क्या आप भी अपनी बोरिंग जॉब में घिस रहे हैं और सोच रहे हैं कि प्रमोशन क्यों नहीं मिल रहा। सच तो यह है कि बिना जैक वेल्च के लेसन्स के आप बस एक कॉर्पोरेट मजदूर बनकर रह जाएंगे। अपनी ग्रोथ को खुद ही ब्लॉक करने का टैलेंट आपमें कूट कूट कर भरा है।
इस आर्टिकल में हम दुनिया के सबसे महान CEO जैक वेल्च की बुक विनिंग से वो राज खोलेंगे जो आपको एक एवरेज एम्प्लॉई से एक असली लीडर बना देंगे। तैयार हो जाइए अपनी हारने की आदतों को छोड़कर जीत का रास्ता पकड़ने के लिए।
लेसन १ : कैंडर की ताकत - कड़वा सच बोलिए और गेम बदलिए
क्या आपको याद है वो आखिरी ऑफिस मीटिंग जहाँ आपके बॉस ने एक बहुत ही बेकार आईडिया दिया था। और आपने क्या किया। आपने मुस्कुराते हुए कहा कि सर क्या विजन है आपका। बस यहीं आपने अपनी और अपनी कंपनी की लंका लगा दी। जैक वेल्च कहते हैं कि कॉर्पोरेट दुनिया की सबसे बड़ी बीमारी कैंसर नहीं बल्कि झूठी मीठी बातें हैं। इसे वे कैंडर की कमी कहते हैं। हमारे यहाँ तो इसे तहजीब मान लिया जाता है कि सामने वाले का दिल न दुखे। लेकिन सच तो यह है कि जब आप सच को दबाते हैं तो आप प्रोग्रेस को दबाते हैं।
सोचिए आप एक रेस्टोरेंट में हैं और खाना बहुत बुरा है। आप वेटर से कहते हैं कि खाना लाजवाब है भाई। अब वो वेटर वही सड़ा हुआ खाना सबको खिलाता रहेगा। अगर आप उसे उसी वक्त सच बोल देते तो शायद वो अपनी गलती सुधार लेता। ऑफिस में भी यही होता है। जब तक आप अपने कलीग को यह नहीं बताएंगे कि उसका काम थर्ड क्लास है तब तक वो खुद को सुधारेगा कैसे। जैक वेल्च का मानना था कि जो लोग सच नहीं बोलते वे असल में सेल्फिश होते हैं। वे अपना चेहरा बचाना चाहते हैं ताकि कोई उन्हें बुरा न कहे।
कैंडर का मतलब यह नहीं है कि आप बदतमीज हो जाएं। इसका मतलब है कि आप बेकार की शुगर कोटिंग बंद करें। अगर मीटिंग में आईडिया बेकार है तो उसे बेकार बोलिए। अगर किसी का परफॉरमेंस खराब है तो उसे डिनर पर ले जाकर यह मत कहिए कि सब ठीक है। उसे साफ़ बताइए कि दोस्त अगर तूने खुद को नहीं बदला तो तुझे विदा करना पड़ेगा। लोग अक्सर सच बोलने से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ऑफिस में लोग उनसे नफरत करेंगे। पर यकीन मानिए चापलूसी करने वालों की इज्जत कोई नहीं करता।
जब एक टीम में सब लोग सच बोलने लगते हैं तो काम की स्पीड रॉकेट जैसी हो जाती है। आपको बेकार की ईमेल चेन और फालतू की पॉलिटिक्स में समय बर्बाद नहीं करना पड़ता। सब जानते हैं कि किसको क्या करना है और कहाँ सुधार की जरूरत है। जैक वेल्च ने GE जैसी बड़ी कंपनी को इसी एक उसूल से चलाया था। उन्होंने साफ़ कर दिया था कि यहाँ वही टिकेगा जो सच सुनने और बोलने का दम रखता हो। तो अगली बार जब कोई आपसे फीडबैक मांगे तो उसे सच का आईना दिखाइए। शायद उस वक्त उसे बुरा लगे पर लॉन्ग रन में वो आपको थैंक यू ही बोलेगा। अगर आप अभी भी डर रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप जीतने के लिए नहीं बल्कि बस सरवाइव करने के लिए काम कर रहे हैं।
