क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो कल क्या होगा यह सोचकर आज का चैन खो देते हैं और फिर भी गलत डिसीजन लेते हैं? मुबारक हो। आपकी किस्मत और आपकी बिजनेस स्ट्रेटजी दोनों ही कोहरे में फंसी पुरानी बस जैसी हैं। अगर आपको लगता है कि सिर्फ अंदाजों से आप अंबानी बन जाएंगे तो शायद आप अपनी बर्बादी का इंतजार कर रहे हैं।
आज हम ह्यू कोर्टनी की किताब 20 20 फोरसाइट के जरिए यह सीखेंगे कि अनिश्चितता के काले बादलों को चीरकर अपनी जीत का रास्ता कैसे बनाया जाता है। चलिए इन 3 बेहतरीन लेसन को समझते हैं।
लेसन १ : अनिश्चितता के लेवल्स को समझना और अंधेरे में तीर मारना बंद करना
दोस्तो, लाइफ और बिजनेस दोनों ही उस पड़ोसी की तरह हैं जो कभी भी आपके घर बिना बताए आ धमकते हैं। आप सोचते हैं कि सब कुछ आपके कंट्रोल में है पर सच तो यह है कि आपको यह भी नहीं पता कि अगले दस मिनट में आपके इंटरनेट का कनेक्शन कटेगा या नहीं। ह्यू कोर्टनी अपनी किताब 20 20 फोरसाइट में कहते हैं कि ज्यादातर लोग अनिश्चितता यानी अनसर्टेनिटी से इतना डरते हैं कि या तो वो डर के मारे कोई फैसला ही नहीं लेते या फिर आँख बंद करके कुएं में कूद जाते हैं। लेखक कहते हैं कि अगर आप यह समझ जाएं कि अंधेरा कितना गहरा है तो आप सही टॉर्च का इंतजाम कर सकते हैं।
ह्यू कोर्टनी ने हमें चार लेवल्स के बारे में बताया है। इसे एक रियल लाइफ एग्जांपल से समझते हैं। मान लीजिए आप एक नई चाय की दुकान खोलना चाहते हैं। लेवल वन वो है जहां आपको पता है कि अगर चाय अच्छी है और जगह बढ़िया है तो लोग आएंगे ही आएंगे। यहाँ भविष्य एकदम साफ है। लेकिन लेवल फोर वो है जहां आप मंगल ग्रह पर चाय की टपरी खोलना चाहते हैं। वहां न ग्राहक का पता है न हवा का और न ही वहां के म्युनिसिपलिटी वाले अंकल का। अब अगर आप मंगल ग्रह वाली प्लानिंग अपने मोहल्ले की दुकान के लिए करेंगे तो लोग आपको पागल ही कहेंगे ना।
ज्यादातर इंडियन स्टार्टअप्स और यंग लोग यहीं गलती करते हैं। वो सोचते हैं कि मार्केट की हर अनिश्चितता एक जैसी है। वो या तो बहुत ज्यादा ओवर कॉन्फिडेंट हो जाते हैं या फिर बिल्कुल ही घबरा जाते हैं। सरकाजम की बात तो यह है कि हम लोग कल की बारिश का अंदाजा नहीं लगा पाते और प्लान बनाते हैं अगले दस साल का। कोर्टनी कहते हैं कि पहले यह देखो कि आपके सामने जो सिचुएशन है वो कितनी धुंधली है। क्या आपके पास पुराने डेटा से कुछ सीखने को है या आप बिल्कुल ही नई पिच पर बैटिंग कर रहे हैं।
जब आप यह पहचान लेते हैं कि आप किस लेवल पर खड़े हैं तो आपका आधा डर वहीँ खत्म हो जाता है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप जानते हों कि सामने वाला कुत्ता सिर्फ भौंकता है काटता नहीं। जब तक आप लेवल को नहीं समझेंगे तब तक आप अपनी स्ट्रेटजी को सिर्फ हवा में महल बनाने जैसा ही पाएंगे। इसलिए अगली बार जब कोई बड़ा फैसला लेना हो तो पहले यह पूछें कि क्या मुझे सच में नहीं पता क्या होगा या मैं सिर्फ डरा हुआ हूं। इस समझदारी के बिना बिजनेस करना वैसा ही है जैसे बिना हेलमेट के सुपर बाइक चलाना। जोश तो बहुत है पर होश का ठिकाना नहीं है।
