Differentiate or Die (Hindi)


क्या आप भी उसी पुरानी घिसी पिटी भीड़ का हिस्सा बनकर खुश हैं। अगर आपका बिजनेस या ब्रांड दूसरों की फोटोकॉपी है तो बधाई हो आप बहुत जल्द गायब होने वाले हैं। अपनी क्वालिटी का ढिंढोरा पीटना बंद कीजिए क्योंकि मार्केट आपकी हार का तमाशा देखने के लिए तैयार बैठा है।

आज के इस किलर कॉम्पिटिशन में या तो आप खुद को दुनिया से अलग साबित करें या फिर चुपचाप हार मान लें। जैक ट्रौट की यह किताब हमें सिखाती है कि सर्वाइव करने के लिए सिर्फ मेहनत नहीं बल्कि एक यूनिक पहचान की जरूरत है। चलिए इन 3 लेसन को गहराई से समझते हैं।


Lesson : बी डिफरेंट और डाई - भीड़ का हिस्सा बनना छोड़िए

सोचिए आप एक मार्केट में खड़े हैं जहाँ सौ दुकानें हैं और सौ की सौ दुकानें एक ही जैसा समोसा बेच रही हैं। सब कह रहे हैं कि हमारा समोसा बेस्ट है। अब आप किसका समोसा खाएंगे। सच तो यह है कि आपको घंटा फर्क नहीं पड़ता। यही हाल आज के मार्केट का है। अगर आप भी वही कर रहे हैं जो सब कर रहे हैं तो आप कस्टमर की नजर में सिर्फ एक और चेहरा हैं। जैक ट्रौट कहते हैं कि आज के दौर में सिर्फ अच्छा होना काफी नहीं है। अगर आप अलग नहीं हैं तो आप मर चुके हैं।

लोग अक्सर सोचते हैं कि अच्छी क्वालिटी और कम दाम देने से काम चल जाएगा। भाई साहब यह तो एंट्री फीस है। क्वालिटी तो अब हर कोई दे रहा है। अगर आप अपनी क्वालिटी का रोना रो रहे हैं तो आप उस दूल्हे की तरह हैं जो शादी में यह कह रहा है कि देखो मैंने नहाया भी है और नए कपड़े भी पहने हैं। अरे भाई वो तो सब करते हैं। आपने अलग क्या किया।

असली खेल तब शुरू होता है जब आप कुछ ऐसा पेश करते हैं जो किसी और के पास नहीं है। मान लीजिए आप एक डॉक्टर हैं। शहर में हजारों डॉक्टर हैं। लेकिन अगर आप खुद को बच्चों के डेंटिस्ट के तौर पर पेश करते हैं तो आपने खुद को अलग कर लिया। अब जब किसी बच्चे के दांत में दर्द होगा तो लोग जनरल डॉक्टर के पास नहीं बल्कि आपके पास आएंगे।

कॉम्पिटिशन एक ऐसी आग है जो हर उस चीज को जला देती है जो आम है। अगर आप अपनी पहचान नहीं बनाएंगे तो आपको डिस्काउंट के नाम पर अपनी कीमत घटानी पड़ेगी। और जिस दिन आपने कीमत घटाई समझो आपने अपनी मौत का वारंट साइन कर दिया। क्योंकि आपसे सस्ता बेचने वाला कोई न कोई और आ ही जाएगा।

कुछ लोग सोचते हैं कि बहुत सारा विज्ञापन करने से वो अलग दिखेंगे। यह वैसा ही है जैसे किसी पार्टी में जोर जोर से चिल्लाना ताकि लोग आपको देखें। लोग देखेंगे जरूर पर आपको पागल समझकर इग्नोर कर देंगे। असल डिफरेंस चिल्लाने में नहीं बल्कि आपकी पोजीशन में होता है।