लेसन २ : डिफरेंशिएशन का नियम - सबको एक जैसा समझना बंद कीजिए
क्या आपको भी बचपन में स्कूल में वो सर्टिफिकेट मिला था जिसमें लिखा था पार्टिसिपेशन अवार्ड। सच कहूं तो वही वो पल था जब आपकी ग्रोथ रुक गई थी। जैक वेल्च कहते हैं कि सबको एक ही तराजू में तोलना सबसे बड़ी बेवकूफी है। अगर आपकी टीम में एक बंदा दिन रात एक कर रहा है और दूसरा बस ऑफिस में फ्री का वाईफाई इस्तेमाल करने आता है तो दोनों को बराबर बोनस देना नाइंसाफी है। इसे जैक वेल्च २०-७०-१० का नियम कहते हैं। इसका मतलब है कि आपको अपनी टीम के टॉप २० परसेंट लोगों को सिर पर बिठाना चाहिए और बॉटम १० परसेंट लोगों को बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।
अब आप कहेंगे कि सर ये तो बहुत निर्दयी बात है। लेकिन सोचिए अगर आप एक क्रिकेट टीम के कप्तान हैं तो क्या आप विराट कोहली और गली के किसी खिलाड़ी को बराबर मैच फीस देंगे। बिल्कुल नहीं। अगर आप अपने बेस्ट परफॉर्मर्स को स्पेशल फील नहीं कराएंगे तो वो जल्दी ही किसी ऐसी जगह चले जाएंगे जहाँ उनकी कदर हो। और जो लोग काम नहीं कर रहे उन्हें ढोते रहना पूरी टीम के मोटिवेशन का कत्ल करना है। जैक वेल्च का मानना था कि जो १० परसेंट लोग परफॉर्म नहीं कर रहे उन्हें कंपनी में रखना उनके साथ भी गलत है। आप उनका कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं क्योंकि शायद वो किसी और फील्ड में या किसी और कंपनी में स्टार बन सकें।
मिडिल के जो ७० परसेंट लोग हैं वो आपकी कंपनी की रीढ़ की हड्डी होते हैं। उन्हें मैनेज करना सबसे बड़ी कला है। उन्हें ट्रेनिंग दीजिए और कोशिश कीजिए कि वे टॉप २० परसेंट में शामिल हो सकें। हमारे यहाँ अक्सर ऑफिस में लोग एवरेज रहकर खुश रहते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि सैलरी तो महीने के आखिर में आ ही जाएगी। जैक वेल्च ने इस माइंडसेट को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने परफॉरमेंस को रिवॉर्ड से जोड़ दिया। अगर आप जीतना चाहते हैं तो आपको अपनी टीम में अंतर करना सीखना होगा।
अक्सर मैनेजर्स इसलिए सबको बराबर रखते हैं क्योंकि वे विलेन नहीं बनना चाहते। वे चाहते हैं कि ऑफिस में सब उन्हें प्यारा बॉस कहें। पर प्यारा बॉस अक्सर कंपनी को डुबो देता है। एक सच्चा लीडर वही है जो कड़वे फैसले ले सके। जब आप डिफरेंशिएशन लागू करते हैं तो ऑफिस की गॉसिप कम हो जाती है और काम की वैल्यू बढ़ जाती है। सबको पता होता है कि अगर आगे बढ़ना है तो रिजल्ट दिखाना होगा। ये थोड़ा कड़वा जरूर है पर जीत का यही एकमात्र रास्ता है। अगर आप सबको खुश करने की कोशिश कर रहे हैं तो आप बिजनेस नहीं कर रहे बल्कि कोई चैरिटी चला रहे हैं।
लेसन ३ : हायरिंग और कल्चर - केवल डिग्री नहीं एटीट्यूड चुनिए
