Win at Work and Succeed at Life (Hindi)


ऑफिस में रात के बारह बजे तक गधे की तरह घिसना और वीकेंड पर भी लैपटॉप से चिपके रहना अगर आपको बहुत बड़ी सक्सेस लगता है तो बधाई हो आप एक बहुत बड़े धोखे में जी रहे हैं। इस ओवरवर्क के चक्कर में आपकी लाइफ का बैलेंस तो बिगड़ ही चुका है और आप अपनी बची खुची खुशियां भी खो रहे हैं।

असल में बिना सोचे समझे चौबीस घंटे काम करना कोई अचीवमेंट नहीं बल्कि एक जाल है। इस जाल से बाहर निकलकर काम के साथ लाइफ में असली सक्सेस कैसे पानी है यही आज हम माइकल हयात की इस किताब के ३ बेहतरीन लेसंस से बहुत ही आसान भाषा में समझने वाले हैं।


लेसन १ : ओवरवर्क की गुलामी से आज़ादी

क्या आपको भी ऐसा लगता है कि जो इंसान ऑफिस में सबसे लेट तक बैठता है वो कंपनी का अगला सीईओ बनने वाला है? अगर हाँ, तो आपको अपनी इस मासूमियत के लिए एक मेडल मिलना चाहिए। हमारे समाज में एक अजीब सा भूत सबके सिर पर सवार है और उस भूत का नाम है ओवरवर्क। लोग ऐसे घूमते हैं जैसे चौबीस घंटे बिजी रहना कोई बहुत बड़ा वीआईपी स्टेटस सिंबल हो। जब कोई पूछता है कि भाई क्या हाल-चाल हैं, तो बड़े गर्व से जवाब आता है कि क्या बताएं यार, सांस लेने की भी फुरसत नहीं है। सच तो यह है कि सांस लेने की फुरसत ना होना कोई तरक्की की निशानी नहीं है बल्कि यह इस बात का सबूत है कि आपको अपनी लाइफ मैनेज करनी नहीं आती।

सोचिए कि आप सुबह नौ बजे ऑफिस जाते हैं और रात के दस बजे तक वहीं बैठे रहते हैं। आपकी चाय का कप वहीं है, आपका लैपटॉप वहीं है और आपकी जिंदगी के बेहतरीन साल भी वहीं दफ़न हो रहे हैं। आप अपने बॉस को खुश करने के लिए अपनी रीढ़ की हड्डी टेढ़ी कर रहे हैं और उधर बॉस सोच रहा है कि यह बंदा दिन भर में अपना काम खत्म क्यों नहीं कर पाता। क्या यह कोई सक्सेस है? माइकल हयात अपनी इस किताब में बहुत ही साफ़ शब्दों में कहते हैं कि ओवरवर्क करना कोई अचीवमेंट नहीं है। यह सिर्फ एक ऐसा दलदल है जिसमें आप जितना ज्यादा भागने की कोशिश करेंगे उतना ही नीचे धंसते चले जाएंगे।

भारत में तो यह बीमारी और भी खतरनाक रूप ले चुकी है। यहाँ लोग बीमार होने पर भी ऑफिस जाते हैं ताकि सबको अपनी वफादारी दिखा सकें। आप खांस रहे हैं, आपको बुखार है, लेकिन आप लैपटॉप पर उंगलियां चला रहे हैं क्योंकि आपको लगता है कि आपके बिना कंपनी बंद हो जाएगी। यकीन मानिए, आपके बिना कंपनी का एक प्रिंटर भी काम करना बंद नहीं करेगा। आप अगले दिन नहीं जाएंगे तो आपकी जगह कोई और बैठ जाएगा। इसलिए इस गलतफहमी से बाहर निकलिए कि ज्यादा घंटे काम करने का मतलब ज्यादा काम होता है।

असली प्रोडक्टिविटी का मतलब यह नहीं है कि आप कितने घंटे काम करते हैं, बल्कि यह है कि आप उस काम को कितने कम समय में और कितने बेहतर तरीके से खत्म करते हैं। जब आप दिन भर सिर्फ काम ही काम करते हैं तो आपका दिमाग थक जाता है। एक थका हुआ दिमाग कभी भी कोई नया या क्रिएटिव आइडिया नहीं सोच सकता। वह सिर्फ एक मशीन की तरह एक ही ढर्रे पर चलता रहता है। अगर आप दिन में बारह घंटे काम कर रहे हैं तो आप मेहनत नहीं कर रहे हैं, आप सिर्फ अपनी जिंदगी का कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं जो कभी लौटकर नहीं आएगा।

