A Good Hard Kick in the Ass (Hindi)


आपका बिजनेस आइडिया क्रांतिकारी है और कल आप करोड़पति बनने वाले हैं। है ना? जाग जाइये दोस्त। बिना मार्केट वैलिडेशन के अपना पैसा और जवानी बर्बाद करने का शौक सिर्फ आपको ही है। आपकी महान प्लानिंग और असली मार्केट के बीच का फर्क ही आपको सड़क पर लाने के लिए काफी है।

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो बिना किसी तैयारी के स्टार्टअप की जंग में कूद पड़े हैं? आज हम रॉब एडम्स की किताब से वो ३ कड़वे लेसन सीखेंगे जो आपको बर्बादी से बचाकर एक असली एंट्रेप्रेन्योर बना सकते हैं।


लेसन १ : आपका आइडिया महान नहीं है बल्कि मार्केट का पैसा महान है

आपके दिमाग में जो वो क्रांतिकारी स्टार्टअप आइडिया घूम रहा है ना? उसे कचरे के डिब्बे में डाल दीजिये। जी हाँ। आपने सही सुना। हम सबको लगता है कि हमारा आइडिया दुनिया बदल देगा। हम अपने दोस्तों को बताते हैं और वो बेचारे शरीफ लोग झूठ बोल देते हैं कि भाई तू तो अगला एलन मस्क बनेगा। लेकिन हकीकत यह है कि जब तक कोई अनजान इंसान उस आइडिया के लिए अपनी मेहनत की कमाई आपकी जेब में नहीं डालता तब तक आपका आइडिया सिर्फ एक हसीन सपना है।

रॉब एडम्स साफ़ कहते हैं कि एंट्रेप्रेन्योर्स अक्सर अपने आइडिया से प्यार कर बैठते हैं। यह प्यार अंधा होता है। इतना अंधा कि आपको मार्केट की चीखें सुनाई नहीं देतीं। आप सोचते हैं कि लोग आपका ऐप डाउनलोड करेंगे क्योंकि उसमें बहुत सारे रंग हैं। लेकिन मार्केट को आपके रंगों से कोई लेना देना नहीं है। मार्केट को अपनी समस्या का समाधान चाहिए।

मान लीजिये आपने एक ऐसा छाता बनाया जो गाने बजाता है। आप बहुत खुश हैं। आपने अपनी सेविंग्स लगा दीं। आपने ऑफिस ले लिया। लेकिन जब आप बाहर निकले तो पता चला कि लोगों को सिर्फ सूखा रहना है गाना नहीं सुनना। अब आप उस छाते को लेकर बारिश में खड़े होकर अकेले रो रहे हैं। यही होता है जब आप मार्केट वैलिडेशन को इग्नोर करते हैं।

ज्यादातर स्टार्टअप इसलिए फेल नहीं होते कि उनके पास पैसा नहीं था। वो इसलिए फेल होते हैं क्योंकि उन्होंने ऐसी चीज़ बनाई जिसकी किसी को जरूरत ही नहीं थी। भारत में अक्सर लोग पड़ोसी को देखकर बिजनेस शुरू करते हैं। शर्मा जी का लड़का चश्मा बेच रहा है तो मैं भी चश्मा बेचूँगा। अरे भाई क्या आपको पता है कि लोगों की आँखें सच में खराब हैं या वो सिर्फ आपको देखकर आँखें फेर रहे हैं?

असली एंट्रेप्रेन्योर वो नहीं है जो कमरे में बंद होकर कोडिंग करता है। असली खिलाड़ी वो है जो सड़कों पर उतरता है। जो लोगों से पूछता है कि आपको क्या तकलीफ है? जो अपने प्रोडक्ट का प्रोटोटाइप दिखाकर लोगों से कहता है कि इसके लिए १० रुपये निकालो। अगर वो १० रुपये नहीं दे रहे तो समझ जाइये कि आपके आइडिया की वैल्यू जीरो है। इसे स्वीकार करना सीखिये। इगो को घर पर छोड़कर मार्केट की सुनिए। पैसा वहीँ है जहाँ समस्या का समाधान है।


