क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो आज के जमाने में पुराने स्टाइल का बिजनेस करके अमीर बनने का सपना देख रहे हैं? अगर हाँ, तो बधाई हो, आप अपनी नाकामी का खुद इंतजार कर रहे हैं। बिना डिजिटल कैपिटल समझे बिजनेस चलाना वैसा ही है जैसे बिना इंटरनेट के स्मार्टफोन चलाना। आप बस पीछे छूट रहे हैं और दुनिया आगे निकल रही है।
आज हम डॉन टैपस्कॉट और डेविड टिकोल की मास्टरपीस डिजिटल कैपिटल को गहराई से समझेंगे। यह किताब हमें सिखाती है कि कैसे मॉडर्न बिजनेस की दुनिया में सिर्फ पैसा ही काफी नहीं है। चलिए जानते हैं वो ३ बड़े लेसन जो आपके बिजनेस करने के तरीके को पूरी तरह बदल देंगे और आपको सक्सेस की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
Lesson : बिजनेस वेब्स की ताकत
आजकल के जमाने में अगर आप अभी भी यह सोच रहे हैं कि आप अकेले अपने दम पर पूरी दुनिया जीत लेंगे, तो भाई साहब, आप शायद उन्नीसवीं सदी में जी रहे हैं। डिजिटल कैपिटल का सबसे पहला और सबसे बड़ा लेसन यही है कि अब अकेले दौड़कर जीतने का जमाना खत्म हो चुका है। अब जमाना है 'बिजनेस वेब्स' का। यह कोई मकड़ी का जाला नहीं है जिसमें आप फंस जाएं, बल्कि यह एक ऐसा नेटवर्क है जो आपको ऊपर उठाता है।
सरल भाषा में कहें तो बिजनेस वेब का मतलब है एक ऐसा डिजिटल नेटवर्क जहाँ आप, आपके सप्लायर्स, आपके पार्टनर्स और यहाँ तक कि आपके कंपटीटर्स भी एक दूसरे से जुड़े होते हैं। पुराने जमाने में लोग अपना राज छुपाकर रखते थे। जैसे किसी ढाबे वाला अपना मसाला छुपाता था। लेकिन आज की डिजिटल इकॉनमी में अगर आप सबसे कटकर रहेंगे, तो आप बस एक कोने में पड़े रह जाएंगे।
एक रियल लाइफ एग्जांपल देखते हैं। मान लीजिए आप एक ऑनलाइन समोसे बेचने का स्टार्टअप शुरू करते हैं। अब अगर आप खुद ही आलू उगाएंगे, खुद ही मैदा पीसेंगे, खुद ही डिलीवरी बॉय बनकर घर घर जाएंगे, तो यकीन मानिए, आप समोसे कम बेचेंगे और थकान से जल्दी लेट जाएंगे। यहीं काम आता है बिजनेस वेब। एक स्मार्ट बिजनेसमैन क्या करेगा? वो जोमैटो के साथ डिलीवरी के लिए जुड़ेगा, एक बढ़िया पेमेंट गेटवे के साथ ट्रांजेक्शन के लिए जुड़ेगा, और सोशल मीडिया के जरिए कस्टमर्स से जुड़ेगा। यह जो पूरा सिस्टम तैयार हुआ, इसे ही बिजनेस वेब कहते हैं।
कुछ लोग आज भी सोचते हैं कि वो खुद का ऐप बनाकर मार्क जुकरबर्ग को टक्कर दे देंगे बिना किसी नेटवर्क के। अरे भाई, बिना नेटवर्क के तो आजकल फोन में सिग्नल नहीं आता, बिजनेस क्या चलेगा? डिजिटल कैपिटल हमें समझाती है कि आपकी असली वैल्यू इसमें नहीं है कि आपके पास कितनी मशीनें हैं, बल्कि इसमें है कि आपका नेटवर्क कितना मजबूत है।
जब आप एक वेब का हिस्सा बनते हैं, तो आप अपनी लागत कम करते हैं और अपनी पहुँच बढ़ाते हैं। इसे एक फुटबॉल मैच की तरह समझिए। अगर आप अकेले ही बॉल लेकर गोल करने की कोशिश करेंगे, तो सामने वाली टीम आपको घेर लेगी। लेकिन अगर आप सही पास देंगे और टीम वर्क करेंगे, तो गोल करना आसान हो जाएगा। डिजिटल वेब भी यही है। यहाँ हर पार्टनर का एक रोल होता है।
आजकल की बड़ी कंपनियां जैसे एप्पल या अमेजॉन कोई अकेले काम नहीं करतीं। उनके पास हजारों पार्टनर्स का एक जाल है जो उनके लिए वैल्यू क्रिएट करते हैं। अगर आप एक छोटे लेवल पर भी अपना काम शुरू कर रहे हैं, तो देखिए कि आप किसके साथ जुड़ सकते हैं। क्या आप किसी ऐसे के साथ हाथ मिला सकते हैं जो आपके काम को आसान बना दे? क्या आपका डिजिटल सिस्टम इतना फ्लेक्सिबल है कि दूसरे लोग उसमें जुड़ सकें?