इस ओवरवर्क के जाल से बाहर निकलने का सबसे पहला स्टेप यह मानना है कि आपकी एक पर्सनल लाइफ भी है। काम आपकी जिंदगी का एक हिस्सा है, काम ही आपकी पूरी जिंदगी नहीं है। जब आप इस बात को गहराई से समझ लेते हैं तो आप अपने काम को एक लिमिटेड समय देना शुरू करते हैं। आप सुबह से शाम तक पूरी एनर्जी के साथ काम करते हैं और फिर अपना लैपटॉप बंद करके अपनी लाइफ जीने चले जाते हैं। यही वो पहला नियम है जो आपको इस मॉडर्न जमाने के बंधुआ मजदूर बनने से बचाता है।


लेसन २ : लाइफ में बाउंड्रीज की लक्ष्मण रेखा

पहले लेसन में हमने यह तो समझ लिया कि हर समय काम में जुटे रहना बेवकूफी है, लेकिन इस बेवकूफी से बचने का रास्ता क्या है? इसका सीधा सा जवाब है अपनी लाइफ में एक लक्ष्मण रेखा खींचना, जिसे अंग्रेजी में लोग बाउंड्रीज कहते हैं। हमारे यहाँ दिक्कत यह है कि हम हर किसी को खुश करने के चक्कर में अपनी लाइफ का रिमोट कंट्रोल दूसरों के हाथ में दे देते हैं। ऑफिस में बॉस ने शाम को छह बजे एक नया काम थमा दिया और आपने बिना सोचे समझे मुस्कुराते हुए कह दिया कि हाँ सर, मैं आज रात को ही इसे खत्म कर दूँगा। घर पर बीवी या पति इंतजार कर रहे हैं, बच्चे सोच रहे हैं कि पापा या मम्मी का चेहरा कैसा दिखता था, लेकिन आप ऑफिस में बॉस के सामने नंबर बनाने में बिजी हैं।

अगर आप हर बात पर हाँ कहते हैं तो आप असल में अपनी खुशियों को ना कह रहे हैं। माइकल हयात कहते हैं कि जब तक आप अपने काम और अपनी पर्सनल लाइफ के बीच एक मजबूत दीवार खड़ी नहीं करेंगे, तब तक लोग आपका इस्तेमाल करते रहेंगे। यह बाउंड्रीज कोई जेल नहीं हैं बल्कि यह आपकी आज़ादी का रास्ता हैं। सोच कर देखिए कि आपने तय किया है कि शाम के सात बजे के बाद आप ऑफिस का कोई ईमेल चेक नहीं करेंगे और न ही किसी कलीग का फोन उठाएंगे। शुरुआत में शायद आपको लगेगा कि कहीं कोई भूचाल न आ जाए, लेकिन यकीन मानिए कुछ नहीं होगा। दुनिया वैसी ही चलती रहेगी जैसी चल रही थी।

अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर हम काम को ना बोलेंगे तो हमारा करियर रुक जाएगा। लेकिन सच इसके बिल्कुल उलट है। जब आप अपनी एक सीमा तय करते हैं तो लोग आपकी और आपके समय की इज्जत करना शुरू करते हैं। उन्हें पता होता है कि यह बंदा अपने काम का पक्का है, यह ऑफिस के समय में पूरा आउटपुट देगा लेकिन उसके बाद यह अपनी लाइफ जिएगा। इसके लिए आपको सबसे पहले ना कहना सीखना होगा। हमारे देश में ना कहना एक बहुत बड़ा पाप माना जाता है, जैसे आपने ना कह दिया तो रिश्ता ही टूट जाएगा। लेकिन एक प्रोफेशनल लाइफ में समझदारी से ना कहना ही आपको बर्नआउट से बचाता है।

बाउंड्रीज तय करने का मतलब यह नहीं है कि आप काम से जी चुरा रहे हैं। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि आप अपने समय के मालिक खुद हैं। जब आप ऑफिस के समय में होते हैं तो अपना पूरा ध्यान सिर्फ काम पर लगाइए, वहाँ कोई सोशल मीडिया या फालतू की गप्पें मत मारिए। जब आप उस समय का सही इस्तेमाल करेंगे तो आपका काम अपने आप समय पर खत्म हो जाएगा। फिर आपको शाम को लेट तक बैठने की नौटंकी करने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी।

यह बाउंड्रीज सिर्फ ऑफिस के लिए ही नहीं बल्कि आपकी पर्सनल लाइफ के लिए भी उतनी ही जरूरी हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आप घर पर बैठे हैं लेकिन आपका दिमाग ऑफिस की फाइलों में अटका हुआ है। जब आप अपनी फैमिली के साथ हों तो अपना फोन साइड में रखिए और उनके साथ पूरी तरह मौजूद रहिए। जब आप इस तरह से अपनी लाइफ को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर हर हिस्से को उसका पूरा समय देते हैं, तभी आप एक बैलेंस्ड और कामयाब इंसान बनते हैं। यही वो असली सक्सेस है जो पैसों से नहीं खरीदी जा सकती।


