतों के बारे में बात करनी होगी।

यहाँ एक और बड़ी गलती है - रेकमेंडेशन का खाली होना। हमारी आदत है कि हम दूसरों की मदद तो कर देते हैं लेकिन अपना हक मांगने में शर्माते हैं। अरे भाई अगर आपने किसी के लिए अच्छा काम किया है तो उनसे एक प्यारा सा रिव्यू मांग लीजिए। बिना रिव्यू के आपकी प्रोफाइल वैसी ही है जैसे बिना रेटिंग वाली अमेज़न की कोई घटिया प्रोडक्ट। लोग आपकी बातों पर यकीन नहीं करेंगे लेकिन वो दूसरों की बातों पर तुरंत भरोसा कर लेते हैं। इसलिए शर्माना छोड़िये और अपनी प्रोफाइल को एक ऐसा चुम्बक बनाइए जो अपॉर्चुनिटीज को अपनी तरफ खींचे।

आपकी प्रोफाइल आपके लिए २४ घंटे काम करनी चाहिए, तब भी जब आप सो रहे हों। अगर कोई आपकी प्रोफाइल पर आकर १० सेकंड के अंदर यह नहीं समझ पा रहा कि आप क्या करते हैं और आपसे कैसे संपर्क करना है, तो समझ लीजिए कि आपने अपनी दुकान का शटर गिरा रखा है। जोश स्टेमल हमें यही सिखाते हैं कि अपनी प्रोफाइल को एक सेल्समेन की तरह ट्रेन करें। इसे एक ऐसा एक्सपीरियंस बनाइए कि लोग वहां से बिना आपसे कनेक्ट हुए जा ही न पाएं। जब आपकी प्रोफाइल तगड़ी होती है, तो आपको लोगों के पीछे भागने की जरूरत नहीं पड़ती, लोग खुद आपके पास आते हैं और पूछते हैं - भाई साहब, क्या आप मेरे लिए काम करेंगे।


लेसन ३ : मीनिंगफुल नेटवर्किंग का जादू - सिर्फ भीड़ नहीं, संबंध बनाओ

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो लिंक्डइन पर जाकर बस अंधाधुंध 'कनेक्ट' बटन दबाते रहते हैं जैसे कि कोई इलेक्शन का कैंपेन चल रहा हो। अगर आपके ५००० कनेक्शन हैं लेकिन आपको जानने वाला एक भी नहीं है, तो आपकी नेटवर्किंग का लेवल जीरो है। जोश स्टेमल कहते हैं कि नेटवर्किंग का मतलब नंबर बढ़ाना नहीं बल्कि रिश्तों की गहराई बढ़ाना है। इंडिया में हमें सिखाया जाता है कि जान पहचान बहुत बड़ी चीज है, लेकिन कोई यह नहीं सिखाता कि यह जान पहचान बनाई कैसे जाती है। लोग अक्सर अपनी मतलब के लिए दूसरों को मैसेज करते हैं - सर जॉब दिला दो, सर मेरा काम प्रमोट कर दो। भाई साहब, सामने वाला आपका फूफा नहीं है जो आपकी फरमाइशें पूरी करेगा।

नेटवर्किंग का सबसे पहला रूल है - पहले वैल्यू दो, फिर कुछ मांगो। इसे ऐसे समझिये कि आप किसी की शादी में गए और जाते ही दूल्हे से कह रहे हैं कि भाई जरा अपनी गाड़ी की चाबी देना मुझे घूम कर आना है। वह आपको पागल समझकर बाहर निकाल देगा। लिंक्डइन पर भी लोग यही गलती करते हैं। जोश स्टेमल की बुक हमें सिखाती है कि असली नेटवर्किंग तब होती है जब आप दूसरों की मदद के लिए हाथ बढ़ाते हैं। मान लीजिए कोई बड़ा इन्फ्लुएंसर है जिसकी आप इज्जत करते हैं। उनकी पोस्ट पर सिर्फ 'नाइस पोस्ट' लिखना बंद कीजिये। यह दुनिया का सबसे आलसी कमेंट है। इसके बजाय कुछ ऐसा लिखिए जिससे उनकी वैल्यू बढ़े या उनके सवाल का एक शानदार जवाब दीजिये। जब आप दूसरों को लाइमलाइट में आने में मदद करते हैं, तो आप खुद ब खुद उनकी नजरों में आ जाते हैं।