लेसन २ : ज्यादा फंडिंग आपकी बर्बादी का सबसे बड़ा कारण बन सकती है

अक्सर नए बिजनेस वाले लोग रात को सोते समय सिर्फ एक ही सपना देखते हैं। वो सपना है फंडिंग का। उन्हें लगता है कि एक बार बैंक अकाउंट में इन्वेस्टर्स का पैसा आ गया तो उनकी सारी मुश्किलें हल हो जाएंगी। लेकिन रॉब एडम्स यहाँ एक बहुत बड़ा बम फोड़ते हैं। वो कहते हैं कि बहुत जल्दी पैसा मिलना आपके स्टार्टअप के लिए जहर के समान है। जब जेब में बहुत ज्यादा पैसा होता है ना तो दिमाग काम करना बंद कर देता है और फालतू के खर्चों का मीटर चालू हो जाता है।

लोग बिजनेस शुरू करने से पहले ही आलीशान ऑफिस ढूंढने लगते हैं। सबसे महंगा लैपटॉप खरीदते हैं और पाँच ऐसी गाड़ियां बुक कर लेते हैं जिनकी उन्हें जरूरत भी नहीं होती। यह सब देखकर ऐसा लगता है जैसे आप बिजनेस नहीं कर रहे बल्कि किसी फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं। असलियत में पैसा आपकी समस्याओं को सुलझाता नहीं है बल्कि उन्हें छुपा देता है। जब आपके पास बहुत पैसा होता है तो आप अपनी गलतियों को सुधारने के बजाय उन पर पैसा फेंककर उन्हें दबाने की कोशिश करते हैं।

मान लीजिये आप एक नया रेस्टोरेंट खोलना चाहते हैं। अब अगर आपके पास करोड़ों की फंडिंग है तो आप सीधे शहर के सबसे महंगे इलाके में दुकान खोल लेंगे। आप दुनिया के सबसे महंगे शेफ को काम पर रख लेंगे। लेकिन अगर आपका खाना ही बेकार है तो क्या होगा? पैसे की वजह से आप कुछ महीने तो दुकान चला लेंगे लेकिन अंत में दुकान बंद ही होगी। इसके उलट अगर आप कम पैसे से शुरुआत करते तो आप पहले एक छोटे स्टॉल से टेस्ट करते कि लोगों को आपका स्वाद पसंद आ रहा है या नहीं।

पैसे की कमी आपको क्रिएटिव बनाती है। वो आपको सिखाती है कि कम से कम खर्च में सबसे अच्छा रिजल्ट कैसे लाया जाए। इसे 'बूटस्ट्रैपिंग' कहते हैं और यही एक असली एंट्रेप्रेन्योर की असली ट्रेनिंग है। जब आप खुद के कमाए हुए पैसों से ऑफिस का बिल भरते हैं ना तब आपको उस एक एक रुपये की कीमत समझ आती है। इन्वेस्टर्स का पैसा तो मुफ्त की रेवड़ी जैसा लगता है जिसे आप बिना सोचे समझे बांटते रहते हैं।

इसलिए अगली बार जब आप फंडिंग के पीछे भागें तो रुककर सोचिये। क्या आपका बिजनेस मॉडल इतना मजबूत है कि वो बिना किसी बाहरी मदद के खड़ा हो सके? अगर आप बिना पैसे के अपना पहला कस्टमर नहीं ला सकते तो यकीन मानिये आप पैसे के साथ भी कुछ नहीं उखाड़ पाएंगे। पैसा सिर्फ एक फ्यूल है। अगर आपकी गाड़ी का इंजन ही खराब है तो कितना भी पेट्रोल डाल दीजिये गाड़ी आगे नहीं बढ़ेगी बल्कि बीच रस्ते में ही धुंआ छोड़ देगी।


