अगर आप आज भी वही पुराने घिसे पिटे बिजनेस रूल्स फॉलो कर रहे हैं तो बधाई हो। आप बहुत जल्द गुमनामी के अंधेरे में खोने वाले हैं। दुनिया बदल रही है और आप अभी भी कल की स्ट्रेटजी लेकर बैठे हैं। यह बुक नहीं पढ़ना आपकी सबसे बड़ी बेवकूफी साबित होगी।
आज के इस आर्टिकल में हम रयान मैथ्यूज और वाट्स वेकर की बेहतरीन किताब द डेविएंट्स एडवांटेज के बारे में बात करेंगे। हम समझेंगे कि कैसे समाज के किनारे बैठे अजीब लोग असल में करोड़ों का मार्केट खड़ा कर देते हैं। चलिए जानते हैं वो ३ लेसन जो आपकी सोच बदल देंगे।
Lesson : फ्रिंज (Fringe) ही असली गोल्ड माइन है
क्या आपको लगता है कि दुनिया के सबसे बड़े बिजनेस आईडिया किसी आलीशान ऑफिस के बोर्डरूम में बैठकर एसी की हवा खाते हुए पैदा होते हैं। अगर हाँ, तो आपको अपनी जानकारी अपडेट करने की सख्त जरूरत है। असलियत तो यह है कि हर क्रांतिकारी आईडिया पहले समाज के उस कोने में जन्म लेता है जिसे दुनिया पागलखाना या कचरा कहती है। ऑथर्स रयान मैथ्यूज और वाट्स वेकर इसे फ्रिंज कहते हैं। यह वह जगह है जहाँ वह लोग रहते हैं जिन्हें आप और हम शायद अपने ड्राइंग रूम में बैठने भी न दें। ये वो लोग हैं जो सिस्टम को अंगूठा दिखाते हैं और कुछ ऐसा करते हैं जो बाकी दुनिया को डरावना या एकदम बकवास लगता है।
मान लीजिए आज से कुछ दशक पहले कोई आपसे कहता कि लोग अनजानों की गाड़ियों में लिफ्ट लेंगे और उनके घरों में सोएंगे। आप शायद हंसते और कहते कि भाई क्या फूंक कर आए हो। लेकिन आज उबर और एयरबीएनबी उसी फ्रिंज आईडिया का नतीजा हैं। जब ये आईडिया शुरू हुए थे तब इन्हें यूज करने वाले लोग डेविएंट्स कहलाते थे यानी वो जो लीक से हटकर चलते हैं। लेकिन बिजनेस का सबसे बड़ा सार्केजम यही है कि जिसे आज आप पागलपन कह रहे हैं कल वही आपका सबसे बड़ा मार्केट बनने वाला है। अगर आप सिर्फ उसी चीज पर नजर रख रहे हैं जो आज ट्रेंड में है तो आप बस बचा हुआ खाना खा रहे हैं। असली दावत तो उस फ्रिंज एरिया में पक रही है जहाँ आपकी नजर ही नहीं जा रही है।
आप अपने आसपास के उन स्टार्टअप्स को देखिए जो आज करोड़ों में खेल रहे हैं। शुरू में जब उन्होंने अपना काम शुरू किया होगा तब मोहल्ले के अंकल और सो कॉल्ड एक्सपर्ट्स ने जरूर कहा होगा कि बेटा कुछ ढंग का काम कर लो इसमें क्या रखा है। लेकिन आज वही अंकल अपने बेटे को उसी कंपनी में नौकरी दिलाने के लिए जुगाड़ ढूंढ रहे होते हैं। यही फ्रिंज की ताकत है। फ्रिंज वह जगह है जहाँ कोई कम्पटीशन नहीं है क्योंकि वहां जाने की हिम्मत किसी की नहीं होती। लोग सेफ्टी ढूंढते हैं और बिजनेस में सेफ्टी का मतलब है धीरे धीरे मौत की तरफ बढ़ना।
अगर आप एक एंटरप्रेन्योर हैं और आप वही कर रहे हैं जो सब कर रहे हैं तो आप एक बिजनेस नहीं बल्कि एक भेड़ चाल का हिस्सा हैं। आपको उन आइडियाज की तलाश करनी होगी जो आज समाज के किनारों पर हैं। जो थोड़े अजीब हैं और थोड़े रिस्की भी। क्योंकि जब तक कोई आईडिया फ्रिंज पर है तब तक उसकी वैल्यू बहुत ज्यादा है। जैसे ही वह मेनस्ट्रीम बनता है उसकी चमक फीकी पड़ने लगती है और मार्जिन कम होने लगता है। तो अगली बार जब आप किसी को कुछ बहुत ही अजीब करते देखें तो उसका मजाक उड़ाने के बजाय यह सोचें कि क्या यहाँ कोई नया मार्केट बन सकता है। क्योंकि दुनिया के सबसे अमीर लोग अक्सर वही होते हैं जो दूसरों के मजाक को अपना बिजनेस मॉडल बना लेते हैं।
