अगर आप आज भी अकेले बैठकर करोड़ों का बिजनेस खड़ा करने का सपना देख रहे हैं तो मुबारक हो आप पत्थर के जमाने में जी रहे हैं। बिना नेटवर्क के बिजनेस चलाना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल के गाड़ी को धक्का मारना। अगर आपने इस डिजिटल दुनिया के नेटवर्क को नहीं समझा तो यकीन मानिए आपका कॉम्पिटिटर आपको घर बैठे ही खत्म कर देगा और आपको पता भी नहीं चलेगा।
डॉन टैपस्कॉट की यह किताब हमें सिखाती है कि आज की दुनिया में सिर्फ हार्ड वर्क काफी नहीं है बल्कि सही कनेक्शन और वैल्यू बनाना ही असली खेल है। चलिए इस आर्टिकल में हम उन ३ पावरफुल लेसन्स को विस्तार से समझते हैं जो आपके बिजनेस और काम करने के नजरिए को हमेशा के लिए बदल देंगे।
Lesson : कोलाबरेशन ही असली पावर है
पुराने जमाने में बिजनेस करने का मतलब था कि अपना किला बनाओ और चारों तरफ ऊंची दीवारें खड़ी कर दो। आप अपना सामान खुद बनाते थे और किसी को अपनी रेसिपी नहीं बताते थे। लेकिन आज की नेटवर्क इकोनॉमी में अगर आप अकेले कमरे में बंद होकर दुनिया जीतने का प्लान बना रहे हैं तो बधाई हो आप एक बहुत बड़े फेलियर की तैयारी कर रहे हैं। डॉन टैपस्कॉट साफ कहते हैं कि अब कंपटीशन कंपनियों के बीच नहीं बल्कि नेटवर्क के बीच होता है। जो कंपनी सबसे अच्छा कोलाबरेशन करेगी वही मार्केट पर राज करेगी।
मान लीजिए आप एक बहुत बड़े शेफ हैं और आप दुनिया का सबसे अच्छा समोसा बनाते हैं। पुराने जमाने में आप अपनी दुकान खोलते और चुपचाप समोसे बेचते। लेकिन आज की दुनिया में आपको जोमैटो के साथ हाथ मिलाना होगा ताकि डिलीवरी हो सके। आपको सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के साथ कोलाबरेशन करना होगा ताकि लोग आपके समोसे के बारे में जानें। आपको मसाला सप्लायर के साथ ऐसा रिश्ता बनाना होगा कि वह आपको बेस्ट क्वालिटी दे। अगर आप कहें कि मैं खुद ही आलू उगाऊंगा और खुद ही साइकिल पर घर घर जाकर डिलीवरी करूँगा तो भाई साहब आपका समोसा ठंडा होने से पहले आपका बिजनेस ठंडा हो जाएगा।
नेटवर्क इकोनॉमी का मतलब ही यही है कि आप अकेले सब कुछ नहीं कर सकते। आपको दूसरों की ताकत का इस्तेमाल करना सीखना होगा। एप्पल जैसी बड़ी कंपनी को देख लीजिए। क्या वह सब कुछ खुद बनाती है। बिल्कुल नहीं। वह स्क्रीन किसी और से लेती है और कैमरा किसी और से। उनका असली काम है एक ऐसा नेटवर्क बनाना जहाँ हर कोई मिलकर एक बेहतरीन आईफोन तैयार करे। अगर एप्पल कल को कहे कि हम किसी से बात नहीं करेंगे और सब कुछ खुद बनाएंगे तो शायद उनका फोन अगले दस साल तक भी लॉन्च नहीं हो पाएगा।
यहाँ एक कड़वा सच यह है कि आज के दौर में आपका नेटवर्क ही आपकी नेटवर्थ है। अगर आपके पास टैलेंट है लेकिन कोई कनेक्शन नहीं है तो आप वैसे ही हैं जैसे बिना सिम कार्ड वाला महंगा आईफोन। देखने में तो बहुत अच्छे लगेंगे लेकिन किसी काम के नहीं होंगे। कोलाबरेशन का मतलब सिर्फ साथ काम करना नहीं है बल्कि एक दूसरे की वैल्यू बढ़ाना है। जब आप दूसरों को बढ़ने में मदद करते हैं तो पूरा नेटवर्क आपको ऊपर खींच लेता है।