यहाँ एक और कमाल की तकनीक है - छोटे लेकिन सच्चे मैसेज। जब भी आप किसी को कनेक्शन रिक्वेस्ट भेजें, तो एक छोटा सा नोट जोड़ें। यह मत लिखिए कि मुझे आपसे बहुत कुछ सीखना है क्योंकि यह लाइन अब इतनी घिस चुकी है कि लोग इसे पढ़ते ही डिलीट कर देते हैं। इसके बजाय उनके किसी हालिया अचीवमेंट या उनकी किसी बात की तारीफ कीजिये जो आपको सच में अच्छी लगी हो। चापलूसी और तारीफ में फर्क होता है और लोग इसे बखूबी समझते हैं। असली नेटवर्किंग का मतलब है एक ऐसा नेटवर्क बनाना जो आपके लिए तब खड़ा हो जब आपको उसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो। यह कोई एक दिन का काम नहीं है, यह तो एक पौधा लगाने जैसा है जिसे रोज पानी देना पड़ता है।

अक्सर लोग सोचते हैं कि बड़े लोगों से जुड़ना बहुत मुश्किल है। लेकिन सच तो यह है कि बड़े लोग भी इंसानों से ही बात करना चाहते हैं, रोबोट्स से नहीं। अगर आप अपनी बातचीत में थोड़ा सा ह्यूमर और थोड़ी सी ईमानदारी रखेंगे, तो लोग आपकी तरफ खिंचे चले आएंगे। नेटवर्किंग का मतलब यह नहीं है कि आप सिर्फ अपने से ऊपर वाले लोगों से जुड़ें। अपने साथ वालों और अपने से जूनियर लोगों की भी उतनी ही मदद कीजिये। क्या पता आज का जूनियर कल का कोई बड़ा स्टार्टअप फाउंडर बन जाए। जोश स्टेमल का कहना है कि आपका नेटवर्क ही आपकी नेटवर्थ है। और यह नेटवर्थ तब बढ़ती है जब आप निस्वार्थ भाव से लोगों की जिंदगी में वैल्यू ऐड करते हैं।

तो अब से कनेक्शन रिक्वेस्ट भेजने की फैक्ट्री बंद कीजिये और असली रिश्ते बनाने का बिजनेस शुरू कीजिये। याद रखिये, एक अच्छा कनेक्शन आपकी पूरी जिंदगी बदल सकता है, लेकिन उसके लिए आपको अपनी स्क्रीन से बाहर निकलकर असलियत में लोगों की परवाह करनी होगी। जब आप दूसरों की कामयाबी में खुश होने लगते हैं, तो कायनात आपकी कामयाबी के रास्ते अपने आप खोल देती है। यही इस ६० दिन की मास्टरी का सबसे बड़ा राज है।


तो दोस्तों, क्या आप अगले ६० दिनों तक रोज १५ मिनट खुद पर इन्वेस्ट करने के लिए तैयार हैं। अपनी प्रोफाइल को उस धूल भरे कोने से बाहर निकालिए और दुनिया को दिखाइए कि आप किस मिट्टी के बने हैं। याद रखिये, मौके उन्हीं को मिलते हैं जो उनके लिए खुद को तैयार रखते हैं। आज ही अपनी प्रोफाइल का हेडलाइन बदलिए और कम से कम ३ ऐसे लोगों को वैल्यू दीजिए जिनसे आप जुड़ना चाहते हैं। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया, तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अभी भी लिंक्डइन पर सिर्फ टाइम पास कर रहे हैं। आपकी एक छोटी सी शुरुआत बड़े बदलाव का कारण बन सकती है।

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