लेसन ३ : कस्टमर की गालियां ही आपकी तरक्की का असली नक्शा हैं

ज्यादातर एंट्रेप्रेन्योर्स को लगता है कि वो अंतर्यामी हैं। उन्हें लगता है कि उन्हें पता है कि कस्टमर को क्या चाहिए। लेकिन सच तो यह है कि कस्टमर को क्या चाहिए यह बात सिर्फ कस्टमर ही बता सकता है। रॉब एडम्स कहते हैं कि अपने ऑफिस के एयर कंडीशनर में बैठकर लंबी चौड़ी पीपीटी बनाने से अच्छा है कि बाहर निकलो और कस्टमर के सामने खड़े हो जाओ। और जब वो आपके प्रोडक्ट की बुराई करे ना तो उसे दिल पर मत लो बल्कि उसे ध्यान से डायरी में लिख लो।

दिक्कत यह है कि हम लोग फीडबैक से डरते हैं। हमें लगता है कि अगर किसी ने कह दिया कि भाई आपका प्रोडक्ट तो कचरा है तो हमारी बेइज्जती हो जाएगी। इसलिए हम सिर्फ उन लोगों के पास जाते हैं जो हमारी तारीफ करें। जैसे कि हमारी मम्मी या हमारे बेस्ट फ्रेंड। अब मम्मी तो यही कहेंगी कि मेरा बेटा हीरा है उसने जो बनाया है वो बेस्ट है। लेकिन क्या आपकी मम्मी वो प्रोडक्ट खरीदेंगी? शायद नहीं। असली सच वो अनजान इंसान बोलेगा जो आपकी शक्ल देखकर नहीं बल्कि आपके काम को देखकर आपको खरी खोटी सुनाएगा।

मान लीजिये आपने एक ऐसी वेबसाइट बनाई जो लोगों को सब्जियां डिलीवर करती है। आप बहुत गर्व से लोगों को अपना ऐप दिखाते हैं। लेकिन कस्टमर कहता है कि भाई ऐप तो बहुत सुंदर है पर इसमें प्याज ढूंढने में मुझे आधा घंटा लग गया। अब आप उसे यह ज्ञान नहीं दे सकते कि भाई हमने इसके डिजाइन पर लाखों खर्च किये हैं। आपको चुपचाप वो डिजाइन बदलना होगा। कस्टमर की शिकायतें दरअसल वो फ्री की सलाह है जिसके लिए बड़ी कंपनियां करोड़ों रुपये देती हैं।

बिजनेस कोई साइंस एक्सपेरिमेंट नहीं है जो लैब में सफल हो जाए। यह एक सामाजिक खेल है। अगर आप लोगों की भाषा नहीं समझ सकते तो आप मैदान से बाहर हैं। रॉब एडम्स का यह बेसिक ट्रेनिंग लेसन सीधा है। अपने प्रोडक्ट को परफेक्ट बनाने के चक्कर में सालों बर्बाद मत करो। उसे मार्केट में उतारो और उसे लोगों को इस्तेमाल करने दो। वो जो गलतियां निकालेंगे वही आपकी सफलता का रास्ता बनेंगी।

एंट्रेप्रेन्योरशिप कोई ग्लैमरस लाइफ नहीं है जैसा फिल्मों में दिखाया जाता है। यह पसीना बहाने और अपनी गलतियों को सुधारने का काम है। अगर आप एक कड़क लात खाने के लिए तैयार हैं तभी इस मैदान में उतरिये। रॉब एडम्स की यह किताब हमें यही सिखाती है कि फेल होने से मत डरो बल्कि बिना तैयारी के फेल होने से डरो। उठिये अपनी प्लानिंग को हकीकत की कसौटी पर परखिये और एक ऐसा बिजनेस बनाइये जो सिर्फ टिके ही नहीं बल्कि दहाड़े।


तो क्या आप अभी भी अपने उसी पुराने आइडिया को लेकर बैठे रहेंगे या आज ही बाहर निकलकर असली मार्केट का सामना करेंगे? कमेंट्स में बताइये कि आपके बिजनेस का वो कौन सा हिस्सा है जिसे आपको आज ही बदलने की जरूरत है। याद रखिये सिर्फ सोचने से कोई राजा नहीं बनता मेहनत और बदलाव ही आपको असली कामयाबी दिलाएंगे। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो सिर्फ बड़ी बड़ी बातें करता है पर काम कुछ नहीं।

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