क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो रोज सुबह उठकर करोड़पति बनने के सपने देखते हैं पर सच यह है कि आपका बिजनेस आइडिया आपके चचेरे भाई के शादी के प्लान से भी ज्यादा कंफ्यूजिंग है। बिना सही स्किल्स के मार्केट में कूदना खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।
अगर आप भी अपनी वही पुरानी घिसी पिटी स्ट्रेटजी लेकर बैठे हैं तो यकीन मानिए आप बहुत बड़ा नुकसान कर रहे हैं। इस आर्टिकल में हम डोनाल्ड मिलर की लिखी शानदार किताब बिजनेस मेड सिंपल से ऐसे तीन कमाल के लेसन सीखेंगे जो आपके काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल देंगे।
लेसन १ : वैल्यू क्रिएशन ही असली बिजनेस है
आजकल के युवाओं में एक नया भूत सवार हुआ है। हर किसी को रातों रात स्टार्टअप का किंग बनना है। सुंदर सा ऑफिस होगा। हाथ में महंगी कॉफी होगी। लोग आपको सर सर कहकर बुलाएंगे। सुनने में कितना अच्छा लगता है ना। लेकिन भाई साहब असलियत इससे कोसों दूर है। ज्यादातर लोग बिजनेस शुरू करने का मतलब सिर्फ एक बढ़िया सा नाम सोचना और एक फैंसी लोगो बनाना समझते हैं। अगर आप भी इसी केटेगरी में आते हैं तो आपके लिए एक कड़वा सच है। मार्केट को इस बात से रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ता कि आपका लोगो कितना सुंदर है। मार्केट को सिर्फ एक चीज से मतलब है और वह है वैल्यू।
डोनाल्ड मिलर अपनी किताब में बहुत साफ शब्दों में कहते हैं कि आपको खुद को एक ऐसा एसेट बनाना होगा जिसकी मार्केट को जरूरत हो। इसे एक सिंपल उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप एक सेकंड हैंड कार खरीदने जाते हैं। आप वहां खड़ी दो कारों को देखते हैं। एक कार बाहर से एकदम चमक रही है। नया पेंट है। बंपर पर बढ़िया स्टीकर लगे हैं। लेकिन जैसे ही आप उसका इंजन चालू करते हैं उसमें से ऐसी आवाज आती है जैसे कोई मिक्सी में पत्थर पीस रहा हो। दूसरी तरफ एक कार है जो देखने में थोड़ी साधारण है। लेकिन उसका इंजन एकदम मक्खन की तरह चलता है। वह एवरेज भी बढ़िया देती है। अब आप खुद बताइए कि आप अपना कीमती पैसा किस कार पर लगाएंगे। जाहिर सी बात है कि आप दूसरी कार ही चुनेंगे क्योंकि वह आपको असली वैल्यू दे रही है।
हमारे करियर और बिजनेस का भी यही हाल है। लोग अपनी डिग्री की चमक तो खूब दिखाते हैं। सोशल मीडिया पर खुद को सीईओ और फाउंडर लिख देते हैं। लेकिन जब काम की बात आती है तो उनके पास देने के लिए कोई वैल्यू नहीं होती। अगर आप किसी कंपनी में काम कर रहे हैं तो आपको खुद से एक सवाल पूछना चाहिए। क्या आप कंपनी के लिए एक इन्वेस्टमेंट हैं या फिर एक खर्चा हैं। एक अच्छा एसेट वह होता है जो कंपनी को आगे बढ़ाता है। वह मालिक के सिर का दर्द कम करता है। वह नई प्रॉब्लम्स के नए सोल्यूशंस ढूंढता है।
