Blown to Bits (Hindi)


क्या आप अभी भी उसी घिसे पिटे बिजनेस मॉडल से चिपक कर बैठे हैं जो पिछली सदी में दम तोड़ चुका है? अगर आप रीच और रिचनेस के पुराने खेल में फंसे हैं तो मुबारक हो आप बहुत जल्द मार्केट से बाहर होने वाले हैं और दुनिया आपकी नासमझी पर हंसेगी।

इवांस और वर्स्टर की किताब ब्लोन टू बिट्स आज के डिजिटल दौर की कड़वी सच्चाई है। आइए समझते हैं वे 3 बड़े लेसन जो आपकी डूबती नैया को पार लगा सकते हैं वरना कंपटीशन आपको कब निगल जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा।


Lesson : रीच और रिचनेस का वह पुराना झगड़ा जो अब खत्म हो चुका है

पुराने जमाने में बिजनेस करना एक बड़े इमोशनल ड्रामे जैसा था। आपको हमेशा एक चॉइस करनी पड़ती थी। या तो आप बहुत सारे लोगों तक पहुंच जाओ जिसे हम रीच कहते हैं या फिर आप मुट्ठी भर लोगों को बहुत ही शानदार और गहरी सर्विस दो जिसे हम रिचनेस कहते हैं। अगर आप गली के नुक्कड़ वाले हलवाई हैं तो आपकी रिचनेस बहुत ज्यादा है। आप जानते हैं कि मिश्रा जी को कम चीनी वाला समोसा चाहिए और गुप्ता जी को ज्यादा चटनी। लेकिन आपकी रीच बस उसी मोहल्ले तक है। वहीं दूसरी तरफ अगर आप एक बड़ी कंपनी हैं जो टीवी पर विज्ञापन देती है तो आपकी रीच करोड़ों में है पर आप यह नहीं जानते कि उस करोड़ों की भीड़ में किसे क्या पसंद है। वहां रिचनेस जीरो है।

लेकिन फिर आया इंटरनेट और उसने इस पुरानी दीवार को ऐसे गिराया जैसे कोई कच्चा मकान। फिलिप इवांस और थॉमस वर्स्टर कहते हैं कि अब आपको इन दोनों में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है। अब आप एक साथ करोड़ों लोगों तक पहुंच भी सकते हैं और हर एक बंदे को पर्सनल सर्विस भी दे सकते हैं। अगर आप अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं और सोच रहे हैं कि सबको एक जैसा माल बेचकर आप राजा बन जाएंगे तो आप गलतफहमी के शिकार हैं।

आजकल के कस्टमर को वह सब चाहिए जो उसे पहले नहीं मिलता था। उसे अमेजन पर करोड़ों प्रोडक्ट्स की रीच भी चाहिए और साथ में यह भी चाहिए कि ऐप उसे खुद बताए कि उसे क्या खरीदना है। इसे ही कहते हैं रिचनेस। अगर आपका बिजनेस अभी भी उस पुराने टीवी विज्ञापन के भरोसे बैठा है जो सबको एक ही बात बोलता है तो आपकी हालत उस पुराने टेप रिकॉर्डर जैसी हो जाएगी जिसे अब कोई मुफ्त में भी नहीं लेता।

हकीकत तो यह है कि जो लोग इस बदलाव को नहीं समझ रहे वे अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर दौड़ रहे हैं। उन्हें लगता है कि उनका पुराना नाम और रसूख उन्हें बचा लेगा। पर भाई साहब सच तो यह है कि अब लोग आपके नाम की नहीं बल्कि उस वैल्यू की इज्जत करते हैं जो आप उन्हें पर्सनली दे रहे हैं। अगर आप अपनी सर्विस में वह गहराई नहीं ला पा रहे तो यकीन मानिए आपका ब्रांड बस एक नाम बनकर रह जाएगा जिसे लोग याद भी नहीं करेंगे। यह जो रीच और रिचनेस का बैलेंस है यही असली चाबी है आज के मार्केट की।