Lesson : डेविएंयट्स को अपना गुरु बनाओ
क्या आपने कभी सोचा है कि समाज जिन्हें विद्रोही, सनकी या अतरंगी कहता है, वही लोग असल में मार्केट के अगले भगवान होते हैं। हम अक्सर उन लोगों की पूजा करते हैं जो सूट पहनकर हमें पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन दिखाते हैं, लेकिन ऑथर्स कहते हैं कि असली इनोवेशन तो उन लोगों के पास है जो रूल्स को तोड़ना अपनी हॉबी समझते हैं। डेविएंट्स वो लोग हैं जो दुनिया को वैसी नहीं देखते जैसी वह है, बल्कि वैसी देखते हैं जैसी वह हो सकती है। और मजे की बात यह है कि जब ये लोग कुछ नया करते हैं, तो पूरी दुनिया पहले उन्हें पागल कहती है, फिर उन्हें दबाने की कोशिश करती है और अंत में उन्हीं के बनाए प्रोडक्ट की लाइन में लग जाती है।
सोचिए, जब पहली बार टैटू पार्लर्स या पियर्सिंग का चलन शुरू हुआ था, तो इसे सिर्फ गुंडे-मवालियों या आवारा लोगों का काम माना जाता था। शरीफ घर के बच्चे वहां जाने से भी डरते थे। लेकिन आज देखिये, वही टैटू एक मल्टी बिलियन डॉलर इंडस्ट्री बन चुका है और आपके ऑफिस का सबसे सीधा दिखने वाला कोलीग भी अपनी बाजू पर कुछ न कुछ छपवाए घूम रहा है। जो कभी फ्रिंज पर था, वो आज फैशन का सेंटर बन चुका है। अगर आप एक स्मार्ट बिजनेसमैन बनना चाहते हैं, तो आपको उन लोगों को पहचानना होगा जो आज सिस्टम से बाहर हैं। ये वो लोग हैं जो किसी बड़ी कंपनी के रूल्स को फॉलो नहीं करते, बल्कि अपने गैराज में बैठकर कुछ ऐसा बना रहे होते हैं जो आने वाले समय में पूरी इंडस्ट्री को हिला देगा।
बिजनेस की दुनिया में सार्केजम यह है कि बड़ी-बड़ी कंपनियां करोड़ों रुपये खर्च कर देती हैं यह समझने में कि कस्टमर को क्या चाहिए, जबकि एक सनकी लड़का अपने कमरे में बैठकर वही चीज फ्री में बना लेता है। क्यों। क्योंकि वो मार्केट रिसर्च नहीं कर रहा, वो अपनी जरूरत पूरी कर रहा है जो कल सबकी जरूरत बनने वाली है। अगर आप सिर्फ उन लोगों की सुन रहे हैं जो आपसे सहमत हैं, तो आप एक गर्त में गिर रहे हैं। आपको उन लोगों को सुनना चाहिए जो आपको चैलेंज करते हैं, जो कहते हैं कि आपका तरीका पुराना और बोरिंग हो चुका है।
अक्सर हम अपने बिजनेस में ऐसे लोगों को नौकरी पर रखते हैं जो 'जी सर' कहें। लेकिन असली ग्रोथ तब होती है जब आप किसी ऐसे बंदे को जगह देते हैं जो आपके हर फैसले पर सवाल उठाए। डेविएंयट्स आपको वो रास्ता दिखाते हैं जो मैप पर अभी तक बना ही नहीं है। वो आपको उस रिस्क से रूबरू कराते हैं जिसे लेने से बाकी लोग डरते हैं। याद रखिये, जब तक कोई आईडिया सुरक्षित लग रहा है, तब तक उसमें बड़ा प्रॉफिट कमाने का मौका हाथ से निकल चुका होता है। असली मलाई तो तब मिलती है जब लोग आपके आईडिया को देखकर अपना सिर पकड़ लें। तो अपने आसपास के उन डेविएंयट्स को ढूंढें जिन्हें दुनिया रिजेक्ट कर चुकी है, क्योंकि वही आपके बिजनेस के अगले सुपरस्टार साबित होंगे।
