आप अपना कीमती टाइम और पापा के पैसे एक ऐसे बिजनेस आइडिया पर फूंक रहे हैं जिसे सुनकर इन्वेस्टर को नींद आ जाए। अगर आप अब भी वही घिसा पिटा प्लान बना रहे हैं जो किसी को समझ नहीं आता तो मुबारक हो आप फेल होने की तैयारी कर चुके हैं।
आज हम स्टेनली रिच और डेविड गमपर्ट की मशहूर किताब बिजनेस प्लांस दैट विन से सीखेंगे कि आखिर एक करोड़ों का चेक दिलाने वाला प्लान कैसे बनता है। चलिए देखते हैं वो ३ बड़े लेसन्स जो आपके डूबते स्टार्टअप को बचा सकते हैं।
Lesson : इन्वेस्टर को अपना प्रोडक्ट नहीं, उसकी कमाई का रास्ता बेचिए
अगर आपको लगता है कि आपका नया ऐप दुनिया बदल देगा और इन्वेस्टर बस आपके ऑफिस के बाहर चेक बुक लेकर खड़ा है, तो भाई साहब, आप शायद किसी साउथ इंडियन फिल्म के हीरो हैं। हकीकत में, इन्वेस्टर को आपके 'क्रांतिकारी' प्रोडक्ट के फीचर्स में रत्ती भर भी दिलचस्पी नहीं होती। स्टेनली रिच और डेविड गमपर्ट अपनी किताब में साफ कहते हैं कि लोग अक्सर अपने बिजनेस प्लान में यह बताने में दस पेज भर देते हैं कि उनका सॉफ्टवेयर कितना फास्ट है या उनका समोसा कितना कुरकुरा है। लेकिन सच तो यह है कि इन्वेस्टर सिर्फ एक ही भाषा समझता है, और वो है पैसा।
सोचिए, आप एक इन्वेस्टर के पास जाते हैं और कहते हैं कि मेरा जूसर फल का एक एक कतरा निचोड़ देता है। वो आपकी तरफ ऐसे देखेगा जैसे आपने उसका कीमती वक्त बर्बाद कर दिया हो। लेकिन अगर आप उसे कहें कि इस जूसर को बनाने में लागत कम है और यह मार्केट के बाकी जूसर से तीन गुना ज्यादा बिकेगा क्योंकि यह बिजली नहीं खाता, तो शायद वो अपनी आंखें खोल ले।
इन्वेस्टर एक ऐसा शिकारी है जो सिर्फ शिकार (प्रॉफिट) पर नजर रखता है। उसे यह मतलब नहीं कि आपकी बंदूक कितनी चमकीली है, उसे मतलब है कि क्या उससे निशाना लगेगा। बहुत से नए एंटरप्रेन्योर अपनी टेक्निकल डिटेल्स में इतने खो जाते हैं कि वो यह बताना भूल जाते हैं कि ग्राहक आखिर इस चीज को खरीदेगा क्यों।
मान लीजिए आपने एक ऐसा चश्मा बनाया है जो रात में भी दिन जैसा दिखाता है। बहुत बढ़िया बात है। लेकिन अगर आप प्लान में यह नहीं दिखा पाए कि इसकी मार्केट साइज कितनी है और कौन से पागल लोग इसे पांच हजार रुपये में खरीदेंगे, तो आपका प्लान रद्दी के डिब्बे के लायक है। बुक हमें सिखाती है कि बिजनेस प्लान एक लव लेटर नहीं है जो आप अपने प्रोडक्ट को लिख रहे हैं, बल्कि यह एक प्रोपोजल है जो आप एक पैसे वाले पार्टनर को दे रहे हैं।
अक्सर लोग कहते हैं कि मेरा आईडिया एकदम नया है, मार्केट में कोई कॉम्पिटिशन ही नहीं है। भाई, अगर कॉम्पिटिशन नहीं है, तो शायद वहां मार्केट ही नहीं है। इन्वेस्टर को यह डर होता है कि कहीं आप किसी ऐसी चीज पर काम तो नहीं कर रहे जिसे कोई चाहता ही नहीं। इसलिए, अपने प्लान में टेक्निकल ज्ञान कम झाड़िए और यह ज्यादा बताइए कि पैसा टेबल पर कैसे आएगा।
आपकी सेल्स पिच में दम होना चाहिए। अगर आप खुद को नहीं बेच सकते, तो आप अपना प्रोडक्ट कभी नहीं बेच पाएंगे। याद रखिए, इन्वेस्टर आपके आईडिया को नहीं खरीद रहा, वो उस भविष्य को खरीद रहा है जहाँ आपका आईडिया उसे और ज्यादा अमीर बना देगा। अगर आप उसे यह सपना नहीं दिखा सकते, तो बेहतर है कि आप अपने स्टार्टअप का सपना छोड़कर किसी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट करा लें।