याद रखिए, डिजिटल दुनिया में 'को-ऑपरेशन' ही असली वेपन है। अगर आप सिर्फ अपने ही कुएं के मेंढक बने रहेंगे, तो समंदर की लहरें आपको कब बहा ले जाएंगी पता भी नहीं चलेगा। बिजनेस वेब बनाना कोई ऑप्शन नहीं है, बल्कि आज के दौर में जिंदा रहने के लिए सबसे बड़ी जरूरत है। यह लेसन हमें सिखाता है कि अपनी ईगो को साइड में रखें और नेटवर्क की पावर को गले लगाएं।
Lesson : ह्यूमन और स्ट्रक्चरल कैपिटल
अगर आपको लगता है कि आपके बैंक अकाउंट में पड़ा पैसा ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। डिजिटल कैपिटल के लेखक कहते हैं कि असली माल तो आपके लोगों के दिमाग में और आपके ऑफिस के सिस्टम में छिपा है। इसे ही हम ह्यूमन और स्ट्रक्चरल कैपिटल कहते हैं। पैसा तो कल कोई भी बैंक से लोन लेकर ले आएगा, लेकिन जो बुद्धि और सिस्टम आपके पास है, वो पड़ोसी की दुकान वाला कॉपी नहीं कर पाएगा।
पहले बात करते हैं ह्यूमन कैपिटल की। यह वो लोग हैं जो आपके लिए काम करते हैं। डिजिटल युग में आपको ऐसे लोग नहीं चाहिए जो सिर्फ जी हजूरी करें, बल्कि वो चाहिए जो आपसे ज्यादा स्मार्ट हों। मान लीजिए आपने एक बहुत ही महंगी कॉफी मशीन खरीदी, लेकिन उसे चलाने वाला बंदा ऐसा है जिसे लगता है कि बटन दबाने से बम फट जाएगा। तो आपकी वो लाखों की मशीन कचरा है। असली वैल्यू उस इंसान की है जिसे पता है कि कॉफी का स्वाद कैसे बढ़ाया जाए।
हमारे देश में बहुत से बॉस ऐसे हैं जो सोचते हैं कि अगर उन्होंने एम्प्लोयी को ज्यादा सिखा दिया, तो वो अपनी अलग दुकान खोल लेगा। भाई साहब, अगर आप उसे नहीं सिखाएंगे और वो आपके पास ही टिका रहा, तो वो आपके बिजनेस का ज्यादा नुकसान करेगा। डिजिटल इकॉनमी में आपको टैलेंट की इज्जत करनी होगी। अगर आपके पास दुनिया के बेस्ट कोडर या मार्केटर्स हैं, तो आपकी ह्यूमन कैपिटल सातवें आसमान पर है।
अब आते हैं स्ट्रक्चरल कैपिटल पर। यह वो सिस्टम, डेटा और प्रोसेस है जो आपके जाने के बाद भी चलता रहे। मान लीजिए कल को आप छुट्टी पर चले जाते हैं और आपका पूरा काम ठप हो जाता है, तो इसका मतलब है कि आपके पास स्ट्रक्चरल कैपिटल जीरो है। एक मजबूत डिजिटल स्ट्रक्चर वो है जहाँ डेटा सही तरह से मैनेज हो। आपको पता होना चाहिए कि आपका कस्टमर क्या पसंद कर रहा है और क्यों।
इसे एक मजेदार मिसाल से समझते हैं। एक पुराने जमाने का हलवाई है जिसे सब याद रहता है कि कौन कितना उधार ले गया। अब अगर उस हलवाई की तबीयत खराब हुई, तो सारा उधार गया तेल लेने। लेकिन एक स्मार्ट डिजिटल बिजनेसमैन एक ऐसा सॉफ्टवेयर रखेगा जहाँ हर ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड हो। यह सॉफ्टवेयर ही उसकी स्ट्रक्चरल कैपिटल है। इंसान बीमार पड़ सकता है, लेकिन सिस्टम और डेटा हमेशा जिंदा रहते हैं।
लेखक यहाँ बहुत पते की बात कहते हैं कि अगर आप सिर्फ फिजिकल एसेट्स यानी जमीन और बिल्डिंग के पीछे भाग रहे हैं, तो आप पुरानी सोच के शिकार हैं। आज के दौर में फेसबुक या व्हाट्सएप की अपनी कितनी जमीन है? कुछ भी नहीं। उनकी असली ताकत उनका कोड और उनका डेटा है। यही उनकी स्ट्रक्चरल कैपिटल है।
इसलिए अपने लोगों को ट्रेनिंग देने में और अपने बिजनेस के लिए अच्छे डिजिटल टूल्स खरीदने में कंजूसी मत कीजिए। अगर आप अपने सिस्टम को इतना स्मूथ बना लेते हैं कि एक नया बंदा भी आकर उसे आसानी से चला सके, तो आपने असली डिजिटल एसेट खड़ा कर लिया है। याद रखिए, पैसा तो आने जाने वाली चीज है, लेकिन जो दिमाग और सिस्टम आपने तैयार किया है, वही आपको लंबी रेस का घोड़ा बनाएगा।