जब आप लेवल समझ जाते हैं तो अगला कदम होता है कि आप एक रास्ते पर चलने के बजाय कई रास्तों का नक्शा तैयार रखें। क्योंकि भाई यह दुनिया है यहाँ आपकी प्लानिंग से ज्यादा दूसरों की गलतियां आपका भविष्य तय करती हैं। और यहीं से शुरू होता है हमारा दूसरा लेसन जो आपको एक से ज्यादा बैकअप प्लान रखने की ताकत देगा।
लेसन २ : सिर्फ एक प्लान के भरोसे बैठना अपनी कबर खुद खोदने जैसा है
आजकल के दौर में अगर आप यह सोचकर बैठे हैं कि आपने जो एक्सेल शीट पर प्लान बनाया है दुनिया वैसे ही चलेगी तो आपसे बड़ा मासूम कोई नहीं है। ह्यू कोर्टनी कहते हैं कि असली खिलाड़ी वह नहीं है जिसके पास एक परफेक्ट प्लान हो बल्कि वह है जिसके पास हर हालात के लिए एक अलग कहानी तैयार हो। इसे वो सिनेरियो प्लानिंग कहते हैं। सरल भाषा में कहें तो भाई अगर प्लान ए फेल हुआ तो क्या आपके पास प्लान बी सी और डी तैयार है या आप सिर्फ हाथ पर हाथ रखकर अपनी फूटी किस्मत को कोसेंगे।
मान लीजिए आप अपनी क्रश को प्रपोज करने का प्लान बना रहे हैं। आपकी स्ट्रेटजी है कि आप उसे एक महंगे रेस्टोरेंट में ले जाएंगे और घुटनों पर बैठकर दिल की बात कहेंगे। यह हुआ आपका एक आइडियल सिनेरियो। लेकिन क्या आपने सोचा है कि अगर वहां उसका भाई मिल गया तो क्या होगा। या अगर उसने बिल देखकर आपको वहीं छोड़ दिया तो आप घर कैसे जाएंगे। असली समझदार इंसान वह है जो इन तीनों हालातों के लिए पहले से तैयार हो। अगर भाई मिला तो दोस्त बन जाना और अगर वो भाग गई तो पैदल घर जाने की हिम्मत रखना। बिजनेस में भी बिल्कुल ऐसा ही होता है।
लेखक समझाते हैं कि भविष्य कोई सीधा रास्ता नहीं है बल्कि एक चौराहे जैसा है जहाँ से कई रास्ते निकलते हैं। हम लोग अक्सर अपनी ईगो में इतने डूबे होते हैं कि हमें लगता है जो हमने सोचा है वही होगा। लेकिन असलियत में मार्केट कभी भी करवट बदल सकता है। कोई नया कानून आ सकता है या कोई नया कॉम्पिटिटर आकर आपकी दुकान बंद करवा सकता है। ह्यू कोर्टनी का कहना है कि आपको अपनी आंखों पर बंधी वह पट्टी खोलनी होगी जो सिर्फ एक ही मंजिल दिखाती है। आपको अलग अलग संभावनाओं के नक्शे बनाने होंगे ताकि जब वक्त बदले तो आपको झटका न लगे।
हम लोग शादी का कार्ड छपवाने से पहले ही बच्चों के नाम सोच लेते हैं पर बिजनेस में यह नहीं सोचते कि अगर मंदी आ गई तो स्टाफ की सैलरी कहाँ से देंगे। कोर्टनी कहते हैं कि अलग अलग सिनेरियो बनाना डरपोक होने की निशानी नहीं है बल्कि यह एक मास्टरमाइंड की निशानी है। यह आपको लचीला बनाता है। जब आप पहले से जानते हैं कि खराब से खराब क्या हो सकता है तो आप उस खराब वक्त में भी शांत रहकर सही फैसला ले पाते हैं।
जो लोग सिर्फ एक रास्ते पर चलते हैं वो अक्सर गिरकर संभल नहीं पाते। लेकिन जो हर मोड़ के लिए तैयार होते हैं वो मुश्किल वक्त में भी अपना रास्ता ढूंढ लेते हैं। याद रखिए अनिश्चितता से लड़ना नहीं है बल्कि उसके साथ डांस करना सीखना है। और इस डांस की अगली स्टेप है डिसीजन लेने की सही टाइमिंग जो हम अगले लेसन में सीखेंगे।
लेसन ३ : डिसीजन लेने की सही टाइमिंग और लचीलापन ही असली गेम है