Lesson : कमर्शियलाइजेशन का खतरनाक जाल
जब कोई आईडिया फ्रिंज से निकलकर मार्केट के बीचों-बीच पहुंचता है, तो उसे हम सक्सेस कहते हैं। लेकिन क्या यह वाकई सक्सेस है। ऑथर्स रयान मैथ्यूज और वाट्स वेकर हमें एक कड़वा सच बताते हैं। जैसे ही कोई अनोखा आईडिया सबके लिए उपलब्ध हो जाता है, उसकी रूह यानी उसकी सोल मरने लगती है। इसे ही कमर्शियलाइजेशन का खेल कहते हैं। सार्केजम देखिये, जिस चीज को आपने उसकी यूनिकनेस की वजह से पसंद किया था, आज वह हर नुक्कड़ की दुकान पर बिक रही है और अब वह आपको बोरिंग लगने लगी है।
इस प्रोसेस को ऐसे समझिये जैसे कोई छोटा सा कैफे जो सिर्फ अपनी खास कॉफी के लिए मशहूर था। वहां जाने में एक अलग ही टशन था क्योंकि वहां सिर्फ चुनिंदा लोग ही जाते थे। फिर वह फेमस हो गया, उसकी फ्रेंचाइजी खुल गई और अब वह हर मॉल में है। अब वहां की कॉफी में वह बात नहीं रही क्योंकि अब वह मास मार्केट के लिए बनी है। बिजनेस में भी यही होता है। जब तक आप डेविएंट हैं, आप लीडर हैं। जैसे ही आप सबको खुश करने की कोशिश करने लगते हैं, आप बस एक और कमोडिटी बन जाते हैं। इसका मतलब यह है कि आपको हमेशा एक पैर फ्रिंज पर और एक पैर मार्केट में रखना होगा। अगर आप पूरी तरह मेनस्ट्रीम हो गए, तो कोई नया डेविएंट आकर आपका मार्केट छीन लेगा।
दुनिया का दस्तूर यही है कि जो आज कूल है, कल वह ओल्ड स्कूल हो जाएगा। अगर आप एक बिजनेसमैन या क्रिएटर हैं, तो आपको लगातार खुद को डिसरप्ट करना होगा। आपको उस डाल को काटना होगा जिस पर आप बैठे हैं, इससे पहले कि कोई और उसे काट दे। यह सुनकर थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन रुकना ही सबसे बड़ा रिस्क है। मार्केट का यह साइकिल बड़ी बेरहमी से चलता है। जो लोग यह सोचते हैं कि उन्होंने एक बार एक बड़ा आईडिया पा लिया और अब जिंदगी भर उसी के सहारे कट जाएगी, वही सबसे पहले डूबते हैं। आपको हमेशा अगले फ्रिंज की तलाश में रहना होगा।
तो क्या आप तैयार हैं उस दुनिया में कदम रखने के लिए जहाँ लोग आपको शक की नजर से देखेंगे। क्या आपमें वो हिम्मत है कि आप अपनी जमी जमाई सल्तनत को छोड़कर फिर से किसी पागलपन भरे आईडिया पर दांव लगाएं। याद रखिये, दुनिया सिर्फ उन्हीं को याद रखती है जिन्होंने लकीर को पीटने के बजाय नई लकीर खींचने की जुर्रत की। डरिए मत उस अजीब आईडिया से जो आपके दिमाग में रात को सोने नहीं देता। शायद वही आपके आने वाले कल का सबसे बड़ा लेसन बनने वाला है। आज से ही अपनी नजरें उन चीजों पर टिकाएं जिन्हें दुनिया बेकार समझ रही है, क्योंकि असली खजाना वहीं छुपा है।
आज हमने सीखा कि कैसे फ्रिंज आइडियाज ही भविष्य के मार्केट्स हैं। अब समय है कि आप अपनी कंफर्ट जोन की रजाई फेकें और बाहर निकलकर कुछ ऐसा करें जो आज लोगों को मजाक लगे। क्या आपके पास भी कोई ऐसा आईडिया है जिसे लोग पागलपन कहते हैं। कमेंट्स में जरूर बताएं और इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसे सब डेविएंट या सनकी समझते हैं। शायद आपकी एक शेयरिंग किसी बड़े रिवोल्यूशन की शुरुआत कर दे।
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