A Bias for Action (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो ऑफिस में सारा दिन चूहों की तरह भागते तो हैं पर पहुँचते कहीं नहीं? मुबारक हो, आप बिजी नहीं बल्कि प्रोडक्टिविटी के नाम पर खुद को धोखा दे रहे हैं। जबकि दुनिया के टॉप मैनेजर्स मजे से काम खत्म करके घर निकल जाते हैं और आप वही पुरानी फाइलों के साथ अपना सिर फोड़ते रहते हैं।

ए बायस फॉर एक्शन बुक हमें बताती है कि असली सक्सेस केवल पसीना बहाने से नहीं बल्कि विलपावर और फोकस के सही तालमेल से आती है। चलिए समझते हैं वह ३ लेसन जो आपको एक थके हुए एम्प्लॉई से एक सुपरफास्ट लीडर बना देंगे।


लेसन १ : बिजी रहने और एक्शन लेने के बीच का बड़ा अंतर

क्या आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो ऑफिस में सुबह से शाम तक कीबोर्ड पर उंगलियां ऐसे चलाते हैं जैसे कोई जंग जीत रहे हों? लेकिन शाम को जब बॉस पूछता है कि भाई काम क्या हुआ, तो आपके पास दिखाने के लिए सिर्फ एक खाली चेहरा और ठंडी कॉफी का कप होता है। असल में हमारे बीच एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। हम सोचते हैं कि जो इंसान जितना ज्यादा भागदौड़ कर रहा है, वह उतना ही बड़ा तोप है। लेकिन हीके ब्रुच और समंत्रा घोषाल कहते हैं कि यह केवल एक भ्रम है।

किताब में बताया गया है कि नब्बे परसेंट मैनेजर्स अपनी पूरी एनर्जी और समय ऐसे कामों में बर्बाद कर देते हैं जिनका कोई असली रिजल्ट नहीं निकलता। इसे लेखक ने एक्टिव नॉन एक्शन कहा है। मान लीजिए आपका दोस्त राहुल है। राहुल सुबह ऑफिस आकर दस ईमेल लिखता है, पांच मीटिंग अटेंड करता है और दोपहर तक बीस लोगों से गप्पे मार लेता है। देखने में लगेगा कि राहुल बहुत बिजी है। लेकिन हकीकत यह है कि वह उन जरूरी प्रोजेक्ट्स को हाथ भी नहीं लगाता जो कंपनी के लिए जरूरी हैं। वह बस उन कामों में उलझा रहता है जो उसे बिजी दिखाते हैं। वह एक ऐसी ट्रेडमिल पर दौड़ रहा है जो उसे कहीं लेकर नहीं जा रही।

असली मैनेजर वह नहीं होता जो सिर्फ शोर मचाता है। असली मैनेजर वह है जो अपनी एनर्जी को सही दिशा में मोड़ना जानता है। उसके पास एक क्लियर विजन होता है। वह जानता है कि अगर उसे कोई बड़ा गोल अचीव करना है, तो उसे छोटे छोटे फालतू कामों को लात मारनी होगी। यहाँ काम आती है आपकी एनर्जी और फोकस की केमिस्ट्री। जब आपकी एनर्जी हाई होती है और फोकस बिल्कुल सटीक, तब आप वह जादू कर पाते हैं जिसे दुनिया सक्सेस कहती है। बिना फोकस के एनर्जी केवल एक फटा हुआ पटाखा है जो शोर तो करता है पर उजाला नहीं।

क्या आपने कभी गौर किया है कि आपके ऑफिस के सबसे शांत रहने वाले सीनियर अक्सर सबसे ज्यादा काम कैसे कर लेते हैं? वह इसलिए क्योंकि उनके पास एक्शन लेने की एक अलग स्ट्रेटजी होती है। वह हर ईमेल का जवाब देने नहीं बैठते। वह हर फालतू गॉसिप का हिस्सा नहीं बनते। वह अपनी विलपावर को बचाकर रखते हैं ताकि जब असली फैसला लेने का वक्त आए, तो वह बिना डरे कदम उठा सकें। बिजी होना एक बीमारी है और एक्शन लेना उसका इलाज। अगर आप भी दिन भर पसीना बहाने के बाद रात को यह सोचकर परेशान होते हैं कि आज किया क्या, तो समझ लीजिए कि आप इसी जाल में फंसे हैं।

सच्चाई तो यह है कि दुनिया को आपके बिजी होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। लोग सिर्फ आपके रिजल्ट्स देखते हैं। अगर आप सिर्फ फाइलें इधर से उधर कर रहे हैं और रिजल्ट जीरो है, तो आपकी मेहनत की वैल्यू भी जीरो है। इसलिए कल से जब ऑफिस जाएं, तो खुद से पूछें कि क्या यह काम मुझे मेरे गोल के करीब ले जा रहा है? अगर जवाब ना है, तो उस काम को छोड़ना ही आपकी असली जीत है। असली लीडर वह है जो जानता है कि कब रुकना है और कब पूरी ताकत के साथ हमला करना है।