लेसन ३ : सेहत और रिश्तों की असली कमाई

पिछले दो लेसंस में हमने काम के जाल को समझा और बाउंड्रीज बनाना सीखा। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि हम यह सब कर किसके लिए रहे हैं? अक्सर लोग कहते हैं कि मैं दिन रात इतनी मेहनत अपने परिवार के अच्छे भविष्य के लिए और अपने बच्चों के लिए कर रहा हूँ। यह सुनने में बहुत अच्छा लगता है, लेकिन जरा सोचिए कि जब आपके पास उस परिवार के साथ बैठने का समय ही नहीं है तो उस पैसे का क्या फायदा? आप लाखों रुपए कमा रहे हैं लेकिन आपकी सेहत इतनी खराब हो चुकी है कि आप ढंग से सो भी नहीं पाते। आप हर समय चिड़चिड़े रहते हैं, आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है और आपके बच्चे आपसे बात करने से कतराते हैं। क्या आप वाकई इसे सक्सेस कहेंगे?

माइकल हयात अपनी इस किताब में एक बहुत बड़ी कड़वी सच्चाई हमारे सामने रखते हैं कि अपनी सेहत और अपने रिश्तों को दांव पर लगाकर मिली सक्सेस असल में सबसे बड़ी फेलियर है। हम लोग एक ऐसे चूहे की दौड़ में शामिल हो गए हैं जहाँ हमें लगता है कि जितना ज्यादा बैंक बैलेंस होगा, जिंदगी उतनी ही हसीन होगी। लेकिन सच तो यह है कि जब आप बीमार होकर हॉस्पिटल के बेड पर लेटे होंगे, तब आपकी कंपनी का लैपटॉप आपके पास नहीं आएगा, बल्कि आपका परिवार ही आपके साथ खड़ा होगा। आपकी सेहत और आपके रिश्ते ही आपकी असली कमाई हैं, बाकी सब तो सिर्फ नंबर्स का एक खेल है।

हमारे समाज में अक्सर लोग अपनी सेहत को सबसे आखिरी नंबर पर रखते हैं। सुबह उठकर एक्सरसाइज करने का समय नहीं है क्योंकि ऑफिस जल्दी पहुंचना है। दोपहर का खाना टेबल पर बैठे-बैठे ही कंप्यूटर स्क्रीन देखते हुए खाना है क्योंकि बहुत जरूरी मीटिंग है। रात को सोने से पहले भी फोन की स्क्रीन देखनी है क्योंकि किसी कलीग का मैसेज आया है। इस तरह की लाइफस्टाइल से आप कोई मेडल नहीं जीत रहे हैं, बल्कि आप अपने शरीर को एक बहुत बड़े खतरे की तरफ धकेल रहे हैं। एक बीमार शरीर के साथ आप दुनिया की कोई भी जंग नहीं जीत सकते।

यही बात हमारे रिश्तों पर भी लागू होती है। रिश्ते किसी पौधे की तरह होते हैं जिन्हें रोज पानी देना पड़ता है। अगर आप अपने पार्टनर, अपने माता-पिता या अपने दोस्तों को समय नहीं देंगे तो धीरे-धीरे उनके साथ आपका कनेक्शन खत्म हो जाएगा। फिर एक दिन आपको अहसास होगा कि आपके पास पैसे तो बहुत हैं लेकिन दिल की बात कहने के लिए कोई इंसान नहीं है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप अपने काम के साथ-साथ अपनी सेहत और अपने करीबियों के लिए भी एक फिक्स समय निकालें। वीकेंड पर काम करने के बजाय अपने दोस्तों से मिलिए, अपने परिवार के साथ बाहर घूमने जाइए और कुछ समय खुद के साथ बिताइए। जब आपकी पर्सनल लाइफ खुशहाल होगी तो आपकी वर्क लाइफ में भी आपकी परफॉर्मेंस अपने आप बहुत बेहतर हो जाएगी।


तो दोस्तों, माइकल हयात और मेगन हयात मिलर की इस बेहतरीन किताब से हमने यह अच्छी तरह सीख लिया है कि जिंदगी सिर्फ काम करने के लिए नहीं बनी है। ओवरवर्क की इस गुलामी से बाहर निकलिए, अपनी लाइफ में एक मजबूत बाउंड्री बनाइए और अपनी सेहत व रिश्तों को अपनी पहली प्रायोरिटी बनाइए। आज ही खुद से एक वादा कीजिए कि आप काम के पीछे भागते-भागते अपनी जिंदगी जीना नहीं छोड़ेंगे। अब आपकी बारी है, नीचे कमेंट करके मुझे अभी बताइए कि क्या आप भी इस ओवरवर्क के जाल में फंसे हुए हैं? और आप अपनी लाइफ में बाउंड्री बनाने के लिए आज से क्या बदलाव करने वाले हैं? इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ जरूर शेयर कीजिए जो दिन रात सिर्फ काम में ही डूबा रहता है ताकि उसकी भी आँखें खुल सकें।

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