लेकिन हमारे यहाँ बहुत से लोग ऐसे होते हैं जिन्हें लगता है कि अगर उन्होंने किसी की मदद ले ली तो उनकी इज्जत कम हो जाएगी। वो सोचते हैं कि मैं तो अकेला ही काफी हूँ। ऐसे लोग अक्सर बिजनेस के मैदान में अकेले ही रह जाते हैं और फिर बाद में किस्मत को दोष देते हैं। नेटवर्क इकोनॉमी में ईगो की कोई जगह नहीं है। यहाँ जीत उसी की होती है जो हाथ मिलाना जानता है। अगर आप अपने बिजनेस को एक टापू की तरह चलाएंगे तो बाढ़ आने पर डूबना तय है। लेकिन अगर आप एक पुल बनाएंगे तो आप और आपके पार्टनर्स दोनों मिलकर तरक्की के दूसरे पार पहुँच जाएंगे।
याद रखिये कोलाबरेशन कोई मजबूरी नहीं बल्कि एक बहुत बड़ी स्ट्रैटेजी है। जब आप नेटवर्क का हिस्सा बनते हैं तो आपकी पहुँच बढ़ जाती है। आपके पास वो रिसोर्सेज आ जाते हैं जो आपके पास कभी थे ही नहीं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप अकेले पहाड़ नहीं चढ़ सकते लेकिन अगर आपके पास एक अच्छी टीम और सही रस्सी हो तो आप एवरेस्ट भी फतह कर सकते हैं। इसलिए अकेले रहने की जिद्द छोड़िये और नेटवर्क की ताकत को पहचानिये।
Lesson : इन्फॉर्मेशन को एसेट की तरह देखें
पुराने जमाने में अगर किसी के पास सोने की खदान होती थी तो उसे अमीर माना जाता था। फिर दौर आया फैक्ट्रियों का जहाँ लोहे और मशीनों की कीमत थी। लेकिन आज की नेटवर्क इकोनॉमी में अगर आपके पास डेटा नहीं है तो आप बस एक खाली डिब्बा हैं। डॉन टैपस्कॉट कहते हैं कि अब जानकारी ही असली संपत्ति है। अगर आप इसे सिर्फ फाइलों में दबाकर रख रहे हैं तो आप अपनी तिजोरी की चाबी नाली में फेंक रहे हैं। जानकारी का सही इस्तेमाल ही तय करता है कि आप मार्केट में लीडर बनेंगे या बस एक फॉलोअर बनकर रह जाएंगे।
मान लीजिए आपकी एक कपड़े की दुकान है। एक ग्राहक आता है और नीली शर्ट खरीदकर चला जाता है। पुराने जमाने का दुकानदार बस पैसे गिनता और खुश हो जाता। लेकिन आज का स्मार्ट बिजनेसमैन उस ग्राहक का डेटा रखता है। उसे पता है कि उस बंदे को नीला रंग पसंद है और वह हर तीन महीने में शॉपिंग करता है। अब अगले महीने जब नई नीली शर्ट आएगी तो वह दुकानदार उसे मैसेज भेजेगा। यह जानकारी ही उसका सबसे बड़ा हथियार है। अगर आप जानकारी का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो आप वैसे ही हैं जैसे कोई अंधा आदमी अंधेरे कमरे में काली बिल्ली ढूंढ रहा हो जो वहां है ही नहीं।
नेटवर्क इकोनॉमी में डेटा का मतलब सिर्फ नंबर्स नहीं है बल्कि लोगों की पसंद और नापसंद को समझना है। फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियां आपको फ्री में सर्विस क्यों देती हैं। क्या वो कोई समाज सेवा कर रही हैं। बिल्कुल नहीं। वो आपकी हर पसंद और हर सर्च को ट्रैक करती हैं। उन्हें पता है कि आपको कब भूख लगती है और आपको कौन से जूते पसंद हैं। यह जानकारी ही उनकी असली जायदाद है जिसे वो करोड़ों में बेचते हैं। अगर आप सोचते हैं कि आप बहुत चालाक हैं और फ्री में सब इस्तेमाल कर रहे हैं तो याद रखिये अगर आप प्रोडक्ट के पैसे नहीं दे रहे हैं तो आप खुद ही प्रोडक्ट हैं।