तो सवाल यह है कि क्या आप एक और समोसे वाले बनना चाहते हैं या फिर वो जो सिर्फ चॉकलेट वाले समोसे बेचता है। अजीब लग रहा है न। लेकिन कम से कम लोग आपको याद तो रखेंगे। यही इस लेसन की जान है कि अपनी एक ऐसी पहचान बनाओ जिसे कोई और कॉपी न कर सके। वरना भीड़ में खोने के लिए तो पूरी दुनिया खाली पड़ी है।


Lesson : ओनरशिप ऑफ एन एट्रिब्यूट - एक शब्द के मालिक बन जाइए

पिछले लेसन में हमने देखा कि अलग दिखना क्यों जरूरी है। लेकिन अब सवाल आता है कि अलग दिखें कैसे। जैक ट्रौट कहते हैं कि आपको कस्टमर के दिमाग में एक खास खूबी या शब्द पर कब्जा करना होगा। इसे कहते हैं ओनरशिप ऑफ एन एट्रिब्यूट। अगर आप हर चीज में बेस्ट बनने की कोशिश करेंगे तो आप किसी भी चीज में बेस्ट नहीं रह जाएंगे।

जब मैं कहता हूँ सेफ कार तो आपके दिमाग में सबसे पहले क्या आता है। ज्यादातर लोग कहेंगे वॉल्वो। क्या दूसरी गाड़ियां सेफ नहीं हैं। बिलकुल हैं। लेकिन वॉल्वो ने सेफ्टी शब्द को ऐसे पकड़ लिया है जैसे कोई बच्चा अपने पसंदीदा खिलौने को पकड़ता है। अब चाहे मर्सिडीज कितनी भी सेफ हो जाए लोगों के दिमाग में सेफ्टी का मतलब वॉल्वो ही रहेगा।

यही गलती हमारे देश के कई बिजनेस करते हैं। वो सोचते हैं कि हम सस्ता भी देंगे फास्ट भी देंगे और क्वालिटी भी देंगे। भाई साहब आप बिजनेस चला रहे हैं या अलादीन का चिराग। अगर आप सब कुछ होने का दावा करेंगे तो लोग आप पर भरोसा करना बंद कर देंगे। यह वैसा ही है जैसे कोई लड़का लड़की को इम्प्रेस करने के लिए कहे कि मैं खाना भी बना लेता हूँ नासा में साइंटिस्ट भी हूँ और पार्ट टाइम में रॉकेट भी उड़ाता हूँ। लड़की समझ जाएगी कि दाल में कुछ काला है।

आपको अपनी एक ऐसी खूबी चुननी होगी जिसे कोई और क्लेम न कर रहा हो। अगर डोमिनोज ने कहा कि हम तीस मिनट में डिलीवरी देंगे तो उन्होंने फास्ट शब्द पर अपना झंडा गाड़ दिया। अब अगर कोई और पिज्जा वाला कहे कि मैं भी तीस मिनट में दूंगा तो लोग कहेंगे कि भाई तू तो डोमिनोज की कॉपी कर रहा है।

कुछ ब्रांड्स को लगता है कि वो सब कुछ बेच सकते हैं। एक ही नाम से साबुन भी बेचेंगे और उसी नाम से घी भी। अब आप खुद सोचिए क्या आप उस साबुन से नहाना चाहेंगे जिससे घी की खुशबू आए या वो घी खाना चाहेंगे जिससे झाग निकलता हो। यह सुनने में मजाक लगता है पर बड़े बड़े ब्रांड्स यही गलती करते हैं।

कस्टमर का दिमाग बहुत छोटा है। वहां बहुत सारी जगह नहीं है। आपको उस छोटे से दिमाग में अपनी एक छोटी सी जगह बनानी है। एक ऐसी खूबी ढूंढिए जो आपके कॉम्पिटिटर के पास नहीं है और फिर पूरी ताकत से उसी का ढिंढोरा पीटिए। जब आप किसी एक चीज के लिए जाने जाते हैं तो आपकी वैल्यू अपने आप बढ़ जाती है।