अगर आप सोचते हैं कि सिर्फ ऑफिस में आठ घंटे बैठकर अपनी कुर्सी तोड़ना ही आपका काम है तो आप बहुत गलत रास्ते पर हैं। ऐसे लोगों को कंपनियां सबसे पहले बाहर का रास्ता दिखाती हैं। आपको अपनी वैल्यू इतनी बढ़ानी होगी कि आपके बिना काम रुक जाए। जब आप लोगों की लाइफ में या किसी बिजनेस में वैल्यू ऐड करते हैं तो पैसा अपने आप आपके पीछे भागता है। इसलिए अपनी बाहरी चमक दमक को छोड़िए। अपने अंदर के इंजन को मजबूत बनाइए। कुछ ऐसा सीखिए जो हर किसी के बस की बात न हो। जब आप खुद को एक कीमती एसेट बना लेंगे तब मार्केट आपको मुंह मांगी कीमत देगा। वरना दुनिया में भीड़ तो पहले से ही बहुत ज्यादा है।
लेसन २ : मार्केटिंग और सेल्स में सिंपल मैसेजिंग का जादू
मान लीजिए आपने दुनिया का सबसे बेहतरीन प्रोडक्ट बना लिया। आपका इंजन भी एकदम सॉलिड है और आपकी वैल्यू भी मार्केट में बहुत ज्यादा है। लेकिन अगर आप लोगों को यह समझा ही नहीं पाए कि आपका प्रोडक्ट उनके किस काम का है तो समझो आपका पूरा बिजनेस ठप है। हमारे देश में एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। लोग सोचते हैं कि भारी भरकम अंग्रेजी बोलना या बहुत मुश्किल शब्दों का इस्तेमाल करना ही असली मार्केटिंग है। आपने भी ऐसे विज्ञापन जरूर देखे होंगे जो इतनी घुमा फिराकर बात करते हैं कि इंसान सोचने पर मजबूर हो जाता है कि भाई यह बेचना क्या चाहते हैं।
आप बहुत भूखे हैं और एक रेस्टोरेंट में जाते हैं। वहां का वेटर आपके पास आता है और कहता है कि सर हमारे पास एक ऐसा व्यंजन है जो ऑर्गेनिक रूप से उगाए गए अनाजों के मिश्रण से बना है जिसे सीधे प्रकृति की गोद से लाकर उबलते हुए जल में पकाया गया है। आप दो मिनट के लिए उसका मुंह देखेंगे और कहेंगे कि भाई साफ साफ बताओ क्या बात है। तब वह कहेगा कि सर यह सादा चावल है। अब आप खुद सोचिए कि क्या आपको उस वेटर पर गुस्सा नहीं आएगा। जब भूख लगी हो तब इंसान को खाना चाहिए होता है ना कि कोई फिलॉसफी।
डोनाल्ड मिलर कहते हैं कि अगर आप अपने कस्टमर को कंफ्यूज करेंगे तो आप उन्हें सौ परसेंट खो देंगे। कस्टमर का दिमाग बहुत आलसी होता है। वह इतनी मेहनत नहीं करना चाहता कि पहले आपके विज्ञापन का मतलब समझे और फिर आपका प्रोडक्ट खरीदे। मार्केटिंग का सबसे पहला नियम यही है कि आपकी बात इतनी साफ होनी चाहिए कि एक छोटे बच्चे को भी समझ आ जाए। आपको सिर्फ तीन सवालों के जवाब बहुत सीधे तरीके से देने होते हैं। पहला यह कि आप क्या बेच रहे हैं। दूसरा यह कि इससे कस्टमर का क्या फायदा होगा। और तीसरा यह कि इसे खरीदने के लिए उसे क्या करना होगा।
अगर आपकी वेबसाइट या आपके सोशल मीडिया पेज पर यह तीन बातें साफ नहीं लिखी हैं तो लोग आपकी दुकान छोड़कर चले जाएंगे। लोग कभी भी सबसे अच्छा प्रोडक्ट नहीं खरीदते। लोग हमेशा वह प्रोडक्ट खरीदते हैं जो उन्हें सबसे जल्दी और सबसे आसानी से समझ में आता है। इसलिए अपनी बात को घुमाना बंद कीजिए। जब आप सेल्स पिच तैयार करते हैं तो खुद को एक बड़ा ज्ञानी साबित करने की कोशिश मत कीजिए। बल्कि सामने वाले की प्रॉब्लम का एक सीधा और आसान सोल्यूशन बनिए। जब आपकी मैसेजिंग एकदम क्रिस्टल क्लियर होगी तब आपकी सेल्स रॉकेट की तरह ऊपर जाएगी।
लेसन ३ : एक्जीक्यूशन और मैनेजमेंट से ही सपने सच होते हैं