यहाँ एक विडंबना यह है कि बहुत से लोग डेटा को कचरा समझते हैं। वो सोचते हैं कि इतने सारे फीडबैक और नंबर्स का हम क्या करेंगे। भाई साहब यह कचरा नहीं बल्कि खाद है जो आपके बिजनेस के पेड़ को बड़ा करेगी। अगर आप अपनी जानकारी को सही से मैनेज नहीं कर सकते तो आप वैसे ही फेल होंगे जैसे बिना मैप के जंगल में घूमने वाला टूरिस्ट। जानकारी को शेयर करना और उसे नेटवर्क में फैलाना ही वैल्यू क्रिएट करता है। जब आप सही समय पर सही बंदे को सही जानकारी देते हैं तो पैसा अपने आप पीछे खिंचा चला आता है।
आजकल के दौर में तो मजाक में यह भी कहा जाता है कि आपकी बीवी को शायद आपकी पसंद न पता हो लेकिन अमेज़न के एल्गोरिदम को जरूर पता है। यह एल्गोरिदम क्या है। यह सिर्फ जानकारी का एक नेटवर्क है जो लगातार सीख रहा है। अगर आप अपने बिजनेस में तकनीक और डेटा का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो आप अभी भी बैलगाड़ी चला रहे हैं जबकि दुनिया रॉकेट पर बैठ चुकी है। जानकारी को एसेट मानने का मतलब है कि आप हर एक क्लिक और हर एक फीडबैक की इज्जत करते हैं।
याद रखिये नेटवर्क इकोनॉमी में जो जितनी ज्यादा जानकारी रखता है और उसे जितनी चतुराई से इस्तेमाल करता है वही राजा है। अगर आप अपनी जानकारी को तिजोरी में बंद करके रखेंगे तो वह सड़ जाएगी। लेकिन अगर आप उसे नेटवर्क के साथ जोड़ेंगे तो वह मल्टीप्लाई हो जाएगी। जानकारी ही वह बिजली है जो आपके नेटवर्क के तारों में दौड़ती है। अगर बिजली नहीं होगी तो तार चाहे सोने के भी हों कोई काम नहीं आएंगे। इसलिए डेटा इकट्ठा कीजिये उसे समझिये और फिर देखिये कैसे आपका बिजनेस रॉकेट की तरह उड़ता है।
Lesson : कस्टमर अब पार्टनर है
पुराने जमाने में कस्टमर का मतलब था वह मासूम इंसान जिसे आप विज्ञापन दिखाकर कुछ भी चिपका देते थे। दुकानदार राजा होता था और कस्टमर सिर्फ एक खरीदार। लेकिन नेटवर्क इकोनॉमी ने इस रिश्ते का तलाक करवा दिया है। अब कस्टमर सिर्फ सामान नहीं खरीदता बल्कि वह आपके ब्रांड की तकदीर लिखता है। डॉन टैपस्कॉट कहते हैं कि आज का कस्टमर एक प्रोसुमर है यानी वह कंज्यूमर भी है और प्रोड्यूसर भी। अगर आप उसे आज भी सिर्फ एक नोट छापने की मशीन समझ रहे हैं तो यकीन मानिए आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं।
मान लीजिए आपने एक बहुत बड़ा रेस्टोरेंट खोला और बहुत सारा पैसा एडवरटाइजिंग पर फूंक दिया। लेकिन अगर एक कस्टमर को आपका खाना पसंद नहीं आया और उसने गुस्से में एक ट्वीट कर दिया या गूगल पर खराब रिव्यू डाल दिया तो आपकी लाखों की मार्केटिंग नाली में चली जाएगी। आज एक आम आदमी के हाथ में स्मार्टफोन है जो किसी एटम बम से कम नहीं है। वह आपके बिजनेस को रातों रात स्टार बना सकता है या फिर मिट्टी में मिला सकता है। इसलिए अब उसे खुश रखना आपकी मजबूरी नहीं बल्कि आपके बिजनेस की लाइफलाइन है।