Lesson : इवोल्यूशन इज की - वक्त के साथ खुद को बदलिए वरना गायब हो जाइए

पिछले दो लेसन में हमने सीखा कि अलग दिखना और एक खास खूबी पर कब्जा करना कितना जरूरी है। लेकिन क्या एक बार अलग दिखना काफी है। जैक ट्रौट कहते हैं कि मार्केट एक बहती नदी की तरह है। जो आज यूनिक है वो कल पुराना हो जाएगा। इवोल्यूशन का मतलब यह नहीं कि आप अपनी पहचान बदल दें बल्कि अपनी उस पहचान को नए जमाने के हिसाब से ढालें।

इसे ऐसे समझिए कि आप नब्बे के दशक के सबसे कूल हीरो थे। आपके बाल लंबे थे और आप बेल बॉटम पहनते थे। लोग आपको पसंद करते थे क्योंकि आप अलग थे। लेकिन अगर आप आज भी उसी अवतार में घूमेंगे तो लोग आपको हीरो नहीं बल्कि सर्कस का जोकर समझेंगे। आपकी पहचान वही है लेकिन आपको उसे आज के हिसाब से अपडेट करना पड़ेगा। नोकिया और कोडक जैसी बड़ी कंपनियों ने यही गलती की। उन्हें लगा कि उनका पुराना जादू हमेशा चलेगा। वो अपने डिफरेंस को इवॉल्व करना भूल गए और आज वो सिर्फ इतिहास की किताबों के किस्से बनकर रह गए हैं।

कुछ लोग अपने पुराने सक्सेस के नशे में ऐसे चूर रहते हैं जैसे कोई फूफा शादी में अपनी पुरानी सरकारी नौकरी की धौंस जमाता है। भाई साहब जमाना बदल गया है। अब लोग आपकी पुरानी कहानियों से नहीं बल्कि आपकी आज की वैल्यू से आपको जज करेंगे। अगर आप अपने ब्रांड को समय के साथ फ्रेश नहीं रखेंगे तो कॉम्पिटिटर आपको कच्चा चबा जाएगा।

बदलाव का मतलब यह नहीं कि आप अपनी जड़ें छोड़ दें। अगर बीएमडब्ल्यू ड्राइविंग के मजे के लिए जानी जाती है तो वो आज इलेक्ट्रिक कार भी बना रही है पर उसका फोकस अब भी ड्राइविंग एक्सपीरियंस पर ही है। इसे कहते हैं स्मार्ट इवोल्यूशन। आपको अपनी कोर वैल्यू को पकड़कर रखना है लेकिन उसे डिलीवर करने का तरीका बदलना होगा।

अंत में बस इतना याद रखिए कि कॉम्पिटिशन कभी खत्म नहीं होगा। यह हर दिन और खतरनाक होता जाएगा। जो लोग डर कर छिप जाते हैं वो कभी नहीं जीतते। और जो बिना सोचे समझे सबको कॉपी करते हैं वो कभी नहीं चमकते। अपनी एक अलग राह चुनिए उस पर अपना झंडा गाड़िए और जैसे जैसे दुनिया बदले अपने कदम भी बढ़ाते रहिए।


दोस्तो आज की इस भागदौड़ भरी दुनिया में खुद को बचाए रखने का सिर्फ एक ही रास्ता है और वो है डिफरेंशिएशन। अपनी उस एक खूबी को पहचानिए जो आपको भीड़ से अलग बनाती है। क्या आप आज से ही अपनी एक नई पहचान बनाने के लिए तैयार हैं। नीचे कमेंट में लिखकर बताइए कि आपके बिजनेस या आपके काम की वो एक यूनिक बात क्या है जो दुनिया में किसी और के पास नहीं है। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो अपनी पहचान की तलाश में भटक रहे हैं। याद रखिए या तो आप अलग दिखेंगे या फिर आप गायब हो जाएंगे। चॉइस आपकी है।

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