Lesson : डीकंस्ट्रक्शन और डिसइंटरमीडिएशन का वह खेल जो सबको ले डूबेगा

क्या आपको याद है वह जमाना जब आपको एक मामूली सी एलआईसी पॉलिसी लेने के लिए उस पड़ोस वाले अंकल के पीछे भागना पड़ता था? वह अंकल जो खुद को इंश्योरेंस का भगवान समझते थे पर असल में बस एक बिचौलिए थे। फिलिप इवांस और थॉमस वर्स्टर कहते हैं कि डिजिटल क्रांति ने इन सारे 'बीच वाले भाई साहबों' की छुट्टी कर दी है। इसे ही टेक्निकल भाषा में डीकंस्ट्रक्शन और डिसइंटरमीडिएशन कहते हैं। आसान शब्दों में कहें तो पुरानी कड़ियाँ अब टूट रही हैं।

पहले एक प्रोडक्ट को आप तक पहुँचने के लिए एक लंबी सीढ़ी चढ़नी पड़ती थी। मैन्युफैक्चरर से होलसेलर, फिर रिटेलर और फिर कहीं जाकर वह आपकी झोली में आता था। हर कोई अपना कमीशन खाता था और इंफॉर्मेशन को दबाकर रखता था। लेकिन अब इंटरनेट ने उस सीढ़ी को ही लात मार दी है। अब आप सीधे ब्रांड की वेबसाइट पर जाते हैं और अपना ऑर्डर प्लेस करते हैं। वह दुकानदार जो कभी अकड़ कर बैठता था और कहता था कि यही माल सबसे अच्छा है, अब वह गायब हो रहा है क्योंकि आपके फोन में उससे ज्यादा जानकारी है।

जब हम देखते हैं कि कैसे बड़े बड़े बिजनेस इस बदलाव को समझ ही नहीं पाए। वे अभी भी उसी पुराने सिस्टम को बचाने में लगे हैं जो अब सड़ चुका है। इवांस और वर्स्टर हमें याद दिलाते हैं कि जब इंफॉर्मेशन और फिजिकल सामान एक दूसरे से अलग हो जाते हैं, तो पूरी वैल्यू चेन बिखर जाती है। आज का कस्टमर सिर्फ सामान नहीं खरीदता, वह उस सामान से जुड़ी इंफॉर्मेशन भी खुद कंट्रोल करना चाहता है।

अगर आप एक बिजनेस चला रहे हैं और आप अभी भी किसी बिचौलिए के भरोसे बैठे हैं जो आपको मार्केट की खबरें लाकर देता है, तो समझ लीजिए कि आपकी दुकान पर ताला लगने वाला है। आज के जमाने में डेटा ही सब कुछ है। अगर आप अपने कस्टमर से डायरेक्ट बात नहीं कर पा रहे, तो आप बस एक कूरियर बॉय बनकर रह जाएंगे। लोग आपकी इज्जत नहीं करेंगे क्योंकि उन्हें पता है कि आपके पास वह खास जानकारी नहीं है जो उन्हें चाहिए। यह डीकंस्ट्रक्शन का दौर है जनाब, यहाँ जो खुद को नहीं बदलेगा वह इतिहास के पन्नों में कहीं खो जाएगा और किसी को फर्क भी नहीं पड़ेगा।


Lesson : इंफॉर्मेशन ही नया एसेट है और यही आपकी किस्मत बदलेगा

पुराने जमाने में अगर आपके पास एक बड़ा लोहे का कारखाना होता या फिर शहर के बीचों बीच एक आलीशान शोरूम होता, तो लोग आपको बहुत बड़ा बिजनेसमैन मानते थे। फिलिप इवांस और थॉमस वर्स्टर कहते हैं कि वह दौर अब पुरानी फिल्मों की तरह धुंधला हो चुका है। अब असली संपत्ति लोहा, लक्कड़ या सीमेंट नहीं है, बल्कि वह जानकारी है जो उस सामान के साथ चिपकी हुई है। आज के इकोनॉमिक्स में इंफॉर्मेशन और फिजिकल एसेट एक दूसरे से अलग होकर अपनी अपनी राह चल पड़े हैं। इसे ऐसे समझिए कि आप एक कार खरीदते हैं, लेकिन उस कार से ज्यादा कीमती वह डेटा है जो वह कंपनी आपसे ले रही है कि आप कहाँ जाते हैं, कितना पेट्रोल डलवाते हैं और आपको कौन सा म्यूजिक पसंद है।