Lesson : रिस्क को छुपाना नहीं, उसे मैनेज करना सीखिए
ज्यादातर नए स्टार्टअप वाले लड़के जब अपना बिजनेस प्लान लेकर इन्वेस्टर के सामने बैठते हैं, तो उनकी बातें सुनकर ऐसा लगता है जैसे वो कोई बिजनेस नहीं, बल्कि स्वर्ग का रास्ता दिखा रहे हों। "सर, हमारा कोई कॉम्पिटिशन नहीं है", "सर, हम पहले साल में ही करोड़ों कमा लेंगे", "सर, रिस्क तो जीरो है"। भाई साहब, अगर रिस्क जीरो होता, तो इन्वेस्टर खुद ही वो बिजनेस शुरू न कर देता? स्टेनली रिच और डेविड गमपर्ट कहते हैं कि एक सच्चा और जीतने वाला बिजनेस प्लान वो है जो अपनी कमजोरियों को जानता है और उन्हें ठीक करने का दम रखता है।
इन्वेस्टर को बेवकूफ समझना आपकी सबसे बड़ी बेवकूफी है। वो आपसे ज्यादा धूर्त और घाघ इंसान है। जब आप कहते हैं कि मार्केट में कोई खतरा नहीं है, तो उसे समझ आ जाता है कि या तो आप झूठ बोल रहे हैं या फिर आपको मार्केट की ए बी सी डी भी नहीं पता। किताब हमें सिखाती है कि रिस्क को कारपेट के नीचे छुपाने के बजाय उसे टेबल पर रखिए। एक स्मार्ट बिजनेस प्लान में साफ़ लिखा होना चाहिए कि अगर कल को सरकार की पॉलिसी बदल गई, या कोई बड़ा प्लेयर मार्केट में आ गया, तो आपका प्लान बी क्या होगा।
सोचिए, आप एक शादी का कॉन्ट्रैक्ट ले रहे हैं। आप दूल्हे के बाप को कहते हैं कि बारिश तो होगी ही नहीं, मैंने आसमान से बात कर ली है। लेकिन अगर उसी दिन मूसलाधार बारिश हो गई, तो क्या होगा? दूल्हा भी भीगेगा और आपकी पेमेंट भी रुकेगी। इसके बजाय, अगर आप कहें कि बारिश होने के चांस हैं, इसलिए मैंने वाटरप्रूफ टेंट का इंतजाम एडवांस में कर लिया है, तो बाप को आप पर ज्यादा भरोसा होगा। बिजनेस भी बिल्कुल ऐसा ही है। इन्वेस्टर्स को आपके कॉन्फिडेंस से ज्यादा आपके बैकअप प्लान में दिलचस्पी होती है।
कुछ लोग बिजनेस प्लान में ऐसे ग्राफ दिखाते हैं जो सीधे ऊपर की तरफ जा रहे होते हैं जैसे वो कोई रॉकेट हों। भाई, लाइफ का ग्राफ भी ऊपर नीचे होता है, बिजनेस तो फिर भी रिस्की चीज है। अगर आपके प्लान में यह नहीं दिखाया गया कि मंदी के समय आप अपनी कंपनी को कैसे बचाएंगे, तो इन्वेस्टर समझ जाएगा कि आप सिर्फ ख्याली पुलाव पका रहे हैं। रिस्क मैनेजमेंट का मतलब डरना नहीं है, बल्कि सावधान रहना है।
अक्सर लोग अपनी टीम की कमियों को छुपाते हैं। अगर आपकी टीम में कोई मार्केटिंग एक्सपर्ट नहीं है, तो उसे स्वीकार कीजिए और बताइए कि आप उस कमी को कैसे पूरा करेंगे। इन्वेस्टर को वो इंसान पसंद आता है जो अपनी औकात जानता हो और उसे बढ़ाने की कोशिश कर रहा हो। एक हवा हवाई प्लान किसी बच्चे की ड्राइंग बुक जैसा लगता है, जबकि एक रिस्क अवेयर प्लान एक मेच्योर लीडर की पहचान है। इसलिए, अगली बार जब आप इन्वेस्टर के सामने जाएं, तो झूठ की चादर ओढ़ने के बजाय सच का चश्मा पहन कर जाएं।
याद रखिए, इन्वेस्टर आपके आईडिया के साथ साथ आपके सच बोलने की हिम्मत पर भी पैसा लगाता है। अगर आप उसे आज ही अंधेरे में रखेंगे, तो कल वो आपको अपनी बैलेंस शीट में काला धब्बा बना देगा।
Lesson : घोड़े पर नहीं, घुड़सवार पर दांव लगाइए