Lesson : कस्टमर को पार्टनर बनाना
पुराने जमाने में दुकानदार और कस्टमर का रिश्ता कैसा होता था? दुकानदार सोचता था कि बस एक बार सामान बेच दूँ और काम खत्म। लेकिन डिजिटल कैपिटल की दुनिया में यह सोच आपको ले डूबेगी। आज का तीसरा सबसे बड़ा लेसन यह है कि कस्टमर को सिर्फ एक खरीदार मत समझिए, उसे अपना बिजनेस पार्टनर बना लीजिए। जो लोग कस्टमर को सिर्फ लूटने का जरिया समझते हैं, वो डिजिटल दुनिया में बहुत जल्दी एक्सपोज हो जाते हैं।
आजकल के कस्टमर बहुत शातिर हैं। वो आपका प्रोडक्ट खरीदने से पहले सौ रिव्यू पढ़ते हैं और दस जगह रेट चेक करते हैं। ऐसे में अगर आप उनसे दूरी बनाकर रखेंगे, तो वो किसी और के पास चले जाएंगे। डिजिटल कैपिटल हमें सिखाती है कि कस्टमर को अपनी वैल्यू क्रिएशन की प्रोसेस में शामिल करें। इसे कहते हैं 'रिलेशनशिप कैपिटल'। यह वो भरोसा है जो आपने सालों में कमाया है और जिसे डिजिटल टूल्स और भी मजबूत बना सकते हैं।
मान लीजिए आप एक फिटनेस ऐप चलाते हैं। अब एक तरीका तो यह है कि आप बस अपना सब्सक्रिप्शन बेचें और भूल जाएं। दूसरा तरीका यह है कि आप अपने ऐप पर एक कम्युनिटी बनाएं जहाँ कस्टमर्स खुद अपनी प्रोग्रेस शेयर करें, एक दूसरे को मोटिवेट करें और आपको फीडबैक दें कि ऐप में क्या कमी है। जब कस्टमर आपको बताता है कि उसे क्या चाहिए और आप उसे बदल देते हैं, तो उसे लगता है कि यह उसका अपना ब्रांड है।
आज भी कुछ कंपनियां ऐसी हैं जो कस्टमर केयर के नाम पर सिर्फ एक रोबोट बिठा देती हैं जो एक ही रटा रटाया जवाब देता रहता है। भाई साहब, डिजिटल होने का मतलब ये नहीं है कि आप इंसानियत ही भूल जाएं। डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल तो कस्टमर के करीब जाने के लिए होना चाहिए, उनसे पीछा छुड़ाने के लिए नहीं। अगर आपका कस्टमर आपके लिए सोशल मीडिया पर खुद तारीफ कर रहा है, तो समझ लीजिए वो आपका सबसे बड़ा मार्केटिंग पार्टनर बन चुका है और वो भी बिल्कुल मुफ्त में।
डिजिटल कैपिटल का मतलब ही यही है कि आप अपने कस्टमर्स के साथ मिलकर नई चीजें बनाएं। जैसे गेमिंग कंपनियां आजकल अपने प्लेयर्स से पूछती हैं कि अगला लेवल कैसा होना चाहिए। इससे कस्टमर को इज्जत महसूस होती है और आपका काम आसान हो जाता है। जब आप कस्टमर को पार्टनर बनाते हैं, तो आपकी मार्केटिंग की चिंता खत्म हो जाती है क्योंकि आपका खुश कस्टमर ही आपकी असली एडवरटाइजिंग एजेंसी बन जाता है।
यह समझ लीजिए कि डिजिटल कैपिटल कोई जादू की छड़ी नहीं है, बल्कि एक नजरिया है। चाहे वो बिजनेस वेब बनाना हो, अपने लोगों और सिस्टम में इन्वेस्ट करना हो या कस्टमर को अपना साथी बनाना हो। यह सब मिलकर आपको उस मुकाम पर ले जाएंगे जहाँ कॉम्पिटिशन आपसे डरने लगेगा। दुनिया बदल रही है, बिजनेस करने के तरीके बदल रहे हैं, अब फैसला आपका है कि आप पुराने ढर्रे पर चलकर गायब होना चाहते हैं या डिजिटल कैपिटल के साथ राज करना चाहते हैं।
जाग जाइए, क्योंकि डिजिटल क्रांति किसी का इंतजार नहीं करती। आज ही अपने बिजनेस को एक नेटवर्क की तरह देखना शुरू करें और देखिए कैसे आपकी वेल्थ और वैल्यू दोनों रॉकेट की तरह ऊपर जाते हैं।
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