नेटवर्क इकोनॉमी में कंपनियां अब कस्टमर से पूछकर प्रोडक्ट बनाती हैं। लेगो जैसी कंपनियां अपने खिलौनों के डिजाइन कस्टमर से मांगती हैं। अगर डिजाइन हिट हो गया तो वो उसे मार्केट में उतारते हैं। इसे कहते हैं को-क्रिएशन। यहाँ कस्टमर आपका पार्टनर बन चुका है। वह आपको फ्री में आईडिया दे रहा है और आपके प्रोडक्ट का प्रचार भी कर रहा है। अगर आप अपने कस्टमर की आवाज नहीं सुन रहे हैं तो आप वैसे ही हैं जैसे कोई रेडियो जो सिर्फ बजता रहता है लेकिन किसी की सुनता नहीं। और ऐसे रेडियो का बटन लोग बहुत जल्दी बंद कर देते हैं।
कुछ बिजनेस अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। वो सोचते हैं कि कस्टमर को क्या पता चलेगा। भाई साहब आज का कस्टमर आपसे ज्यादा पढ़ा लिखा और सतर्क है। वह खरीदने से पहले दस जगह रेट चेक करता है और सौ लोगों के रिव्यू पढ़ता है। अगर आप उसके साथ चालाकी करेंगे तो वह आपके नेटवर्क से ऐसे बाहर निकलेगा कि आपके होश उड़ जाएंगे। कस्टमर को पार्टनर मानने का मतलब है उसे इज्जत देना और उसे अपने बिजनेस के सफर में शामिल करना। जब आप उसे वैल्यू देते हैं तो वह खुद चलकर आपके पास आता है और चार लोगों को साथ लेकर आता है।
आज का कस्टमर उस फूफा की तरह है जिसे शादी में जरा भी कम तवज्जो मिली तो वह पूरा माहौल बिगाड़ सकता है। लेकिन अगर आपने उसे दूल्हे की तरह इज्जत दी तो वह पूरी बारात को आपके हक में कर देगा। नेटवर्क की दुनिया में वर्ड ऑफ माउथ ही असली एडवरटाइजिंग है। जब आपका कस्टमर आपकी तारीफ करता है तो उसका असर किसी भी बॉलीवुड स्टार के विज्ञापन से ज्यादा होता है। इसलिए अपने कस्टमर को सिर्फ एक ट्रांजैक्शन मत समझिये बल्कि उसे अपना सबसे बड़ा ब्रांड एंबेसडर बनाइये।
अंत में बस इतना समझ लीजिये कि नेटवर्क इकोनॉमी का खेल बहुत सीधा है। अगर आप कोलाबरेशन करेंगे जानकारी को सही से इस्तेमाल करेंगे और कस्टमर को अपना पार्टनर बनाएंगे तो आप जीत जाएंगे। वरना दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि कल कोई आपका नाम भी याद नहीं रखेगा। अब समय आ गया है कि आप अपनी पुरानी सोच की जंजीरें तोड़ें और इस नए डिजिटल युग के नेटवर्क में खुद को फिट करें। उठिये और अपनी वैल्यू बनाना शुरू कीजिये क्योंकि इस दुनिया में जगह सिर्फ उनकी है जो दूसरों की वैल्यू बढ़ाना जानते हैं।
नेटवर्क इकोनॉमी कोई आने वाला कल नहीं है बल्कि यह आज की हकीकत है। अगर आप अभी भी पुराने तरीके से बिजनेस या काम कर रहे हैं तो आप खुद को पीछे धकेल रहे हैं। आज ही फैसला कीजिये कि आप एक टापू बनकर रहेंगे या एक विशाल नेटवर्क का हिस्सा बनेंगे। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिये जो अभी भी अकेले दुनिया जीतने का ख्वाब देख रहे हैं। कमेंट में बताइये कि आपके हिसाब से नेटवर्क बनाने में सबसे बड़ी चुनौती क्या है। चलिए मिलकर एक नई वैल्यू क्रिएट करते हैं।
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