दोस्तो, अगर आप सही समय पर सही दांव नहीं लगा सकते तो आपकी सारी नॉलेज और प्लानिंग रद्दी के भाव बिकने लायक है। ह्यू कोर्टनी कहते हैं कि अनिश्चित दुनिया में जीतना इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप कितने स्मार्ट हैं बल्कि इस पर निर्भर करता है कि आप कितने फुर्तीले हैं। बहुत से लोग इसलिए हार जाते हैं क्योंकि वो तब तक इंतजार करते हैं जब तक कि सब कुछ एकदम साफ न हो जाए। लेकिन सच तो यह है कि जब तक कोहरा पूरी तरह छंटता है तब तक कोई और बाजी मार चुका होता है। आपको धुंध में भी कदम बढ़ाना आना चाहिए।
इसे एक मजेदार मिसाल से समझते हैं। मान लीजिए आप एक चलती बस को पकड़ना चाहते हैं। अगर आप बस के पूरी तरह रुकने का इंतजार करेंगे तो शायद कंडक्टर आपको चढ़ने ही न दे क्योंकि बस पहले ही भर चुकी होगी। और अगर आप बहुत तेज भागती बस में हाथ डालेंगे तो सीधा अस्पताल पहुंचेंगे। सही समझदारी उस पल में है जब बस की रफ्तार थोड़ी धीमी हो और आप एक सटीक जंप मारें। बिजनेस और करियर में भी यही होता है। आपको अपने ऑप्शंस को जिंदा रखना होता है और जैसे ही इशारा मिले अपनी पूरी ताकत झोंक देनी होती है।
हम लोग अक्सर उस लड़के की तरह होते हैं जो जिम जॉइन करने के लिए 'मंडे' का इंतजार करता रहता है और वो मंडे कभी आता ही नहीं। ह्यू कोर्टनी हमें सिखाते हैं कि स्ट्रेटजी कोई पत्थर की लकीर नहीं है जिसे एक बार बना दिया और भूल गए। यह एक बहती नदी की तरह होनी चाहिए। अगर सामने कोई बड़ा पत्थर आ जाए तो रास्ता बदल लो पर रुकना नहीं है। बहुत से बड़े ब्रांड्स इसलिए खत्म हो गए क्योंकि वो अपने पुराने तरीके से चिपके रहे जबकि दुनिया बदल चुकी थी। उन्होंने सोचा कि उनका नाम ही काफी है पर मार्केट ने उन्हें बता दिया कि नाम से ज्यादा काम और वक्त की कद्र जरूरी है।
लेखक एक बहुत गहरी बात कहते हैं कि आपको 'वेट एंड सी' यानी रुको और देखो की पॉलिसी तभी अपनानी चाहिए जब आपके पास सच में कोई चारा न हो। वरना हमेशा छोटे छोटे कदम बढ़ाते रहें ताकि आप गेम से बाहर न हों। इसे हम एडेप्टेबिलिटी कहते हैं। अगर आप गिरते हैं तो तुरंत खड़े होइए और अपनी धूल झाड़कर फिर से देखिए कि अब नया रास्ता कौन सा है। याद रखिए इस अनिश्चित दुनिया में सिर्फ वही सरवाइव करता है जो बदलने के लिए तैयार है। जो अड़ गया वो टूट गया और जो मुड़ गया वो आगे निकल गया।
आज हमने सीखा कि कैसे लेवल्स को पहचानना है फिर कैसे अलग अलग प्लान तैयार रखने हैं और आखिर में कैसे सही टाइम पर अपना दांव खेलना है। यह किताब सिर्फ बिजनेस के लिए नहीं बल्कि आपकी जिंदगी के हर मोड़ के लिए एक टॉर्च का काम करती है।
दोस्तो, दुनिया अनिश्चित थी और हमेशा रहेगी। आप इसे कंट्रोल नहीं कर सकते पर आप खुद को तैयार जरूर कर सकते हैं। क्या आप अभी भी उस पुरानी बस के रुकने का इंतजार कर रहे हैं या आप आज ही धुंध में अपना पहला कदम बढ़ाने के लिए तैयार हैं? नीचे कमेंट में बताएं कि आपका प्लान बी क्या है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ जरूर शेयर करें जो हर काम कल पर टालता है। याद रखिए कल कभी नहीं आता जो है बस आज है।
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