इवांस और वर्स्टर हमें यह कड़वी हकीकत समझाते हैं कि जो लोग अभी भी केवल सामान बेचने में लगे हैं, वे बस एक रेस का हिस्सा हैं जहाँ हर कोई कीमत कम करने के चक्कर में खुद को खत्म कर रहा है। असली खिलाड़ी वह है जो उस सामान के चारों ओर इंफॉर्मेशन का एक जाल बुनता है। अगर आप एक फिटनेस बैंड बेच रहे हैं, तो आप सिर्फ प्लास्टिक और सेंसर नहीं बेच रहे, आप उस बंदे की सेहत का कच्चा चिट्ठा बेच रहे हैं। वह डेटा ही आपकी असली तिजोरी है। जो बिजनेस इस इंफॉर्मेशन को कंट्रोल नहीं कर पा रहा, वह बस एक मजदूरी कर रहा है जिसका कोई भविष्य नहीं है।

कई पुरानी कंपनियाँ अभी भी सोचती हैं कि डेटा कलेक्ट करना बस एक एक्स्ट्रा काम है। वे अपने कस्टमर्स को ऐसे ट्रीट करती हैं जैसे वे बस एक नंबर हों। लेकिन भाई साहब, आज का कस्टमर बहुत स्मार्ट है। उसे पता है कि उसकी चॉइस की कीमत क्या है। अगर आप उसे उसकी पसंद के हिसाब से सर्विस नहीं दे रहे, तो वह एक सेकंड में दूसरे ऐप पर शिफ्ट हो जाएगा। आपका करोड़ों का इंफ्रास्ट्रक्चर धरा का धरा रह जाएगा अगर आपके पास सही इंफॉर्मेशन नहीं है।

अब वक्त आ गया है कि आप अपनी बिजनेस स्ट्रेटेजी को इस नए दौर के हिसाब से ढालें। अपनी पुरानी सोच को डस्टबिन में डालिए और यह देखना शुरू कीजिए कि आपका कस्टमर असल में चाहता क्या है। क्या आप उसे सिर्फ सामान दे रहे हैं या उसे एक एक्सपीरियंस दे रहे हैं जो डेटा से बना है? यह बदलाव ही आपको मार्केट का राजा बनाएगा वरना आप बस उन लोगों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे जो कहते थे कि हमारा बिजनेस तो बहुत अच्छा चल रहा था, पता नहीं अचानक क्या हो गया।

तो दोस्तों, क्या आप तैयार हैं इस नई डिजिटल जंग के लिए? क्या आप अपनी पुरानी जंजीरों को तोड़कर इंफॉर्मेशन की इस दुनिया में राज करने के लिए तैयार हैं? याद रखिए, बदलाव कभी पूछकर नहीं आता, वह बस आता है और जो उसके साथ नहीं चलता उसे पीछे छोड़ देता है। अपनी सोच बदलिए, अपना तरीका बदलिए और फिर देखिए कैसे पूरी दुनिया आपकी मुट्ठी में होगी। आज ही कदम उठाएं और अपने बिजनेस को एक नई ऊँचाई पर ले जाएं।

-----

अगर आप इस बुक की पूरी गहराई में जाना चाहते हैं, तो इस बुक को यहाँ से खरीद सकते है - Buy Now

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#BusinessStrategy #DigitalTransformation #BookSummary #MarketingStrategy #Entrepreneurship


_

Post a Comment

Previous Post Next Post