क्या आपको लगता है कि आपका आईडिया दुनिया का सबसे अनोखा आईडिया है? अगर हां, तो जरा आईने के सामने खड़े होइए और खुद को एक जोरदार थप्पड़ लगाइए। क्योंकि स्टेनली रिच और डेविड गमपर्ट अपनी किताब में चिल्ला चिल्ला कर कह रहे हैं कि "आइडिया इज चीप, एग्जीक्यूशन इज एवरीथिंग"। इन्वेस्टर के पास हर दिन सौ ऐसे लड़के आते हैं जो कहते हैं कि उनके पास अगला फेसबुक या अमेज़न बनाने का प्लान है। लेकिन इन्वेस्टर उस प्लान को नहीं, उस इंसान को देखता है जो उस प्लान को जमीन पर उतारेगा।
सोचिए, आपके पास दुनिया की सबसे तेज फरारी कार है, लेकिन उसे चलाने वाला ड्राइवर एक ऐसा अनाड़ी है जिसे क्लच और ब्रेक का फर्क नहीं पता। क्या आप उस कार पर सट्टा लगाएंगे? कभी नहीं। इन्वेस्टर भी यही सोचता है। वो देखता है कि आपकी टीम में कौन है। क्या आपके पास वो लोग हैं जो मुश्किल वक्त में कंपनी को डूबने से बचा सकें? या फिर आपकी टीम सिर्फ उन दोस्तों की मंडली है जो संडे को पब में बैठकर करोड़ों के सपने देखते हैं और मंडे को ऑफिस आने में उन्हें आलस आता है?
किताब हमें बताती है कि एक इन्वेस्टर हमेशा "ए क्लास टीम" को "बी क्लास आईडिया" के साथ चुन लेगा, लेकिन वो कभी भी "बी क्लास टीम" को "ए क्लास आईडिया" के साथ पैसा नहीं देगा। क्यों? क्योंकि एक काबिल टीम खराब आईडिया को भी रास्ते में सुधार कर कामयाब बना सकती है, लेकिन एक निकम्मी टीम सोने के अंडे देने वाली मुर्गी को भी मारकर खा जाएगी।
जरा अपनी टीम की मीटिंग्स याद कीजिए। क्या वहां सिर्फ चाय और समोसे पर चर्चा होती है या वाकई में काम के डेडलाइन्स तय होते हैं? अगर आपकी टीम में हर कोई 'सीईओ' बनना चाहता है और झाड़ू लगाने या कोडिंग करने वाला कोई नहीं है, तो आपका बिजनेस प्लान एक कॉमेडी फिल्म की स्क्रिप्ट से ज्यादा कुछ नहीं है। इन्वेस्टर देखता है कि आपकी टीम में बैलेंस है या नहीं। क्या आपके पास एक टेक का बंदा है? एक सेल्स का उस्ताद है? और क्या आप सब एक दूसरे की बात सुनने की हिम्मत रखते हैं?
अक्सर स्टार्टअप वाले अपनी टीम स्लाइड में सुंदर चेहरों की फोटो लगा देते हैं। भाई, इन्वेस्टर को आपकी टीम की खूबसूरती नहीं, उनकी काबिलियत देखनी है। उसे यह जानना है कि जब कंपनी का बैंक बैलेंस जीरो होगा, तब क्या आपकी टीम साथ खड़ी रहेगी या सबसे पहले जहाज छोड़कर भागेगी?
सक्सेसफुल बिजनेस प्लान का राज यही है कि आप दिखाएं कि आपकी टीम के पास सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि वो 'जुनून' और 'अनुभव' है जो मार्केट की ठोकरों को सह सके। अगर आप यह साबित कर पाए कि आप और आपकी टीम फौलाद की बनी है, तो यकीन मानिए, इन्वेस्टर खुद आपके पीछे भागेगा।
तो दोस्तों, बिजनेस प्लांस दैट विन हमें यह सिखाती है कि कामयाबी सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि आपकी सोच, आपकी टीम और आपके सच बोलने के हुनर में छिपी है। अगर आप आज भी पुराने तरीके से प्लान बना रहे हैं, तो रुकिए और सोचिए। क्या आप वाकई में एक बिजनेस बना रहे हैं या सिर्फ एक महंगा शौक पाल रहे हैं?
आज ही अपने बिजनेस प्लान को इन्वेस्टर के चश्मे से देखिए। क्या उसमें दम है? क्या आपकी टीम तैयार है? अगर हां, तो मैदान में उतरिए। और अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया और आप चाहते हैं कि आपके दोस्त भी अपना पैसा डूबने से बचाएं, तो इसे अभी शेयर करें। कमेंट में बताएं कि आपके बिजनेस का सबसे बड़ा रिस्क क्या है? चलिए मिलकर उसे सुलझाते हैं।
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