अब तक हमने सीख लिया कि अपनी वैल्यू कैसे बढ़ानी है और अपनी बात को सिंपल तरीके से लोगों तक कैसे पहुंचाना है। लेकिन अब बारी आती है उस सबसे बड़े विलेन की जो अच्छे से अच्छे आइडिया को मिट्टी में मिला देता है। वह विलेन है सिर्फ बातें करना और काम को टालते रहना। हमारे आसपास ऐसे ज्ञानियों की कोई कमी नहीं है जो चाय की टपरी पर बैठकर पूरे देश की इकोनॉमी सुधारने का दम रखते हैं। उनके पास ऐसे-ऐसे बिजनेस आइडिया होते हैं कि अगर वे सच हो जाएं तो एलन मस्क भी उनके सामने पानी भरता नजर आए। लेकिन जब उनसे पूछो कि भाई कल सुबह तुम अपने इस आइडिया के लिए क्या करने वाले हो तो उनका जवाब होता है कि अभी थोड़ा शुभ मुहूर्त नहीं आया है।
चलिए इसे भी एक मजेदार तरीके से समझते हैं। मान लीजिए आप एक बहुत आलीशान घर बनाना चाहते हैं। आपके पास दुनिया के सबसे बेहतरीन आर्किटेक्ट का बनाया हुआ एक नक्शा भी है। आप रोज उस नक्शे को देखते हैं। अपने दोस्तों को दिखाते हैं और खूब तारीफें बटोरते हैं। लेकिन आप जमीन पर एक ईंट भी नहीं रखते। आप बस सोचते हैं कि एक दिन जादू होगा और वह आलीशान घर अपने आप खड़ा हो जाएगा। क्या ऐसा कभी होगा। बिल्कुल नहीं। जब तक मजदूर आकर गारा और सीमेंट नहीं मिलाएंगे तब तक वह घर सिर्फ एक कागज का टुकड़ा ही बना रहेगा।
डोनाल्ड मिलर अपनी किताब में यही समझाते हैं कि बिना एक सही प्लान और रोज के एक्जीक्यूशन के बड़े से बड़ा आइडिया भी सिर्फ एक खूबसूरत सपना बनकर रह जाता है। मैनेजमेंट का मतलब यह नहीं है कि आप बड़ी-बड़ी मीटिंग्स करें और लंबे-लंबे ईमेल लिखें। असली मैनेजमेंट का मतलब है कि आपके पास हर दिन का एक साफ टारगेट होना चाहिए। आपको यह पता होना चाहिए कि कौन सा काम सबसे जरूरी है और उसे आज ही खत्म करना है।
अक्सर लोग खुद को बहुत बिजी दिखाते हैं। वे दिनभर लैपटॉप के सामने बैठे रहते हैं। फाइल्स इधर से उधर करते रहते हैं। लेकिन जब शाम को रिजल्ट देखा जाता है तो वह बिल्कुल जीरो होता है। इसे प्रोडक्टिविटी नहीं बल्कि सिर्फ टाइम पास कहते हैं। अगर आप अपने बिजनेस या करियर में सच में आगे बढ़ना चाहते हैं तो आपको अपनी रोज की आदतों को बदलना होगा। छोटे-छोटे कदम उठाइए लेकिन वे कदम रोज उठने चाहिए। एक कमजोर आइडिया भी अगर पूरी ताकत और सही एक्जीक्यूशन के साथ जमीन पर उतारा जाए तो वह उस महान आइडिया से लाख गुना बेहतर है जो सिर्फ आपके दिमाग की अलमारी में बंद पड़ा है। इसलिए सोचना बंद कीजिए और काम पर लग जाइए।
तो दोस्तों डोनाल्ड मिलर की यह बातें सिर्फ एक किताब की समरी नहीं हैं बल्कि आपके सफल होने का एक सीधा रास्ता हैं। अब यह फैसला पूरी तरह आपके हाथ में है। क्या आप भी सिर्फ सपने देखने वाली भीड़ का हिस्सा बने रहना चाहते हैं या फिर सच में अपनी लाइफ को सिंपल और सक्सेसफुल बनाना चाहते हैं। आज ही कमेंट बॉक्स में लिखकर बताइए कि इन तीन लेसन में से कौन सा लेसन आपको सबसे ज्यादा पसंद आया और आप उसे अपनी लाइफ में कब से लागू करने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जो सिर्फ बड़े-बड़े प्लान बनाते हैं पर करते कुछ नहीं हैं।
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