क्या आपने कभी ऐसे इंसान के साथ काम किया है जिसके पास बड़ी-बड़ी डिग्रियां तो हैं पर उसका मुंह हमेशा सड़ा रहता है। जो हर छोटी बात पर रोता है और पूरी टीम की पॉजिटिविटी चूस लेता है। जैक वेल्च कहते हैं कि ऐसे टैलेंटेड गधों से बचकर रहना ही समझदारी है। हायरिंग करते समय अक्सर हम गलती यह करते हैं कि हम केवल रिज्यूमे पर लिखे भारी-भरकम शब्दों को देखते हैं। लेकिन जैक वेल्च के मुताबिक आपको चार चीजों पर ध्यान देना चाहिए जिन्हें वे '4-Es' कहते हैं: एनर्जी, एनर्जाइज, एज और एग्जीक्यूट।
सोचिए आप एक ऐसे बंदे को काम पर रखते हैं जो बहुत बुद्धिमान है पर उसमें खुद कोई एनर्जी नहीं है। वो सुबह ऑफिस आता है जैसे किसी ने उसे जबरदस्ती उठा दिया हो। क्या ऐसा इंसान आपकी कंपनी को जिताएगा। बिल्कुल नहीं। आपको वो लोग चाहिए जिनके अंदर जीतने की आग हो और जो दूसरों को भी मोटिवेट यानी एनर्जाइज कर सकें। इसके अलावा उनमें मुश्किल फैसले लेने का 'एज' होना चाहिए और काम को पूरा करने यानी 'एग्जीक्यूट' करने का जज्बा होना चाहिए। अक्सर लोग प्लानिंग तो बहुत करते हैं पर जब काम करने की बारी आती है तो वे गायब हो जाते हैं।
एटीट्यूड एक ऐसी चीज है जिसे सिखाया नहीं जा सकता। आप किसी को एक्सेल शीट चलाना सिखा सकते हैं पर आप किसी को खुश रहना या पैशनेट होना नहीं सिखा सकते। जैक वेल्च का मानना था कि अगर किसी का एटीट्यूड सही है तो उसे स्किल सिखाई जा सकती है। लेकिन अगर कोई ईगो से भरा है तो वो आपकी टीम के कल्चर को जहर की तरह खराब कर देगा। कल्चर का मतलब है कि जब कोई मैनेजर कमरे में न हो तब आपकी टीम कैसे बर्ताव करती है। क्या वे एक दूसरे की टांग खींच रहे हैं या वे मिलकर गोल की तरफ भाग रहे हैं।
एक विनिंग कल्चर बनाने के लिए आपको उन लोगों को सेलिब्रेट करना होगा जो कंपनी के मूल्यों पर चलते हैं। अगर कोई बहुत ज्यादा पैसा कमा कर दे रहा है पर वो टीम के साथ बदतमीजी करता है तो जैक वेल्च उसे तुरंत निकालने की सलाह देते थे। क्योंकि एक बुरा सेब पूरी टोकरी को खराब कर देता है। लीडरशिप का असली मतलब यही है कि आप ऐसे लोगों का ग्रुप बनाएं जो हारने से नफरत करते हों और जीतने के लिए किसी भी हद तक मेहनत करने को तैयार हों। जब आपके पास सही एटीट्यूड वाले लोग होते हैं तो मैनेजमेंट अपने आप आसान हो जाता है।
जीतना कोई तुक्का नहीं है बल्कि एक चॉइस है। अगर आप आज भी उसी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं जहाँ आप सच बोलने से डरते हैं और एवरेज बनकर खुश हैं तो आप कभी नहीं जीत पाएंगे। जैक वेल्च के ये लेसन्स सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं बल्कि आज से ही अपनी लाइफ और काम में उतारने के लिए हैं। उठिए और अपनी टीम में वो बदलाव लाइए जो आपको टॉप पर ले जाए। कमेंट्स में बताएं कि इन ३ लेसन्स में से कौन सा लेसन आपकी प्रोफेशनल लाइफ बदल सकता है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसे एक बड़े धक्के की जरूरत है।
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