लेसन २ : विलपावर की ताकत और काम को खत्म करने का जुनून

सिर्फ प्लान बनाना तो बहुत आसान है, असल चुनौती है उस प्लान को आखिरी अंजाम तक पहुंचाना। हम में से बहुत से लोग जोश में आकर मंडे को एक लंबी लिस्ट बनाते हैं, लेकिन ट्यूसडे आते-आते वह जोश पानी के बुलबुले की तरह फूट जाता है। लेखक कहते हैं कि एक सफल मैनेजर और एक नाकाम इंसान के बीच जो सबसे बड़ी दीवार है, वह है विलपावर यानी इच्छाशक्ति। विलपावर कोई ऐसी चीज नहीं है जो सिर्फ कुछ खास लोगों के पास होती है, बल्कि यह एक मसल की तरह है जिसे आपको रोज ट्रेन करना पड़ता है।

जरा सोचिए अपने उस पड़ोसी के बारे में जो हर साल एक जनवरी को जिम की मेंबरशिप लेता है। वह पहले दो दिन तो ऐसे एक्सरसाइज करता है जैसे उसे कल ही बाहुबली बनना हो। लेकिन तीसरे दिन उसे जिम जाने के बजाय बिस्तर ज्यादा प्यारा लगने लगता है। ऑफिस में भी हम यही करते हैं। हम एक नया प्रोजेक्ट शुरू तो करते हैं, लेकिन जैसे ही पहली रुकावट आती है, हम बहाने ढूंढने लगते हैं। "अरे यार, क्लाइंट बहुत टेढ़ा है" या "अभी तो मार्केट ही खराब है"। यह सब कमजोर विलपावर की निशानियां हैं।

किताब में बताया गया है कि जो मैनेजर्स असली रिजल्ट लाते हैं, वह कभी भी मुश्किलों को देखकर अपना रास्ता नहीं बदलते। उनके अंदर एक जिद्दीपन होता है। वह जानते हैं कि रास्ता कितना भी पथरीला क्यों न हो, उन्हें अपनी मंजिल तक पहुंचना ही है। इसे लेखक ने "पर्पसफुल एक्शन" कहा है। जब आपके पास एक गहरा मकसद होता है, तो आपकी विलपावर अपने आप जाग जाती है। मान लीजिए आपके घर में आग लगी हो, तो क्या आप यह सोचकर बैठेंगे कि आज मेरा मूड नहीं है या मुझे थकान हो रही है? बिल्कुल नहीं। आप अपनी पूरी ताकत लगा देंगे क्योंकि वहां एक क्लियर मकसद है।

काम के मामले में भी यही फिलॉसफी काम करती है। अगर आप अपने काम को सिर्फ एक बोझ समझेंगे, तो आपकी विलपावर हमेशा लो रहेगी। लेकिन अगर आप उस काम को एक चैलेंज की तरह देखेंगे, तो आपको खुद समझ आएगा कि आप कितने पावरफुल हैं। अक्सर हम उन कामों को टालते हैं जो हमें डराते हैं। हम छोटी-छोटी चीजों में उलझे रहते हैं ताकि हमें उन बड़े फैसलों का सामना न करना पड़े जो हमारी लाइफ बदल सकते हैं। लेकिन याद रखिए, डर के आगे जीत सिर्फ कोल्ड ड्रिंक के विज्ञापन में नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी होती है।

एक इफेक्टिव लीडर वह है जो अपनी विलपावर को छोटे-छोटे टुकड़ों में नहीं बांटता। वह अपनी पूरी ताकत एक बार में एक ही बड़े काम पर लगाता है। जब आप अपनी सारी एनर्जी एक ही जगह फोकस करते हैं, तो बड़े से बड़ा पहाड़ भी टूट जाता है। इसलिए अगली बार जब आपको लगे कि आप हार मान रहे हैं, तो अपने आप को याद दिलाएं कि आपकी विलपावर आपकी सबसे बड़ी संपत्ति है। इसे फालतू की ईमेल्स और मीटिंग्स में खर्च मत कीजिए। इसे बचाकर रखिए उस एक बड़े धमाके के लिए जो आपकी पहचान बनाएगा।


लेसन ३ : एक्टिव डिसीजन मेकिंग और समय की बर्बादी का अंत

क्या आपके ऑफिस में भी वो मीटिंग्स होती हैं जो दो घंटे तक चलती हैं और अंत में यह तय होता है कि अगली मीटिंग कब होगी? अगर हाँ, तो आप एक बहुत ही खतरनाक वायरस का शिकार हैं जिसे कहते हैं फैसला न ले पाना। लेखक इस बुक में साफ कहते हैं कि एक औसत मैनेजर और एक महान लीडर के बीच सिर्फ एक ही फर्क है: फैसला लेने की स्पीड। जहाँ दुनिया सोचती रह जाती है, वहाँ एक असली एक्शन लेने वाला इंसान मैदान में उतरकर बाजी मार लेता है।

जरा अपने उस दोस्त समीर के बारे में सोचिए जो पिछले तीन साल से एक स्टार्टअप शुरू करने का प्लान बना रहा है। उसने सौ फाइलें पढ़ ली हैं, हजार वीडियो देख लिए हैं और हर पार्टी में वह सिर्फ अपने आइडिया की बात करता है। लेकिन जब उससे पूछो कि भाई काम कितना हुआ, तो पता चलता है कि उसने अभी तक कंपनी रजिस्टर भी नहीं कराई है। इसे कहते हैं एनालिसिस पैरालिसिस। यानी इतना ज्यादा सोचना कि आपका दिमाग ही जाम हो जाए। जबकि दूसरी तरफ वो लोग होते हैं जो आधा अधूरा प्लान लेकर भी मैदान में उतर जाते हैं और रास्ते में अपनी गलतियों से सीखते हुए आगे बढ़ते हैं।

किताब हमें सिखाती है कि कोई भी फैसला सौ परसेंट परफेक्ट नहीं होता। अगर आप इस इंतजार में बैठे हैं कि जब सारे सिग्नल ग्रीन होंगे तभी आप गाड़ी चलाएंगे, तो दोस्त आप पूरी जिंदगी उसी चौराहे पर खड़े रहेंगे। एक कामयाब मैनेजर जानता है कि वक्त की कीमत पैसों से कहीं ज्यादा है। वह गलत फैसला लेने से नहीं डरता, वह डरता है फैसला न लेने से। क्योंकि गलत फैसले को सुधारा जा सकता है, लेकिन बीते हुए वक्त को कभी वापस नहीं लाया जा सकता।

अक्सर हम फैसले लेने से इसलिए बचते हैं क्योंकि हमें डर लगता है कि कहीं लोग हमारा मजाक न उड़ाएं। हम अपनी जिम्मेदारी किसी और पर डालना चाहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी किसी ऐसे कप्तान को देखा है जो तूफान आने पर कहे कि मुझे नहीं पता जहाज कहाँ ले जाना है, आप लोग खुद देख लो? एक लीडर वही है जो दबाव के बीच शांत रहकर कदम उठाता है। वह छोटी-छोटी बारीकियों में नहीं फंसता बल्कि बड़ी तस्वीर को देखता है। उसे पता है कि अगर आज उसने एक्शन नहीं लिया, तो कल उसकी टीम और उसका करियर दोनों डूब सकते हैं।

समय की बर्बादी को रोकना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। इसके लिए बस आपको "ना" कहना सीखना होगा। हर उस काम को ना कहिए जो आपको आपके मकसद से दूर ले जाता है। हर उस मीटिंग को ना कहिए जिसका कोई एजेंडा नहीं है। जब आप फालतू चीजों को अपनी लाइफ से बाहर निकालते हैं, तब आपके पास उस काम के लिए जगह बचती है जो सच में मायने रखता है। असली पावर एक्शन लेने में है, केवल सोचने में नहीं। इसलिए अपनी कुर्सी से उठिए, उन फाइलों को बंद करिए और वह एक काम आज ही पूरा करिए जिसे आप पिछले एक महीने से टाल रहे हैं।


जिंदगी बहुत छोटी है और करने को बहुत कुछ है। आप दुनिया को यह बताने के लिए पैदा नहीं हुए हैं कि आप कितने बिजी थे, बल्कि आप यह दिखाने आए हैं कि आपने क्या हासिल किया। ए बायस फॉर एक्शन सिर्फ एक किताब नहीं है, यह एक वेक अप कॉल है उन सभी के लिए जो सपनों की दुनिया में तो राजा हैं पर हकीकत में सिर्फ वक्त काट रहे हैं। आज ही अपनी विलपावर को जगाइए और उस एक बड़े लक्ष्य की तरफ पहला कदम बढ़ाइए। याद रखिए, इतिहास सोचने वाले नहीं, बल्कि करने वाले रचते हैं।

तो क्या आप आज से ही एक एक्शन लेने वाले इंसान बनने के लिए तैयार हैं? नीचे कमेंट में अपना वह एक गोल लिखिए जिसे आप अगले २४ घंटे में पूरा करने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करना न भूलें जो सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करता है पर काम कुछ नहीं। चलिए, साथ मिलकर एक्शन लेते हैं।

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